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राजस्थान जिला राज 35 प्रतापगढ़ तहसील उदयपुर पुलिस थाना देवगढ़ मेरा गांव का नाम लोहारिया डूंगरपुर बांसवाड़ा

14 hrs ago
user_Vikram Singh
Vikram Singh
घाटोल, बांसवाड़ा, राजस्थान•
14 hrs ago

राजस्थान जिला राज 35 प्रतापगढ़ तहसील उदयपुर पुलिस थाना देवगढ़ मेरा गांव का नाम लोहारिया डूंगरपुर बांसवाड़ा

More news from राजस्थान and nearby areas
  • राजस्थान की पूर्व देवस्थान मंत्री शकुंतला रावत ने मंगलवार को कुशलगढ़ में नव-निर्मित एवं भव्य राम मंदिर पहुंचकर भगवान श्रीराम के दर्शन किए। 150 वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक राम मंदिर के नव-निर्माण और सौंदर्यीकरण के बाद उसके भव्य स्वरूप को देखकर शकुंतला रावत ने अत्यधिक प्रसन्नता व्यक्त की। इस अवसर पर राम मंदिर निर्माण समिति ने उनका और क्षेत्रीय विधायक रमीला खड़िया का माल्यार्पण एवं दुपट्टा ओढ़ाकर भव्य स्वागत-अभिनंदन किया। कार्यक्रम का संचालन कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष रजनीकांत खाब्या ने किया। अपने संबोधन में शकुंतला रावत ने मंदिरों और तीर्थ स्थलों को हमारी संस्कृति, परंपरा एवं आस्था के महत्वपूर्ण केंद्र बताया, साथ ही धार्मिक धरोहरों के संरक्षण और विकास में सरकार की भूमिका को भी महत्वपूर्ण रेखांकित किया। विधायक रमीला खड़िया ने जानकारी दी कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और तत्कालीन देवस्थान मंत्री शकुंतला रावत के प्रयासों से राम मंदिर और मंगलेश्वर तीर्थ के विकास के लिए कुल 5 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे, जिससे क्षेत्र को एक नई धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान मिली है। राम मंदिर निर्माण समिति के संरक्षक कैलाश राव बारोट ने इस अवसर पर सभी सहयोगियों, जनप्रतिनिधियों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में मुकेश अग्रवाल, भरत कुमावत, सुधीर स्वर्णकार, हरेंद्र पाठक, हेमेंद्र पांडिया, तिलोत्तमा पांडिया, राघवेश चरपोटा, विजय सिंह खड़िया, विजय भाई मइड़ा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, कांग्रेस पदाधिकारी और श्रद्धालु उपस्थित रहे। मंदिर दर्शन के उपरांत, नीलकंठ महादेव मंदिर परिसर में महिला परिषद द्वारा पूर्व मंत्री शकुंतला रावत का विशेष स्वागत और सम्मान किया गया।
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    राजस्थान की पूर्व देवस्थान मंत्री शकुंतला रावत ने मंगलवार को कुशलगढ़ में नव-निर्मित एवं भव्य राम मंदिर पहुंचकर भगवान श्रीराम के दर्शन किए। 150 वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक राम मंदिर के नव-निर्माण और सौंदर्यीकरण के बाद उसके भव्य स्वरूप को देखकर शकुंतला रावत ने अत्यधिक प्रसन्नता व्यक्त की। इस अवसर पर राम मंदिर निर्माण समिति ने उनका और क्षेत्रीय विधायक रमीला खड़िया का माल्यार्पण एवं दुपट्टा ओढ़ाकर भव्य स्वागत-अभिनंदन किया।

कार्यक्रम का संचालन कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष रजनीकांत खाब्या ने किया। अपने संबोधन में शकुंतला रावत ने मंदिरों और तीर्थ स्थलों को हमारी संस्कृति, परंपरा एवं आस्था के महत्वपूर्ण केंद्र बताया, साथ ही धार्मिक धरोहरों के संरक्षण और विकास में सरकार की भूमिका को भी महत्वपूर्ण रेखांकित किया। विधायक रमीला खड़िया ने जानकारी दी कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और तत्कालीन देवस्थान मंत्री शकुंतला रावत के प्रयासों से राम मंदिर और मंगलेश्वर तीर्थ के विकास के लिए कुल 5 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे, जिससे क्षेत्र को एक नई धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान मिली है।

राम मंदिर निर्माण समिति के संरक्षक कैलाश राव बारोट ने इस अवसर पर सभी सहयोगियों, जनप्रतिनिधियों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में मुकेश अग्रवाल, भरत कुमावत, सुधीर स्वर्णकार, हरेंद्र पाठक, हेमेंद्र पांडिया, तिलोत्तमा पांडिया, राघवेश चरपोटा, विजय सिंह खड़िया, विजय भाई मइड़ा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, कांग्रेस पदाधिकारी और श्रद्धालु उपस्थित रहे। मंदिर दर्शन के उपरांत, नीलकंठ महादेव मंदिर परिसर में महिला परिषद द्वारा पूर्व मंत्री शकुंतला रावत का विशेष स्वागत और सम्मान किया गया।
    user_गाण्डीव न्यूज नेटवर्क
    गाण्डीव न्यूज नेटवर्क
    बांसवाड़ा, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    13 hrs ago
  • राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के अरनोद में ई-रवन्ना सेवा के बंद हो जाने के कारण रेड ओकर खनन का कारोबार पूरी तरह से ठप पड़ गया है। इस समस्या से परेशान खनन कारोबार से जुड़े व्यापारियों ने अपनी शिकायत दर्ज कराते हुए उपखंड अधिकारी (एसडीएम) को एक ज्ञापन सौंपा है।
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    राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के अरनोद में ई-रवन्ना सेवा के बंद हो जाने के कारण रेड ओकर खनन का कारोबार पूरी तरह से ठप पड़ गया है। इस समस्या से परेशान खनन कारोबार से जुड़े व्यापारियों ने अपनी शिकायत दर्ज कराते हुए उपखंड अधिकारी (एसडीएम) को एक ज्ञापन सौंपा है।
    user_Baba
    Baba
    अरनोद, प्रतापगढ़, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • देश में एक बड़े मानव तस्करी नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसका विस्तार लखनऊ से लेकर राजस्थान तक फैला हुआ है। इस नेटवर्क से संबंधित एक कार्रवाई में, दो नाबालिग बहनों को राजस्थान के कोटा शहर से सफलतापूर्वक बरामद किया गया है।
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    देश में एक बड़े मानव तस्करी नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसका विस्तार लखनऊ से लेकर राजस्थान तक फैला हुआ है। इस नेटवर्क से संबंधित एक कार्रवाई में, दो नाबालिग बहनों को राजस्थान के कोटा शहर से सफलतापूर्वक बरामद किया गया है।
    user_Shamshuddin Sheikh
    Shamshuddin Sheikh
    प्रतापगढ़, प्रतापगढ़, राजस्थान•
    20 hrs ago
  • राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में मानसून से पहले 375 जर्जर आंगनबाड़ी केंद्रों को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया गया है। इन केंद्रों के खस्ताहाल होने के कारण मासूम बच्चों की जान को खतरा बताया जा रहा है, और इन्हें खंडहर में तब्दील हो चुके भवनों के रूप में चिन्हित किया गया था। जिला कलेक्टर डॉ. इंद्रजीत सिंह यादव ने महिला एवं बाल विकास विभाग की उपनिदेशक को इन्हें ध्वस्त करने के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद सार्वजनिक निर्माण विभाग इन वर्षों पुराने खतरनाक भवनों को गिराएगा। इसमें कुशलगढ़ ब्लॉक के 43 आंगनबाड़ी भवन भी शामिल हैं। ध्वस्तिकरण प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है, जिसकी अध्यक्षता उपखंड अधिकारी करेंगे और सीडीपीओ तथा पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता इसके सदस्य होंगे। ध्वस्त करते समय जन-धन हानि न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। हालांकि, इसी जिले के कुशलगढ़ उपखंड क्षेत्र के खेड़ा धरती घाटा क्षेत्र की ग्राम पंचायत रुपगढ़ में स्थित सातलिया की टोडी का आंगनबाड़ी केंद्र पिछले सात वर्षों से अधूरा पड़ा है। इसे पूर्व सरपंच द्वारा पूरा बनाया जाना था, लेकिन समाचार लिखे जाने तक यह केंद्र अधूरा ही है। इस पर जिला प्रशासन, एसडीएम और महिला एवं बाल विकास विभाग पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इन सात सालों में यह अधूरा पड़ा आंगनबाड़ी भवन उनकी नज़र में क्यों नहीं आया। अब देखना यह होगा कि इस बार सातलिया की टोडी के इस अधूरे आंगनबाड़ी केंद्र को पूरा करने और उस पर जिला प्रशासन ध्यान देगा या नहीं, यह तो वक्त ही बताएगा।
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    राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में मानसून से पहले 375 जर्जर आंगनबाड़ी केंद्रों को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया गया है। इन केंद्रों के खस्ताहाल होने के कारण मासूम बच्चों की जान को खतरा बताया जा रहा है, और इन्हें खंडहर में तब्दील हो चुके भवनों के रूप में चिन्हित किया गया था। जिला कलेक्टर डॉ. इंद्रजीत सिंह यादव ने महिला एवं बाल विकास विभाग की उपनिदेशक को इन्हें ध्वस्त करने के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद सार्वजनिक निर्माण विभाग इन वर्षों पुराने खतरनाक भवनों को गिराएगा। इसमें कुशलगढ़ ब्लॉक के 43 आंगनबाड़ी भवन भी शामिल हैं। ध्वस्तिकरण प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है, जिसकी अध्यक्षता उपखंड अधिकारी करेंगे और सीडीपीओ तथा पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता इसके सदस्य होंगे। ध्वस्त करते समय जन-धन हानि न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा।

हालांकि, इसी जिले के कुशलगढ़ उपखंड क्षेत्र के खेड़ा धरती घाटा क्षेत्र की ग्राम पंचायत रुपगढ़ में स्थित सातलिया की टोडी का आंगनबाड़ी केंद्र पिछले सात वर्षों से अधूरा पड़ा है। इसे पूर्व सरपंच द्वारा पूरा बनाया जाना था, लेकिन समाचार लिखे जाने तक यह केंद्र अधूरा ही है। इस पर जिला प्रशासन, एसडीएम और महिला एवं बाल विकास विभाग पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इन सात सालों में यह अधूरा पड़ा आंगनबाड़ी भवन उनकी नज़र में क्यों नहीं आया। अब देखना यह होगा कि इस बार सातलिया की टोडी के इस अधूरे आंगनबाड़ी केंद्र को पूरा करने और उस पर जिला प्रशासन ध्यान देगा या नहीं, यह तो वक्त ही बताएगा।
    user_Dharmendra Soni
    Dharmendra Soni
    कुशलगढ़, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    9 hrs ago
  • मंगलवार को डूंगरपुर जिले में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान ने सफलतापूर्वक 10 वर्ष पूरे किए, जिसके उपलक्ष्य में जिलेभर के समस्त स्वास्थ्य संस्थानों पर उत्सव जैसा माहौल रहा। इस ऐतिहासिक पड़ाव के तहत सैकड़ों गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को विशेष जांच, परामर्श और उपचार सेवाओं का सीधा लाभ प्रदान किया गया। सुबह से ही स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसवपूर्व जांचों के लिए लाभार्थियों की भारी भीड़ देखी गई। इस दौरान हीमोग्लोबिन की कमी से ग्रसित महिलाओं को विशेष जांच के बाद आवश्यकतानुसार एफसीएम इंजेक्शन लगाए गए, वहीं पात्र महिलाओं को 'मां वाउचर योजना' के तहत निःशुल्क सोनोग्राफी की सुविधा भी मुहैया कराई गई। अभियान के तहत दी जा रही सुविधाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए आरसीएचओ डॉ. लोकेश कुमार परमार ने विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। डॉ. परमार ने ओबरी सीएचसी, आंतरी पीएचसी, बिलिया बडगामा और बरबोदनियां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने वहां मौजूद गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों से सीधा संवाद कर चिकित्सा सेवाओं पर फीडबैक लिया तथा केंद्रों पर उपलब्ध सुविधाओं पर संतोष व्यक्त किया। निरीक्षण के दौरान आरसीएचओ ने 'मां वाउचर योजना' के तहत जारी निःशुल्क सोनोग्राफी वाउचर्स की भी समीक्षा की और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि निर्धारित मानदंडों के अनुसार हर पात्र लाभार्थी तक यह वाउचर अनिवार्य रूप से पहुंचना चाहिए। यह अभियान वर्ष 2016 में शुरू हुआ था, जिसका मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। आज इसी उद्देश्य के तहत जिले में सैकड़ों महिलाओं को निःशुल्क दवाइयां, जांच और उचित पोषण की समझाइश देकर लाभान्वित किया गया।
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    मंगलवार को डूंगरपुर जिले में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान ने सफलतापूर्वक 10 वर्ष पूरे किए, जिसके उपलक्ष्य में जिलेभर के समस्त स्वास्थ्य संस्थानों पर उत्सव जैसा माहौल रहा। इस ऐतिहासिक पड़ाव के तहत सैकड़ों गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को विशेष जांच, परामर्श और उपचार सेवाओं का सीधा लाभ प्रदान किया गया।

सुबह से ही स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसवपूर्व जांचों के लिए लाभार्थियों की भारी भीड़ देखी गई। इस दौरान हीमोग्लोबिन की कमी से ग्रसित महिलाओं को विशेष जांच के बाद आवश्यकतानुसार एफसीएम इंजेक्शन लगाए गए, वहीं पात्र महिलाओं को 'मां वाउचर योजना' के तहत निःशुल्क सोनोग्राफी की सुविधा भी मुहैया कराई गई। अभियान के तहत दी जा रही सुविधाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए आरसीएचओ डॉ. लोकेश कुमार परमार ने विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। डॉ. परमार ने ओबरी सीएचसी, आंतरी पीएचसी, बिलिया बडगामा और बरबोदनियां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

उन्होंने वहां मौजूद गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों से सीधा संवाद कर चिकित्सा सेवाओं पर फीडबैक लिया तथा केंद्रों पर उपलब्ध सुविधाओं पर संतोष व्यक्त किया। निरीक्षण के दौरान आरसीएचओ ने 'मां वाउचर योजना' के तहत जारी निःशुल्क सोनोग्राफी वाउचर्स की भी समीक्षा की और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि निर्धारित मानदंडों के अनुसार हर पात्र लाभार्थी तक यह वाउचर अनिवार्य रूप से पहुंचना चाहिए। यह अभियान वर्ष 2016 में शुरू हुआ था, जिसका मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। आज इसी उद्देश्य के तहत जिले में सैकड़ों महिलाओं को निःशुल्क दवाइयां, जांच और उचित पोषण की समझाइश देकर लाभान्वित किया गया।
    user_Santosh Vyas
    Santosh Vyas
    Court reporter डूंगरपुर, डूंगरपुर, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद (रेसा) ने शिक्षा विभाग में व्याप्त प्रशासनिक विसंगतियों, पदोन्नति के सीमित अवसरों और शिक्षकों-प्रधानाचार्यों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। परिषद के आह्वान पर, बुधवार को सीमलवाड़ा ब्लॉक इकाई ने मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री के नाम 22 सूत्रीय मांग-पत्र उपखंड अधिकारी को सौंपते हुए शीघ्र समाधान की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशभर का शिक्षा सेवा संवर्ग आंदोलन के लिए बाध्य होगा। रेसा पदाधिकारियों ने बताया कि राज्य का सबसे बड़ा विभाग होने के बावजूद शिक्षा विभाग के प्रशासनिक ढांचे में समय के अनुकूल सुधार नहीं किए गए हैं, जिसके कारण विद्यालयों और शिक्षा अधिकारियों को अनेक प्रशासनिक कठिनाइयाँ झेलनी पड़ रही हैं। संगठन का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था शिक्षा प्रशासन को कमजोर कर रही है और इससे शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। ज्ञापन में प्रमुख रूप से प्रधानाचार्यों के पदोन्नति अवसरों का मुद्दा उठाया गया है। परिषद ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में लगभग 19 हजार प्रधानाचार्य कार्यरत हैं, जबकि उनके ऊपर के प्रशासनिक पदों की संख्या अत्यंत सीमित है, जैसे जिला शिक्षा अधिकारी के मात्र 534, उपनिदेशक के 67, संयुक्त निदेशक के 18 और अतिरिक्त निदेशक के केवल तीन पद स्वीकृत हैं। ऐसे में, अधिकांश प्रधानाचार्य पूरी सेवा अवधि में पदोन्नति से वंचित रह जाते हैं। परिषद ने मांग की कि प्रधानाचार्य एवं जिला शिक्षा अधिकारी के बीच एक नया पदोन्नति पद तत्काल सृजित किया जाए। संगठन का कहना है कि एसीबीईओ, एडीईओ, सहायक निदेशक, एपीसी, वरिष्ठ व्याख्याता तथा नोडल एवं संकुल विद्यालयों में कार्यरत पदों का उन्नयन कर नए पदों का सृजन किया जा सकता है, जिससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार भी नहीं पड़ेगा। रेसा ने वर्ष 2026-27 की लंबित विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) बैठकों को शीघ्र आयोजित करने की मांग की है। इसके साथ ही, जिला शिक्षा अधिकारी से लेकर अतिरिक्त निदेशक स्तर तक नए पदों के सृजन और कैडर पुनर्गठन की आवश्यकता बताई गई, क्योंकि संगठन का मानना है कि वर्तमान प्रशासनिक ढाँचा विभाग की बढ़ती आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि राज्य के नवगठित आठ जिलों के गठन को लगभग तीन वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन वहां अभी तक मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी (सीडीईओ), अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक (एडीपीसी) तथा डाइट कार्यालयों की स्थापना नहीं हो सकी है, जिससे शिक्षा प्रशासन प्रभावित हो रहा है। परिषद ने इन कार्यालयों की तत्काल स्वीकृति और पदस्थापन की मांग की। वहीं, परिषद ने कहा कि एक-एक प्रधानाचार्य को पीईईओ एवं यूसीईईओ के रूप में पाँच से तीस विद्यालयों तक के प्रशासनिक कार्यों, वेतन भुगतान और पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है, लेकिन इतने अतिरिक्त कार्य के बावजूद कोई विशेष आर्थिक लाभ नहीं दिया जा रहा। संगठन ने इस अतिरिक्त जिम्मेदारी के बदले मूल वेतन का 10 प्रतिशत विशेष भत्ता देने की मांग की तथा चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर पीईईओ व्यवस्था का बहिष्कार किया जाएगा। रेसा ने शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को शिक्षा के अतिरिक्त गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति दिलाने की मांग भी उठाई है। संगठन का कहना है कि जनगणना और चुनाव जैसे आवश्यक कार्यों को छोड़कर शिक्षकों को अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में नहीं लगाया जाना चाहिए। साथ ही, बार-बार आयोजित होने वाली वीडियो कॉन्फ्रेंस, रैलियों, चित्रकला एवं निबंध प्रतियोगिताओं के नाम पर जारी आदेशों पर भी रोक लगाने की मांग की गई। परिषद ने विद्यालयों में निर्माण कार्य, निविदा प्रक्रिया, कार्यादेश तथा भवन सुरक्षा प्रमाण-पत्र जैसी तकनीकी जिम्मेदारियां प्रधानाचार्यों से हटाकर एडीपीसी कार्यालय के तकनीकी विशेषज्ञों को सौंपने की मांग की, क्योंकि संगठन का कहना है कि इन कार्यों के कारण शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं। ज्ञापन में बिना प्रारंभिक जांच के प्रधानाचार्यों को एपीओ अथवा निलंबित किए जाने की कार्रवाई पर भी चिंता जताई गई है। परिषद ने मांग की कि किसी भी शिकायत पर उचित जांच के बाद ही कार्रवाई की जाए, ताकि अधिकारियों का मनोबल बना रहे। अंत में, रेसा ने शिक्षा विभाग सीधे विद्यार्थियों, शिक्षकों और समाज के भविष्य से जुड़ा होने के कारण विभागीय नीतियों और प्रशासनिक निर्णयों में अनुभवी शिक्षा अधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया, यह मानते हुए कि इससे शिक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी, जवाबदेह और परिणामोन्मुखी बन सकेगी। ज्ञापन सौंपने के दौरान रेसा ब्लॉक समन्वयक प्राचार्य धनपाल भोई, विनोद पाटीदार, अभिनंदन सिंह, नागेंद्र सिंह झाला, महेंद्र कुमार लबाना, नरवरलाल लबाना, मोहम्मद इशाक, राजेंद्र सिंह चौहान, हरिशचंद्र सिंह सहित परिषद के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
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    राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद (रेसा) ने शिक्षा विभाग में व्याप्त प्रशासनिक विसंगतियों, पदोन्नति के सीमित अवसरों और शिक्षकों-प्रधानाचार्यों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। परिषद के आह्वान पर, बुधवार को सीमलवाड़ा ब्लॉक इकाई ने मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री के नाम 22 सूत्रीय मांग-पत्र उपखंड अधिकारी को सौंपते हुए शीघ्र समाधान की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशभर का शिक्षा सेवा संवर्ग आंदोलन के लिए बाध्य होगा।

रेसा पदाधिकारियों ने बताया कि राज्य का सबसे बड़ा विभाग होने के बावजूद शिक्षा विभाग के प्रशासनिक ढांचे में समय के अनुकूल सुधार नहीं किए गए हैं, जिसके कारण विद्यालयों और शिक्षा अधिकारियों को अनेक प्रशासनिक कठिनाइयाँ झेलनी पड़ रही हैं। संगठन का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था शिक्षा प्रशासन को कमजोर कर रही है और इससे शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। ज्ञापन में प्रमुख रूप से प्रधानाचार्यों के पदोन्नति अवसरों का मुद्दा उठाया गया है। परिषद ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में लगभग 19 हजार प्रधानाचार्य कार्यरत हैं, जबकि उनके ऊपर के प्रशासनिक पदों की संख्या अत्यंत सीमित है, जैसे जिला शिक्षा अधिकारी के मात्र 534, उपनिदेशक के 67, संयुक्त निदेशक के 18 और अतिरिक्त निदेशक के केवल तीन पद स्वीकृत हैं। ऐसे में, अधिकांश प्रधानाचार्य पूरी सेवा अवधि में पदोन्नति से वंचित रह जाते हैं। परिषद ने मांग की कि प्रधानाचार्य एवं जिला शिक्षा अधिकारी के बीच एक नया पदोन्नति पद तत्काल सृजित किया जाए। संगठन का कहना है कि एसीबीईओ, एडीईओ, सहायक निदेशक, एपीसी, वरिष्ठ व्याख्याता तथा नोडल एवं संकुल विद्यालयों में कार्यरत पदों का उन्नयन कर नए पदों का सृजन किया जा सकता है, जिससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार भी नहीं पड़ेगा।

रेसा ने वर्ष 2026-27 की लंबित विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) बैठकों को शीघ्र आयोजित करने की मांग की है। इसके साथ ही, जिला शिक्षा अधिकारी से लेकर अतिरिक्त निदेशक स्तर तक नए पदों के सृजन और कैडर पुनर्गठन की आवश्यकता बताई गई, क्योंकि संगठन का मानना है कि वर्तमान प्रशासनिक ढाँचा विभाग की बढ़ती आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि राज्य के नवगठित आठ जिलों के गठन को लगभग तीन वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन वहां अभी तक मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी (सीडीईओ), अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक (एडीपीसी) तथा डाइट कार्यालयों की स्थापना नहीं हो सकी है, जिससे शिक्षा प्रशासन प्रभावित हो रहा है। परिषद ने इन कार्यालयों की तत्काल स्वीकृति और पदस्थापन की मांग की। वहीं, परिषद ने कहा कि एक-एक प्रधानाचार्य को पीईईओ एवं यूसीईईओ के रूप में पाँच से तीस विद्यालयों तक के प्रशासनिक कार्यों, वेतन भुगतान और पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है, लेकिन इतने अतिरिक्त कार्य के बावजूद कोई विशेष आर्थिक लाभ नहीं दिया जा रहा। संगठन ने इस अतिरिक्त जिम्मेदारी के बदले मूल वेतन का 10 प्रतिशत विशेष भत्ता देने की मांग की तथा चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर पीईईओ व्यवस्था का बहिष्कार किया जाएगा।

रेसा ने शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को शिक्षा के अतिरिक्त गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति दिलाने की मांग भी उठाई है। संगठन का कहना है कि जनगणना और चुनाव जैसे आवश्यक कार्यों को छोड़कर शिक्षकों को अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में नहीं लगाया जाना चाहिए। साथ ही, बार-बार आयोजित होने वाली वीडियो कॉन्फ्रेंस, रैलियों, चित्रकला एवं निबंध प्रतियोगिताओं के नाम पर जारी आदेशों पर भी रोक लगाने की मांग की गई। परिषद ने विद्यालयों में निर्माण कार्य, निविदा प्रक्रिया, कार्यादेश तथा भवन सुरक्षा प्रमाण-पत्र जैसी तकनीकी जिम्मेदारियां प्रधानाचार्यों से हटाकर एडीपीसी कार्यालय के तकनीकी विशेषज्ञों को सौंपने की मांग की, क्योंकि संगठन का कहना है कि इन कार्यों के कारण शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं। ज्ञापन में बिना प्रारंभिक जांच के प्रधानाचार्यों को एपीओ अथवा निलंबित किए जाने की कार्रवाई पर भी चिंता जताई गई है। परिषद ने मांग की कि किसी भी शिकायत पर उचित जांच के बाद ही कार्रवाई की जाए, ताकि अधिकारियों का मनोबल बना रहे। अंत में, रेसा ने शिक्षा विभाग सीधे विद्यार्थियों, शिक्षकों और समाज के भविष्य से जुड़ा होने के कारण विभागीय नीतियों और प्रशासनिक निर्णयों में अनुभवी शिक्षा अधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया, यह मानते हुए कि इससे शिक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी, जवाबदेह और परिणामोन्मुखी बन सकेगी। ज्ञापन सौंपने के दौरान रेसा ब्लॉक समन्वयक प्राचार्य धनपाल भोई, विनोद पाटीदार, अभिनंदन सिंह, नागेंद्र सिंह झाला, महेंद्र कुमार लबाना, नरवरलाल लबाना, मोहम्मद इशाक, राजेंद्र सिंह चौहान, हरिशचंद्र सिंह सहित परिषद के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
    user_Gunwant kalal
    Gunwant kalal
    Local News Reporter सीमलवाड़ा, डूंगरपुर, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • कुशलगढ़ में श्वेताम्बर जैन मूर्ति पूजक श्री संघ द्वारा हिरन नदी के बावलिया खाल तट पर स्थित यतीजी के बगीचे में भव्य ध्वजारोहण समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम श्री नरपति चन्द्र सूरिजी महाराज साहेब और उनके शिष्य श्री मोतीचंद्र सूरिजी महाराज साहेब की समाधियों के साथ-साथ अधिष्ठायक देव श्री बटुक भैरव नाथ जी के मंदिर पर हुआ। जैनाचार्य श्री ऋषभ विजय जी महाराज साहेब के शिष्य अष्टम वर्षीतप आराधक श्री पीयूषचन्द्र विजय जी म.सा. एवं युवा प्रवचनकार मधुर भाषी श्री रजत चन्द्र विजयजी म.सा. की पावन निश्रा में, मूर्ति पूजक श्री संघ के श्रद्धालु केशरियानाथ जैन मंदिर से तीन धर्मध्वजाएं लेकर ढोल-धमाकों के साथ यतीजी के बगीचे पहुंचे थे। मंत्रोच्चार के बीच, श्री नरपति चन्द्र सूरिजी महाराज साहेब की समाधि पर संघवी कमलेश कावड़िया, दीपेश कावड़िया, नितेश कावड़िया और दिव्य कावड़िया परिवार ने ध्वजा चढ़ाई। वहीं, श्री मोतीचंद्र सूरिजी महाराज साहेब की समाधि पर महावीर कुमार एवं जिनेंद्र सेठिया द्वारा ध्वजारोहण किया गया। श्री बटुक भैरव नाथ जी मंदिर पर अभय कुमार, आशीष कुमार, कमल कुमार एवं बाबूलाल चोपड़ा परिवार ने ध्वज फहराया। दोपहर में, मुनि श्री पीयूष चन्द्र विजय जी म.सा. ने श्री संघ को महामंगलिक सुनाई। इस अवसर पर जैन समाज अध्यक्ष कमलेश कावड़िया, परिषद अध्यक्ष पंकज लुणावत, जयंतीलाल चंडालिया, पारस मेहता, अशोक श्रीमार, प्रकाश चंडालिया, चंद्रकांत मेहता, जिनेंद्र सेठिया, सुनील धारीवाल, मुकेश लुणावत, अनिल नहाटा, पारस सेठिया, जयंतीलाल, भाजपा विस्तारक हितेंद्र सेठिया, संजय नहाटा सहित बड़ी संख्या में समाजजन और महिलाएं उपस्थित रहीं। इस आयोजन से यतीजी के बगीचे में श्रद्धा और भक्ति का एक भव्य संगम देखने को मिला।
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    कुशलगढ़ में श्वेताम्बर जैन मूर्ति पूजक श्री संघ द्वारा हिरन नदी के बावलिया खाल तट पर स्थित यतीजी के बगीचे में भव्य ध्वजारोहण समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम श्री नरपति चन्द्र सूरिजी महाराज साहेब और उनके शिष्य श्री मोतीचंद्र सूरिजी महाराज साहेब की समाधियों के साथ-साथ अधिष्ठायक देव श्री बटुक भैरव नाथ जी के मंदिर पर हुआ। जैनाचार्य श्री ऋषभ विजय जी महाराज साहेब के शिष्य अष्टम वर्षीतप आराधक श्री पीयूषचन्द्र विजय जी म.सा. एवं युवा प्रवचनकार मधुर भाषी श्री रजत चन्द्र विजयजी म.सा. की पावन निश्रा में, मूर्ति पूजक श्री संघ के श्रद्धालु केशरियानाथ जैन मंदिर से तीन धर्मध्वजाएं लेकर ढोल-धमाकों के साथ यतीजी के बगीचे पहुंचे थे।

मंत्रोच्चार के बीच, श्री नरपति चन्द्र सूरिजी महाराज साहेब की समाधि पर संघवी कमलेश कावड़िया, दीपेश कावड़िया, नितेश कावड़िया और दिव्य कावड़िया परिवार ने ध्वजा चढ़ाई। वहीं, श्री मोतीचंद्र सूरिजी महाराज साहेब की समाधि पर महावीर कुमार एवं जिनेंद्र सेठिया द्वारा ध्वजारोहण किया गया। श्री बटुक भैरव नाथ जी मंदिर पर अभय कुमार, आशीष कुमार, कमल कुमार एवं बाबूलाल चोपड़ा परिवार ने ध्वज फहराया।

दोपहर में, मुनि श्री पीयूष चन्द्र विजय जी म.सा. ने श्री संघ को महामंगलिक सुनाई। इस अवसर पर जैन समाज अध्यक्ष कमलेश कावड़िया, परिषद अध्यक्ष पंकज लुणावत, जयंतीलाल चंडालिया, पारस मेहता, अशोक श्रीमार, प्रकाश चंडालिया, चंद्रकांत मेहता, जिनेंद्र सेठिया, सुनील धारीवाल, मुकेश लुणावत, अनिल नहाटा, पारस सेठिया, जयंतीलाल, भाजपा विस्तारक हितेंद्र सेठिया, संजय नहाटा सहित बड़ी संख्या में समाजजन और महिलाएं उपस्थित रहीं। इस आयोजन से यतीजी के बगीचे में श्रद्धा और भक्ति का एक भव्य संगम देखने को मिला।
    user_गाण्डीव न्यूज नेटवर्क
    गाण्डीव न्यूज नेटवर्क
    बांसवाड़ा, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    19 hrs ago
  • सरकारी जमीन पर हो रहे अवैध खनन के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया है। इस अभियान के तहत, अवैध गतिविधियों में संलिप्त चार ट्रैक्टर, एक एक्सकेवेटर और एक कार को डिटेन किया गया है।
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    सरकारी जमीन पर हो रहे अवैध खनन के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया है। इस अभियान के तहत, अवैध गतिविधियों में संलिप्त चार ट्रैक्टर, एक एक्सकेवेटर और एक कार को डिटेन किया गया है।
    user_Baba
    Baba
    अरनोद, प्रतापगढ़, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • बांसवाड़ा में भारत आदिवासी पार्टी (BAP) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा आदिवासी समाज के लिए 'वनवासी' शब्द के इस्तेमाल पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। BAP जिलाध्यक्ष प्रभुलाल बुज के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने एक जोरदार प्रदर्शन किया, जिसमें पुतला दहन भी शामिल था। इसके साथ ही, कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति और केंद्रीय गृह मंत्री के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने यह स्पष्ट मांग रखी कि अनुसूचित जनजाति समुदाय के लिए 'वनवासी' शब्द का नहीं, बल्कि 'आदिवासी' शब्द का ही उपयोग किया जाए। उनका तर्क है कि आदिवासी समाज अपनी पहचान 'आदिवासी' के रूप में ही स्वीकार करता है और भारतीय संविधान में भी 'वनवासी' शब्द का कोई उल्लेख नहीं है। BAP नेताओं ने इस मुद्दे को आदिवासी समाज की पहचान, सम्मान और अधिकारों से जुड़ा एक गंभीर विषय बताया, और सभी सरकारी दस्तावेजों तथा कार्यक्रमों में 'आदिवासी' शब्द के अनिवार्य उपयोग की मांग की।
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    बांसवाड़ा में भारत आदिवासी पार्टी (BAP) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा आदिवासी समाज के लिए 'वनवासी' शब्द के इस्तेमाल पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। BAP जिलाध्यक्ष प्रभुलाल बुज के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने एक जोरदार प्रदर्शन किया, जिसमें पुतला दहन भी शामिल था। इसके साथ ही, कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति और केंद्रीय गृह मंत्री के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा।

प्रदर्शनकारियों ने यह स्पष्ट मांग रखी कि अनुसूचित जनजाति समुदाय के लिए 'वनवासी' शब्द का नहीं, बल्कि 'आदिवासी' शब्द का ही उपयोग किया जाए। उनका तर्क है कि आदिवासी समाज अपनी पहचान 'आदिवासी' के रूप में ही स्वीकार करता है और भारतीय संविधान में भी 'वनवासी' शब्द का कोई उल्लेख नहीं है। BAP नेताओं ने इस मुद्दे को आदिवासी समाज की पहचान, सम्मान और अधिकारों से जुड़ा एक गंभीर विषय बताया, और सभी सरकारी दस्तावेजों तथा कार्यक्रमों में 'आदिवासी' शब्द के अनिवार्य उपयोग की मांग की।
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    OFFICIAL NEWS EXPLAINER
    News Anchor बांसवाड़ा, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    1 hr ago
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