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राजधानी दिल्ली में ड्राइवर समुदाय की एकता की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली है। यहाँ ऑल इंडिया ड्राइवर संघ के हजारों पदाधिकारियों ने एकजुट होकर 'भारत जन चेतना यात्रा' निकाली, जिसने ड्राइवर समुदाय की सामूहिक शक्ति और एकता को प्रदर्शित किया।

3 hrs ago
user_Vinod Rastogi
Vinod Rastogi
चाणक्यपुरी, नई दिल्ली, दिल्ली•
3 hrs ago

राजधानी दिल्ली में ड्राइवर समुदाय की एकता की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली है। यहाँ ऑल इंडिया ड्राइवर संघ के हजारों पदाधिकारियों ने एकजुट होकर 'भारत जन चेतना यात्रा' निकाली, जिसने ड्राइवर समुदाय की सामूहिक शक्ति और एकता को प्रदर्शित किया।

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  • नए सरकारी नियमों के अनुसार, यदि आपके पास रसोई गैस सिलेंडर (Indane, HP और Bharat Gas) के साथ-साथ पाइप वाली प्राकृतिक गैस (PNG) का भी कनेक्शन है, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। सरकार ने 'एक घर, एक गैस कनेक्शन' नियम को सख्ती से लागू करने और पीएनजी नेटवर्क का विस्तार करने के लिए नियमों को कड़ा कर दिया है, जिसके चलते 30 जून से ऐसे दोहरे कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं का एलपीजी कनेक्शन कट सकता है। नए नियमों के मुताबिक, देश में अब कोई भी उपभोक्ता एक साथ एलपीजी सिलेंडर और पीएनजी कनेक्शन दोनों नहीं रख सकता, इसे एक प्रतिबंधित गतिविधि घोषित किया गया है। यदि आपके इलाके में पीएनजी की पाइपलाइन आ चुकी है, तो आपको पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन करना होगा और अपने पुराने एलपीजी सिलेंडर कनेक्शन को बंद करना होगा।
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    नए सरकारी नियमों के अनुसार, यदि आपके पास रसोई गैस सिलेंडर (Indane, HP और Bharat Gas) के साथ-साथ पाइप वाली प्राकृतिक गैस (PNG) का भी कनेक्शन है, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। सरकार ने 'एक घर, एक गैस कनेक्शन' नियम को सख्ती से लागू करने और पीएनजी नेटवर्क का विस्तार करने के लिए नियमों को कड़ा कर दिया है, जिसके चलते 30 जून से ऐसे दोहरे कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं का एलपीजी कनेक्शन कट सकता है।

नए नियमों के मुताबिक, देश में अब कोई भी उपभोक्ता एक साथ एलपीजी सिलेंडर और पीएनजी कनेक्शन दोनों नहीं रख सकता, इसे एक प्रतिबंधित गतिविधि घोषित किया गया है। यदि आपके इलाके में पीएनजी की पाइपलाइन आ चुकी है, तो आपको पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन करना होगा और अपने पुराने एलपीजी सिलेंडर कनेक्शन को बंद करना होगा।
    user_Rekha Panchal
    Rekha Panchal
    Delhi Cantonment, New Delhi•
    57 min ago
  • उत्तराखंड के हरिद्वार में एक परिवार उस समय हैरान रह गया, जब उनके घर की पानी की टंकी में एक-दो नहीं, बल्कि सांप के 27 बच्चे मिले। इस चौंकाने वाली घटना ने सभी को हैरान कर दिया, जिससे घर के लोगों के साथ-साथ आसपास के लोग भी घबरा गए। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम को बुलाया गया, जिसने घंटों चले बचाव अभियान के बाद सभी सांप के बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। यह घटना अब सोशल मीडिया पर खूब चर्चा का विषय बनी हुई है और इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, घर के सदस्यों को पानी की टंकी में कुछ हलचल दिखाई दी थी, जिसके बाद जांच करने पर अंदर बड़ी संख्या में सांप के बच्चे नज़र आए। एक वायरल दावे में यह भी कहा जा रहा है कि कई दिनों से पानी की सप्लाई ठीक न होने के कारण परिवार ने टंकी की जांच की थी, तब उन्हें सांप और उसके बच्चे मिले। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। वन विभाग के कर्मचारियों ने सावधानीपूर्वक एक-एक कर कुल 27 सांप के बच्चों को टंकी से बाहर निकाला। अधिकारियों ने बताया कि इस पूरी घटना में किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और बाद में सभी सांपों को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश और नमी वाले मौसम में सांप अक्सर ठंडी और सुरक्षित जगहों की तलाश में घरों, टंकियों, स्टोर रूम या अन्य छिपे हुए स्थानों में पहुंच जाते हैं, जिसके कारण मानसून के दौरान ऐसी घटनाएं बढ़ जाती हैं। सोशल मीडिया पर लोगों ने इस भयावह दृश्य पर हैरानी जताई है। कई यूजर्स ने कहा कि वे अब पानी की टंकी खोलने से पहले दो बार सोचेंगे, जबकि कुछ लोगों ने वन विभाग की टीम की त्वरित और सुरक्षित बचाव कार्यवाही की सराहना की है, जिसने बिना किसी नुकसान के सभी सांपों को बाहर निकाल लिया।
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    उत्तराखंड के हरिद्वार में एक परिवार उस समय हैरान रह गया, जब उनके घर की पानी की टंकी में एक-दो नहीं, बल्कि सांप के 27 बच्चे मिले। इस चौंकाने वाली घटना ने सभी को हैरान कर दिया, जिससे घर के लोगों के साथ-साथ आसपास के लोग भी घबरा गए। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम को बुलाया गया, जिसने घंटों चले बचाव अभियान के बाद सभी सांप के बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। यह घटना अब सोशल मीडिया पर खूब चर्चा का विषय बनी हुई है और इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, घर के सदस्यों को पानी की टंकी में कुछ हलचल दिखाई दी थी, जिसके बाद जांच करने पर अंदर बड़ी संख्या में सांप के बच्चे नज़र आए। एक वायरल दावे में यह भी कहा जा रहा है कि कई दिनों से पानी की सप्लाई ठीक न होने के कारण परिवार ने टंकी की जांच की थी, तब उन्हें सांप और उसके बच्चे मिले। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

वन विभाग के कर्मचारियों ने सावधानीपूर्वक एक-एक कर कुल 27 सांप के बच्चों को टंकी से बाहर निकाला। अधिकारियों ने बताया कि इस पूरी घटना में किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और बाद में सभी सांपों को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश और नमी वाले मौसम में सांप अक्सर ठंडी और सुरक्षित जगहों की तलाश में घरों, टंकियों, स्टोर रूम या अन्य छिपे हुए स्थानों में पहुंच जाते हैं, जिसके कारण मानसून के दौरान ऐसी घटनाएं बढ़ जाती हैं।

सोशल मीडिया पर लोगों ने इस भयावह दृश्य पर हैरानी जताई है। कई यूजर्स ने कहा कि वे अब पानी की टंकी खोलने से पहले दो बार सोचेंगे, जबकि कुछ लोगों ने वन विभाग की टीम की त्वरित और सुरक्षित बचाव कार्यवाही की सराहना की है, जिसने बिना किसी नुकसान के सभी सांपों को बाहर निकाल लिया।
    user_Mohit Badtiya
    Mohit Badtiya
    Civil Lines, Central Delhi•
    1 hr ago
  • Post by Pohuyy
    1
    Post by Pohuyy
    user_Pohuyy
    Pohuyy
    सिविल लाइन्स, मध्य दिल्ली, दिल्ली•
    2 hrs ago
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में अफगानिस्तान की स्थिति पर हुई चर्चा के दौरान भारत ने पाकिस्तान पर जमकर हमला बोला। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने पाकिस्तान के अफगानिस्तान में घुसकर किए गए हमलों को नरसंहार करार दिया और उस पर अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर आम नागरिकों की हत्या कर रहा है, जिसे भारत ने 'पाखंड का सबसे बड़ा उदाहरण' बताया। भारत के प्रतिनिधि ने इस बात पर जोर दिया कि नरसंहार करने वाला, भले ही उसे सैन्य कार्रवाई का नाम दे, उस पाप से मुक्त नहीं हो जाता। उन्होंने अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि साल 2026 के शुरुआती तीन महीनों में 372 आम नागरिक मारे गए, जिनमें से अधिकतर रमजान के पवित्र महीने में जान गंवा बैठे थे। हरीश ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान के लैंडलॉक देश होने का फायदा उठाते हुए उसके व्यापार मार्गों में बाधाएं डाल रहा है और अफगान सामान पर प्रतिबंध लगाकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों व संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन कर रहा है। इसके विपरीत, भारत ने अफगानिस्तान की मदद के लिए उठाए गए अपने कदमों का भी उल्लेख किया। 2021 के बाद से भारत ने 50 हजार टन गेहूं, 420 टन दवाएं और वैक्सीन, तथा 40 हजार लीटर कीटनाशक अफगानिस्तान भेजे हैं। इस साल अप्रैल में ही बाढ़ राहत के लिए आवश्यक सामग्री और वैक्सीन की खेप काबुल भेजी गई थी। नई दिल्ली मानवीय सहायता के साथ ही अफगानिस्तान के सभी 34 प्रदेशों के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, जहां भारत की करीब 500 से अधिक परियोजनाएं चल रही हैं। इनमें पक्तिका, पक्तिया और खोस्त में मैटरनिटी क्लीनिकों का निर्माण, काबुल में इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ का अपग्रेडेशन, ट्रॉमा सेंटर, ऑन्कोलॉजी सेंटर और 30 बेड के अस्पताल का निर्माण शामिल है। पी. हरीश ने बताया कि भारत, अफगानिस्तान की क्रिकेट टीम की द्विपक्षीय श्रृंखला के लिए मेजबानी भी कर रहा है। भारत ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि अफगान भाई-बहन इससे बेहतर के हकदार हैं।
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    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में अफगानिस्तान की स्थिति पर हुई चर्चा के दौरान भारत ने पाकिस्तान पर जमकर हमला बोला। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने पाकिस्तान के अफगानिस्तान में घुसकर किए गए हमलों को नरसंहार करार दिया और उस पर अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर आम नागरिकों की हत्या कर रहा है, जिसे भारत ने 'पाखंड का सबसे बड़ा उदाहरण' बताया।

भारत के प्रतिनिधि ने इस बात पर जोर दिया कि नरसंहार करने वाला, भले ही उसे सैन्य कार्रवाई का नाम दे, उस पाप से मुक्त नहीं हो जाता। उन्होंने अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि साल 2026 के शुरुआती तीन महीनों में 372 आम नागरिक मारे गए, जिनमें से अधिकतर रमजान के पवित्र महीने में जान गंवा बैठे थे। हरीश ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान के लैंडलॉक देश होने का फायदा उठाते हुए उसके व्यापार मार्गों में बाधाएं डाल रहा है और अफगान सामान पर प्रतिबंध लगाकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों व संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन कर रहा है।

इसके विपरीत, भारत ने अफगानिस्तान की मदद के लिए उठाए गए अपने कदमों का भी उल्लेख किया। 2021 के बाद से भारत ने 50 हजार टन गेहूं, 420 टन दवाएं और वैक्सीन, तथा 40 हजार लीटर कीटनाशक अफगानिस्तान भेजे हैं। इस साल अप्रैल में ही बाढ़ राहत के लिए आवश्यक सामग्री और वैक्सीन की खेप काबुल भेजी गई थी। नई दिल्ली मानवीय सहायता के साथ ही अफगानिस्तान के सभी 34 प्रदेशों के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, जहां भारत की करीब 500 से अधिक परियोजनाएं चल रही हैं। इनमें पक्तिका, पक्तिया और खोस्त में मैटरनिटी क्लीनिकों का निर्माण, काबुल में इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ का अपग्रेडेशन, ट्रॉमा सेंटर, ऑन्कोलॉजी सेंटर और 30 बेड के अस्पताल का निर्माण शामिल है।

पी. हरीश ने बताया कि भारत, अफगानिस्तान की क्रिकेट टीम की द्विपक्षीय श्रृंखला के लिए मेजबानी भी कर रहा है। भारत ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि अफगान भाई-बहन इससे बेहतर के हकदार हैं।
    user_Vipin Singh
    Vipin Singh
    Delhi Cantonment, New Delhi•
    2 hrs ago
  • सोशल मीडिया यूज़र alam_malik143143 ने लोगों से उनके यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक चैनल को फॉलो करने का अनुरोध किया है।
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    सोशल मीडिया यूज़र alam_malik143143 ने लोगों से उनके यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक चैनल को फॉलो करने का अनुरोध किया है।
    user_Nazir Khan
    Nazir Khan
    Artist सिविल लाइन्स, मध्य दिल्ली, दिल्ली•
    2 hrs ago
  • राजधानी दिल्ली में ड्राइवर समुदाय की एकता की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली है। यहाँ ऑल इंडिया ड्राइवर संघ के हजारों पदाधिकारियों ने एकजुट होकर 'भारत जन चेतना यात्रा' निकाली, जिसने ड्राइवर समुदाय की सामूहिक शक्ति और एकता को प्रदर्शित किया।
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    राजधानी दिल्ली में ड्राइवर समुदाय की एकता की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली है। यहाँ ऑल इंडिया ड्राइवर संघ के हजारों पदाधिकारियों ने एकजुट होकर 'भारत जन चेतना यात्रा' निकाली, जिसने ड्राइवर समुदाय की सामूहिक शक्ति और एकता को प्रदर्शित किया।
    user_Vinod Rastogi
    Vinod Rastogi
    चाणक्यपुरी, नई दिल्ली, दिल्ली•
    3 hrs ago
  • आईटीआई बचाव आंदोलन की मुहिम अब और तेज हो गई है, जिसके तहत नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर रोष प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन के माध्यम से कौशल विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं पर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जो इस आंदोलन को एक मुखर रूप दे रहे हैं।
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    आईटीआई बचाव आंदोलन की मुहिम अब और तेज हो गई है, जिसके तहत नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर रोष प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन के माध्यम से कौशल विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं पर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जो इस आंदोलन को एक मुखर रूप दे रहे हैं।
    user_Raaz
    Raaz
    Delhi Cantonment, New Delhi•
    3 hrs ago
  • देश में सरकारी नौकरियों के लिए जारी कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच, जहां अक्सर पीएचडी, इंजीनियरिंग और पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री वाले उम्मीदवार भी कम शैक्षणिक योग्यता वाली नौकरियों के लिए आवेदन करते हैं, सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सर्वोच्च अदालत ने साफ कहा है कि हर नौकरी के लिए ज्यादा पढ़ाई होना ज़रूरी नहीं है। यदि किसी पद के लिए न्यूनतम के साथ-साथ अधिकतम शैक्षणिक योग्यता भी तय की गई है, तो उससे अधिक योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों को नौकरी से बाहर किया जा सकता है। अदालत ने इस व्यवस्था को पूरी तरह वैध और न्यायसंगत माना है। इसका उद्देश्य कम शैक्षणिक योग्यता वाले उम्मीदवारों को रोजगार के उचित अवसर प्रदान करना है। इस फैसले के अनुसार, अगर कोई सरकारी नौकरी 10वीं या 12वीं पास वालों के लिए निकलती है, तो उसके लिए एमए या पीएचडी डिग्री वाले उम्मीदवार अयोग्य घोषित किए जा सकते हैं।
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    देश में सरकारी नौकरियों के लिए जारी कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच, जहां अक्सर पीएचडी, इंजीनियरिंग और पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री वाले उम्मीदवार भी कम शैक्षणिक योग्यता वाली नौकरियों के लिए आवेदन करते हैं, सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सर्वोच्च अदालत ने साफ कहा है कि हर नौकरी के लिए ज्यादा पढ़ाई होना ज़रूरी नहीं है। यदि किसी पद के लिए न्यूनतम के साथ-साथ अधिकतम शैक्षणिक योग्यता भी तय की गई है, तो उससे अधिक योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों को नौकरी से बाहर किया जा सकता है।

अदालत ने इस व्यवस्था को पूरी तरह वैध और न्यायसंगत माना है। इसका उद्देश्य कम शैक्षणिक योग्यता वाले उम्मीदवारों को रोजगार के उचित अवसर प्रदान करना है। इस फैसले के अनुसार, अगर कोई सरकारी नौकरी 10वीं या 12वीं पास वालों के लिए निकलती है, तो उसके लिए एमए या पीएचडी डिग्री वाले उम्मीदवार अयोग्य घोषित किए जा सकते हैं।
    user_Ragini Garg
    Ragini Garg
    Civil Lines, Central Delhi•
    3 hrs ago
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