पश्चिम बंगाल की सियासत में इन दिनों काफी हलचल देखी जा रही है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर अंदरूनी बगावत की अटकलों के बीच, पार्टी के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी ने नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही सत्ताधारी दल के पास प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और तमाम केंद्रीय शक्तियों का बल हो, लेकिन तृणमूल कांग्रेस के पास 'मां, माटी, मानुष' की शक्ति और पश्चिम बंगाल की जनता का पूरा भरोसा है। इस सियासी ड्रामे के बीच, बनर्जी ने पार्टी आलाकमान के प्रति अपनी अटूट निष्ठा को भी दोहराया। इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद टीएमसी नेता कीर्ति आजाद ने पार्टी से असंतुष्ट चल रहे नेताओं को आड़े हाथों लिया और उन पर राजनीतिक नैतिकता खोने का आरोप लगाया। आजाद ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि जो लोग चुनाव जीतने के बाद अब ममता बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं, वे असल में 'गद्दार' हैं। उन्होंने इन नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनमें थोड़ी भी नैतिकता बची है, तो वे तुरंत अपने पदों से इस्तीफा दें और भाजपा के टिकट पर दुबारा चुनाव लड़कर दिखाएं। आजाद ने पूर्व सांसद सुखेन्दु शेखर रॉय का उदाहरण भी दिया, यह कहते हुए कि कम से कम उनमें इस्तीफा देने की हिम्मत तो थी।
पश्चिम बंगाल की सियासत में इन दिनों काफी हलचल देखी जा रही है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर अंदरूनी बगावत की अटकलों के बीच, पार्टी के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी ने नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही सत्ताधारी दल के पास प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और तमाम केंद्रीय शक्तियों का बल हो, लेकिन तृणमूल कांग्रेस के पास 'मां, माटी, मानुष' की शक्ति और पश्चिम बंगाल की जनता का पूरा भरोसा है। इस सियासी ड्रामे के बीच, बनर्जी ने पार्टी आलाकमान के प्रति अपनी अटूट निष्ठा को भी दोहराया। इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद टीएमसी नेता कीर्ति आजाद ने पार्टी से असंतुष्ट चल रहे नेताओं को आड़े हाथों लिया और उन पर राजनीतिक नैतिकता खोने का आरोप लगाया। आजाद ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि जो लोग चुनाव जीतने के बाद अब ममता बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं, वे असल में 'गद्दार' हैं। उन्होंने इन नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनमें थोड़ी भी नैतिकता बची है, तो वे तुरंत अपने पदों से इस्तीफा दें और भाजपा के टिकट पर दुबारा चुनाव लड़कर दिखाएं। आजाद ने पूर्व सांसद सुखेन्दु शेखर रॉय का उदाहरण भी दिया, यह कहते हुए कि कम से कम उनमें इस्तीफा देने की हिम्मत तो थी।
- अगर आप बिना किसी जोखिम के बड़ा फंड तैयार करना चाहते हैं, तो डाकघर की RD (रिकरिंग डिपॉजिट) और PPF (पब्लिक प्रोविडेंट फंड) योजनाएँ बेहतरीन विकल्प हो सकती हैं। भारत सरकार समर्थित इन योजनाओं में निवेश को पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है और बाजार के उतार-चढ़ाव का इन पर कोई असर नहीं पड़ता। नियमित बचत और चक्रवृद्धि ब्याज की मदद से निवेशक समय के साथ लाखों रुपये का फंड तैयार कर सकते हैं। यही कारण है कि सुरक्षित और लंबी अवधि के निवेश के लिए ये योजनाएँ लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हैं।1
- यह है इस दुनिया की सच्चाई यह है भारत की सच्चाई भारत में कुछ लोग ऐसे ही हो रहे हैं1
- पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में एक बार फिर बगावत की आग भड़क उठी है। अवामी एक्शन कमेटी के आह्वान पर रविवार (7 जून) को पूरे पीओके में बंद और प्रदर्शन की घोषणा की गई थी। इस बीच, सोमवार (8 जून) को लंदन स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग के बाहर भी पीओके के अप्रवासी लोगों ने पाकिस्तानी हुकूमत और सेना के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए "पाकिस्तानी सेना वापस जाओ" के नारे लगाए। इसी क्रम में पीओके के रावलकोट में पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स ने आम लोगों पर गोलीबारी की और पैलेट गन का इस्तेमाल किया। रविवार रात से लेकर सोमवार शाम तक रावलकोट में सेना और रेंजर्स के इस दमन में कुल 26 लोगों की जान चली गई, जबकि 190 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें से कई के शरीर पर पैलेट गन के छर्रों के निशान मिले हैं। स्थिति को देखते हुए पीओके की राजधानी मुजफ्फराबाद में कर्फ्यू लगा दिया गया है और पूरा शहर इस समय बंद है। हालांकि, आधिकारिक आंकड़ों के विपरीत, पीओके के लोग वीडियो बयान जारी कर आरोप लगा रहे हैं कि रावलकोट में पाकिस्तानी सेना के दमन के कारण 100 से 150 लोगों की मौत हुई है।1
- ऑल ड्राइवर संघ भारत ने अपनी 18 सूत्री मांगों को लेकर राजधानी दिल्ली में एक जन चेतना यात्रा का आयोजन किया। इस यात्रा में देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में पदाधिकारी उपस्थित हुए। जन चेतना यात्रा के बाद, ऑल ड्राइवर संघ भारत ने सरकार को अपना एक ज्ञापन सौंपा।1
- पूर्व बसपा उम्मीदवार डॉ. अस्मिता को उनके पति के साथ वीर सिंह से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया गया है। इस गिरफ्तारी के विरोध में ओबीसी महासभा ने दिल्ली में ज़ोरदार प्रदर्शन किया है।1
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'प्रोजेक्ट गंगा' का शुभारंभ किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश के गांवों में एक बड़ी डिजिटल क्रांति की शुरुआत करना है। यह परियोजना विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सशक्तिकरण और विकास को गति देने के लिए डिज़ाइन की गई है।1
- स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया है कि गंभीर बीमारियाँ अचानक नहीं होतीं, बल्कि उनका असर पहले छोटे-छोटे संकेतों के रूप में दिखाई देने लगता है। उन्होंने बताया कि लगातार थकान महसूस होना, अचानक वजन का घटना या बढ़ना, भूख में बदलाव आना, बार-बार बुखार आना, सांस फूलना या लंबे समय तक शरीर में दर्द बने रहना, ये सभी शरीर की ओर से आने वाली संभावित चेतावनी हो सकती हैं। विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि ऐसे लक्षणों को सामान्य समझकर नज़रअंदाज़ करना गंभीर परिणाम दे सकता है। उनका कहना है कि समय पर जाँच और सही इलाज से कई गंभीर बीमारियों को उनके शुरुआती चरण में ही नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए, शरीर में होने वाले किसी भी असामान्य बदलाव को हल्के में लेने की गलती नहीं करनी चाहिए।1
- नजफगढ़ रोड पर एक बस में जेबकतरी करते हुए एक चोर को पकड़ा गया। बताया गया कि चोर ने एक मंगलसूत्र तोड़कर चुरा लिया था। घटना के बाद आक्रोशित जनता ने चोर को पकड़कर उसका 'इलाज' कर दिया।1
- एक बेहद भावुक क्षण में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक शहीद फौजी की मां को वीर चक्र सौंपते हुए उन्हें गले लगाया। इस दौरान, स्वयं राष्ट्रपति मुर्मू भी रोने लगीं, और दोनों महिलाएं इस मार्मिक पल में फूट-फूटकर रोईं। यह दृश्य इस बात का प्रतीक बना कि आखिर दोनों मां ही तो थीं, जिन्होंने एक समान मानवीय संवेदना के साथ इस पल को महसूस किया।1