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मध्य प्रदेश के नीमच जिले में एक अनोखा प्रदर्शन देखने को मिला, जहाँ न्याय की उम्मीद में एक पीड़ित किसान कलेक्ट्रेट पहुँच गया। इस किसान ने न्याय की आस में अपने गले में जूतों की माला पहन रखी थी, और इसी अवस्था में वह कलेक्ट्रेट में मौजूद रहा।

10 hrs ago
user_भविष्य न्यूज़ 24
भविष्य न्यूज़ 24
Local News Reporter नीमच, नीमच, मध्य प्रदेश•
10 hrs ago

मध्य प्रदेश के नीमच जिले में एक अनोखा प्रदर्शन देखने को मिला, जहाँ न्याय की उम्मीद में एक पीड़ित किसान कलेक्ट्रेट पहुँच गया। इस किसान ने न्याय की आस में अपने गले में जूतों की माला पहन रखी थी, और इसी अवस्था में वह कलेक्ट्रेट में मौजूद रहा।

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  • यह प्रस्तुति एक छात्र के संघर्ष की कहानी बताती है, जिसमें उसके एक 'टॉप रैंकर' बनने तक के सफर का उल्लेख किया गया है।
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    यह प्रस्तुति एक छात्र के संघर्ष की कहानी बताती है, जिसमें उसके एक 'टॉप रैंकर' बनने तक के सफर का उल्लेख किया गया है।
    user_Shyam pokra
    Shyam pokra
    Hindi sahitya writer. Manasa, Neemuch•
    8 hrs ago
  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में चलाए जा रहे #नशा_मुक्त_मध्यप्रदेश अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। मध्य प्रदेश हेड ब्यूरो मंगल देव राठौर की खास रिपोर्ट के अनुसार, जबलपुर में थाना बेलबाग, अधारताल और क्राइम ब्रांच की एक संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए एक ड्रग्स तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है।
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    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में चलाए जा रहे #नशा_मुक्त_मध्यप्रदेश अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। मध्य प्रदेश हेड ब्यूरो मंगल देव राठौर की खास रिपोर्ट के अनुसार, जबलपुर में थाना बेलबाग, अधारताल और क्राइम ब्रांच की एक संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए एक ड्रग्स तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है।
    user_Mangal Dev Rathore
    Mangal Dev Rathore
    मंदसौर नगर, मंदसौर, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • चित्तौड़गढ़ के बड़ीसादड़ी क्षेत्र में अपशिष्ट पदार्थों को हटाने के लिए जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। 8 जून, सोमवार को सहकारिता एवं नागरिक उड्डयन मंत्री गौतम दक की मौजूदगी में जिला प्रशासन, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के अधिकारियों और संघर्ष समिति के सदस्यों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में जनस्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया गया कि वर्षा ऋतु से पहले कैचमेंट क्षेत्र को पूरी तरह से साफ किया जाएगा। मंत्री गौतम दक ने हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अपशिष्ट पदार्थ हटाने के काम में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि मंगलवार से ही डंपरों की संख्या बढ़ाकर मलबे को युद्धस्तर पर हटाया जाए, क्योंकि यह आमजन के स्वास्थ्य से जुड़ा एक अत्यंत संवेदनशील विषय है, जिसकी नियमित निगरानी आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को मौके पर जाकर निरीक्षण करने और वर्षा प्रारंभ होने से पहले कैचमेंट एरिया से मलबा हटाने को पहली प्राथमिकता देने को कहा। बैठक में राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारियों को लिए गए सैंपलों की रिपोर्ट शीघ्र उपलब्ध कराने और लापरवाही पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों, जिनमें डॉ. विमल नागौरी, निवर्तमान पालिका उपाध्यक्ष मुस्तफा अली बोहरा, रणजीत झाला, प्रवीण दक और पूर्व विधायक प्रकाश चौधरी शामिल थे, ने अपनी चिंताओं और सुझावों से प्रशासन को अवगत कराया, जिस पर मंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों ने समाधानात्मक कार्रवाई का भरोसा दिलाया। जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने भी हिंदुस्तान जिंक की टीम को मंगलवार से अधिकतम संसाधनों के साथ मौके पर पहुंचकर अपशिष्ट हटाने का काम तेज करने के निर्देश दिए और समिति को लगातार निगरानी व प्रभावी कार्रवाई का आश्वासन दिया। हालांकि, जहां एक ओर मंत्री गौतम दक ने प्रशासन को निर्देश दिए हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने आरोप लगाए हैं और 'जहर मुक्त बड़ीसादड़ी संघर्ष समिति' में अभी भी संशय बना हुआ है।
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    चित्तौड़गढ़ के बड़ीसादड़ी क्षेत्र में अपशिष्ट पदार्थों को हटाने के लिए जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। 8 जून, सोमवार को सहकारिता एवं नागरिक उड्डयन मंत्री गौतम दक की मौजूदगी में जिला प्रशासन, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के अधिकारियों और संघर्ष समिति के सदस्यों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में जनस्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया गया कि वर्षा ऋतु से पहले कैचमेंट क्षेत्र को पूरी तरह से साफ किया जाएगा।

मंत्री गौतम दक ने हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अपशिष्ट पदार्थ हटाने के काम में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि मंगलवार से ही डंपरों की संख्या बढ़ाकर मलबे को युद्धस्तर पर हटाया जाए, क्योंकि यह आमजन के स्वास्थ्य से जुड़ा एक अत्यंत संवेदनशील विषय है, जिसकी नियमित निगरानी आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को मौके पर जाकर निरीक्षण करने और वर्षा प्रारंभ होने से पहले कैचमेंट एरिया से मलबा हटाने को पहली प्राथमिकता देने को कहा। बैठक में राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारियों को लिए गए सैंपलों की रिपोर्ट शीघ्र उपलब्ध कराने और लापरवाही पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए।

संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों, जिनमें डॉ. विमल नागौरी, निवर्तमान पालिका उपाध्यक्ष मुस्तफा अली बोहरा, रणजीत झाला, प्रवीण दक और पूर्व विधायक प्रकाश चौधरी शामिल थे, ने अपनी चिंताओं और सुझावों से प्रशासन को अवगत कराया, जिस पर मंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों ने समाधानात्मक कार्रवाई का भरोसा दिलाया। जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने भी हिंदुस्तान जिंक की टीम को मंगलवार से अधिकतम संसाधनों के साथ मौके पर पहुंचकर अपशिष्ट हटाने का काम तेज करने के निर्देश दिए और समिति को लगातार निगरानी व प्रभावी कार्रवाई का आश्वासन दिया। हालांकि, जहां एक ओर मंत्री गौतम दक ने प्रशासन को निर्देश दिए हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने आरोप लगाए हैं और 'जहर मुक्त बड़ीसादड़ी संघर्ष समिति' में अभी भी संशय बना हुआ है।
    user_Alert Nation News
    Alert Nation News
    Local News Reporter चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    1 hr ago
  • BPSC अध्यापिका गुंजन के कथित प्रेमी से हुई बातचीत के बाद वीणा माधवी का उल्लेख सामने आया है।
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    BPSC अध्यापिका गुंजन के कथित प्रेमी से हुई बातचीत के बाद वीणा माधवी का उल्लेख सामने आया है।
    user_प्रतापhttps://www.facebook.com
    प्रतापhttps://www.facebook.com
    Nurse चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • चित्तौड़गढ़ में धर्म, संगठन और छात्र राजनीति से जुड़ी कई गतिविधियां सामने आईं। इन प्रमुख घटनाओं में महाकाल सेना में नई नियुक्तियां की गईं, लक्ष्मीनाथ मंदिर में कृष्ण जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया, और एनएसयूआई (NSUI) ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया।
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    चित्तौड़गढ़ में धर्म, संगठन और छात्र राजनीति से जुड़ी कई गतिविधियां सामने आईं। इन प्रमुख घटनाओं में महाकाल सेना में नई नियुक्तियां की गईं, लक्ष्मीनाथ मंदिर में कृष्ण जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया, और एनएसयूआई (NSUI) ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया।
    user_Hello Chittorgarh News
    Hello Chittorgarh News
    Local News Reporter चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा मंगलवार को बेगूं उपखंड क्षेत्र के उत्थन कलां गांव में जे के सीमेंट लिमिटेड की प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजना को पर्यावरणीय स्वीकृति (NOC) देने के लिए जनसुनवाई आयोजित की गई। इस जनसुनवाई की अध्यक्षता एसडीएम गंगरार पुनीत कुमार ने की, जिसमें बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण उपस्थित रहे। मेसर्स जे. के. सीमेंट लिमिटेड द्वारा बेगूं उपखंड क्षेत्र के चन्दाखेडी, ढोरिया, ठुकराई, परख्या खेडी, पालका, उत्थन कला, धारला, शादी और रायता गांवों में प्रस्तावित लाइम स्टोन उत्पादन परियोजना के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति मांगी गई है। यह जनसुनवाई परियोजना से संबंधित पर्यावरणीय प्रभावों और ग्रामीणों की चिंताओं को सुनने के उद्देश्य से आयोजित हुई। जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने परियोजना के संभावित पर्यावरणीय प्रभावों, जल स्रोतों, कृषि भूमि, रोजगार और स्थानीय जनजीवन पर पड़ने वाले असर को लेकर अपने विचार प्रस्तुत किए। पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया के तहत प्राप्त इन सुझावों और आपत्तियों को अंतिम प्रतिवेदन में शामिल कर सक्षम प्राधिकारी को भेजा जाएगा, जिसके आधार पर परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरी पर निर्णय लिया जाएगा। इस मौके पर एसडीएम गंगरार पुनीत कुमार के साथ आर ओ आरएसपीसीबी चित्तौड़गढ़ आशीष बोरासी, डीएसपी अंजलि सिंह, तहसीलदार गोपाल जीनगर, बीडीओ सुरेश गिरी गोस्वामी सहित आसपास क्षेत्र के सभी ग्रामीण और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
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    राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा मंगलवार को बेगूं उपखंड क्षेत्र के उत्थन कलां गांव में जे के सीमेंट लिमिटेड की प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजना को पर्यावरणीय स्वीकृति (NOC) देने के लिए जनसुनवाई आयोजित की गई। इस जनसुनवाई की अध्यक्षता एसडीएम गंगरार पुनीत कुमार ने की, जिसमें बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण उपस्थित रहे।

मेसर्स जे. के. सीमेंट लिमिटेड द्वारा बेगूं उपखंड क्षेत्र के चन्दाखेडी, ढोरिया, ठुकराई, परख्या खेडी, पालका, उत्थन कला, धारला, शादी और रायता गांवों में प्रस्तावित लाइम स्टोन उत्पादन परियोजना के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति मांगी गई है। यह जनसुनवाई परियोजना से संबंधित पर्यावरणीय प्रभावों और ग्रामीणों की चिंताओं को सुनने के उद्देश्य से आयोजित हुई।

जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने परियोजना के संभावित पर्यावरणीय प्रभावों, जल स्रोतों, कृषि भूमि, रोजगार और स्थानीय जनजीवन पर पड़ने वाले असर को लेकर अपने विचार प्रस्तुत किए। पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया के तहत प्राप्त इन सुझावों और आपत्तियों को अंतिम प्रतिवेदन में शामिल कर सक्षम प्राधिकारी को भेजा जाएगा, जिसके आधार पर परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरी पर निर्णय लिया जाएगा।

इस मौके पर एसडीएम गंगरार पुनीत कुमार के साथ आर ओ आरएसपीसीबी चित्तौड़गढ़ आशीष बोरासी, डीएसपी अंजलि सिंह, तहसीलदार गोपाल जीनगर, बीडीओ सुरेश गिरी गोस्वामी सहित आसपास क्षेत्र के सभी ग्रामीण और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
    user_The fact khabar
    The fact khabar
    Local News Reporter बेगूं, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    9 hrs ago
  • नीमच में एक कांग्रेस पार्षद और एक महिला पर अपने मामा की संपत्ति हड़पने और उन्हें धमकाने का गंभीर आरोप लगा है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब कोर्ट ने पहले ही उनकी ओर से प्रस्तुत की गई फर्जी वसीयत और संपत्ति संबंधी दावों को निरस्त कर दिया है। इस पूरे प्रकरण को लेकर पीड़ित पक्ष ने अब कलेक्टर से शिकायत की है, जिसमें पार्षद और महिला पर मामा की संपत्ति पर गैरकानूनी तरीके से कब्जा करने का प्रयास करने का आरोप लगाया गया है।
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    नीमच में एक कांग्रेस पार्षद और एक महिला पर अपने मामा की संपत्ति हड़पने और उन्हें धमकाने का गंभीर आरोप लगा है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब कोर्ट ने पहले ही उनकी ओर से प्रस्तुत की गई फर्जी वसीयत और संपत्ति संबंधी दावों को निरस्त कर दिया है। इस पूरे प्रकरण को लेकर पीड़ित पक्ष ने अब कलेक्टर से शिकायत की है, जिसमें पार्षद और महिला पर मामा की संपत्ति पर गैरकानूनी तरीके से कब्जा करने का प्रयास करने का आरोप लगाया गया है।
    user_भविष्य न्यूज़ 24
    भविष्य न्यूज़ 24
    Local News Reporter नीमच, नीमच, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
  • मध्य प्रदेश हेड ब्यूरो मंगल देव राठौर की एक विशेष रिपोर्ट में विवाह समूह के लिए एक वीडियो साझा करने का सुझाव दिया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, यदि कोई अपनी बेटी का जीवन शादी के बाद खुशहाल देखना चाहता है, तो उसे यह ज्ञानवर्धक वीडियो देखना चाहिए। साथ ही, इसे अपनी बेटी और परिवार को दिखाने तथा समाज में भी प्रसारित करने का आग्रह किया गया है।
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    मध्य प्रदेश हेड ब्यूरो मंगल देव राठौर की एक विशेष रिपोर्ट में विवाह समूह के लिए एक वीडियो साझा करने का सुझाव दिया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, यदि कोई अपनी बेटी का जीवन शादी के बाद खुशहाल देखना चाहता है, तो उसे यह ज्ञानवर्धक वीडियो देखना चाहिए। साथ ही, इसे अपनी बेटी और परिवार को दिखाने तथा समाज में भी प्रसारित करने का आग्रह किया गया है।
    user_Mangal Dev Rathore
    Mangal Dev Rathore
    मंदसौर नगर, मंदसौर, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में इन दिनों दो बड़े पर्यावरणीय मुद्दे जनचर्चा के केंद्र में हैं। एक तरफ चंदेरिया क्षेत्र में लगभग 2700 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित फर्टिलाइज़र प्लांट को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों द्वारा गहरी पर्यावरणीय चिंताएं जताई जा रही हैं, तो वहीं दूसरी ओर बड़ीसादड़ी क्षेत्र में जेरोफिक्स औद्योगिक अपशिष्ट की कथित अवैध डंपिंग का मामला सरकारी जांच और प्रशासनिक कार्रवाई का विषय बना हुआ है। सरकारी दस्तावेजों, निरीक्षण रिपोर्टों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों व नागरिकों द्वारा उठाए गए सवालों ने इन मामलों को केवल औद्योगिक परियोजनाओं तक सीमित न रखकर पर्यावरणीय सुरक्षा, औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन और प्रशासनिक जवाबदेही का महत्वपूर्ण मुद्दा बना दिया है। बड़ीसादड़ी में जेरोफिक्स प्रकरण में विरोधाभास सामने आया है। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (आरएसपीसीबी) ने रेलवे एम्बैंकमेंट निर्माण के लिए जेरोफिक्स के उपयोग की अनुमति नियंत्रित और शर्तबद्ध तरीके से दी थी। इस अनुमति में भूजल, मिट्टी, लीचेट, टीसीएलपी परीक्षण और दीर्घकालीन पर्यावरणीय निगरानी सहित अनेक शर्तें शामिल थीं। हालांकि, आरएसपीसीबी के ही निरीक्षण प्रतिवेदन और क्षेत्रीय अधिकारी के पत्र में विभिन्न स्थानों पर जेरोफिक्स जैसी सामग्री पाए जाने और कथित "अवैध डंपिंग" का उल्लेख है, जिसके बाद संयुक्त जांच और वैज्ञानिक परीक्षण की मांग तेज हो गई है। यह विरोधाभास इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष बनकर उभरा है। दूसरी तरफ, चंदेरिया क्षेत्र में प्रस्तावित फर्टिलाइज़र प्लांट को लेकर भी लंबे समय से विरोध जारी है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह क्षेत्र पहले से ही औद्योगिक गतिविधियों के प्रभाव में है, और किसी भी नई परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों का निष्पक्ष मूल्यांकन आवश्यक है। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि किसी भी औद्योगिक परियोजना की स्वीकृति से पहले उसके संभावित प्रभावों का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन सार्वजनिक होना चाहिए, ताकि स्थानीय समुदाय तथ्यों के आधार पर अपनी राय रख सके। स्थानीय स्तर पर अब यह चर्चा भी सामने आ रही है कि क्या जेरोफिक्स अपशिष्ट प्रबंधन और प्रस्तावित फर्टिलाइज़र प्लांट के बीच कोई तकनीकी या नीतिगत संबंध है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा या सार्वजनिक तकनीकी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं जो दोनों मामलों के बीच प्रत्यक्ष संबंध स्थापित करते हों, फिर भी नागरिक और सामाजिक संगठन सरकार व संबंधित एजेंसियों से कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछ रहे हैं। इनमें यह सवाल भी शामिल है कि क्या प्रस्तावित फर्टिलाइज़र प्लांट में जेरोफिक्स या उससे संबंधित किसी औद्योगिक उपोत्पाद के उपयोग की कोई योजना है, और यदि हां, तो उसकी तकनीकी व पर्यावरणीय जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है। साथ ही, वे परियोजना पर स्वतंत्र वैज्ञानिक संस्थानों से विस्तृत अध्ययन, बड़ीसादड़ी जेरोफिक्स प्रकरण और प्रस्तावित प्लांट के बीच तकनीकी संबंध, तथा स्थानीय समुदाय की प्रभावी भागीदारी और पारदर्शी जनसुनवाई सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। औद्योगिक परियोजनाओं के समर्थक जहां रोजगार, निवेश और क्षेत्रीय आर्थिक विकास की बात करते हैं, वहीं विरोध कर रहे स्थानीय लोग कहते हैं कि यदि विकास की कीमत प्रदूषित जल, प्रभावित कृषि भूमि, पर्यावरणीय असंतुलन और जनस्वास्थ्य पर बढ़ते खतरे के रूप में चुकानी पड़े, तो ऐसी परियोजनाओं पर व्यापक सार्वजनिक विमर्श और वैज्ञानिक परीक्षण आवश्यक हो जाते हैं। यही कारण है कि यह बहस अब केवल एक उद्योग या एक परियोजना तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि विकास और पर्यावरणीय संतुलन के मॉडल पर भी सवाल खड़े कर रही है। जनता और सामाजिक संगठनों की प्रमुख मांगों में बड़ीसादड़ी जेरोफिक्स प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच, कथित डंपिंग स्थलों के भूजल, मिट्टी और वायु की वैज्ञानिक जांच, सभी जांच रिपोर्टों एवं पर्यावरणीय अध्ययनों को सार्वजनिक करना, प्रस्तावित फर्टिलाइज़र प्लांट से संबंधित तकनीकी एवं पर्यावरणीय जानकारी सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराना, तथा पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया में स्थानीय समुदाय, स्वतंत्र विशेषज्ञों और वैज्ञानिक संस्थानों की भागीदारी सुनिश्चित करना शामिल है। चित्तौड़गढ़ में सामने आए ये दोनों घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि औद्योगिक विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय सुरक्षा और जनस्वास्थ्य की चिंताओं को भी समान महत्व देना आवश्यक है। उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों और स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों के बीच अब आवश्यकता इस बात की है कि संबंधित विभाग, पर्यावरणीय एजेंसियां और परियोजना प्रबंधन सभी तथ्यों को पारदर्शी रूप से सार्वजनिक करें, ताकि जनता के बीच व्याप्त आशंकाओं का वैज्ञानिक और तथ्यात्मक समाधान हो सके। क्योंकि विकास तभी सार्थक माना जाएगा, जब वह स्थानीय समुदाय के जल, जंगल, जमीन और जीवन की सुरक्षा के साथ आगे बढ़े।
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    राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में इन दिनों दो बड़े पर्यावरणीय मुद्दे जनचर्चा के केंद्र में हैं। एक तरफ चंदेरिया क्षेत्र में लगभग 2700 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित फर्टिलाइज़र प्लांट को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों द्वारा गहरी पर्यावरणीय चिंताएं जताई जा रही हैं, तो वहीं दूसरी ओर बड़ीसादड़ी क्षेत्र में जेरोफिक्स औद्योगिक अपशिष्ट की कथित अवैध डंपिंग का मामला सरकारी जांच और प्रशासनिक कार्रवाई का विषय बना हुआ है। सरकारी दस्तावेजों, निरीक्षण रिपोर्टों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों व नागरिकों द्वारा उठाए गए सवालों ने इन मामलों को केवल औद्योगिक परियोजनाओं तक सीमित न रखकर पर्यावरणीय सुरक्षा, औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन और प्रशासनिक जवाबदेही का महत्वपूर्ण मुद्दा बना दिया है।

बड़ीसादड़ी में जेरोफिक्स प्रकरण में विरोधाभास सामने आया है। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (आरएसपीसीबी) ने रेलवे एम्बैंकमेंट निर्माण के लिए जेरोफिक्स के उपयोग की अनुमति नियंत्रित और शर्तबद्ध तरीके से दी थी। इस अनुमति में भूजल, मिट्टी, लीचेट, टीसीएलपी परीक्षण और दीर्घकालीन पर्यावरणीय निगरानी सहित अनेक शर्तें शामिल थीं। हालांकि, आरएसपीसीबी के ही निरीक्षण प्रतिवेदन और क्षेत्रीय अधिकारी के पत्र में विभिन्न स्थानों पर जेरोफिक्स जैसी सामग्री पाए जाने और कथित "अवैध डंपिंग" का उल्लेख है, जिसके बाद संयुक्त जांच और वैज्ञानिक परीक्षण की मांग तेज हो गई है। यह विरोधाभास इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष बनकर उभरा है।

दूसरी तरफ, चंदेरिया क्षेत्र में प्रस्तावित फर्टिलाइज़र प्लांट को लेकर भी लंबे समय से विरोध जारी है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह क्षेत्र पहले से ही औद्योगिक गतिविधियों के प्रभाव में है, और किसी भी नई परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों का निष्पक्ष मूल्यांकन आवश्यक है। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि किसी भी औद्योगिक परियोजना की स्वीकृति से पहले उसके संभावित प्रभावों का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन सार्वजनिक होना चाहिए, ताकि स्थानीय समुदाय तथ्यों के आधार पर अपनी राय रख सके।

स्थानीय स्तर पर अब यह चर्चा भी सामने आ रही है कि क्या जेरोफिक्स अपशिष्ट प्रबंधन और प्रस्तावित फर्टिलाइज़र प्लांट के बीच कोई तकनीकी या नीतिगत संबंध है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा या सार्वजनिक तकनीकी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं जो दोनों मामलों के बीच प्रत्यक्ष संबंध स्थापित करते हों, फिर भी नागरिक और सामाजिक संगठन सरकार व संबंधित एजेंसियों से कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछ रहे हैं। इनमें यह सवाल भी शामिल है कि क्या प्रस्तावित फर्टिलाइज़र प्लांट में जेरोफिक्स या उससे संबंधित किसी औद्योगिक उपोत्पाद के उपयोग की कोई योजना है, और यदि हां, तो उसकी तकनीकी व पर्यावरणीय जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है। साथ ही, वे परियोजना पर स्वतंत्र वैज्ञानिक संस्थानों से विस्तृत अध्ययन, बड़ीसादड़ी जेरोफिक्स प्रकरण और प्रस्तावित प्लांट के बीच तकनीकी संबंध, तथा स्थानीय समुदाय की प्रभावी भागीदारी और पारदर्शी जनसुनवाई सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।

औद्योगिक परियोजनाओं के समर्थक जहां रोजगार, निवेश और क्षेत्रीय आर्थिक विकास की बात करते हैं, वहीं विरोध कर रहे स्थानीय लोग कहते हैं कि यदि विकास की कीमत प्रदूषित जल, प्रभावित कृषि भूमि, पर्यावरणीय असंतुलन और जनस्वास्थ्य पर बढ़ते खतरे के रूप में चुकानी पड़े, तो ऐसी परियोजनाओं पर व्यापक सार्वजनिक विमर्श और वैज्ञानिक परीक्षण आवश्यक हो जाते हैं। यही कारण है कि यह बहस अब केवल एक उद्योग या एक परियोजना तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि विकास और पर्यावरणीय संतुलन के मॉडल पर भी सवाल खड़े कर रही है।

जनता और सामाजिक संगठनों की प्रमुख मांगों में बड़ीसादड़ी जेरोफिक्स प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच, कथित डंपिंग स्थलों के भूजल, मिट्टी और वायु की वैज्ञानिक जांच, सभी जांच रिपोर्टों एवं पर्यावरणीय अध्ययनों को सार्वजनिक करना, प्रस्तावित फर्टिलाइज़र प्लांट से संबंधित तकनीकी एवं पर्यावरणीय जानकारी सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराना, तथा पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया में स्थानीय समुदाय, स्वतंत्र विशेषज्ञों और वैज्ञानिक संस्थानों की भागीदारी सुनिश्चित करना शामिल है। चित्तौड़गढ़ में सामने आए ये दोनों घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि औद्योगिक विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय सुरक्षा और जनस्वास्थ्य की चिंताओं को भी समान महत्व देना आवश्यक है। उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों और स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों के बीच अब आवश्यकता इस बात की है कि संबंधित विभाग, पर्यावरणीय एजेंसियां और परियोजना प्रबंधन सभी तथ्यों को पारदर्शी रूप से सार्वजनिक करें, ताकि जनता के बीच व्याप्त आशंकाओं का वैज्ञानिक और तथ्यात्मक समाधान हो सके। क्योंकि विकास तभी सार्थक माना जाएगा, जब वह स्थानीय समुदाय के जल, जंगल, जमीन और जीवन की सुरक्षा के साथ आगे बढ़े।
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    Alert Nation News
    Local News Reporter चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    1 hr ago
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