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यह है इस दुनिया की सच्चाई यह है भारत की सच्चाई भारत में कुछ लोग ऐसे ही हो रहे हैं
Ravi Kashyap
यह है इस दुनिया की सच्चाई यह है भारत की सच्चाई भारत में कुछ लोग ऐसे ही हो रहे हैं
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- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में अफगानिस्तान की स्थिति पर हुई चर्चा के दौरान भारत ने पाकिस्तान पर जमकर हमला बोला। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने पाकिस्तान के अफगानिस्तान में घुसकर किए गए हमलों को नरसंहार करार दिया और उस पर अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर आम नागरिकों की हत्या कर रहा है, जिसे भारत ने 'पाखंड का सबसे बड़ा उदाहरण' बताया। भारत के प्रतिनिधि ने इस बात पर जोर दिया कि नरसंहार करने वाला, भले ही उसे सैन्य कार्रवाई का नाम दे, उस पाप से मुक्त नहीं हो जाता। उन्होंने अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि साल 2026 के शुरुआती तीन महीनों में 372 आम नागरिक मारे गए, जिनमें से अधिकतर रमजान के पवित्र महीने में जान गंवा बैठे थे। हरीश ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान के लैंडलॉक देश होने का फायदा उठाते हुए उसके व्यापार मार्गों में बाधाएं डाल रहा है और अफगान सामान पर प्रतिबंध लगाकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों व संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन कर रहा है। इसके विपरीत, भारत ने अफगानिस्तान की मदद के लिए उठाए गए अपने कदमों का भी उल्लेख किया। 2021 के बाद से भारत ने 50 हजार टन गेहूं, 420 टन दवाएं और वैक्सीन, तथा 40 हजार लीटर कीटनाशक अफगानिस्तान भेजे हैं। इस साल अप्रैल में ही बाढ़ राहत के लिए आवश्यक सामग्री और वैक्सीन की खेप काबुल भेजी गई थी। नई दिल्ली मानवीय सहायता के साथ ही अफगानिस्तान के सभी 34 प्रदेशों के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, जहां भारत की करीब 500 से अधिक परियोजनाएं चल रही हैं। इनमें पक्तिका, पक्तिया और खोस्त में मैटरनिटी क्लीनिकों का निर्माण, काबुल में इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ का अपग्रेडेशन, ट्रॉमा सेंटर, ऑन्कोलॉजी सेंटर और 30 बेड के अस्पताल का निर्माण शामिल है। पी. हरीश ने बताया कि भारत, अफगानिस्तान की क्रिकेट टीम की द्विपक्षीय श्रृंखला के लिए मेजबानी भी कर रहा है। भारत ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि अफगान भाई-बहन इससे बेहतर के हकदार हैं।1
- राजधानी दिल्ली में ड्राइवर समुदाय की एकता की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली है। यहाँ ऑल इंडिया ड्राइवर संघ के हजारों पदाधिकारियों ने एकजुट होकर 'भारत जन चेतना यात्रा' निकाली, जिसने ड्राइवर समुदाय की सामूहिक शक्ति और एकता को प्रदर्शित किया।1
- आईटीआई बचाव आंदोलन की मुहिम अब और तेज हो गई है, जिसके तहत नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर रोष प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन के माध्यम से कौशल विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं पर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जो इस आंदोलन को एक मुखर रूप दे रहे हैं।1
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- देश में मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी लगाम लगाने के लिए सरकार ने मुखबिरों और सूचना देने वाले आम नागरिकों के लिए एक विशेष इनाम योजना को बढ़ावा दिया है। एनडीपीएस कानून के तहत, ड्रग तस्करों की सटीक जानकारी देकर कार्रवाई सुनिश्चित करवाने वाले व्यक्तियों को हजारों से लेकर लाखों रुपये तक का नकद इनाम मिल सकता है। दी गई जानकारी के अनुसार, कई मामलों में सफल सूचना देने पर व्यक्ति को ₹3,000 से लेकर ₹2 लाख या उससे भी अधिक का नकद इनाम प्रदान किया जा सकता है। इसके साथ ही, ड्रग तस्करी के खिलाफ सफल कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को भी प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान इस योजना में शामिल है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नशे के कारोबार के खिलाफ इस महत्वपूर्ण लड़ाई में आम नागरिकों की भागीदारी बेहद अहम है। यह भी सुनिश्चित किया गया है कि गोपनीय सूचना देने वाले व्यक्तियों की पहचान को पूरी तरह से सुरक्षित रखा जाएगा, जिससे वे बिना किसी डर के जानकारी साझा कर सकें।1
- पूर्व बसपा उम्मीदवार डॉ. अस्मिता को उनके पति के साथ वीर सिंह से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया गया है। इस गिरफ्तारी के विरोध में ओबीसी महासभा ने दिल्ली में ज़ोरदार प्रदर्शन किया है।1
- कई देशों में शांति का संदेश दे चुके 'पीस डॉग' अलोका ने मेनका गांधी के दिल्ली स्थित आवास पर उनसे मुलाकात की। अपनी विश्व शांति यात्रा के बाद हुई इस खास भेंट में, 'शांति दूत' अलोका ने सौहार्द, करुणा और सह-अस्तित्व का सशक्त संदेश दिया। इस दौरान मेनका गांधी और अलोका के बीच विश्व शांति और पशु कल्याण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।2
- पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में एक बार फिर बगावत की आग भड़क उठी है। अवामी एक्शन कमेटी के आह्वान पर रविवार (7 जून) को पूरे पीओके में बंद और प्रदर्शन की घोषणा की गई थी। इस बीच, सोमवार (8 जून) को लंदन स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग के बाहर भी पीओके के अप्रवासी लोगों ने पाकिस्तानी हुकूमत और सेना के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए "पाकिस्तानी सेना वापस जाओ" के नारे लगाए। इसी क्रम में पीओके के रावलकोट में पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स ने आम लोगों पर गोलीबारी की और पैलेट गन का इस्तेमाल किया। रविवार रात से लेकर सोमवार शाम तक रावलकोट में सेना और रेंजर्स के इस दमन में कुल 26 लोगों की जान चली गई, जबकि 190 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें से कई के शरीर पर पैलेट गन के छर्रों के निशान मिले हैं। स्थिति को देखते हुए पीओके की राजधानी मुजफ्फराबाद में कर्फ्यू लगा दिया गया है और पूरा शहर इस समय बंद है। हालांकि, आधिकारिक आंकड़ों के विपरीत, पीओके के लोग वीडियो बयान जारी कर आरोप लगा रहे हैं कि रावलकोट में पाकिस्तानी सेना के दमन के कारण 100 से 150 लोगों की मौत हुई है।1