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जहानाबाद की मिट्टी में मेहनत और प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, जहाँ के बच्चे डॉक्टर और इंजीनियर बनने के सपने देखते हुए हाई स्कूल तक उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं। हालांकि, कक्षा 12 की परीक्षा समाप्त होते ही उनके सपनों के सामने एक ऊँची दीवार खड़ी हो जाती है, क्योंकि इंजीनियरिंग, चिकित्सा या वाणिज्य-प्रबंधन जैसी उच्च शिक्षा के लिए उन्हें शहर छोड़ना पड़ता है। यह स्थिति हजारों मेधावी छात्रों के सपनों को आर्थिक तंगी के कारण तोड़ देती है, जिससे वे पढ़ाई छोड़कर किसी दुकान या खेतों में काम करने को मजबूर हो जाते हैं। पटना, गया, दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में उच्च शिक्षा का खर्च गरीब किसान या मजदूर के बच्चों के लिए असंभव हो जाता है, जिससे यह समस्या जहानाबाद के लिए एक सामूहिक क्षति बन जाती है। इस ज्वलंत मुद्दे पर जहानाबाद के नागरिक अपने माननीय विधायक और सांसद महोदय से ठोस कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। उनकी प्रमुख माँगें हैं कि जहानाबाद में एक इंजीनियरिंग/पॉलिटेक्निक कॉलेज की स्थापना की जाए ताकि तकनीकी शिक्षा स्थानीय युवाओं की पहुँच में आ सके; एक मेडिकल कॉलेज या नर्सिंग संस्थान की व्यवस्था हो जिससे चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक छात्रों को घर के पास अवसर मिलें; और एक वाणिज्य/प्रबंधन महाविद्यालय स्थापित किया जाए, जो व्यापार, अर्थशास्त्र और प्रशासनिक क्षेत्र में जाने वाले युवाओं को दिशा दे सके। इसके अतिरिक्त, आईटीआई और कौशल विकास केंद्रों को और सुदृढ़ करने की बात कही गई है, ताकि जो छात्र डिग्री नहीं चाहते, उन्हें रोजगारपरक प्रशिक्षण मिल सके। इन संस्थानों की स्थापना से जहानाबाद का कायाकल्प होगा, जिससे मेधावी गरीब छात्रों को घर के पास ही उच्च शिक्षा मिलेगी। साथ ही, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे, स्थानीय अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और प्रतिभा पलायन रुकेगा, जिससे शहर का समग्र विकास सुनिश्चित होगा। जब युवा यहीं पढ़ेंगे, यहीं खाएँगे और यहीं रहेंगे, तो वे यहीं के व्यापार, संस्कृति और समाज को समृद्ध करेंगे, क्योंकि उच्च शिक्षा संस्थान किसी भी शहर के विकास की रीढ़ होते हैं। जहानाबाद के पास संभावनाएँ, जनशक्ति और इच्छाशक्ति है, बस एक सही दिशा में लिए गए नीतिगत निर्णय की आवश्यकता है। यह जन-आवाज़ जनप्रतिनिधियों तक पहुँचे, इसके लिए नागरिकों से इस संदेश को साझा करने का आग्रह किया गया है।

1 hr ago
user_जितेन्द्र कुमार
जितेन्द्र कुमार
घोसी, जहानाबाद, बिहार•
1 hr ago
8695fb90-5a69-4c49-9fc6-c3bc9b673964

जहानाबाद की मिट्टी में मेहनत और प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, जहाँ के बच्चे डॉक्टर और इंजीनियर बनने के सपने देखते हुए हाई स्कूल तक उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं। हालांकि, कक्षा 12 की परीक्षा समाप्त होते ही उनके सपनों के सामने एक ऊँची दीवार खड़ी हो जाती है, क्योंकि इंजीनियरिंग, चिकित्सा या वाणिज्य-प्रबंधन जैसी उच्च शिक्षा के लिए उन्हें शहर छोड़ना पड़ता है। यह स्थिति हजारों मेधावी छात्रों के सपनों को आर्थिक तंगी के कारण तोड़ देती है, जिससे वे पढ़ाई छोड़कर किसी दुकान या खेतों में काम करने को मजबूर हो जाते हैं। पटना, गया, दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में उच्च शिक्षा का खर्च गरीब किसान या मजदूर के बच्चों के लिए असंभव हो जाता है, जिससे यह समस्या जहानाबाद के लिए एक सामूहिक क्षति बन जाती है। इस ज्वलंत मुद्दे पर जहानाबाद के नागरिक अपने माननीय विधायक और सांसद महोदय से ठोस कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। उनकी प्रमुख माँगें हैं कि जहानाबाद में एक इंजीनियरिंग/पॉलिटेक्निक कॉलेज की स्थापना की जाए ताकि तकनीकी शिक्षा स्थानीय युवाओं की पहुँच में आ सके; एक मेडिकल कॉलेज या नर्सिंग संस्थान की व्यवस्था हो जिससे

चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक छात्रों को घर के पास अवसर मिलें; और एक वाणिज्य/प्रबंधन महाविद्यालय स्थापित किया जाए, जो व्यापार, अर्थशास्त्र और प्रशासनिक क्षेत्र में जाने वाले युवाओं को दिशा दे सके। इसके अतिरिक्त, आईटीआई और कौशल विकास केंद्रों को और सुदृढ़ करने की बात कही गई है, ताकि जो छात्र डिग्री नहीं चाहते, उन्हें रोजगारपरक प्रशिक्षण मिल सके। इन संस्थानों की स्थापना से जहानाबाद का कायाकल्प होगा, जिससे मेधावी गरीब छात्रों को घर के पास ही उच्च शिक्षा मिलेगी। साथ ही, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे, स्थानीय अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और प्रतिभा पलायन रुकेगा, जिससे शहर का समग्र विकास सुनिश्चित होगा। जब युवा यहीं पढ़ेंगे, यहीं खाएँगे और यहीं रहेंगे, तो वे यहीं के व्यापार, संस्कृति और समाज को समृद्ध करेंगे, क्योंकि उच्च शिक्षा संस्थान किसी भी शहर के विकास की रीढ़ होते हैं। जहानाबाद के पास संभावनाएँ, जनशक्ति और इच्छाशक्ति है, बस एक सही दिशा में लिए गए नीतिगत निर्णय की आवश्यकता है। यह जन-आवाज़ जनप्रतिनिधियों तक पहुँचे, इसके लिए नागरिकों से इस संदेश को साझा करने का आग्रह किया गया है।

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  • जहानाबाद की मिट्टी में मेहनत और प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, जहाँ के बच्चे डॉक्टर और इंजीनियर बनने के सपने देखते हुए हाई स्कूल तक उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं। हालांकि, कक्षा 12 की परीक्षा समाप्त होते ही उनके सपनों के सामने एक ऊँची दीवार खड़ी हो जाती है, क्योंकि इंजीनियरिंग, चिकित्सा या वाणिज्य-प्रबंधन जैसी उच्च शिक्षा के लिए उन्हें शहर छोड़ना पड़ता है। यह स्थिति हजारों मेधावी छात्रों के सपनों को आर्थिक तंगी के कारण तोड़ देती है, जिससे वे पढ़ाई छोड़कर किसी दुकान या खेतों में काम करने को मजबूर हो जाते हैं। पटना, गया, दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में उच्च शिक्षा का खर्च गरीब किसान या मजदूर के बच्चों के लिए असंभव हो जाता है, जिससे यह समस्या जहानाबाद के लिए एक सामूहिक क्षति बन जाती है। इस ज्वलंत मुद्दे पर जहानाबाद के नागरिक अपने माननीय विधायक और सांसद महोदय से ठोस कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। उनकी प्रमुख माँगें हैं कि जहानाबाद में एक इंजीनियरिंग/पॉलिटेक्निक कॉलेज की स्थापना की जाए ताकि तकनीकी शिक्षा स्थानीय युवाओं की पहुँच में आ सके; एक मेडिकल कॉलेज या नर्सिंग संस्थान की व्यवस्था हो जिससे चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक छात्रों को घर के पास अवसर मिलें; और एक वाणिज्य/प्रबंधन महाविद्यालय स्थापित किया जाए, जो व्यापार, अर्थशास्त्र और प्रशासनिक क्षेत्र में जाने वाले युवाओं को दिशा दे सके। इसके अतिरिक्त, आईटीआई और कौशल विकास केंद्रों को और सुदृढ़ करने की बात कही गई है, ताकि जो छात्र डिग्री नहीं चाहते, उन्हें रोजगारपरक प्रशिक्षण मिल सके। इन संस्थानों की स्थापना से जहानाबाद का कायाकल्प होगा, जिससे मेधावी गरीब छात्रों को घर के पास ही उच्च शिक्षा मिलेगी। साथ ही, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे, स्थानीय अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और प्रतिभा पलायन रुकेगा, जिससे शहर का समग्र विकास सुनिश्चित होगा। जब युवा यहीं पढ़ेंगे, यहीं खाएँगे और यहीं रहेंगे, तो वे यहीं के व्यापार, संस्कृति और समाज को समृद्ध करेंगे, क्योंकि उच्च शिक्षा संस्थान किसी भी शहर के विकास की रीढ़ होते हैं। जहानाबाद के पास संभावनाएँ, जनशक्ति और इच्छाशक्ति है, बस एक सही दिशा में लिए गए नीतिगत निर्णय की आवश्यकता है। यह जन-आवाज़ जनप्रतिनिधियों तक पहुँचे, इसके लिए नागरिकों से इस संदेश को साझा करने का आग्रह किया गया है।
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    जहानाबाद की मिट्टी में मेहनत और प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, जहाँ के बच्चे डॉक्टर और इंजीनियर बनने के सपने देखते हुए हाई स्कूल तक उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं। हालांकि, कक्षा 12 की परीक्षा समाप्त होते ही उनके सपनों के सामने एक ऊँची दीवार खड़ी हो जाती है, क्योंकि इंजीनियरिंग, चिकित्सा या वाणिज्य-प्रबंधन जैसी उच्च शिक्षा के लिए उन्हें शहर छोड़ना पड़ता है। यह स्थिति हजारों मेधावी छात्रों के सपनों को आर्थिक तंगी के कारण तोड़ देती है, जिससे वे पढ़ाई छोड़कर किसी दुकान या खेतों में काम करने को मजबूर हो जाते हैं। पटना, गया, दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में उच्च शिक्षा का खर्च गरीब किसान या मजदूर के बच्चों के लिए असंभव हो जाता है, जिससे यह समस्या जहानाबाद के लिए एक सामूहिक क्षति बन जाती है।

इस ज्वलंत मुद्दे पर जहानाबाद के नागरिक अपने माननीय विधायक और सांसद महोदय से ठोस कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। उनकी प्रमुख माँगें हैं कि जहानाबाद में एक इंजीनियरिंग/पॉलिटेक्निक कॉलेज की स्थापना की जाए ताकि तकनीकी शिक्षा स्थानीय युवाओं की पहुँच में आ सके; एक मेडिकल कॉलेज या नर्सिंग संस्थान की व्यवस्था हो जिससे चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक छात्रों को घर के पास अवसर मिलें; और एक वाणिज्य/प्रबंधन महाविद्यालय स्थापित किया जाए, जो व्यापार, अर्थशास्त्र और प्रशासनिक क्षेत्र में जाने वाले युवाओं को दिशा दे सके। इसके अतिरिक्त, आईटीआई और कौशल विकास केंद्रों को और सुदृढ़ करने की बात कही गई है, ताकि जो छात्र डिग्री नहीं चाहते, उन्हें रोजगारपरक प्रशिक्षण मिल सके।

इन संस्थानों की स्थापना से जहानाबाद का कायाकल्प होगा, जिससे मेधावी गरीब छात्रों को घर के पास ही उच्च शिक्षा मिलेगी। साथ ही, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे, स्थानीय अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और प्रतिभा पलायन रुकेगा, जिससे शहर का समग्र विकास सुनिश्चित होगा। जब युवा यहीं पढ़ेंगे, यहीं खाएँगे और यहीं रहेंगे, तो वे यहीं के व्यापार, संस्कृति और समाज को समृद्ध करेंगे, क्योंकि उच्च शिक्षा संस्थान किसी भी शहर के विकास की रीढ़ होते हैं। जहानाबाद के पास संभावनाएँ, जनशक्ति और इच्छाशक्ति है, बस एक सही दिशा में लिए गए नीतिगत निर्णय की आवश्यकता है। यह जन-आवाज़ जनप्रतिनिधियों तक पहुँचे, इसके लिए नागरिकों से इस संदेश को साझा करने का आग्रह किया गया है।
    user_जितेन्द्र कुमार
    जितेन्द्र कुमार
    घोसी, जहानाबाद, बिहार•
    1 hr ago
  • जहानाबाद जिले के काको प्रखंड में संचालित 'दीदी अधिकार केंद्र' ग्रामीण महिलाओं के लिए न्याय, परामर्श और सशक्तिकरण का एक प्रभावी मंच बनकर उभरा है। जीविका के तहत कार्यरत यह केंद्र महिलाओं को घरेलू हिंसा, सामाजिक उत्पीड़न, पारिवारिक विवाद, कानूनी सहायता और सरकारी योजनाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है। प्रखंड परियोजना क्रियान्वयन इकाई, काको के सहयोग से संचालित यह केंद्र महिलाओं को अपनी समस्याओं को सुरक्षित वातावरण में साझा करने और उनका समाधान पाने का अवसर दे रहा है। केंद्र में समन्वयक के तौर पर कार्यरत प्रियंका कुमारी महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही हैं। वे गांव-गांव जाकर बैठकों के माध्यम से महिलाओं को घरेलू हिंसा, बाल विवाह, संपत्ति अधिकार और सामाजिक सुरक्षा जैसे विषयों पर जानकारी देती हैं। प्रियंका कुमारी ने बताया कि सामाजिक दबाव और डर के कारण कई महिलाएं पहले अपनी समस्याएं खुलकर सामने नहीं रख पाती थीं। हालांकि, अब तक इस केंद्र के जरिए 16 से अधिक जेंडर और पारिवारिक विवाद से संबंधित मामलों का सफलतापूर्वक समाधान किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, 400 से अधिक महिलाओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य किया गया है। काको प्रखंड की नोनही पंचायत निवासी विभा देवी का मामला इस केंद्र के सशक्तिकरण प्रयासों का एक प्रेरणादायक उदाहरण है। विभा देवी लंबे समय से घरेलू प्रताड़ना और मानसिक उत्पीड़न से जूझ रही थीं। जीविका के सीता ग्राम संगठन से जुड़ने के बाद उन्हें 'दीदी अधिकार केंद्र' के बारे में पता चला, जहाँ उन्हें कानूनी सहायता, काउंसलिंग और मानसिक सहयोग प्रदान किया गया। केंद्र द्वारा परिवार के साथ लगातार संवाद और समझाइश के प्रयासों के बाद उनके घर का माहौल सकारात्मक रूप से बदल गया और उनके घरेलू विवाद समाप्त हो गए। आज विभा देवी आत्मविश्वास के साथ अपना जीवन जी रही हैं और अन्य महिलाओं को भी उनके अधिकारों के प्रति जागरूक कर रही हैं। विभा देवी ने जिला प्रशासन और दीदी अधिकार केंद्र का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सही समय पर मिले सहयोग और मार्गदर्शन ने वास्तव में उनकी जिंदगी बदल दी है। जिला प्रशासन ने जिले की सभी महिलाओं से अपील की है कि किसी भी प्रकार की घरेलू हिंसा या उत्पीड़न की स्थिति में वे अपने नजदीकी 'दीदी अधिकार केंद्र', महिला हेल्पलाइन या संबंधित प्रशासनिक इकाइयों से संपर्क कर सकती हैं।
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    जहानाबाद जिले के काको प्रखंड में संचालित 'दीदी अधिकार केंद्र' ग्रामीण महिलाओं के लिए न्याय, परामर्श और सशक्तिकरण का एक प्रभावी मंच बनकर उभरा है। जीविका के तहत कार्यरत यह केंद्र महिलाओं को घरेलू हिंसा, सामाजिक उत्पीड़न, पारिवारिक विवाद, कानूनी सहायता और सरकारी योजनाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है। प्रखंड परियोजना क्रियान्वयन इकाई, काको के सहयोग से संचालित यह केंद्र महिलाओं को अपनी समस्याओं को सुरक्षित वातावरण में साझा करने और उनका समाधान पाने का अवसर दे रहा है।

केंद्र में समन्वयक के तौर पर कार्यरत प्रियंका कुमारी महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही हैं। वे गांव-गांव जाकर बैठकों के माध्यम से महिलाओं को घरेलू हिंसा, बाल विवाह, संपत्ति अधिकार और सामाजिक सुरक्षा जैसे विषयों पर जानकारी देती हैं। प्रियंका कुमारी ने बताया कि सामाजिक दबाव और डर के कारण कई महिलाएं पहले अपनी समस्याएं खुलकर सामने नहीं रख पाती थीं। हालांकि, अब तक इस केंद्र के जरिए 16 से अधिक जेंडर और पारिवारिक विवाद से संबंधित मामलों का सफलतापूर्वक समाधान किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, 400 से अधिक महिलाओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य किया गया है।

काको प्रखंड की नोनही पंचायत निवासी विभा देवी का मामला इस केंद्र के सशक्तिकरण प्रयासों का एक प्रेरणादायक उदाहरण है। विभा देवी लंबे समय से घरेलू प्रताड़ना और मानसिक उत्पीड़न से जूझ रही थीं। जीविका के सीता ग्राम संगठन से जुड़ने के बाद उन्हें 'दीदी अधिकार केंद्र' के बारे में पता चला, जहाँ उन्हें कानूनी सहायता, काउंसलिंग और मानसिक सहयोग प्रदान किया गया। केंद्र द्वारा परिवार के साथ लगातार संवाद और समझाइश के प्रयासों के बाद उनके घर का माहौल सकारात्मक रूप से बदल गया और उनके घरेलू विवाद समाप्त हो गए। आज विभा देवी आत्मविश्वास के साथ अपना जीवन जी रही हैं और अन्य महिलाओं को भी उनके अधिकारों के प्रति जागरूक कर रही हैं। विभा देवी ने जिला प्रशासन और दीदी अधिकार केंद्र का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सही समय पर मिले सहयोग और मार्गदर्शन ने वास्तव में उनकी जिंदगी बदल दी है।

जिला प्रशासन ने जिले की सभी महिलाओं से अपील की है कि किसी भी प्रकार की घरेलू हिंसा या उत्पीड़न की स्थिति में वे अपने नजदीकी 'दीदी अधिकार केंद्र', महिला हेल्पलाइन या संबंधित प्रशासनिक इकाइयों से संपर्क कर सकती हैं।
    user_Pawan Kumar
    Pawan Kumar
    पत्रकार जहानाबाद, जहानाबाद, बिहार•
    2 hrs ago
  • नीमचक बथानी के ग्राम डीआई में रामाश्रय मांझी की माताजी के निधन पर युवा जदयू प्रदेश महासचिव मोहम्मद औरंगजेब ने उनके आवास पहुंचकर परिवार से मुलाकात की। उन्होंने शोक-संतप्त परिवार को सांत्वना देते हुए अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
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    नीमचक बथानी के ग्राम डीआई में रामाश्रय मांझी की माताजी के निधन पर युवा जदयू प्रदेश महासचिव मोहम्मद औरंगजेब ने उनके आवास पहुंचकर परिवार से मुलाकात की। उन्होंने शोक-संतप्त परिवार को सांत्वना देते हुए अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
    user_MD aurangzeb
    MD aurangzeb
    Voice of people नीम चक बथानी, गया, बिहार•
    10 hrs ago
  • पटना जिले के बिक्रम थाना परिसर में रविवार को बकरीद पर्व के मद्देनज़र एक शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। थाना अध्यक्ष प्रभात कुमार के नेतृत्व में हुई इस बैठक में बिक्रम क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और गणमान्य समाजसेवियों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया कि आगामी 28 मई को मनाए जाने वाले बकरीद पर्व को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न किया जाए और किसी भी प्रकार की अशांति न फैलाई जाए। यह भी स्पष्ट किया गया कि शांति भंग करने वालों पर पुलिस की पैनी नजर रहेगी और पकड़े जाने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श कर उनका निराकरण भी किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में एसआई वरुण कुमार, एएसआई गोरेलाल, एएसआई यासीन के साथ-साथ शशि भूषण, सुब्रत वासुदेव, मोहम्मद महफूज, दिलीप यादव, सुशील कुमार, गुड्डु कुमार, अभिजीत कुमार और कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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    पटना जिले के बिक्रम थाना परिसर में रविवार को बकरीद पर्व के मद्देनज़र एक शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। थाना अध्यक्ष प्रभात कुमार के नेतृत्व में हुई इस बैठक में बिक्रम क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और गणमान्य समाजसेवियों ने हिस्सा लिया।

बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया कि आगामी 28 मई को मनाए जाने वाले बकरीद पर्व को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न किया जाए और किसी भी प्रकार की अशांति न फैलाई जाए। यह भी स्पष्ट किया गया कि शांति भंग करने वालों पर पुलिस की पैनी नजर रहेगी और पकड़े जाने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श कर उनका निराकरण भी किया गया।

इस महत्वपूर्ण बैठक में एसआई वरुण कुमार, एएसआई गोरेलाल, एएसआई यासीन के साथ-साथ शशि भूषण, सुब्रत वासुदेव, मोहम्मद महफूज, दिलीप यादव, सुशील कुमार, गुड्डु कुमार, अभिजीत कुमार और कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
    user_BIKKU SINGH
    BIKKU SINGH
    Local News Reporter बिक्रम, पटना, बिहार•
    1 hr ago
  • एक ट्रक ड्राइवर ने बंद रेलवे फाटक तोड़कर जबरन पटरी पार करने की कोशिश की, तभी तेज रफ्तार ट्रेन सामने आ गई। सोशल मीडिया पर वायरल इस खौफनाक वीडियो में ड्राइवर की 2 मिनट की जल्दबाजी सैकड़ों जिंदगियों पर भारी पड़ सकती थी।
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    एक ट्रक ड्राइवर ने बंद रेलवे फाटक तोड़कर जबरन पटरी पार करने की कोशिश की, तभी तेज रफ्तार ट्रेन सामने आ गई। सोशल मीडिया पर वायरल इस खौफनाक वीडियो में ड्राइवर की 2 मिनट की जल्दबाजी सैकड़ों जिंदगियों पर भारी पड़ सकती थी।
    user_Bihar Sharif Times
    Bihar Sharif Times
    News Anchor बिहार, नालंदा, बिहार•
    11 hrs ago
  • अरवल जिले में रसोई गैस की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस महंगाई के कारण आम लोगों के मासिक बजट पर सीधा असर पड़ा है और घर चलाना और भी मुश्किल हो गया है।
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    अरवल जिले में रसोई गैस की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस महंगाई के कारण आम लोगों के मासिक बजट पर सीधा असर पड़ा है और घर चलाना और भी मुश्किल हो गया है।
    user_Golu Kumar Soni
    Golu Kumar Soni
    करपी, अरवल, बिहार•
    13 hrs ago
  • झारखंड और बिहार की राजनीति के साथ-साथ मजदूर आंदोलनों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले राजेंद्र प्रसाद सिंह को श्रमिक हितों की एक सशक्त आवाज के रूप में याद किया जाता है। उन्होंने लंबे समय तक कांग्रेस और इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) से जुड़कर जनसेवा को अपने राजनीतिक जीवन का केंद्र बनाए रखा। 24 मई को उनकी पुण्यतिथि पर, उनके समर्थक, राजनीतिक सहयोगी और विभिन्न नेता उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके जनकल्याणकारी योगदान को स्मरण करते हैं। उनकी राजनीतिक यात्रा मजदूरों के मसीहा के तौर पर जानी जाती है, जहाँ उन्होंने कोयलांचल क्षेत्र और श्रमिक वर्ग के मुद्दों को लगातार उठाया तथा उनके अधिकारों की जोरदार पैरवी की। बेरमो विधानसभा क्षेत्र से लगातार 6 बार विधायक चुने जाना उनकी लोकप्रियता और क्षेत्रीय पकड़ का प्रमाण है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने बिहार और फिर झारखंड में स्वास्थ्य, वित्त और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण विभागों में मंत्री के रूप में जिम्मेदारियाँ भी निभाईं। राजेंद्र प्रसाद सिंह को उनके सिद्धांत आधारित राजनीति के लिए विशेष रूप से याद किया जाता है। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में संगठन, जनहित और राजनीतिक मूल्यों को हमेशा प्राथमिकता दी और कभी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उनकी विरासत आज भी झारखंड के श्रमिक आंदोलनों और क्षेत्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बनी हुई है।
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    झारखंड और बिहार की राजनीति के साथ-साथ मजदूर आंदोलनों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले राजेंद्र प्रसाद सिंह को श्रमिक हितों की एक सशक्त आवाज के रूप में याद किया जाता है। उन्होंने लंबे समय तक कांग्रेस और इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) से जुड़कर जनसेवा को अपने राजनीतिक जीवन का केंद्र बनाए रखा। 24 मई को उनकी पुण्यतिथि पर, उनके समर्थक, राजनीतिक सहयोगी और विभिन्न नेता उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके जनकल्याणकारी योगदान को स्मरण करते हैं।

उनकी राजनीतिक यात्रा मजदूरों के मसीहा के तौर पर जानी जाती है, जहाँ उन्होंने कोयलांचल क्षेत्र और श्रमिक वर्ग के मुद्दों को लगातार उठाया तथा उनके अधिकारों की जोरदार पैरवी की। बेरमो विधानसभा क्षेत्र से लगातार 6 बार विधायक चुने जाना उनकी लोकप्रियता और क्षेत्रीय पकड़ का प्रमाण है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने बिहार और फिर झारखंड में स्वास्थ्य, वित्त और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण विभागों में मंत्री के रूप में जिम्मेदारियाँ भी निभाईं।

राजेंद्र प्रसाद सिंह को उनके सिद्धांत आधारित राजनीति के लिए विशेष रूप से याद किया जाता है। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में संगठन, जनहित और राजनीतिक मूल्यों को हमेशा प्राथमिकता दी और कभी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उनकी विरासत आज भी झारखंड के श्रमिक आंदोलनों और क्षेत्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बनी हुई है।
    user_Ashutosh kumar
    Ashutosh kumar
    Local News Reporter Lakhibag, Manpur•
    20 min ago
  • पुलिस ने अवैध हथियारों के साथ दो अपराधकर्मियों को गिरफ्तार किया है। इनकी गिरफ्तारी के दौरान पुलिस को एक देशी कट्टा और आठ जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं।
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    पुलिस ने अवैध हथियारों के साथ दो अपराधकर्मियों को गिरफ्तार किया है। इनकी गिरफ्तारी के दौरान पुलिस को एक देशी कट्टा और आठ जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं।
    user_BIKKU SINGH
    BIKKU SINGH
    Local News Reporter बिक्रम, पटना, बिहार•
    6 hrs ago
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