उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में, कलवारी थाना क्षेत्र के माझा खुर्द और माझा कला तीलियावा इलाके इन दिनों 'कानून के जंगलराज' का केंद्र बने हुए हैं। सरयू नदी के किनारे स्थित इन गांवों में खनन माफियाओं पर प्रशासनिक संरक्षण और दबंगई के दम पर बड़े पैमाने पर तबाही मचाने का आरोप है। स्थिति यह है कि माफिया अब केवल सरकारी पट्टे की ज़मीन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीणों की निजी खेती की ज़मीनों पर भी कब्ज़ा कर उसे खोखला कर रहे हैं। प्रशासन और खनन विभाग की संदिग्ध चुप्पी ने इस मामले को 'अंधेर नगरी, चौपट राज' जैसी स्थिति में ला दिया है। इस पूरे खेल के मुख्य भुक्तभोगी दिनेश यादव ने साक्ष्यों के साथ बताया कि खनन माफिया दिवाकर सोनकर के गुर्गों ने बिना किसी अनुमति या मुआवज़े के उनकी पुस्तैनी ज़मीन (गाटा संख्या 861 एवं 870) में जेसीबी डालकर बालू निकालना शुरू कर दिया है। दिनेश का दावा है कि पट्टा गाटा संख्या 1164/33 एवं 1164/51 के लिए स्वीकृत है, लेकिन अवैध खनन गाटा संख्या 1164/71 में किया जा रहा है। जब पीड़ितों ने इसका विरोध किया तो उन्हें धमकाया गया। थाना कलवारी में शिकायत के बाद पुलिस ने 'पैमाइश तक खुदाई बंद' रहने का आश्वासन दिया था, लेकिन यह आश्वासन महज़ खानापूर्ति साबित हुआ, और अगले ही दिन भारी मशीनों का काफिला फिर से सक्रिय हो गया। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, शाम ढलते ही प्रतिबंधित पोकलैंड मशीनों की गूंज सुनाई देने लगती है और रात भर ओवरलोडेड डंपर तथा तेज़ रफ़्तार ट्रैक्टर-ट्रॉलियां दौड़ती रहती हैं, जिससे रास्ते टूट रहे हैं और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। माझा खुर्द के ग्रामीणों ने खनन माफियाओं और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच एक मज़बूत 'गठजोड़' होने का आरोप लगाया है। जिला खनन अधिकारी प्रशांत यादव पर आरोप हैं कि वे शिकायतकर्ताओं को नज़रअंदाज़ करते हैं या उनके नंबर ब्लॉक कर देते हैं। इस अंधाधुंध खुदाई से सरयू नदी की कोख छलनी हो रही है, जिससे आगामी मानसून में गांव में कटान और बाढ़ का खतरा कई गुना बढ़ गया है, जिससे हर साल सैकड़ों एकड़ उपजाऊ कृषि योग्य ज़मीन नदी में विलीन हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि माफिया कम समय में अधिक मुनाफा कमाने की होड़ में गांव के भविष्य को ही दांव पर लगा रहे हैं। गांव के प्रधान और दर्जनों ग्रामीणों की शिकायत के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई न होना प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। अब ज़िले की तेज़तर्रार डीएम कृतिका ज्योत्सना के सामने यह सबसे बड़ी चुनौती है कि क्या वह इस 'खनन माफिया तंत्र' को तोड़ पाएंगी। ग्रामीणों की निगाहें उन पर टिकी हैं कि क्या गलत तरीके से जारी पट्टों को तत्काल निरस्त किया जाएगा, क्या खनन अधिकारी और माफिया के कथित 'गठजोड़' की जांच होगी, और क्या प्रशासन अपनी नाक के नीचे हो रहे इस पर्यावरणीय और राजस्व अपराध पर नकेल कस पाएगा। यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या जिला खनन विभाग 'बिक चुका है' और खनन माफियाओं को किसका संरक्षण प्राप्त है। ग्रामीणों ने 'आर-पार की लड़ाई' लड़ने का मन बना लिया है, और चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो माझा खुर्द का नक्शा बदल सकता है और आने वाली पीढ़ियां इस गांव को केवल यादों में ही देख पाएंगी।
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में, कलवारी थाना क्षेत्र के माझा खुर्द और माझा कला तीलियावा इलाके इन दिनों 'कानून के जंगलराज' का केंद्र बने हुए हैं। सरयू नदी के किनारे स्थित इन गांवों में खनन माफियाओं पर प्रशासनिक संरक्षण और दबंगई के दम पर बड़े पैमाने पर तबाही मचाने का आरोप है। स्थिति यह है कि माफिया अब केवल सरकारी पट्टे की ज़मीन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीणों की निजी खेती की ज़मीनों पर भी कब्ज़ा कर उसे खोखला कर रहे हैं। प्रशासन और खनन विभाग की संदिग्ध चुप्पी ने इस मामले को 'अंधेर नगरी, चौपट राज' जैसी स्थिति में ला दिया है। इस पूरे खेल के मुख्य भुक्तभोगी दिनेश यादव ने साक्ष्यों के साथ बताया कि खनन माफिया दिवाकर सोनकर के गुर्गों ने बिना किसी अनुमति या मुआवज़े के उनकी पुस्तैनी ज़मीन (गाटा संख्या 861 एवं 870) में जेसीबी डालकर बालू निकालना शुरू कर दिया है। दिनेश का दावा है कि पट्टा गाटा संख्या 1164/33 एवं 1164/51 के लिए स्वीकृत है, लेकिन अवैध खनन गाटा संख्या 1164/71 में किया जा रहा है। जब पीड़ितों ने इसका विरोध किया तो उन्हें धमकाया गया। थाना कलवारी में शिकायत के बाद पुलिस ने 'पैमाइश तक खुदाई बंद' रहने का आश्वासन दिया था, लेकिन यह आश्वासन महज़ खानापूर्ति साबित हुआ, और अगले ही दिन भारी मशीनों का काफिला फिर से सक्रिय हो गया। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, शाम ढलते ही प्रतिबंधित पोकलैंड मशीनों की गूंज सुनाई देने लगती है और रात भर ओवरलोडेड डंपर तथा तेज़ रफ़्तार ट्रैक्टर-ट्रॉलियां दौड़ती रहती हैं, जिससे रास्ते टूट रहे हैं और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। माझा खुर्द के ग्रामीणों ने खनन माफियाओं और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच एक मज़बूत 'गठजोड़' होने का आरोप लगाया है। जिला खनन अधिकारी प्रशांत यादव पर आरोप हैं कि वे शिकायतकर्ताओं को नज़रअंदाज़ करते हैं या उनके नंबर ब्लॉक कर देते हैं। इस अंधाधुंध खुदाई से सरयू नदी की कोख छलनी हो रही है, जिससे आगामी मानसून में गांव में कटान और बाढ़ का खतरा कई गुना बढ़ गया है, जिससे हर साल सैकड़ों एकड़ उपजाऊ कृषि योग्य ज़मीन नदी में विलीन हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि माफिया कम समय में अधिक मुनाफा कमाने की होड़ में गांव के भविष्य को ही दांव पर लगा रहे हैं। गांव के प्रधान और दर्जनों ग्रामीणों की शिकायत के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई न होना प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। अब ज़िले की तेज़तर्रार डीएम कृतिका ज्योत्सना के सामने यह सबसे बड़ी चुनौती है कि क्या वह इस 'खनन माफिया तंत्र' को तोड़ पाएंगी। ग्रामीणों की निगाहें उन पर टिकी हैं कि क्या गलत तरीके से जारी पट्टों को तत्काल निरस्त किया जाएगा, क्या खनन अधिकारी और माफिया के कथित 'गठजोड़' की जांच होगी, और क्या प्रशासन अपनी नाक के नीचे हो रहे इस पर्यावरणीय और राजस्व अपराध पर नकेल कस पाएगा। यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या जिला खनन विभाग 'बिक चुका है' और खनन माफियाओं को किसका संरक्षण प्राप्त है। ग्रामीणों ने 'आर-पार की लड़ाई' लड़ने का मन बना लिया है, और चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो माझा खुर्द का नक्शा बदल सकता है और आने वाली पीढ़ियां इस गांव को केवल यादों में ही देख पाएंगी।
- उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में, कलवारी थाना क्षेत्र के माझा खुर्द और माझा कला तीलियावा इलाके इन दिनों 'कानून के जंगलराज' का केंद्र बने हुए हैं। सरयू नदी के किनारे स्थित इन गांवों में खनन माफियाओं पर प्रशासनिक संरक्षण और दबंगई के दम पर बड़े पैमाने पर तबाही मचाने का आरोप है। स्थिति यह है कि माफिया अब केवल सरकारी पट्टे की ज़मीन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीणों की निजी खेती की ज़मीनों पर भी कब्ज़ा कर उसे खोखला कर रहे हैं। प्रशासन और खनन विभाग की संदिग्ध चुप्पी ने इस मामले को 'अंधेर नगरी, चौपट राज' जैसी स्थिति में ला दिया है। इस पूरे खेल के मुख्य भुक्तभोगी दिनेश यादव ने साक्ष्यों के साथ बताया कि खनन माफिया दिवाकर सोनकर के गुर्गों ने बिना किसी अनुमति या मुआवज़े के उनकी पुस्तैनी ज़मीन (गाटा संख्या 861 एवं 870) में जेसीबी डालकर बालू निकालना शुरू कर दिया है। दिनेश का दावा है कि पट्टा गाटा संख्या 1164/33 एवं 1164/51 के लिए स्वीकृत है, लेकिन अवैध खनन गाटा संख्या 1164/71 में किया जा रहा है। जब पीड़ितों ने इसका विरोध किया तो उन्हें धमकाया गया। थाना कलवारी में शिकायत के बाद पुलिस ने 'पैमाइश तक खुदाई बंद' रहने का आश्वासन दिया था, लेकिन यह आश्वासन महज़ खानापूर्ति साबित हुआ, और अगले ही दिन भारी मशीनों का काफिला फिर से सक्रिय हो गया। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, शाम ढलते ही प्रतिबंधित पोकलैंड मशीनों की गूंज सुनाई देने लगती है और रात भर ओवरलोडेड डंपर तथा तेज़ रफ़्तार ट्रैक्टर-ट्रॉलियां दौड़ती रहती हैं, जिससे रास्ते टूट रहे हैं और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। माझा खुर्द के ग्रामीणों ने खनन माफियाओं और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच एक मज़बूत 'गठजोड़' होने का आरोप लगाया है। जिला खनन अधिकारी प्रशांत यादव पर आरोप हैं कि वे शिकायतकर्ताओं को नज़रअंदाज़ करते हैं या उनके नंबर ब्लॉक कर देते हैं। इस अंधाधुंध खुदाई से सरयू नदी की कोख छलनी हो रही है, जिससे आगामी मानसून में गांव में कटान और बाढ़ का खतरा कई गुना बढ़ गया है, जिससे हर साल सैकड़ों एकड़ उपजाऊ कृषि योग्य ज़मीन नदी में विलीन हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि माफिया कम समय में अधिक मुनाफा कमाने की होड़ में गांव के भविष्य को ही दांव पर लगा रहे हैं। गांव के प्रधान और दर्जनों ग्रामीणों की शिकायत के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई न होना प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। अब ज़िले की तेज़तर्रार डीएम कृतिका ज्योत्सना के सामने यह सबसे बड़ी चुनौती है कि क्या वह इस 'खनन माफिया तंत्र' को तोड़ पाएंगी। ग्रामीणों की निगाहें उन पर टिकी हैं कि क्या गलत तरीके से जारी पट्टों को तत्काल निरस्त किया जाएगा, क्या खनन अधिकारी और माफिया के कथित 'गठजोड़' की जांच होगी, और क्या प्रशासन अपनी नाक के नीचे हो रहे इस पर्यावरणीय और राजस्व अपराध पर नकेल कस पाएगा। यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या जिला खनन विभाग 'बिक चुका है' और खनन माफियाओं को किसका संरक्षण प्राप्त है। ग्रामीणों ने 'आर-पार की लड़ाई' लड़ने का मन बना लिया है, और चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो माझा खुर्द का नक्शा बदल सकता है और आने वाली पीढ़ियां इस गांव को केवल यादों में ही देख पाएंगी।1
- एक ट्रक ड्राइवर ने घर के दरवाजे पर सो रहे एक परिवार को कुचल दिया, जिससे चार लोगों की जान चली गई। इस घटना के बाद, बाराबंकी पुलिस ने सख्त कार्रवाई करने की तैयारी शुरू कर दी है। एसपी अर्पित विजयवर्गीय के नेतृत्व में, बाराबंकी पुलिस उन ट्रक मालिकों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की तैयारी में है, जिनके ट्रक ड्राइवर ने यह जानलेवा दुर्घटना की। इस मामले में एएसपी उत्तरी ने एक बयान भी जारी किया है।1
- बस्ती जिले के लुहारपुरवा में शुक्रवार शाम एक घर में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया, जिससे बाइक, साइकिल और घर का सारा राशन जलकर राख हो गया। फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पा लिया है, लेकिन इसके कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है।1
- आज 24 मई, 2026 को संतकबीरनगर के पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन में और अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन में, आगामी बकरीद/ईद-उल-उजहा त्योहार के मद्देनजर थाना महुली में पीस कमेटी की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का संचालन क्षेत्राधिकारी धनघटा अभयनाथ मिश्र ने थानाध्यक्ष महुली दुर्गेश पाण्डेय की उपस्थिति में किया, जिसमें थाना क्षेत्र के धार्मिक गुरुओं और संभ्रांत व्यक्तियों ने भाग लिया। मीटिंग के दौरान, त्योहार से संबंधित सभी आवश्यक दिशा-निर्देशों से अवगत कराया गया। मुख्य रूप से सड़क पर नमाज अदा न करने, कुर्बानी स्थल को केवल परंपरागत तरीके से उपयोग करने, अपशिष्ट का सही निस्तारण सुनिश्चित करने और प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी न देने जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। लोगों से शांति और भाईचारे के साथ पर्व मनाने की अपील की गई, साथ ही यह सख्त हिदायत भी दी गई कि त्योहार के दौरान गड़बड़ी पैदा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उपस्थित सभी लोगों से त्योहार को भाईचारे के साथ और सकुशल संपन्न कराने का आग्रह किया गया। पुलिस द्वारा सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की भ्रामक खबर या सांप्रदायिक टिप्पणी न करने की सलाह दी गई। बताया गया कि पुलिस अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी नजर रख रही है और ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त, यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति या वस्तु दिखाई दे, तो तुरंत थाने या यूपी 112/स्थानीय पुलिस स्टेशन पर सूचित करने की अपील की गई।4
- संत कबीर नगर के मेंहदावल में, बेलकला विकास क्षेत्र की ग्राम पंचायत कैथवलिया में नौदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ एक भव्य कलश शोभायात्रा के साथ हुआ। इस यात्रा के दौरान आपसी भाईचारे और सौहार्द की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली, जिसने सभी का ध्यान खींचा। मुस्लिम समुदाय से जुड़े पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रत्याशी अब्दुल जब्बार ने इस कलश यात्रा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं पर फूलों की वर्षा कर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके अतिरिक्त, भीषण गर्मी को देखते हुए, अब्दुल जब्बार ने श्रद्धालुओं के बीच बिस्लरी पानी का वितरण कर उनकी प्यास बुझाई, जो एक सराहनीय कार्य था। यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने अब्दुल जब्बार के इस कार्य की भरपूर प्रशंसा की और कहा कि ऐसे कार्य समाज में आपसी प्रेम, भाईचारे और सौहार्द को मजबूत करने का संदेश देते हैं। यह कलश शोभायात्रा कैथवलिया गांव निवासी मेवालाल शर्मा के घर से शुरू हुई और कैथवलिया समन्था, बेलवा सेगर चौराहे, पिपरा प्रथम होते हुए राजघाट बूधानदी से गुज़रते हुए विभिन्न मार्गों से होकर कथा स्थल पर पहुंची। कथा स्थल पर विधि-विधान के साथ कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया, और इस पूरी यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। इस आयोजन में अब्दुल जब्बार और मेवालाल शर्मा सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।4
- संत कबीर नगर के शनिचरा बाजार में ACPS (एशियन) कम्प्यूटर प्र.सं.फाउंडेशन का उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए कम्प्यूटर प्रशिक्षण, कोचिंग तथा योग्य छात्रों को रोजगार की व्यवस्था प्रदान करना है। रामजानकी मार्ग, शनिचरा बाजार स्थित इस संस्थान की शाखाएं गोरखपुर, बस्ती, खलीलाबाद, संत कबीर नगर और शनिचरा बाजार में संचालित हैं। प्रबन्धक शिव ने जानकारी देते हुए बताया कि यहाँ PGDCA, ADCA, CCC, Tally Prime, MS Office सहित सभी प्रमुख कम्प्यूटर कोर्स उपलब्ध हैं। छोटे बच्चों के लिए कम्प्यूटर और अन्य विषयों की कोचिंग की सुविधा भी दी जाती है। उन्होंने विशेष रूप से यह भी बताया कि प्रशिक्षण पूरा करने वाले योग्य छात्रों को संस्थान द्वारा रोजगार दिलाने की व्यवस्था भी की जाती है। कम्प्यूटर प्रशिक्षण और कोचिंग के अतिरिक्त, ACPS (एशियन) कम्प्यूटर प्र.सं.फाउंडेशन अन्य ऑनलाइन सेवाएं भी प्रदान करता है, जिनमें उद्यम रजिस्ट्रेशन, ITR, राशन कार्ड, जाति-आय-निवास, पैन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, आधार संशोधन, जन्म प्रमाण पत्र, ई-श्रम कार्ड और किसान निधि जैसे सभी प्रकार के ऑनलाइन कार्य शामिल हैं। साथ ही, कम्प्यूटर हार्डवेयर का सामान भी यहाँ उपलब्ध है। इस अवसर पर सदस्य विपिन कुमार, राम लौट, राजू और विद्यार्थी अस्मिता, नितेश, उज्जवल, शिखा, सत्यम आदि उपस्थित रहे।2
- काजीरंगा नेशनल पार्क में बाघ और भालू के बीच एक अनोखी लड़ाई का दृश्य देखने को मिला, जिसने वहाँ मौजूद पर्यटकों को आश्चर्यचकित कर दिया। इस अद्वितीय संघर्ष को पर्यटकों ने अपने कैमरों में कैद कर लिया, जिससे यह अनोखा नज़ारा रिकॉर्ड हो गया।1
- उत्तर प्रदेश के देवरिया में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हेलीकॉप्टर के उतरते ही, ज़िलाधिकारी मधुसूदन हुगली ने प्रोटोकॉल के तहत तेज़ी से दौड़ लगा दी। करीब 100 मीटर की यह दौड़ देखकर वहां मौजूद लोग दंग रह गए और अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।1