धुलकोट क्षेत्र के आदिवासी और दूरस्थ अंचलों में लोग भीषण जल संकट का सामना कर रहे हैं, जहाँ पानी की एक-एक बूंद के लिए जिंदगियाँ मौत से जंग लड़ रही हैं। तपती धूप, सूखी धरती और फटे हुए पहाड़ों के बीच सामने आई ये तस्वीरें किसी रेगिस्तान या अकालग्रस्त देश की नहीं, बल्कि उसी 'डिजिटल इंडिया' की हैं जहाँ कागजों पर 'हर घर जल' और 'नल-जल योजना' के तहत करोड़ों के बजट पानी की तरह बहा दिए जाने के दावे किए जाते हैं, पर वास्तविकता कुछ और ही है। ग्राम भग्वानिया के सरबड़ गांव (रेखलिया झिरा फालिया) से सामने आई रूह कंपा देने वाली तस्वीरें इस भयावह स्थिति को उजागर करती हैं। सबसे दर्दनाक और शर्मनाक बात यह है कि इस जानलेवा संघर्ष में सबसे आगे छोटे-छोटे मासूम बच्चे दिखाई दे रहे हैं। जिन हाथों में स्कूल के बस्ते और किताबें होनी चाहिए थीं, उनके हाथों में आज गंदे पानी की बाल्टियाँ और कुप्पियाँ हैं, जो उनके लिए 'मौत का कुआँ' बन गई हैं।
धुलकोट क्षेत्र के आदिवासी और दूरस्थ अंचलों में लोग भीषण जल संकट का सामना कर रहे हैं, जहाँ पानी की एक-एक बूंद के लिए जिंदगियाँ मौत से जंग लड़ रही हैं। तपती धूप, सूखी धरती और फटे हुए पहाड़ों के बीच सामने आई ये तस्वीरें किसी रेगिस्तान या अकालग्रस्त देश की नहीं, बल्कि उसी 'डिजिटल इंडिया' की हैं जहाँ कागजों पर 'हर घर जल' और 'नल-जल योजना' के तहत करोड़ों के बजट पानी की तरह बहा दिए जाने के दावे किए जाते हैं, पर वास्तविकता कुछ और ही है। ग्राम भग्वानिया के सरबड़ गांव (रेखलिया झिरा फालिया) से सामने आई रूह कंपा देने वाली तस्वीरें इस भयावह स्थिति को उजागर करती हैं। सबसे दर्दनाक और शर्मनाक बात यह है कि इस जानलेवा संघर्ष में सबसे आगे छोटे-छोटे मासूम बच्चे दिखाई दे रहे हैं। जिन हाथों में स्कूल के बस्ते और किताबें होनी चाहिए थीं, उनके हाथों में आज गंदे पानी की बाल्टियाँ और कुप्पियाँ हैं, जो उनके लिए 'मौत का कुआँ' बन गई हैं।
- धुलकोट क्षेत्र के आदिवासी और दूरस्थ अंचलों में लोग भीषण जल संकट का सामना कर रहे हैं, जहाँ पानी की एक-एक बूंद के लिए जिंदगियाँ मौत से जंग लड़ रही हैं। तपती धूप, सूखी धरती और फटे हुए पहाड़ों के बीच सामने आई ये तस्वीरें किसी रेगिस्तान या अकालग्रस्त देश की नहीं, बल्कि उसी 'डिजिटल इंडिया' की हैं जहाँ कागजों पर 'हर घर जल' और 'नल-जल योजना' के तहत करोड़ों के बजट पानी की तरह बहा दिए जाने के दावे किए जाते हैं, पर वास्तविकता कुछ और ही है। ग्राम भग्वानिया के सरबड़ गांव (रेखलिया झिरा फालिया) से सामने आई रूह कंपा देने वाली तस्वीरें इस भयावह स्थिति को उजागर करती हैं। सबसे दर्दनाक और शर्मनाक बात यह है कि इस जानलेवा संघर्ष में सबसे आगे छोटे-छोटे मासूम बच्चे दिखाई दे रहे हैं। जिन हाथों में स्कूल के बस्ते और किताबें होनी चाहिए थीं, उनके हाथों में आज गंदे पानी की बाल्टियाँ और कुप्पियाँ हैं, जो उनके लिए 'मौत का कुआँ' बन गई हैं।1
- कटनी नगर के आधारकाप क्षेत्र में स्थित खेर माई जोगनी माता मंदिर में रविवार, 24 मई 2026 को भव्य निकासी कार्यक्रम का आयोजन अत्यंत श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया, जिन्होंने माता रानी के जयकारे लगाए और क्षेत्र की सुख-समृद्धि तथा शांति व्यवस्था के लिए प्रार्थना की। पूरे आधारकाप क्षेत्र में एक धार्मिक और भक्तिमय माहौल बना रहा, जिससे श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। माता जोगनी माई के पंडा श्री गोपाल निषाद जी ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना और निकासी कार्यक्रम को संपन्न कराया। निकासी के दौरान, भक्तों ने ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों के साथ माता की आराधना की। श्रद्धालुओं का यह अटल विश्वास है कि माँ जोगनी माई की कृपा से पूरे क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। इस आयोजन में दक्खिनी माता भगत समाज के सदस्यों ने विशेष भूमिका निभाई। समाज के बालमुकुंद निषाद, परषोत्तम निषाद, मुक्खी निषाद, रमेश निषाद, राकेश निषाद सहित सभी सदस्यों ने अपनी भक्तिपूर्ण प्रस्तुतियाँ देकर श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। भक्तों द्वारा किए गए भजन-कीर्तन और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों ने पूरे आयोजन को भक्तिमय बना दिया। निकासी कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, और सभी ने माता रानी के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। यह पूरा आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ, जिसे क्षेत्रवासियों ने सामाजिक एकता और धार्मिक आस्था का प्रतीक बताया।1
- जनता को एक गंभीर चेतावनी जारी की गई है, जिसमें बताया गया है कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' की धोखाधड़ी शुरू हो चुकी है। यह संदेश लोगों को सावधान और सतर्क रहने का आग्रह करता है, क्योंकि इसमें कहा गया है कि कोई भी अगला शिकार बन सकता है। साइबर क्राइम से सुरक्षा के लिए इस जानकारी से जुड़े वीडियो को साझा करने का आह्वान भी किया गया है।1
- उत्तराखंड के चमोली में कंचनगंगा के ऊपर एक ग्लेशियर टूट गया है, जिससे बद्रीनाथ धाम से ठीक ऊपर पहाड़ों से बड़ी-बड़ी चट्टानें टूटकर हवा में उड़ती हुई दिखाई दीं, जिसे 'बर्फ का तूफान' बताया जा रहा है। इस घटना की वजह तेजी से बढ़ती गर्मी को बताया गया है, जिसके कारण ग्लेशियर बड़ी मात्रा में टूट रहे हैं। हालांकि, अभी तक इस घटना से किसी तरह के नुकसान की कोई जानकारी सामने नहीं आई है।1
- उमरिया जिले के ग्राम खेरवा टोला में बाघ के हमले के बाद ग्रामीण लोग भड़क उठे। इस घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने रेंजर पर हमला कर दिया।1
- यह पोस्ट "वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥" मंत्र के साथ शुरू होती है, जिसमें सभी कार्यों को निर्विघ्न संपन्न करने की प्रार्थना की गई है। इसके बाद मां शारदा मैया के प्रातःकालीन दिव्य श्रृंगार दर्शन की जानकारी साझा की गई है। पोस्ट में यह भाव व्यक्त किया गया है कि मां शारदा मैया की कृपा से ही सारे काम सफल हो रहे हैं और जो भी नाम या पहचान मिल रही है, वह मैया की ही देन है। अंत में "जय मां शारदा भवानी", "जय माई की" और "जय हो माई शारदा की" जैसे जयकारों के साथ भक्ति और श्रद्धा प्रकट की गई है।2
- सतना जिले के सोहावल में मध्य प्रदेश शासन की शासकीय आराजी पर दरगाह कमेटी द्वारा जेसीबी चलाकर अवैध कब्जा करने का गंभीर मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सदर जाकिर हुसैन के मार्गदर्शन में पैसू मास्टर द्वारा इस कार्य को अंजाम दिया जा रहा है, जिसमें हरे-भरे पेड़ों को भी नष्ट किया गया है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल और त्वरित कार्रवाई की मांग की है।1
- केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी अमृत सरोवर योजना पूरे देश में तेजी से आगे बढ़ रही है। इसका उद्देश्य हर जिले में कम से कम 75 जल निकायों का निर्माण और जीर्णोद्धार कर जल संरक्षण को बढ़ावा देना है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित कर जनजीवन में बड़ा बदलाव ला रही है।1