मेजा क्षेत्र के लिए बीती रात एक बुरे सपने जैसी रही, जहाँ देर रात अचानक आए भीषण तूफान और मूसलाधार बारिश ने पूरे इलाके में भारी तबाही मचाई। हवाओं की तीव्र गति के कारण पल भर में ही चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। तूफान का सबसे भयावह रूप ग्रामीण इलाकों में देखने को मिला, जहाँ कई कच्चे मकानों की छतें उड़ गईं और पुराने पक्के घरों की दीवारें ढह गईं। तेज हवाओं ने बिजली के दर्जनों खंभे उखाड़कर सड़कों पर गिरा दिए, जिससे पूरी रात क्षेत्र में बिजली आपूर्ति ठप रही और लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हुए। इसके अतिरिक्त, सड़कों के किनारे लगे दर्जनों विशालकाय पेड़ जड़ से उखड़कर गिर गए, जिससे मुख्य मार्ग अवरुद्ध हो गए और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। यह तूफान किसानों के लिए किसी बड़ी आपदा से कम नहीं है, क्योंकि खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं। तैयार खड़ी गेहूं और अन्य फसलें जलमग्न हो गईं, जिससे किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फिर गया। लोग रात भर अपने घरों में डर और सहम के माहौल में दुबके रहे, कोई भी बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। सुबह होते ही तबाही का मंजर सामने आया, जिसमें हर तरफ बिखरी टहनियां, गिरे हुए पेड़ और बिजली के तारों का जाल मुसीबत का सबब बना हुआ है। स्थानीय प्रशासन और बिजली विभाग की टीमें नुकसान का आकलन करने और सड़कों को साफ करने में जुटी हैं, लेकिन जनजीवन को सामान्य होने में अभी समय लगने की संभावना है। इस प्राकृतिक आपदा ने न केवल संपत्ति का भारी नुकसान किया है, बल्कि लोगों के मन में गहरा डर और चिंता भी छोड़ दी है।
मेजा क्षेत्र के लिए बीती रात एक बुरे सपने जैसी रही, जहाँ देर रात अचानक आए भीषण तूफान और मूसलाधार बारिश ने पूरे इलाके में भारी तबाही मचाई। हवाओं की तीव्र गति के कारण पल भर में ही चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। तूफान का सबसे भयावह रूप ग्रामीण इलाकों में देखने को मिला, जहाँ कई कच्चे मकानों की छतें उड़ गईं और पुराने पक्के घरों की दीवारें ढह गईं। तेज हवाओं ने बिजली के दर्जनों खंभे उखाड़कर सड़कों पर गिरा दिए, जिससे पूरी रात क्षेत्र में बिजली आपूर्ति ठप रही और लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हुए। इसके अतिरिक्त, सड़कों के किनारे लगे दर्जनों विशालकाय पेड़ जड़ से उखड़कर गिर गए, जिससे मुख्य मार्ग अवरुद्ध हो गए और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। यह तूफान किसानों के लिए किसी बड़ी आपदा से कम नहीं है, क्योंकि खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं। तैयार खड़ी गेहूं और अन्य फसलें जलमग्न हो गईं, जिससे किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फिर गया। लोग रात भर अपने घरों में डर और सहम के माहौल में दुबके रहे, कोई भी बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। सुबह होते ही तबाही का मंजर सामने आया, जिसमें हर तरफ बिखरी टहनियां, गिरे हुए पेड़ और बिजली के तारों का जाल मुसीबत का सबब बना हुआ है। स्थानीय प्रशासन और बिजली विभाग की टीमें नुकसान का आकलन करने और सड़कों को साफ करने में जुटी हैं, लेकिन जनजीवन को सामान्य होने में अभी समय लगने की संभावना है। इस प्राकृतिक आपदा ने न केवल संपत्ति का भारी नुकसान किया है, बल्कि लोगों के मन में गहरा डर और चिंता भी छोड़ दी है।
- मध्य प्रदेश के सागर जिले में 10 जून 2026 को बिजली चोरी का मामला दर्ज करना एक जूनियर इंजीनियर (JE) को महंगा पड़ गया। पीड़ितों द्वारा विद्युत विभाग के JE कैलाश बेलदार की विभागीय कार्यालय में घुसकर एक महिला और उसके साथियों ने चप्पलों से पिटाई कर दी। यह पूरी घटना सीसीटीवी में कैद हो गई है और अब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।1
- प्रयागराज जिले के मेजा में हुई एक घटना के संबंध में पुलिस ने अपना बयान जारी किया है। यह बयान उक्त घटना को लेकर पुलिस द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी है।1
- प्रयागराज के घूरपुर थाना क्षेत्र के करमा चौकी अंतर्गत डेरा चकिया गांव के सामने मंगलवार को एक सड़क हादसे में एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। जानकारी के अनुसार, गौहनिया की ओर से पुआल लादकर करछना की तरफ जा रहा एक ट्रैक्टर जब डेरा चकिया गांव के सामने पहुंचा, तो करमा की ओर से अपने घर जा रहे बबुआन पटेल (ज्ञान चंद पटेल के पुत्र) उसकी चपेट में आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि ट्रैक्टर की जोरदार टक्कर से बबुआन पटेल गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। स्थानीय लोगों और परिजनों की मदद से घायल युवक को तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें एसआरएन प्रयागराज रेफर कर दिया। घटना की सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंची और मामले की जांच में जुट गई है। घायल युवक के उपचार को लेकर परिजनों में चिंता का माहौल बना हुआ है।4
- प्रयागराज के SRN अस्पताल में डॉक्टरों की हड़ताल के कारण मरीज़ों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मरीज़ों के परिजनों ने आरोप लगाया है कि उन्हें पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएँ नहीं मिल पा रही हैं। यह स्थिति स्वरूप रानी अस्पताल के ट्रामा सेंटर के पास बनी हुई है, जहाँ डॉक्टर धरने पर बैठे हैं। इसी दौरान, परेशान मरीज़ों के परिजनों की डॉक्टरों से तीखी बहस भी हुई।1
- SRN अस्पताल में डॉक्टरों की हड़ताल के कारण मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति के चलते ट्रामा सेंटर पर मरीज के परिजनों और डॉक्टरों के बीच तीखी बहस भी हुई।1
- मेजा क्षेत्र के लिए बीती रात एक बुरे सपने जैसी रही, जहाँ देर रात अचानक आए भीषण तूफान और मूसलाधार बारिश ने पूरे इलाके में भारी तबाही मचाई। हवाओं की तीव्र गति के कारण पल भर में ही चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। तूफान का सबसे भयावह रूप ग्रामीण इलाकों में देखने को मिला, जहाँ कई कच्चे मकानों की छतें उड़ गईं और पुराने पक्के घरों की दीवारें ढह गईं। तेज हवाओं ने बिजली के दर्जनों खंभे उखाड़कर सड़कों पर गिरा दिए, जिससे पूरी रात क्षेत्र में बिजली आपूर्ति ठप रही और लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हुए। इसके अतिरिक्त, सड़कों के किनारे लगे दर्जनों विशालकाय पेड़ जड़ से उखड़कर गिर गए, जिससे मुख्य मार्ग अवरुद्ध हो गए और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। यह तूफान किसानों के लिए किसी बड़ी आपदा से कम नहीं है, क्योंकि खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं। तैयार खड़ी गेहूं और अन्य फसलें जलमग्न हो गईं, जिससे किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फिर गया। लोग रात भर अपने घरों में डर और सहम के माहौल में दुबके रहे, कोई भी बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। सुबह होते ही तबाही का मंजर सामने आया, जिसमें हर तरफ बिखरी टहनियां, गिरे हुए पेड़ और बिजली के तारों का जाल मुसीबत का सबब बना हुआ है। स्थानीय प्रशासन और बिजली विभाग की टीमें नुकसान का आकलन करने और सड़कों को साफ करने में जुटी हैं, लेकिन जनजीवन को सामान्य होने में अभी समय लगने की संभावना है। इस प्राकृतिक आपदा ने न केवल संपत्ति का भारी नुकसान किया है, बल्कि लोगों के मन में गहरा डर और चिंता भी छोड़ दी है।1
- प्रयागराज में इलाहाबाद हाई कोर्ट के अधिवक्ताओं ने आज शाम एकजुट होकर अपनी दिवंगत साथी अधिवक्ता जागृति शुक्ला को नम आंखों से याद किया। हाई कोर्ट के गेट नंबर 3 के पास भारी संख्या में एकत्र हुए इन अधिवक्ताओं ने कैंडल जलाकर उन्हें अपनी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान न्यायपीठ से जुड़े तमाम वकीलों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। कैंडल मार्च और श्रद्धांजलि सभा में मौजूद अधिवक्ताओं का कहना था कि जागृति शुक्ला एक होनहार और समर्पित अधिवक्ता थीं, और उनका असमय जाना पूरे अधिवक्ता समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है। इस मौके पर 'समस्त अधिवक्तागण' की ओर से एक बड़ा बैनर भी लगाया गया था, जिसके सामने सभी ने मोमबत्तियां जलाकर अपनी साथी को नमन किया और उनके योगदान को याद किया।1
- प्रयागराज से मिल रही खबर के अनुसार, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 10 जून 2026 को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इस फैसले के तहत, 'शांति भंग' के आरोप में निर्दोष लोगों को जेल भेजने वाले पुलिस अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी पीड़ित को 8 दिनों तक अवैध हिरासत में रखा जाता है, तो उसे 2 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। इस मुआवजे की राशि दोषी पुलिस अधिकारियों के वेतन से वसूली जाएगी, जिससे बिना कानूनी आधार के 24 घंटे से अधिक हिरासत में रखने पर पुलिस को अब भारी परिणाम भुगतने होंगे। प्रधान संपादक रंजीत कुमार सोनकर की क्राइम एक्सपर्ट न्यूज़ के मुताबिक, इलाहाबाद हाईकोर्ट के ये नए दिशा-निर्देश पूरे उत्तर प्रदेश में तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।1