कटिहार जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र का कौवा बारी गांव इन दिनों मक्खियों के भीषण आतंक से जूझ रहा है, जहां न कोई महामारी है और न ही कोई प्राकृतिक आपदा, फिर भी पूरा गांव परेशान है। सुबह आँख खुलते ही लोगों को घर छोड़कर भागना पड़ता है। पहली नज़र में सामान्य दिखने वाले इस गांव के घरों के अंदर कदम रखते ही दीवारों, बर्तनों और खाने-पीने की चीज़ों पर हज़ारों मक्खियों का झुंड मंडराता नज़र आता है। ग्रामीण पिछले दो से ढाई वर्षों से इस गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं, जिससे खाना बनाना, खाना खाना और यहाँ तक कि घर में बैठना भी मुश्किल हो गया है, जिसका सबसे ज़्यादा ख़ामियाज़ा छोटे बच्चों और बुजुर्गों को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के पास चल रहे एक मुर्गी फार्म से निकलने वाली गंदगी इन मक्खियों की बढ़ती संख्या का मुख्य कारण है। उन्होंने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। करीब 100 से अधिक घरों और हजारों की आबादी वाले इस गांव के लोगों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आख़िर उन्हें इस मक्खियों के आतंक से कब राहत मिलेगी, और प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब तक कार्रवाई करेगा? कौवा बारी गांव की यह परेशानी अब केवल असुविधा नहीं रही, बल्कि यह स्वास्थ्य से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा बन चुकी है। ग्रामीणों को इंतज़ार है कि प्रशासन उनकी इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है और कब तक उन्हें इस मक्खियों के आतंक से मुक्ति मिल पाती है।
कटिहार जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र का कौवा बारी गांव इन दिनों मक्खियों के भीषण आतंक से जूझ रहा है, जहां न कोई महामारी है और न ही कोई प्राकृतिक आपदा, फिर भी पूरा गांव परेशान है। सुबह आँख खुलते ही लोगों को घर छोड़कर भागना पड़ता है। पहली नज़र में सामान्य दिखने वाले इस गांव के घरों के अंदर कदम रखते ही दीवारों, बर्तनों और खाने-पीने की चीज़ों पर हज़ारों मक्खियों का झुंड मंडराता नज़र आता है। ग्रामीण पिछले दो से ढाई वर्षों से इस गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं, जिससे खाना बनाना, खाना खाना और यहाँ तक कि घर में बैठना भी मुश्किल हो गया है, जिसका सबसे ज़्यादा ख़ामियाज़ा छोटे बच्चों और बुजुर्गों को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के पास चल रहे एक मुर्गी फार्म से निकलने वाली गंदगी इन मक्खियों की बढ़ती संख्या का मुख्य कारण है। उन्होंने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। करीब 100 से अधिक घरों और हजारों की आबादी वाले इस गांव के लोगों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आख़िर उन्हें इस मक्खियों के आतंक से कब राहत मिलेगी, और प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब तक कार्रवाई करेगा? कौवा बारी गांव की यह परेशानी अब केवल असुविधा नहीं रही, बल्कि यह स्वास्थ्य से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा बन चुकी है। ग्रामीणों को इंतज़ार है कि प्रशासन उनकी इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है और कब तक उन्हें इस मक्खियों के आतंक से मुक्ति मिल पाती है।
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- कटिहार जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र का कौवा बारी गांव इन दिनों मक्खियों के भीषण आतंक से जूझ रहा है, जहां न कोई महामारी है और न ही कोई प्राकृतिक आपदा, फिर भी पूरा गांव परेशान है। सुबह आँख खुलते ही लोगों को घर छोड़कर भागना पड़ता है। पहली नज़र में सामान्य दिखने वाले इस गांव के घरों के अंदर कदम रखते ही दीवारों, बर्तनों और खाने-पीने की चीज़ों पर हज़ारों मक्खियों का झुंड मंडराता नज़र आता है। ग्रामीण पिछले दो से ढाई वर्षों से इस गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं, जिससे खाना बनाना, खाना खाना और यहाँ तक कि घर में बैठना भी मुश्किल हो गया है, जिसका सबसे ज़्यादा ख़ामियाज़ा छोटे बच्चों और बुजुर्गों को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के पास चल रहे एक मुर्गी फार्म से निकलने वाली गंदगी इन मक्खियों की बढ़ती संख्या का मुख्य कारण है। उन्होंने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। करीब 100 से अधिक घरों और हजारों की आबादी वाले इस गांव के लोगों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आख़िर उन्हें इस मक्खियों के आतंक से कब राहत मिलेगी, और प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब तक कार्रवाई करेगा? कौवा बारी गांव की यह परेशानी अब केवल असुविधा नहीं रही, बल्कि यह स्वास्थ्य से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा बन चुकी है। ग्रामीणों को इंतज़ार है कि प्रशासन उनकी इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है और कब तक उन्हें इस मक्खियों के आतंक से मुक्ति मिल पाती है।1
- कटिहार के कुरसेला थाना क्षेत्र में अवैध गैस सिलेंडर कारोबार का मामला अब गंभीर रूप ले रहा है। NH 31 पर पुलिस पिकेट पर एक टेंपो से 10 संदिग्ध कमर्शियल गैस सिलेंडर बरामद होने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। इस मामले में पुलिस ने संदिग्ध भारत गैस एजेंसी संचालक मुकेश चौधरी, गिरफ्तार किए गए दोनों व्यक्तियों, टेंपो मालिक और सिलेंडर की डिलीवरी लेने वाले व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच तेज कर दी है। पुलिस पूरे मामले की तह तक पहुंचने के लिए गैस की आपूर्ति श्रृंखला, खरीद-बिक्री की प्रक्रिया और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की गहन जांच कर रही है। बताया जा रहा है कि क्षेत्र में अवैध गैस रिफिलिंग, रीपैकिंग और फर्जी तरीके से गैस सिलेंडरों की आपूर्ति का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। बरामद 10 सिलेंडरों में इंडेन और एचपी कंपनी के सिलेंडर शामिल थे, जबकि गिरफ्तार व्यक्ति ने भारत गैस एजेंसी की 8 कमर्शियल सिलेंडरों की बुकिंग पर्ची एक ही व्यक्ति के नाम पर प्रस्तुत की थी। जांच में विभिन्न कंपनियों के सिलेंडरों पर दूसरी कंपनी की सील और पहचान चिह्न मिलने से आशंका है कि गैस भरकर उन पर भारत गैस का रैपर लगाकर बाजार में बेचा जा रहा था। इसी आधार पर भारत गैस एजेंसी संचालक मुकेश चौधरी पर मामला दर्ज किया गया है और एजेंसी की संभावित मिलीभगत की भी जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, इन अवैध सिलेंडरों की आपूर्ति होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक की जा रही थी। यह भी बताया गया है कि कुरसेला पुलिस पिकेट से मात्र 50 मीटर की दूरी पर गैस कटिंग का कारोबार भी संचालित हो रहा था, जिस पर दो माह पूर्व प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी किंचित कुमार ने दो लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज कराया था। विशेषज्ञों ने अवैध गैस रीफिलिंग और रीपैकिंग को न केवल कानूनी अपराध बताया है, बल्कि इसे आम लोगों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा करार दिया है। सुरक्षा मानकों का पालन न करने से सिलेंडरों में रिसाव, आग और विस्फोट का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जिससे भीड़भाड़ वाले स्थानों पर बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। पुलिस अधिकारियों ने इस पूरे नेटवर्क के अन्य पहलुओं की भी जांच की बात कही है, क्योंकि बड़े पैमाने पर ऐसे कारोबार में कई स्तरों पर लोगों की संलिप्तता हो सकती है। गिरफ्तार लोगों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस अन्य संदिग्ध ठिकानों की भी जांच कर रही है और इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में अवैध गैस कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है। इस बीच, क्षेत्र में यह चर्चा भी जोरों पर थी कि अवैध सिलेंडरों से लदे टेंपो के साथ पकड़े गए दोनों व्यक्तियों को रात में ही छोड़ दिया गया था। हालांकि, थानाध्यक्ष राकेश कुमार ने इन चर्चाओं का खंडन करते हुए स्पष्ट किया है कि अवैध गैस सिलेंडर बरामदगी मामले में संदिग्ध भारत गैस एजेंसी संचालक, दोनों युवकों, वाहन मालिक और गैस सिलेंडर प्राप्त करने वाले व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और पकड़े गए दोनों युवकों को न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और जैसे-जैसे अनुसंधान आगे बढ़ेगा, मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य और नाम सामने आ सकते हैं। प्रशासन ने अवैध गैस कारोबार में शामिल किसी को भी न बख्शने और पूरे नेटवर्क का खुलासा कर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने का दावा किया है।3
- मुखिया सुनील कुमार पासवान ने गढ़िया बलुआ पंचायत में विभिन्न योजनाओं की समीक्षा के लिए एक बैठक आयोजित की। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान, सभी योजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और उनकी गुणवत्ता बनाए रखने पर विशेष बल दिया गया।1
- खान सर की गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। इस घटनाक्रम के बाद उनके वकील ने मीडिया के सामने आकर कोर्टरूम के अंदर हुई कार्यवाही के बारे में जानकारी दी।1
- कटिहार जिले के अहमदाबाद दुर्गापुर पंचायत में सड़कों की गंभीर समस्या बनी हुई है। यह मुद्दा स्थानीय लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण परेशानी का कारण है।1
- राजद प्रदेश नेतृत्व ने राज्य और देश में बढ़ती भय, भूख, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, प्रश्न पत्र लीक की घटनाओं और बढ़ते अपराधों के साथ-साथ बिजली संकट को लेकर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन आयोजित किया।1
- डंडखोरा थाना पुलिस ने अवैध शराब के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की है। इस अभियान के तहत, पुलिस ने लगभग 300 लीटर देशी कच्चा जावा विनष्ट किया, और कई अवैध शराब भट्ठियों को भी नष्ट कराया गया। इस कार्रवाई में, पुलिस ने 35 लीटर देशी चुलाई शराब भी जब्त की है, जिसके साथ एक महिला को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस का यह कदम अवैध शराब के कारोबार पर शिकंजा कसने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।3
- पूर्णिया जिले के कृति आनंद नगर में, ग्रामीणों ने शमशान की भूमि पर अतिक्रमण का गंभीर आरोप लगाया है। इस मामले को लेकर आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल जांच करने और अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।1