Shuru
Apke Nagar Ki App…
जो लोग कुछ नया पाने की चाह में अपना घर-परिवार और बच्चों का भविष्य दाँव पर लगा रहे हैं, उन्हें सावधान रहने की चेतावनी दी गई है।
प्रतापhttps://www.facebook.com
जो लोग कुछ नया पाने की चाह में अपना घर-परिवार और बच्चों का भविष्य दाँव पर लगा रहे हैं, उन्हें सावधान रहने की चेतावनी दी गई है।
More news from राजस्थान and nearby areas
- BPSC अध्यापिका गुंजन के कथित प्रेमी से हुई बातचीत के बाद वीणा माधवी का उल्लेख सामने आया है।1
- नीमच में आयोजित आरोह 2026 की ओपन ताइक्वांडो प्रतियोगिता में खिलाड़ियों का जबरदस्त उत्साह और जोश देखने को मिला। इस प्रतियोगिता में कुल 150 खिलाड़ियों ने भाग लिया, जहाँ कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच 68 पदक वितरित किए गए। यह आयोजन खिलाड़ियों के दमदार प्रदर्शन और ऊर्जा से भरपूर था।1
- राजस्थान पुलिस द्वारा बाल श्रम से मुक्ति हेतु भीलवाड़ा में चलाए जा रहे 'उमंग 7' अभियान के अंतर्गत, टंकी के बालाजी मंदिर क्षेत्र से चार बच्चों को भिक्षावृत्ति से मुक्त कराया गया है। बचाव के बाद, इन बच्चों को बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष चंद्रकला ओझा और सदस्य विनोद राव के सामने प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात्, बाल कल्याण समिति ने बच्चों को आश्रय प्रदान करते हुए 'एवरेस्ट शेल्टर' में रखवाया। इस संयुक्त कार्रवाई में मानव तस्करी विरोधी इकाई के उप निरीक्षक ओम प्रकाश सैन, सहायक उप निरीक्षक ईश्वर सिंह और कांस्टेबल किशन सिंह ने अहम भूमिका निभाई। साथ ही, जिला बाल संरक्षण इकाई एवं बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक धर्मराज प्रतिहार के निर्देशानुसार, चाइल्डलाइन (1098) के परियोजना समन्वयक हेमंत सिंह सिसोदिया, सुपरवाइजर आनंद कुमार सुमनारिया, नवाचार संस्थान के जिला समन्वयक जितेंद्र सिंह तोमर और रेड एंड रेस्क्यू ऑफिसर भगवत सिंह चारण ने भी इस अभियान में सहयोग किया। इस पूरी कार्रवाई की जानकारी भीलवाड़ा चाइल्ड हेल्पलाइन के हेमंत ने मंगलवार शाम करीब 4 बजे प्रदान की।1
- मध्य प्रदेश के नीमच जिले में एक अनोखा प्रदर्शन देखने को मिला, जहाँ न्याय की उम्मीद में एक पीड़ित किसान कलेक्ट्रेट पहुँच गया। इस किसान ने न्याय की आस में अपने गले में जूतों की माला पहन रखी थी, और इसी अवस्था में वह कलेक्ट्रेट में मौजूद रहा।1
- भीलवाड़ा ज़िले के कांवाखेड़ा वार्ड 27 में 9 जून को चम्बल परियोजना की पानी की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई है। कांवाखेड़ा नाले की पुलिया से गुज़र रही इस पाइपलाइन से हर रोज़ सैकड़ों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई है, क्योंकि एक तरफ जहाँ घरेलू नल कनेक्शनों में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिलता, वहीं दूसरी ओर बेवजह पानी व्यर्थ बह रहा है। इस समस्या को लेकर चम्बल जल परियोजना अधिकारी से फोन पर संपर्क कर शिकायत भी की गई थी, लेकिन इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई। कांग्रेस कच्ची बस्ती प्रकोष्ठ, भीलवाड़ा (शहर) के ज़िला उपाध्यक्ष राकेश देसाई ने संगठन के तत्वावधान में मांग की है कि इस समस्या का अतिशीघ्र समाधान किया जाए ताकि वार्ड वासियों को राहत मिल सके।1
- राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में इन दिनों दो बड़े पर्यावरणीय मुद्दे जनचर्चा के केंद्र में हैं। एक तरफ चंदेरिया क्षेत्र में लगभग 2700 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित फर्टिलाइज़र प्लांट को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों द्वारा गहरी पर्यावरणीय चिंताएं जताई जा रही हैं, तो वहीं दूसरी ओर बड़ीसादड़ी क्षेत्र में जेरोफिक्स औद्योगिक अपशिष्ट की कथित अवैध डंपिंग का मामला सरकारी जांच और प्रशासनिक कार्रवाई का विषय बना हुआ है। सरकारी दस्तावेजों, निरीक्षण रिपोर्टों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों व नागरिकों द्वारा उठाए गए सवालों ने इन मामलों को केवल औद्योगिक परियोजनाओं तक सीमित न रखकर पर्यावरणीय सुरक्षा, औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन और प्रशासनिक जवाबदेही का महत्वपूर्ण मुद्दा बना दिया है। बड़ीसादड़ी में जेरोफिक्स प्रकरण में विरोधाभास सामने आया है। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (आरएसपीसीबी) ने रेलवे एम्बैंकमेंट निर्माण के लिए जेरोफिक्स के उपयोग की अनुमति नियंत्रित और शर्तबद्ध तरीके से दी थी। इस अनुमति में भूजल, मिट्टी, लीचेट, टीसीएलपी परीक्षण और दीर्घकालीन पर्यावरणीय निगरानी सहित अनेक शर्तें शामिल थीं। हालांकि, आरएसपीसीबी के ही निरीक्षण प्रतिवेदन और क्षेत्रीय अधिकारी के पत्र में विभिन्न स्थानों पर जेरोफिक्स जैसी सामग्री पाए जाने और कथित "अवैध डंपिंग" का उल्लेख है, जिसके बाद संयुक्त जांच और वैज्ञानिक परीक्षण की मांग तेज हो गई है। यह विरोधाभास इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष बनकर उभरा है। दूसरी तरफ, चंदेरिया क्षेत्र में प्रस्तावित फर्टिलाइज़र प्लांट को लेकर भी लंबे समय से विरोध जारी है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह क्षेत्र पहले से ही औद्योगिक गतिविधियों के प्रभाव में है, और किसी भी नई परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों का निष्पक्ष मूल्यांकन आवश्यक है। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि किसी भी औद्योगिक परियोजना की स्वीकृति से पहले उसके संभावित प्रभावों का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन सार्वजनिक होना चाहिए, ताकि स्थानीय समुदाय तथ्यों के आधार पर अपनी राय रख सके। स्थानीय स्तर पर अब यह चर्चा भी सामने आ रही है कि क्या जेरोफिक्स अपशिष्ट प्रबंधन और प्रस्तावित फर्टिलाइज़र प्लांट के बीच कोई तकनीकी या नीतिगत संबंध है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा या सार्वजनिक तकनीकी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं जो दोनों मामलों के बीच प्रत्यक्ष संबंध स्थापित करते हों, फिर भी नागरिक और सामाजिक संगठन सरकार व संबंधित एजेंसियों से कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछ रहे हैं। इनमें यह सवाल भी शामिल है कि क्या प्रस्तावित फर्टिलाइज़र प्लांट में जेरोफिक्स या उससे संबंधित किसी औद्योगिक उपोत्पाद के उपयोग की कोई योजना है, और यदि हां, तो उसकी तकनीकी व पर्यावरणीय जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है। साथ ही, वे परियोजना पर स्वतंत्र वैज्ञानिक संस्थानों से विस्तृत अध्ययन, बड़ीसादड़ी जेरोफिक्स प्रकरण और प्रस्तावित प्लांट के बीच तकनीकी संबंध, तथा स्थानीय समुदाय की प्रभावी भागीदारी और पारदर्शी जनसुनवाई सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। औद्योगिक परियोजनाओं के समर्थक जहां रोजगार, निवेश और क्षेत्रीय आर्थिक विकास की बात करते हैं, वहीं विरोध कर रहे स्थानीय लोग कहते हैं कि यदि विकास की कीमत प्रदूषित जल, प्रभावित कृषि भूमि, पर्यावरणीय असंतुलन और जनस्वास्थ्य पर बढ़ते खतरे के रूप में चुकानी पड़े, तो ऐसी परियोजनाओं पर व्यापक सार्वजनिक विमर्श और वैज्ञानिक परीक्षण आवश्यक हो जाते हैं। यही कारण है कि यह बहस अब केवल एक उद्योग या एक परियोजना तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि विकास और पर्यावरणीय संतुलन के मॉडल पर भी सवाल खड़े कर रही है। जनता और सामाजिक संगठनों की प्रमुख मांगों में बड़ीसादड़ी जेरोफिक्स प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच, कथित डंपिंग स्थलों के भूजल, मिट्टी और वायु की वैज्ञानिक जांच, सभी जांच रिपोर्टों एवं पर्यावरणीय अध्ययनों को सार्वजनिक करना, प्रस्तावित फर्टिलाइज़र प्लांट से संबंधित तकनीकी एवं पर्यावरणीय जानकारी सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराना, तथा पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया में स्थानीय समुदाय, स्वतंत्र विशेषज्ञों और वैज्ञानिक संस्थानों की भागीदारी सुनिश्चित करना शामिल है। चित्तौड़गढ़ में सामने आए ये दोनों घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि औद्योगिक विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय सुरक्षा और जनस्वास्थ्य की चिंताओं को भी समान महत्व देना आवश्यक है। उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों और स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों के बीच अब आवश्यकता इस बात की है कि संबंधित विभाग, पर्यावरणीय एजेंसियां और परियोजना प्रबंधन सभी तथ्यों को पारदर्शी रूप से सार्वजनिक करें, ताकि जनता के बीच व्याप्त आशंकाओं का वैज्ञानिक और तथ्यात्मक समाधान हो सके। क्योंकि विकास तभी सार्थक माना जाएगा, जब वह स्थानीय समुदाय के जल, जंगल, जमीन और जीवन की सुरक्षा के साथ आगे बढ़े।1
- जो लोग कुछ नया पाने की चाह में अपना घर-परिवार और बच्चों का भविष्य दाँव पर लगा रहे हैं, उन्हें सावधान रहने की चेतावनी दी गई है।1
- चित्तौड़गढ़ पुलिस विभाग में एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। इस बदलाव के तहत, जिले के चार महत्वपूर्ण सर्किलों में नए अधिकारियों की तैनाती हुई है।1
- भीलवाड़ा/आकोला क्षेत्र के चांदगढ़ गांव में मंगलवार दोपहर एक तेज रफ्तार वाहन ने जमकर कहर बरपाया। बड़लियास की ओर से तेज गति से आ रही एक गाड़ी अनियंत्रित होकर चांदगढ़ निवासी भगवान लाल ओड के मकान से जा टकराई। यह टक्कर इतनी भीषण थी कि घर के बाहर बना लोहे का छपरा क्षतिग्रस्त हो गया और उसकी टीन की चादरें नीचे गिर गईं। इस घटना में मकान के बाहर बैठी एक गाय वाहन की चपेट में आने से मौके पर ही मर गई। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर एकत्र हो गए। ग्रामीणों का कहना है कि वाहन चालक नशे की हालत में था। दुर्घटना में चालक भी घायल हो गया, जिसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। सूचना मिलते ही बड़लियास थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहन को जब्त कर थाने पहुंचा दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। ग्रामीणों ने लापरवाह वाहन चालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और क्षेत्र में यातायात नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करवाने की मांग की है।2