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मोहनिया, कैमूर में उत्पाद विभाग की टीम ने एक एंबुलेंस को शराब जांच के लिए रोका। चालक ने टीम पर मारपीट का आरोप लगाया, जिसके बाद गुस्साई भीड़ ने चेकपोस्ट को आधे घंटे तक जाम कर दिया। पुलिस ने हस्तक्षेप कर जाम खुलवाया और मामले की जांच शुरू कर दी है।
Vinod kumar singh
मोहनिया, कैमूर में उत्पाद विभाग की टीम ने एक एंबुलेंस को शराब जांच के लिए रोका। चालक ने टीम पर मारपीट का आरोप लगाया, जिसके बाद गुस्साई भीड़ ने चेकपोस्ट को आधे घंटे तक जाम कर दिया। पुलिस ने हस्तक्षेप कर जाम खुलवाया और मामले की जांच शुरू कर दी है।
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- मोहनिया, कैमूर में उत्पाद विभाग की टीम ने एक एंबुलेंस को शराब जांच के लिए रोका। चालक ने टीम पर मारपीट का आरोप लगाया, जिसके बाद गुस्साई भीड़ ने चेकपोस्ट को आधे घंटे तक जाम कर दिया। पुलिस ने हस्तक्षेप कर जाम खुलवाया और मामले की जांच शुरू कर दी है।2
- कैमूर जिले के भभुआ में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक नाबालिग लड़की ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपनी माँ को गंभीर रूप से घायल कर दिया। बताया गया है कि इस वारदात को अंजाम देने के लिए भूत-प्रेत का बहाना बनाया गया था।1
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- रोहतास जिले के सासाराम स्थित सदर अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। गंभीर मरीजों के अस्पताल पहुंचने पर भी वहाँ एक भी डॉक्टर मौजूद नहीं मिला। इसी दौरान सासाराम नगर थाना की पुलिस चार अभियुक्तों को इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंची, लेकिन डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण पुलिसकर्मियों को भी काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सदर अस्पताल की पूरी व्यवस्था 'भगवान भरोसे' चल रही है। जनता ने सवाल उठाया है कि जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दौरे के समय स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर दिखाई जा रही थी, तो अब यह स्थिति क्यों बनी हुई है। लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रभाव वाले क्षेत्र में भी डॉक्टरों की गैर-मौजूदगी के चलते मरीज दर-दर भटकने को मजबूर हैं। आम जनता का तर्क है कि जब पुलिस प्रशासन को ही इलाज के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है, तो आम मरीजों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। गंभीर मरीजों और उनके परिजनों में अस्पताल प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों ने जिला प्रशासन और जिला अधिकारी से आग्रह किया है कि वे इस मामले का संज्ञान लें और अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था को तत्काल सुधारा जाए, ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।1