झारखंड और बिहार की राजनीति के साथ-साथ मजदूर आंदोलनों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले राजेंद्र प्रसाद सिंह को श्रमिक हितों की एक सशक्त आवाज के रूप में याद किया जाता है। उन्होंने लंबे समय तक कांग्रेस और इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) से जुड़कर जनसेवा को अपने राजनीतिक जीवन का केंद्र बनाए रखा। 24 मई को उनकी पुण्यतिथि पर, उनके समर्थक, राजनीतिक सहयोगी और विभिन्न नेता उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके जनकल्याणकारी योगदान को स्मरण करते हैं। उनकी राजनीतिक यात्रा मजदूरों के मसीहा के तौर पर जानी जाती है, जहाँ उन्होंने कोयलांचल क्षेत्र और श्रमिक वर्ग के मुद्दों को लगातार उठाया तथा उनके अधिकारों की जोरदार पैरवी की। बेरमो विधानसभा क्षेत्र से लगातार 6 बार विधायक चुने जाना उनकी लोकप्रियता और क्षेत्रीय पकड़ का प्रमाण है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने बिहार और फिर झारखंड में स्वास्थ्य, वित्त और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण विभागों में मंत्री के रूप में जिम्मेदारियाँ भी निभाईं। राजेंद्र प्रसाद सिंह को उनके सिद्धांत आधारित राजनीति के लिए विशेष रूप से याद किया जाता है। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में संगठन, जनहित और राजनीतिक मूल्यों को हमेशा प्राथमिकता दी और कभी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उनकी विरासत आज भी झारखंड के श्रमिक आंदोलनों और क्षेत्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बनी हुई है।
झारखंड और बिहार की राजनीति के साथ-साथ मजदूर आंदोलनों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले राजेंद्र प्रसाद सिंह को श्रमिक हितों की एक सशक्त आवाज के रूप में याद किया जाता है। उन्होंने लंबे समय तक कांग्रेस और इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) से जुड़कर जनसेवा को अपने राजनीतिक जीवन का केंद्र बनाए रखा। 24 मई को उनकी पुण्यतिथि पर, उनके समर्थक, राजनीतिक सहयोगी और विभिन्न नेता उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके जनकल्याणकारी योगदान को स्मरण करते हैं। उनकी राजनीतिक यात्रा मजदूरों के मसीहा के तौर पर जानी जाती है, जहाँ उन्होंने कोयलांचल क्षेत्र और श्रमिक वर्ग के मुद्दों को लगातार उठाया तथा उनके अधिकारों की जोरदार पैरवी की। बेरमो विधानसभा क्षेत्र से लगातार 6 बार विधायक चुने जाना उनकी लोकप्रियता और क्षेत्रीय पकड़ का प्रमाण है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने बिहार और फिर झारखंड में स्वास्थ्य, वित्त और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण विभागों में मंत्री के रूप में जिम्मेदारियाँ भी निभाईं। राजेंद्र प्रसाद सिंह को उनके सिद्धांत आधारित राजनीति के लिए विशेष रूप से याद किया जाता है। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में संगठन, जनहित और राजनीतिक मूल्यों को हमेशा प्राथमिकता दी और कभी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उनकी विरासत आज भी झारखंड के श्रमिक आंदोलनों और क्षेत्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बनी हुई है।
- पटना के एसएसपी ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दो थानाध्यक्षों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई एक अपराधी के घर पर छापेमारी के दौरान हुई, जहाँ एसएसपी को स्वयं तलाशी देनी पड़ी, जो भारी पड़ गया। छापेमारी के समय परिजनों ने विरोध किया और इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी वायरल हो गया। इस पूरी घटना के बाद पुलिस पर अपराधियों के सामने झुकने का आरोप लगा है, जिससे आम जनता के बीच उसकी छवि धूमिल हुई। इसी गंभीर मामले में पटना के एसएसपी ने दोनों थानाध्यक्षों को निलंबित करने का यह बड़ा कदम उठाया है।1
- स्वच्छ फल्गु, स्वच्छ गयाजी अभियान के बैनर तले आठवें रविवार को महादेव घाट पर एक जनजागरण अभियान चलाया गया। इस पहल का उद्देश्य जनता में जागरूकता फैलाना था।1
- अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के नेतृत्व में 23 मई 2026 को गया कॉलेज, गया में छात्र-छात्राओं ने भारी आक्रोश व्यक्त करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। यह आक्रोश छात्रा नैना के साथ हुई एक घटना को लेकर था, जिसके विरोध में एबीवीपी कार्यकर्ताओं और सैकड़ों छात्रों ने प्राचार्य कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान परिसर में "नैना न्याय दो", "छात्रा सम्मान से समझौता नहीं चलेगा" और "दोषियों पर कार्रवाई करो" जैसे नारों की गूंज सुनाई दी। एबीवीपी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक पीड़ित छात्रा को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा, क्योंकि छात्रों ने कॉलेज प्रशासन पर मामले को दबाने और लीपापोती करने का प्रयास करने का आरोप लगाया। जीबीएम कॉलेज अध्यक्ष वैष्णवी कुमारी ने छात्राओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मसम्मान से किसी भी तरह के समझौते को अस्वीकार्य बताया, साथ ही चेतावनी दी कि यदि कॉलेज प्रशासन ने तत्काल निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की तो छात्र शक्ति सड़क से लेकर विश्वविद्यालय तक उग्र आंदोलन करेगी। वहीं, महानगर मंत्री आदित्य मिश्रा ने कहा कि छात्र हितों की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन एबीवीपी अन्याय और अत्याचार के खिलाफ हमेशा मजबूती से खड़ी रही है और जब तक न्याय नहीं मिलेगा, आंदोलन रुकने वाला नहीं है। प्रदर्शन की गंभीरता को देखते हुए कॉलेज परिसर में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने छात्रों को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन एबीवीपी कार्यकर्ता अपनी मांगों पर अडिग रहे और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रखने की बात कही। इस दौरान छात्र नेताओं और कर्मचारियों के बीच झड़प भी हुई, जिसके बाद डीएसपी मौके पर पहुंचे और छात्र नेताओं को समझाकर शांत कराया। लगातार बढ़ते छात्र आक्रोश और आंदोलन के दबाव के बाद गया कॉलेज प्रशासन को एबीवीपी प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता करनी पड़ी। वार्ता के उपरांत कॉलेज प्रशासन द्वारा एक लिखित आश्वासन जारी किया गया, जिसमें एबीवीपी की प्रमुख मांगों को स्वीकार किया गया। इन आश्वासनों में घटना की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराना, जांच में दोषी पाए गए किसी भी अधिकारी, कर्मचारी या संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध तत्काल सख्त प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना, पीड़ित छात्रा के समुचित उपचार का संपूर्ण खर्च महाविद्यालय प्रशासन द्वारा वहन करना, महाविद्यालय परिसर एवं परीक्षा केंद्रों पर छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाना, तथा आगामी सभी परीक्षाओं में बिहार परीक्षा अधिनियम-1981 एवं मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के दिशा-निर्देशों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करना शामिल था। प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया कि मामले में किसी प्रकार की लापरवाही या लीपापोती नहीं की जाएगी और सभी बिंदुओं पर गंभीरता से अमल किया जाएगा। एबीवीपी गया महानगर ने स्पष्ट कहा है कि परिषद प्रशासन के हर कदम पर नजर रखेगी और यदि जांच में किसी भी प्रकार की ढिलाई, पक्षपात या लीपापोती की गई तो आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।1
- गया में महारानी अहिल्याबाई होल्कर विचार मंच ने उनकी 301वीं जयंती को महोत्सव के रूप में मनाने की तैयारी की है। 31 मई 2026 को होने वाला यह ऐतिहासिक समारोह विशेष रूप से महिलाओं को समर्पित होगा, जिसमें उनकी बड़ी भागीदारी अपेक्षित है।1
- गया जिले के गुरुआ थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक नक्सल कांड के फरार अभियुक्त ब्रह्मदेव पासवान के घर पर न्यायालय के आदेश पर विधिवत कुर्की की कार्रवाई की है। गुरुआ थानाध्यक्ष मनेश कुमार ने रविवार दोपहर 02:23 बजे जानकारी देते हुए बताया कि यह कार्रवाई गुरुआ थाना कांड संख्या 11/98 से संबंधित है। अभियुक्त ब्रह्मदेव पासवान थाना क्षेत्र के कठवारा ग्राम का निवासी है और वह वर्ष 1998 में दर्ज हुए इस नक्सल कांड के बाद से ही लंबे समय से फरार चल रहा था। पुलिस के अनुसार, फरार अभियुक्त ब्रह्मदेव पासवान को कई बार गिरफ्तार करने का प्रयास किया गया था, लेकिन वह लगातार पुलिस की पकड़ से बाहर रहा। इसी के परिणामस्वरूप, न्यायालय से आदेश प्राप्त होने के बाद पुलिस प्रशासन ने उसकी संपत्ति कुर्क करने की यह कार्रवाई की। रविवार को पुलिस टीम गांव पहुंची और दंडाधिकारी की मौजूदगी में कानूनी प्रक्रिया के तहत घर में मौजूद सामानों की सूची बनाकर कुर्की की कार्रवाई पूरी की, जिस दौरान मौके पर स्थानीय लोगों की भीड़ भी जमा हो गई। इस कार्रवाई के बाद इलाके में चर्चा का माहौल बना हुआ है। थानाध्यक्ष मनेश कुमार ने यह भी बताया कि फरार अभियुक्तों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून से बचना संभव नहीं है और लंबे समय से फरार आरोपियों के खिलाफ न्यायालय के निर्देशानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। पुलिस प्रशासन का कहना है कि नक्सल गतिविधियों से जुड़े मामलों में फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए यह अभियान लगातार जारी रहेगा तथा कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर आवश्यक कदम उठाया जाएगा।2
- गया के महादेव घाट पर 'स्वच्छ फल्गु, स्वच्छ गयाजी' अभियान आठवें रविवार भी जारी रहा। इसमें लोगों से फल्गु नदी और घाटों की सफाई के लिए श्रमदान का आह्वान किया गया, जहाँ गंदगी का अंबार लगा है। आयोजकों ने नालों के पानी को शहर से बाहर करने और मरीन ड्राइव बनाने की भी मांग की है।1
- chuha ka dekhe hai1
- कृपया पूरी खबर/टेक्स्ट भेज दीजिए। आपने सिर्फ “▪️पटना से बड़ी खबर” लिखा है — मैं उसे संक्षेप, हेडलाइन, सोशल मीडिया पोस्ट1