उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जनपद में एक बेहद गंभीर और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। आसपुर देवसरा थाना क्षेत्र के सेतापुर गांव में रास्ते के विवाद को लेकर हुए जानलेवा हमले में गंभीर रूप से घायल रामआसरे की ६ जून को प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू (SRN) अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है, वहीं स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, मार्च महीने में विपक्षी दल द्वारा रामआसरे पर जानलेवा हमला किया गया था, जिसमें उन्हें अत्यंत गंभीर चोटें आई थीं। तभी से उनका लगातार अस्पताल में उपचार चल रहा था। महीनों तक जिंदगी और मौत के बीच लंबी जंग के बाद आखिरकार ६ जून को उन्होंने दम तोड़ दिया। मृतक अपने पीछे पत्नी मालती देवी और एक इकलौती बेटी को छोड़ गए हैं, जिससे परिवार के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। रामआसरे की मौत के बाद उनकी पत्नी मालती देवी ने स्थानीय पुलिस प्रशासन पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। पीड़ित पत्नी का कहना है कि पुलिस ने न्याय दिलाने और आरोपियों पर कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने का प्रयास किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन के भारी दबाव के चलते अत्यंत जल्दबाजी में मृतक का अंतिम संस्कार करा दिया गया, ताकि मामले को तूल पकड़ने से रोका जा सके। इन गंभीर आरोपों के बाद क्षेत्र में पुलिस की भूमिका को लेकर गहरा आक्रोश और चर्चाओं का बाजार गर्म है, हालांकि पुलिस प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। घटना और पुलिसिया रवैये से आहत होकर, मृतक की पत्नी मालती देवी ने जिलाधिकारी (प्रतापगढ़) को ०७/०६/२०२६ को एक लिखित मांग पत्र सौंपा है। इस पत्र के माध्यम से पीड़िता ने अपनी और अपनी बेटी की सुरक्षा व भविष्य को लेकर प्रशासन के सामने ५ सूत्रीय माँगें रखी हैं, जिनमें पीड़िता व उसकी पुत्री के जीवन निर्वाह के लिए ५० लाख रुपये का आर्थिक मुआवजा, परिवार के गुजारे के लिए एक बीघा भूमि आवंटन, पीड़िता और उसकी बेटी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए स्थाई रोजगार की व्यवस्था, पति की हत्या में शामिल सभी अभियुक्तों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई कर उन्हें तत्काल जेल भेजना और पीड़िता व उसकी बेटी की जान-माल की सुरक्षा का पुख्ता प्रबंध शामिल हैं। एक तरफ जहाँ कमाने वाले मुखिया की मौत से परिवार पूरी तरह बिखर चुका है, वहीं दूसरी तरफ पुलिसिया दबाव के आरोपों ने इस मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर गहरा असंतोष है कि महीनों पहले हुए हमले के बावजूद आरोपियों पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई। अब देखना यह है कि प्रतापगढ़ जिला प्रशासन इस पीड़ित परिवार की गुहार पर क्या संज्ञान लेता है और आरोपियों के खिलाफ क्या ठोस कदम उठाता है।
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जनपद में एक बेहद गंभीर और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। आसपुर देवसरा थाना क्षेत्र के सेतापुर गांव में रास्ते के विवाद को लेकर हुए जानलेवा हमले में गंभीर रूप से घायल रामआसरे की ६ जून को प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू (SRN) अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है, वहीं स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, मार्च महीने में विपक्षी दल द्वारा रामआसरे पर जानलेवा हमला किया गया था, जिसमें उन्हें अत्यंत गंभीर चोटें आई थीं। तभी से उनका लगातार अस्पताल में उपचार चल रहा था। महीनों तक जिंदगी और मौत के बीच लंबी जंग के बाद आखिरकार ६ जून को उन्होंने दम तोड़ दिया। मृतक अपने पीछे पत्नी मालती देवी और एक इकलौती बेटी को छोड़ गए हैं, जिससे परिवार के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। रामआसरे की मौत के बाद उनकी पत्नी मालती देवी ने स्थानीय पुलिस प्रशासन पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। पीड़ित पत्नी का कहना है कि पुलिस ने न्याय दिलाने और आरोपियों पर कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने का प्रयास किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन के भारी दबाव के चलते अत्यंत जल्दबाजी में मृतक का अंतिम संस्कार करा दिया गया, ताकि मामले को तूल पकड़ने से रोका जा सके। इन गंभीर आरोपों के बाद क्षेत्र में पुलिस की भूमिका को लेकर गहरा आक्रोश और चर्चाओं का बाजार गर्म है, हालांकि पुलिस प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। घटना और पुलिसिया रवैये से आहत होकर, मृतक की पत्नी मालती देवी ने जिलाधिकारी (प्रतापगढ़) को ०७/०६/२०२६ को एक लिखित मांग पत्र सौंपा है। इस पत्र के माध्यम से पीड़िता ने अपनी और अपनी बेटी की सुरक्षा व भविष्य को लेकर प्रशासन के सामने ५ सूत्रीय माँगें रखी हैं, जिनमें पीड़िता व उसकी पुत्री के जीवन निर्वाह के लिए ५० लाख रुपये का आर्थिक मुआवजा, परिवार के गुजारे के लिए एक बीघा भूमि आवंटन, पीड़िता और उसकी बेटी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए स्थाई रोजगार की व्यवस्था, पति की हत्या में शामिल सभी अभियुक्तों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई कर उन्हें तत्काल जेल भेजना और पीड़िता व उसकी बेटी की जान-माल की सुरक्षा का पुख्ता प्रबंध शामिल हैं। एक तरफ जहाँ कमाने वाले मुखिया की मौत से परिवार पूरी तरह बिखर चुका है, वहीं दूसरी तरफ पुलिसिया दबाव के आरोपों ने इस मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर गहरा असंतोष है कि महीनों पहले हुए हमले के बावजूद आरोपियों पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई। अब देखना यह है कि प्रतापगढ़ जिला प्रशासन इस पीड़ित परिवार की गुहार पर क्या संज्ञान लेता है और आरोपियों के खिलाफ क्या ठोस कदम उठाता है।
- उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए ₹1 लाख के इनामी अपराधी भानु प्रताप सिंह को एक एनकाउंटर में मार गिराया है।1
- उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जनपद के आसपुर देवसरा थाना क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ सेतापुर गांव में रास्ते के विवाद को लेकर हुए जानलेवा हमले में गंभीर रूप से घायल रामआसरे की ६ जून को प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू (SRN) अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है, वहीं स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, मार्च महीने में विपक्षी दल ने रास्ते के विवाद को लेकर रामआसरे पर जानलेवा हमला किया था, जिसमें उन्हें अत्यंत गंभीर चोटें आईं थीं। तभी से उनका लगातार अस्पताल में उपचार चल रहा था। महीनों तक चली जिंदगी और मौत की जंग के बाद आखिरकार ६ जून को उन्होंने दम तोड़ दिया। मृतक अपने पीछे पत्नी मालती देवी और एक इकलौती बेटी को छोड़ गए हैं, जिससे परिवार के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। रामआसरे की मौत के बाद उनकी पत्नी मालती देवी ने स्थानीय पुलिस प्रशासन पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। पीड़ित पत्नी का कहना है कि पुलिस ने न्याय दिलाने और आरोपियों पर कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने का प्रयास किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन के भारी दबाव के चलते अत्यंत जल्दबाजी में मृतक का अंतिम संस्कार करा दिया गया, ताकि मामले को तूल पकड़ने से रोका जा सके। इन गंभीर आरोपों के बाद क्षेत्र में पुलिस की भूमिका को लेकर गहरा आक्रोश और चर्चाओं का बाजार गर्म है, हालांकि अभी तक पुलिस प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। घटना और पुलिसिया रवैये से आहत होकर मृतक की पत्नी मालती देवी ने जिलाधिकारी (प्रतापगढ़) को ०७/०६/२०२६ को अंगूठे का निशान लगा एक लिखित मांग पत्र सौंपा है। इस पत्र के माध्यम से पीड़िता ने अपनी और अपनी बेटी की सुरक्षा व भविष्य को लेकर प्रशासन के सामने पांच सूत्रीय माँगें रखी हैं, जिनमें पीड़िता व उसकी पुत्री के जीवन निर्वाह के लिए ₹५० लाख का आर्थिक मुआवजा, परिवार के गुजारे के लिए एक बीघा भूमि का आवंटन, पीड़िता और उसकी बेटी के लिए स्थाई रोजगार की व्यवस्था, पति की हत्या में शामिल सभी अभियुक्तों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई कर उन्हें तत्काल जेल भेजना, और पीड़िता व उसकी बेटी की जान-माल की सुरक्षा का पुख्ता प्रबंध करना शामिल है। एक तरफ जहाँ कमाने वाले मुखिया की मौत से परिवार पूरी तरह बिखर चुका है, वहीं दूसरी तरफ पुलिसिया दबाव के आरोपों ने इस मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर गहरा असंतोष है कि महीनों पहले हुए हमले के बावजूद आरोपियों पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रतापगढ़ जिला प्रशासन इस पीड़ित परिवार की गुहार पर क्या संज्ञान लेता है और आरोपियों के खिलाफ क्या ठोस कदम उठाता है।1
- अमेठी पुलिस ने जगदीशपुर थाना क्षेत्र में एक बुजुर्ग की हत्या का 24 घंटे के भीतर सनसनीखेज खुलासा किया है। इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि दो बाल अपचारियों को निगरानी में लिया गया है। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल की गई एक पिस्टल और एक ज़िंदा कारतूस भी बरामद किया है। दरअसल, 8 जून को लोढ़ियावां मजरे बगाही निवासी 75 वर्षीय हीरालाल दुबे उर्फ बदलू दुबे की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मृतक के परिजन वीरेंद्र कुमार द्विवेदी की शिकायत पर जगदीशपुर थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया था। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित टीम ने जांच और सर्विलांस की मदद से इस पूरे मामले का पर्दाफाश किया। पूछताछ में सामने आया कि मृतक के पोते ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर इस हत्या की साजिश रची थी। पुलिस जांच में यह भी पता चला कि हीरालाल दुबे को वर्ष 2016-17 में हाईवे निर्माण के लिए ज़मीन अधिग्रहण के बदले लगभग 85 लाख रुपये का मुआवजा मिला था। इसी मुआवजे की रकम और संपत्ति को लेकर परिवार में विवाद चल रहा था, और आरोप है कि मृतक अपने भतीजे वीरेंद्र दुबे को संपत्ति देने की बात कर रहे थे, जिससे उनका पोता नाराज़ था। इसी रंजिश के चलते पोते ने अपने साथी सुशील कुमार यादव उर्फ विनय यादव और एक अन्य बाल अपचारी के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई थी। आरोपियों ने पहले घटनास्थल की रेकी की और फिर 8 जून की सुबह शौच के लिए जा रहे हीरालाल दुबे को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने इस मामले में लोशनापुर, थाना जगदीशपुर निवासी 22 वर्षीय सुशील कुमार यादव उर्फ विनय यादव को गिरफ्तार कर लिया है। नियमानुसार दो बाल अपचारियों को भी निगरानी में लिया गया है। अमेठी के पुलिस अधीक्षक ने हत्या का सफलतापूर्वक अनावरण करने वाली जगदीशपुर थाना पुलिस और स्वाट/सर्विलांस टीम को 25 हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है।1
- अमेठी के जगदीशपुर थाना क्षेत्र के लोढ़ियांवा गांव में उस समय सनसनी फैल गई जब सुबह शौच के लिए गए एक 75 वर्षीय बुजुर्ग की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान हीरालाल द्विवेदी के रूप में हुई है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, जहां से चार खोखा कारतूस बरामद किए गए। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक हीरालाल द्विवेदी के पौत्र जितेंद्र द्विवेदी की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज करते हुए इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।1
- प्रतापगढ़ में 4 जून 2026 की शाम करीब 7 बजे एक व्यवसायी युवक को कथित तौर पर जबरन कार में बैठाकर ले जाने की कोशिश का मामला सामने आया है। दहिलामऊ चाँदमारी निवासी रंजना मिश्रा ने पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया है कि उनके व्यवसायी मित्र शान उर्फ अब्दुल्ला जब स्कूटी से पट्टी जा रहे थे, तब ताला मोड़ के आगे पिपरी खालसा स्थित उर्मिला फिलिंग स्टेशन के पास एर्टिगा कार और कई मोटरसाइकिलों पर सवार लोगों ने उन्हें रोक लिया और जबरन कार में बैठाने का प्रयास किया। शिकायत के अनुसार, हमलावर शान को अपने पेट्रोल पंप पर ले गए, जहां उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें जबरन एक केबिन में बैठाए रखा। शान ने फोन कर रंजना मिश्रा को घटना की जानकारी दी, जिसके बाद रंजना ने तुरंत पुलिस डायल 112 को सूचना दी। जब रंजना मिश्रा, जो कि एक अधिवक्ता भी हैं, मौके पर पहुंचीं, तो उनके साथ भी मारपीट और अभद्रता की गई, साथ ही उनकी चैन, मोबाइल और पर्स छीन लिया गया। पीड़िता ने आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई, अपनी सुरक्षा और न्याय की मांग की है। उन्होंने प्रतापगढ़ के एसपी से निष्पक्ष जांच कर न्याय दिलाने की गुहार लगाई है।4
- प्रतापगढ़ जिले के आसपुर देवसरा थाना क्षेत्र स्थित सेतापुर गांव में रास्ते के एक विवाद ने एक बड़ी घटना का रूप ले लिया है, जिसके परिणामस्वरूप एक व्यक्ति की मौत हो गई। इस विवाद के दौरान हुई मारपीट में घायल हुए रामआसरे का प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल में इलाज चल रहा था, जहां उनकी मौत हो गई। परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि रामआसरे पर मार्च में हमला हुआ था और तब से उनका लगातार इलाज जारी था। अब उनकी मौत के बाद, परिजनों का कहना है कि मामले को दबाने और जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कराने की कोशिश की जा रही है। मृतक की पत्नी ने पुलिस प्रशासन पर सीधे तौर पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसके कारण पूरे क्षेत्र में आक्रोश और तनाव का माहौल व्याप्त है।1
- दिनांक 09.06.2026 को थाना मुसाफिरखाना क्षेत्र में आरक्षी भर्ती परीक्षा देने आई एक महिला अभ्यर्थी अनन्या गलती से अपने निर्धारित परीक्षा केंद्र, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज जामो, के बजाय राजकीय बालिका इंटर कॉलेज मुसाफिरखाना पहुंच गई थीं। इसकी जानकारी प्रभारी निरीक्षक मुसाफिरखाना श्री विवेक कुमार सिंह को मिलने पर उन्होंने तुरंत पीआरवी-5347 को अभ्यर्थी की सहायता के लिए निर्देशित किया। पीआरवी-5347 ने तत्काल मौके पर पहुंचकर बिना कोई समय गंवाए अभ्यर्थी अनन्या को सुरक्षित और समय से पहले उनके सही परीक्षा केंद्र, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज जामो, तक पहुंचाया। समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचने पर अभ्यर्थी अनन्या ने अमेठी पुलिस और यूपी-112 की त्वरित सहायता, संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना करते हुए उनका धन्यवाद व्यक्त किया। पुलिस भर्ती परीक्षा देने आई महिला अभ्यर्थी को यूपी-112 द्वारा समय से पूर्व सही परीक्षा केंद्र पहुंचाकर की गई यह सहायता एक सराहनीय कार्य है।1
- अमेठी जिले के जगदीशपुर में जमीन विवाद से जुड़े एक हत्याकांड के मामले में 75 वर्षीय जगदीश वैष्णव और उनके पोते को सफलतापूर्वक जमानत मिल गई है। दादा-पोते की जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद उन्हें राहत मिली।1
- पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) के मीरपुर में भारी बवाल मचा हुआ है, जहाँ बड़ी संख्या में पाकिस्तान विरोधी प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं। यह आक्रोश पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी के बाद भड़का है, जिसमें बीते कल 26 आम नागरिकों की जान चली गई और 190 लोग घायल हो गए।1