मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद मंगलवार को गहरा सियासी विवाद उत्पन्न हो गया। इस फैसले के विरोध में कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए भाजपा पर राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, जिनमें महासचिव जयराम रमेश, केसी वेणुगोपाल, भूपेश बघेल और सचिन पायलट शामिल थे, नई दिल्ली स्थित निर्वाचन आयोग (ECI) के दफ्तर पहुंचे और अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान जयराम रमेश को आयोग कार्यालय परिसर में प्रवेश से रोके जाने की तस्वीरें भी सामने आईं। आयोग जाने से पहले, कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि 'लोकतंत्र की हत्या कर दी गई है' और भाजपा पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नष्ट करने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा अब वोट चोरी से आगे बढ़कर 'सीट चोरी' तक पहुंच गई है और मध्य प्रदेश में राज्यसभा की सीट चोरी करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस नेताओं ने निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी आपत्तियां और मांगें रखने का प्रयास किया। आयोग के सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस की ओर से भेजा गया पत्र मंगलवार शाम 7:34 बजे प्राप्त हुआ, जिसमें कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग के अधिकारियों से रात 9 बजे मुलाकात के लिए समय मांगा था। हालांकि, बिना पूर्व सूचना के अचानक कांग्रेस नेताओं के आयोग के दफ्तर पहुंचने से दिक्कत हुई, क्योंकि आयोग में अधिकतर आला अधिकारी शाम 7 से 7:15 बजे के बीच निकल गए थे। इसके बावजूद, निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस के दो नेताओं, केसी वेणुगोपाल और भूपेश बघेल, को दफ्तर में प्रवेश की अनुमति दी, जिन्होंने आयोग को अपना ज्ञापन सौंपा। आयोग के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि पहले से जानकारी होने पर उच्च अधिकारी या मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य दोनों आयुक्त कांग्रेस नेताओं से मिलने के लिए दफ्तर में मौजूद रहते। विवाद की शुरुआत तब हुई जब राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया। मध्य प्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी के अनुसार, नामांकन इस आधार पर रद्द किया गया कि कांग्रेस उम्मीदवार ने अपने चुनावी हलफनामे में एक कानूनी मामले की जानकारी कथित तौर पर छिपाई थी। यह आपत्ति मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार महेश केवट की ओर से दर्ज कराई गई थी। सूत्रों के मुताबिक, निर्वाचन आयोग कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को बुधवार सुबह मिलने का समय दे सकता है।
मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद मंगलवार को गहरा सियासी विवाद उत्पन्न हो गया। इस फैसले के विरोध में कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए भाजपा पर राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, जिनमें महासचिव जयराम रमेश, केसी वेणुगोपाल, भूपेश बघेल और सचिन पायलट शामिल थे, नई दिल्ली स्थित निर्वाचन आयोग (ECI) के दफ्तर पहुंचे और अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान जयराम रमेश को आयोग कार्यालय परिसर में प्रवेश से रोके जाने की तस्वीरें भी सामने आईं। आयोग जाने से पहले, कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि 'लोकतंत्र की हत्या कर दी गई है' और भाजपा पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नष्ट करने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा अब वोट चोरी से आगे बढ़कर 'सीट चोरी' तक पहुंच गई है और मध्य प्रदेश में राज्यसभा की सीट चोरी करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस नेताओं ने निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी आपत्तियां और मांगें रखने का प्रयास किया। आयोग के सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस की ओर से भेजा गया पत्र मंगलवार शाम 7:34 बजे प्राप्त हुआ, जिसमें कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग के अधिकारियों से रात 9 बजे मुलाकात के लिए समय मांगा था। हालांकि, बिना पूर्व सूचना के अचानक कांग्रेस नेताओं के आयोग के दफ्तर पहुंचने से दिक्कत हुई, क्योंकि आयोग में अधिकतर आला अधिकारी शाम 7 से 7:15 बजे के बीच निकल गए थे। इसके बावजूद, निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस के दो नेताओं, केसी वेणुगोपाल और भूपेश बघेल, को दफ्तर में प्रवेश की अनुमति दी, जिन्होंने आयोग को अपना ज्ञापन सौंपा। आयोग के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि पहले से जानकारी होने पर उच्च अधिकारी या मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य दोनों आयुक्त कांग्रेस नेताओं से मिलने के लिए दफ्तर में मौजूद रहते। विवाद की शुरुआत तब हुई जब राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया। मध्य प्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी के अनुसार, नामांकन इस आधार पर रद्द किया गया कि कांग्रेस उम्मीदवार ने अपने चुनावी हलफनामे में एक कानूनी मामले की जानकारी कथित तौर पर छिपाई थी। यह आपत्ति मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार महेश केवट की ओर से दर्ज कराई गई थी। सूत्रों के मुताबिक, निर्वाचन आयोग कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को बुधवार सुबह मिलने का समय दे सकता है।
- आज के दौर में हर नागरिक के लिए अपने अधिकारों और कानूनी सुरक्षा की जानकारी रखना अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। यह जानकारी न केवल व्यक्ति को जागरूक बनाती है, बल्कि किसी भी अन्याय, धोखाधड़ी या परेशानी की स्थिति में अपने हितों की रक्षा करने में भी सहायक सिद्ध होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, जागरूक नागरिक अपने अधिकारों का बेहतर उपयोग कर सकते हैं और आवश्यकता पड़ने पर आसानी से कानूनी सहायता भी प्राप्त कर सकते हैं। यही वजह है कि लोगों को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी जाती है, क्योंकि जानकारी और जागरूकता ही एक सुरक्षित, सशक्त और जिम्मेदार समाज की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है।1
- मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद मंगलवार को गहरा सियासी विवाद उत्पन्न हो गया। इस फैसले के विरोध में कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए भाजपा पर राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, जिनमें महासचिव जयराम रमेश, केसी वेणुगोपाल, भूपेश बघेल और सचिन पायलट शामिल थे, नई दिल्ली स्थित निर्वाचन आयोग (ECI) के दफ्तर पहुंचे और अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान जयराम रमेश को आयोग कार्यालय परिसर में प्रवेश से रोके जाने की तस्वीरें भी सामने आईं। आयोग जाने से पहले, कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि 'लोकतंत्र की हत्या कर दी गई है' और भाजपा पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नष्ट करने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा अब वोट चोरी से आगे बढ़कर 'सीट चोरी' तक पहुंच गई है और मध्य प्रदेश में राज्यसभा की सीट चोरी करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस नेताओं ने निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी आपत्तियां और मांगें रखने का प्रयास किया। आयोग के सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस की ओर से भेजा गया पत्र मंगलवार शाम 7:34 बजे प्राप्त हुआ, जिसमें कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग के अधिकारियों से रात 9 बजे मुलाकात के लिए समय मांगा था। हालांकि, बिना पूर्व सूचना के अचानक कांग्रेस नेताओं के आयोग के दफ्तर पहुंचने से दिक्कत हुई, क्योंकि आयोग में अधिकतर आला अधिकारी शाम 7 से 7:15 बजे के बीच निकल गए थे। इसके बावजूद, निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस के दो नेताओं, केसी वेणुगोपाल और भूपेश बघेल, को दफ्तर में प्रवेश की अनुमति दी, जिन्होंने आयोग को अपना ज्ञापन सौंपा। आयोग के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि पहले से जानकारी होने पर उच्च अधिकारी या मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य दोनों आयुक्त कांग्रेस नेताओं से मिलने के लिए दफ्तर में मौजूद रहते। विवाद की शुरुआत तब हुई जब राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया। मध्य प्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी के अनुसार, नामांकन इस आधार पर रद्द किया गया कि कांग्रेस उम्मीदवार ने अपने चुनावी हलफनामे में एक कानूनी मामले की जानकारी कथित तौर पर छिपाई थी। यह आपत्ति मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार महेश केवट की ओर से दर्ज कराई गई थी। सूत्रों के मुताबिक, निर्वाचन आयोग कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को बुधवार सुबह मिलने का समय दे सकता है।1
- भाई चंद्रशेखर ने 'वादा' और आदिवासियों के अधिकारों के लिए अपनी आवाज़ बुलंद की है, जिसमें उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ स्वयं को समर्पित किया है। वे दिल्ली से हैं और आदिवासी मुस्लिम समुदाय के हितों के लिए भी मुखर रूप से आवाज़ उठाते हैं। उनके इस प्रयास को समर्थन देने का आग्रह किया गया है।1
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में अफगानिस्तान की स्थिति पर हुई चर्चा के दौरान भारत ने पाकिस्तान पर जमकर हमला बोला। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने पाकिस्तान के अफगानिस्तान में घुसकर किए गए हमलों को नरसंहार करार दिया और उस पर अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर आम नागरिकों की हत्या कर रहा है, जिसे भारत ने 'पाखंड का सबसे बड़ा उदाहरण' बताया। भारत के प्रतिनिधि ने इस बात पर जोर दिया कि नरसंहार करने वाला, भले ही उसे सैन्य कार्रवाई का नाम दे, उस पाप से मुक्त नहीं हो जाता। उन्होंने अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि साल 2026 के शुरुआती तीन महीनों में 372 आम नागरिक मारे गए, जिनमें से अधिकतर रमजान के पवित्र महीने में जान गंवा बैठे थे। हरीश ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान के लैंडलॉक देश होने का फायदा उठाते हुए उसके व्यापार मार्गों में बाधाएं डाल रहा है और अफगान सामान पर प्रतिबंध लगाकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों व संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन कर रहा है। इसके विपरीत, भारत ने अफगानिस्तान की मदद के लिए उठाए गए अपने कदमों का भी उल्लेख किया। 2021 के बाद से भारत ने 50 हजार टन गेहूं, 420 टन दवाएं और वैक्सीन, तथा 40 हजार लीटर कीटनाशक अफगानिस्तान भेजे हैं। इस साल अप्रैल में ही बाढ़ राहत के लिए आवश्यक सामग्री और वैक्सीन की खेप काबुल भेजी गई थी। नई दिल्ली मानवीय सहायता के साथ ही अफगानिस्तान के सभी 34 प्रदेशों के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, जहां भारत की करीब 500 से अधिक परियोजनाएं चल रही हैं। इनमें पक्तिका, पक्तिया और खोस्त में मैटरनिटी क्लीनिकों का निर्माण, काबुल में इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ का अपग्रेडेशन, ट्रॉमा सेंटर, ऑन्कोलॉजी सेंटर और 30 बेड के अस्पताल का निर्माण शामिल है। पी. हरीश ने बताया कि भारत, अफगानिस्तान की क्रिकेट टीम की द्विपक्षीय श्रृंखला के लिए मेजबानी भी कर रहा है। भारत ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि अफगान भाई-बहन इससे बेहतर के हकदार हैं।1
- राजधानी दिल्ली में ड्राइवर समुदाय की एकता की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली है। यहाँ ऑल इंडिया ड्राइवर संघ के हजारों पदाधिकारियों ने एकजुट होकर 'भारत जन चेतना यात्रा' निकाली, जिसने ड्राइवर समुदाय की सामूहिक शक्ति और एकता को प्रदर्शित किया।1
- आईटीआई बचाव आंदोलन की मुहिम अब और तेज हो गई है, जिसके तहत नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर रोष प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन के माध्यम से कौशल विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं पर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जो इस आंदोलन को एक मुखर रूप दे रहे हैं।1
- पश्चिम बंगाल की सियासत में इन दिनों काफी हलचल देखी जा रही है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर अंदरूनी बगावत की अटकलों के बीच, पार्टी के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी ने नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही सत्ताधारी दल के पास प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और तमाम केंद्रीय शक्तियों का बल हो, लेकिन तृणमूल कांग्रेस के पास 'मां, माटी, मानुष' की शक्ति और पश्चिम बंगाल की जनता का पूरा भरोसा है। इस सियासी ड्रामे के बीच, बनर्जी ने पार्टी आलाकमान के प्रति अपनी अटूट निष्ठा को भी दोहराया। इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद टीएमसी नेता कीर्ति आजाद ने पार्टी से असंतुष्ट चल रहे नेताओं को आड़े हाथों लिया और उन पर राजनीतिक नैतिकता खोने का आरोप लगाया। आजाद ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि जो लोग चुनाव जीतने के बाद अब ममता बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं, वे असल में 'गद्दार' हैं। उन्होंने इन नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनमें थोड़ी भी नैतिकता बची है, तो वे तुरंत अपने पदों से इस्तीफा दें और भाजपा के टिकट पर दुबारा चुनाव लड़कर दिखाएं। आजाद ने पूर्व सांसद सुखेन्दु शेखर रॉय का उदाहरण भी दिया, यह कहते हुए कि कम से कम उनमें इस्तीफा देने की हिम्मत तो थी।1
- रूस में गोली लगने से 21 वर्षीय अनुज शर्मा की दर्दनाक मौत हो गई है। अनुज, जो घरौंडा के चोरा गांव का रहने वाला था, मजदूरी करने वाले अपने पिता के 6 लाख रुपये के कर्ज पर स्टडी वीजा के लिए विदेश गया था। मिली जानकारी के अनुसार, अनुज को यूक्रेन-रूस युद्ध के लिए जबरन भर्ती किया गया था, जिसके चलते यह दुखद घटना घटी। इस खबर से परिवार गहरे सदमे में है, और उसकी रोती-तड़पती बहन अपने भाई के शव के पीछे भागी।1