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मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत एनएचएम संविदा कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे इन स्वास्थ्य कर्मियों ने, जिनमें शाजापुर के संविदा स्वास्थ्य कर्मी भी शामिल हैं, अपनी पीड़ा व्यक्त करने के लिए एक मार्मिक रास्ता अपनाया है। मंगलवार, 9 जून 2026 को दोपहर 12.51 बजे, उन्होंने अपने खून से एक भावुक पत्र लिखकर प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपनी सेवाओं के नियमितीकरण की पुरजोर मांग की। इस पत्र में स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि 'संविदा कर्मी का निवेदन, सभी कर्मचारियों को नियमित किया जाए।' कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने कोरोना जैसी भीषण महामारी के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर हजारों जिंदगियां बचाईं और प्रदेश की सेवा में अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे, जब आम जनता घरों में थी। अस्पतालों, जांच केंद्रों और टीकाकरण केंद्रों पर 24 घंटे लगातार ड्यूटी देकर इन 'कोरोना योद्धाओं' ने हजारों मरीजों को मौत के मुंह से निकाला था। हालांकि, महामारी का दौर बीत जाने के बाद उन्हें लग रहा है कि सरकार उनके त्याग और बलिदान को भूल गई है, जिसके चलते वे अब असुरक्षा महसूस कर रहे हैं। संविदा कर्मियों का आरोप है कि वर्षों तक स्वास्थ्य विभाग में निष्ठावान सेवा देने के बावजूद उनके भविष्य पर अनिश्चितता की तलवार लटकी हुई है। समान कार्य करने के बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों की तुलना में बहुत कम वेतन मिलता है, और लगातार छंटनी का डर तथा भविष्य की चिंता ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया है। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने इस कदम को कर्मचारियों की घोर हताशा का परिणाम बताया है। संघ ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि स्वास्थ्य सेवाओं को अनवरत चलाने वाले इन कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित किया जाए और उन्हें तत्काल प्रभाव से नियमित कर उनका जायज हक दिया जाए, ताकि उन्हें भविष्य में ऐसे कदम उठाने पर मजबूर न होना पड़े।

5 hrs ago
user_Amjad Khan
Amjad Khan
शाजापुर, शाजापुर, मध्य प्रदेश•
5 hrs ago
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मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत एनएचएम संविदा कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे इन स्वास्थ्य कर्मियों ने, जिनमें शाजापुर के संविदा स्वास्थ्य कर्मी भी शामिल हैं, अपनी पीड़ा व्यक्त करने के लिए एक मार्मिक रास्ता अपनाया है। मंगलवार, 9 जून 2026 को दोपहर 12.51 बजे, उन्होंने अपने खून से एक भावुक पत्र लिखकर प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपनी सेवाओं के नियमितीकरण की पुरजोर मांग की। इस पत्र में स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि 'संविदा कर्मी का निवेदन, सभी कर्मचारियों को नियमित किया जाए।' कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने कोरोना जैसी भीषण महामारी के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर हजारों जिंदगियां बचाईं और प्रदेश की सेवा में अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे, जब आम जनता घरों में थी। अस्पतालों, जांच केंद्रों और टीकाकरण केंद्रों पर 24 घंटे लगातार ड्यूटी देकर इन 'कोरोना योद्धाओं' ने हजारों मरीजों को मौत के मुंह

से निकाला था। हालांकि, महामारी का दौर बीत जाने के बाद उन्हें लग रहा है कि सरकार उनके त्याग और बलिदान को भूल गई है, जिसके चलते वे अब असुरक्षा महसूस कर रहे हैं। संविदा कर्मियों का आरोप है कि वर्षों तक स्वास्थ्य विभाग में निष्ठावान सेवा देने के बावजूद उनके भविष्य पर अनिश्चितता की तलवार लटकी हुई है। समान कार्य करने के बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों की तुलना में बहुत कम वेतन मिलता है, और लगातार छंटनी का डर तथा भविष्य की चिंता ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया है। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने इस कदम को कर्मचारियों की घोर हताशा का परिणाम बताया है। संघ ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि स्वास्थ्य सेवाओं को अनवरत चलाने वाले इन कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित किया जाए और उन्हें तत्काल प्रभाव से नियमित कर उनका जायज हक दिया जाए, ताकि उन्हें भविष्य में ऐसे कदम उठाने पर मजबूर न होना पड़े।

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  • मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत एनएचएम संविदा कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे इन स्वास्थ्य कर्मियों ने, जिनमें शाजापुर के संविदा स्वास्थ्य कर्मी भी शामिल हैं, अपनी पीड़ा व्यक्त करने के लिए एक मार्मिक रास्ता अपनाया है। मंगलवार, 9 जून 2026 को दोपहर 12.51 बजे, उन्होंने अपने खून से एक भावुक पत्र लिखकर प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपनी सेवाओं के नियमितीकरण की पुरजोर मांग की। इस पत्र में स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि 'संविदा कर्मी का निवेदन, सभी कर्मचारियों को नियमित किया जाए।' कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने कोरोना जैसी भीषण महामारी के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर हजारों जिंदगियां बचाईं और प्रदेश की सेवा में अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे, जब आम जनता घरों में थी। अस्पतालों, जांच केंद्रों और टीकाकरण केंद्रों पर 24 घंटे लगातार ड्यूटी देकर इन 'कोरोना योद्धाओं' ने हजारों मरीजों को मौत के मुंह से निकाला था। हालांकि, महामारी का दौर बीत जाने के बाद उन्हें लग रहा है कि सरकार उनके त्याग और बलिदान को भूल गई है, जिसके चलते वे अब असुरक्षा महसूस कर रहे हैं। संविदा कर्मियों का आरोप है कि वर्षों तक स्वास्थ्य विभाग में निष्ठावान सेवा देने के बावजूद उनके भविष्य पर अनिश्चितता की तलवार लटकी हुई है। समान कार्य करने के बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों की तुलना में बहुत कम वेतन मिलता है, और लगातार छंटनी का डर तथा भविष्य की चिंता ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया है। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने इस कदम को कर्मचारियों की घोर हताशा का परिणाम बताया है। संघ ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि स्वास्थ्य सेवाओं को अनवरत चलाने वाले इन कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित किया जाए और उन्हें तत्काल प्रभाव से नियमित कर उनका जायज हक दिया जाए, ताकि उन्हें भविष्य में ऐसे कदम उठाने पर मजबूर न होना पड़े।
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    मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत एनएचएम संविदा कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे इन स्वास्थ्य कर्मियों ने, जिनमें शाजापुर के संविदा स्वास्थ्य कर्मी भी शामिल हैं, अपनी पीड़ा व्यक्त करने के लिए एक मार्मिक रास्ता अपनाया है। मंगलवार, 9 जून 2026 को दोपहर 12.51 बजे, उन्होंने अपने खून से एक भावुक पत्र लिखकर प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपनी सेवाओं के नियमितीकरण की पुरजोर मांग की। इस पत्र में स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि 'संविदा कर्मी का निवेदन, सभी कर्मचारियों को नियमित किया जाए।'

कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने कोरोना जैसी भीषण महामारी के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर हजारों जिंदगियां बचाईं और प्रदेश की सेवा में अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे, जब आम जनता घरों में थी। अस्पतालों, जांच केंद्रों और टीकाकरण केंद्रों पर 24 घंटे लगातार ड्यूटी देकर इन 'कोरोना योद्धाओं' ने हजारों मरीजों को मौत के मुंह से निकाला था। हालांकि, महामारी का दौर बीत जाने के बाद उन्हें लग रहा है कि सरकार उनके त्याग और बलिदान को भूल गई है, जिसके चलते वे अब असुरक्षा महसूस कर रहे हैं।

संविदा कर्मियों का आरोप है कि वर्षों तक स्वास्थ्य विभाग में निष्ठावान सेवा देने के बावजूद उनके भविष्य पर अनिश्चितता की तलवार लटकी हुई है। समान कार्य करने के बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों की तुलना में बहुत कम वेतन मिलता है, और लगातार छंटनी का डर तथा भविष्य की चिंता ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया है। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने इस कदम को कर्मचारियों की घोर हताशा का परिणाम बताया है। संघ ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि स्वास्थ्य सेवाओं को अनवरत चलाने वाले इन कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित किया जाए और उन्हें तत्काल प्रभाव से नियमित कर उनका जायज हक दिया जाए, ताकि उन्हें भविष्य में ऐसे कदम उठाने पर मजबूर न होना पड़े।
    user_Amjad Khan
    Amjad Khan
    शाजापुर, शाजापुर, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • Post by मंगल भिलाला
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    Post by मंगल भिलाला
    user_मंगल भिलाला
    मंगल भिलाला
    शाजापुर, शाजापुर, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • मोहन बड़ोदिया के ग्राम सरसोदिया स्थित हनुमान मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन पंडित सुरेश कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणी के विवाह का भावपूर्ण प्रसंग सुनाया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने पूरी भक्ति-भाव से कथा का श्रवण किया और भगवान श्रीकृष्ण के आदर्श जीवन से प्रेरणा लेने का महत्वपूर्ण संदेश प्राप्त किया। कथावाचक पंडित सुरेश कृष्ण शास्त्री ने कृष्ण-रुक्मणी विवाह की महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि सच्ची श्रद्धा और प्रेम से ही भगवान की कृपा प्राप्त होती है। कथा के दौरान हुए भजन-कीर्तन से पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया। आयोजकों ने बताया है कि बुधवार को इस कथा का अंतिम दिन रहेगा। समापन के अवसर पर पूर्णाहुति के साथ महाप्रसादी का विशेष आयोजन किया जाएगा, जिसके लिए क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की गई है।
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    मोहन बड़ोदिया के ग्राम सरसोदिया स्थित हनुमान मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन पंडित सुरेश कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणी के विवाह का भावपूर्ण प्रसंग सुनाया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने पूरी भक्ति-भाव से कथा का श्रवण किया और भगवान श्रीकृष्ण के आदर्श जीवन से प्रेरणा लेने का महत्वपूर्ण संदेश प्राप्त किया।

कथावाचक पंडित सुरेश कृष्ण शास्त्री ने कृष्ण-रुक्मणी विवाह की महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि सच्ची श्रद्धा और प्रेम से ही भगवान की कृपा प्राप्त होती है। कथा के दौरान हुए भजन-कीर्तन से पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।

आयोजकों ने बताया है कि बुधवार को इस कथा का अंतिम दिन रहेगा। समापन के अवसर पर पूर्णाहुति के साथ महाप्रसादी का विशेष आयोजन किया जाएगा, जिसके लिए क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की गई है।
    user_Rajesh jamliya
    Rajesh jamliya
    Local News Reporter मोमन बड़ोदिया, शाजापुर, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • Post by Manish Dhakd
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    Post by Manish Dhakd
    user_Manish Dhakd
    Manish Dhakd
    आगर, आगर मालवा, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
  • मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया है। इस घटनाक्रम पर उन्होंने क्या प्रतिक्रिया दी, इसको लेकर एक खास बयान का इंतज़ार है, जिसे 'सुनिए' कहकर संदर्भित किया गया है।
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    मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया है। इस घटनाक्रम पर उन्होंने क्या प्रतिक्रिया दी, इसको लेकर एक खास बयान का इंतज़ार है, जिसे 'सुनिए' कहकर संदर्भित किया गया है।
    user_Mms news24
    Mms news24
    देवास, देवास, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • राजगढ़ जिले के तलेन में नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि अरुण यादव ने जनता को संबोधित करते हुए एक विशेष साक्षात्कार में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं, जिसमें क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया गया। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ समय से बंद पड़ी लाइट व्यवस्था को अगले दो से तीन दिनों के भीतर सुधार लिया जाएगा। इसके साथ ही, उन्होंने तलेन में पानी की किल्लत के जल्द ही स्थायी समाधान का भी भरोसा दिलाया, जिससे क्षेत्र की जनता को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अरुण यादव ने अपने इस साक्षात्कार में इन दो प्रमुख समस्याओं के अलावा भी कई अन्य बड़ी घोषणाएं कीं। इन आश्वासनों और घोषणाओं के माध्यम से उन्होंने जनता को यह विश्वास दिलाने का प्रयास किया कि नगर परिषद उनके मुद्दों के प्रति गंभीर है। इस इंटरव्यू को अधिक से अधिक साझा करने की अपील की गई है।
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    राजगढ़ जिले के तलेन में नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि अरुण यादव ने जनता को संबोधित करते हुए एक विशेष साक्षात्कार में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं, जिसमें क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया गया। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ समय से बंद पड़ी लाइट व्यवस्था को अगले दो से तीन दिनों के भीतर सुधार लिया जाएगा। इसके साथ ही, उन्होंने तलेन में पानी की किल्लत के जल्द ही स्थायी समाधान का भी भरोसा दिलाया, जिससे क्षेत्र की जनता को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

अरुण यादव ने अपने इस साक्षात्कार में इन दो प्रमुख समस्याओं के अलावा भी कई अन्य बड़ी घोषणाएं कीं। इन आश्वासनों और घोषणाओं के माध्यम से उन्होंने जनता को यह विश्वास दिलाने का प्रयास किया कि नगर परिषद उनके मुद्दों के प्रति गंभीर है। इस इंटरव्यू को अधिक से अधिक साझा करने की अपील की गई है।
    user_Dharmendra Pushpad
    Dharmendra Pushpad
    Restaurant पचोर, राजगढ़, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • जनसुनवाई में जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों से नागरिक अपनी समस्याएं एवं
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    जनसुनवाई में जिले के

 शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों से नागरिक अपनी समस्याएं एवं
    user_Manoj Kumar
    Manoj Kumar
    Teacher सुसनेर, आगर मालवा, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • शाजापुर के ग्राम पनवाड़ी स्थित एबी रोड के एक ब्लैक स्पॉट (डेंजर जोन) पर मंगलवार दोपहर सड़क सुरक्षा जागरूकता के लिए 'जीवन रक्षक पाठशाला' का आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य सड़क हादसों में होने वाली जनहानि को रोकना और आम नागरिकों को शुरुआती कुछ मिनटों, यानी 'गोल्डन आवर' में मददगार बनने के लिए प्रेरित करना था, जो घायल की जान बचाने के लिए सबसे अहम होते हैं। उज्जैन रेंज के डीआईजी नवनीत भसीन और शाजापुर पुलिस अधीक्षक यशपाल सिंह राजपूत के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक घनश्याम मालवीय, एसडीओपी अजय मिश्रा, रक्षित निरीक्षक वंदना सिंह, यातायात प्रभारी सौरव शुक्ला और सुनेरा थाना प्रभारी अंकित मुकाती सहित पुलिस व प्रशासन के आला अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण जीवन रक्षक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण रहा। शाजापुर जिला अस्पताल से आई चिकित्सकों की टीम ने मौके पर मौजूद ग्रामीणों को सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) देने का सही तरीका सिखाया। डॉक्टरों ने जोर देकर बताया कि किसी भी दुर्घटना या कार्डियक अरेस्ट जैसी आपात स्थिति में यदि मरीज को तुरंत और सही तरीके से सीपीआर दिया जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। जागरूकता शिविर में ग्रामीणों को दुर्घटना से जुड़ी महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं से भी अवगत कराया गया। अधिकारियों ने जानकारी दी कि हादसे में घायल व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुंचाने वाले नेक नागरिक को अब पुलिस परेशान नहीं करती, बल्कि उन्हें 'राहवीर योजना' के तहत ₹25,000 तक की प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया जाता है। साथ ही, 'प्रधानमंत्री राहत योजना' के अंतर्गत सड़क दुर्घटना के पात्र घायलों को ₹1.50 लाख तक का कैशलेस (मुफ्त) उपचार उपलब्ध कराने का प्रावधान भी समझाया गया। कार्यक्रम के अंत में, अधिकारियों ने सभी उपस्थित लोगों से अपील की कि वे सड़क पर घायल पड़े व्यक्ति को देखकर कतराएं नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक की तरह आगे बढ़कर उसकी मदद करें। इसके अतिरिक्त, दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनने और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन करने की हिदायत भी दी गई। इस शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर आपातकालीन सहायता संबंधी अहम जानकारियाँ प्राप्त कीं।
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    शाजापुर के ग्राम पनवाड़ी स्थित एबी रोड के एक ब्लैक स्पॉट (डेंजर जोन) पर मंगलवार दोपहर सड़क सुरक्षा जागरूकता के लिए 'जीवन रक्षक पाठशाला' का आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य सड़क हादसों में होने वाली जनहानि को रोकना और आम नागरिकों को शुरुआती कुछ मिनटों, यानी 'गोल्डन आवर' में मददगार बनने के लिए प्रेरित करना था, जो घायल की जान बचाने के लिए सबसे अहम होते हैं। उज्जैन रेंज के डीआईजी नवनीत भसीन और शाजापुर पुलिस अधीक्षक यशपाल सिंह राजपूत के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक घनश्याम मालवीय, एसडीओपी अजय मिश्रा, रक्षित निरीक्षक वंदना सिंह, यातायात प्रभारी सौरव शुक्ला और सुनेरा थाना प्रभारी अंकित मुकाती सहित पुलिस व प्रशासन के आला अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण जीवन रक्षक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण रहा। शाजापुर जिला अस्पताल से आई चिकित्सकों की टीम ने मौके पर मौजूद ग्रामीणों को सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) देने का सही तरीका सिखाया। डॉक्टरों ने जोर देकर बताया कि किसी भी दुर्घटना या कार्डियक अरेस्ट जैसी आपात स्थिति में यदि मरीज को तुरंत और सही तरीके से सीपीआर दिया जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

जागरूकता शिविर में ग्रामीणों को दुर्घटना से जुड़ी महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं से भी अवगत कराया गया। अधिकारियों ने जानकारी दी कि हादसे में घायल व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुंचाने वाले नेक नागरिक को अब पुलिस परेशान नहीं करती, बल्कि उन्हें 'राहवीर योजना' के तहत ₹25,000 तक की प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया जाता है। साथ ही, 'प्रधानमंत्री राहत योजना' के अंतर्गत सड़क दुर्घटना के पात्र घायलों को ₹1.50 लाख तक का कैशलेस (मुफ्त) उपचार उपलब्ध कराने का प्रावधान भी समझाया गया।

कार्यक्रम के अंत में, अधिकारियों ने सभी उपस्थित लोगों से अपील की कि वे सड़क पर घायल पड़े व्यक्ति को देखकर कतराएं नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक की तरह आगे बढ़कर उसकी मदद करें। इसके अतिरिक्त, दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनने और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन करने की हिदायत भी दी गई। इस शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर आपातकालीन सहायता संबंधी अहम जानकारियाँ प्राप्त कीं।
    user_Amjad Khan
    Amjad Khan
    शाजापुर, शाजापुर, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
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