नाबालिक बच्चों को फंसाकर उनके साथ सेक्स करने और वीडियो बनाकर बेंचने वाले आरोपी व उसकी पत्नी को पास्को कोर्ट ने सुनाई फांसी की सज़ा, नमस्कार न्यूज़ टाइम बांदा में आपका स्वागत है खबर यूपी के जनपद बांदा से है नाबालिक बच्चों को फंसाकर उनके साथ सेक्स करने और वीडियो बनाकर बेंचने वाले आरोपी व उसकी पत्नी को पास्को कोर्ट ने सुनाई फांसी की सज़ा, अक्टूबर2020 में एक व्यक्ति द्वारा इंटरपोल के जरिये आरोपी के खिलाफ पोर्न वीडियो और फोटोज के साथ सीबीआई में दर्ज कराई थी शिकायत, आरोपी रामभवन जलकल विभाग बाँदा में था जेई के पद पर तैनात, पीड़ित और आरोपी जनपद में रहने के चलते दिल्ली कोर्ट से बाँदा कोर्ट को ट्रांसफर हुआ था मामला, मामले में सीबीआई के द्वारा कोर्ट में दाखिल की गई थी चार्जशीट, शिकायतकर्ता ने एक पेनड्राइव के जरिये 34बच्चों के वीडियो सहित 679फोटोज़ सीबीआई को किया था सुपुर्द, सीबीआई ने पति रामभवन के साथ उसकी पत्नी दुर्गावती को भी बनाया था आरोपी, पास्को कोर्ट के न्यायाधीश प्रदीप मिश्रा ने मामले संगीन अपराध करार देते हुए दोनो पति पत्नी को सुनाई फांसी की सज़ा, कोर्ट ने जिलाधिकारी को पत्र जारी कर केंद्र व राज्य सरकारें दोनो मिलकर पीड़ितों को 10 10लाख की धनराशि भी देने का दिया आदेश, मामला पास्को कोर्ट द्वारा फांसी की सज़ा सुनाए जाने से जुड़ा है। बांदा से सुरेश साहू की रिपोर्ट।
नाबालिक बच्चों को फंसाकर उनके साथ सेक्स करने और वीडियो बनाकर बेंचने वाले आरोपी व उसकी पत्नी को पास्को कोर्ट ने सुनाई फांसी की सज़ा, नमस्कार न्यूज़ टाइम बांदा में आपका स्वागत है खबर यूपी के जनपद बांदा से है नाबालिक बच्चों को फंसाकर उनके साथ सेक्स करने और वीडियो बनाकर बेंचने वाले आरोपी व उसकी पत्नी को पास्को कोर्ट ने सुनाई फांसी की सज़ा, अक्टूबर2020 में एक व्यक्ति द्वारा इंटरपोल के जरिये आरोपी
के खिलाफ पोर्न वीडियो और फोटोज के साथ सीबीआई में दर्ज कराई थी शिकायत, आरोपी रामभवन जलकल विभाग बाँदा में था जेई के पद पर तैनात, पीड़ित और आरोपी जनपद में रहने के चलते दिल्ली कोर्ट से बाँदा कोर्ट को ट्रांसफर हुआ था मामला, मामले में सीबीआई के द्वारा कोर्ट में दाखिल की गई थी चार्जशीट, शिकायतकर्ता ने एक पेनड्राइव के जरिये 34बच्चों के वीडियो सहित 679फोटोज़ सीबीआई को किया था सुपुर्द, सीबीआई ने पति रामभवन
के साथ उसकी पत्नी दुर्गावती को भी बनाया था आरोपी, पास्को कोर्ट के न्यायाधीश प्रदीप मिश्रा ने मामले संगीन अपराध करार देते हुए दोनो पति पत्नी को सुनाई फांसी की सज़ा, कोर्ट ने जिलाधिकारी को पत्र जारी कर केंद्र व राज्य सरकारें दोनो मिलकर पीड़ितों को 10 10लाख की धनराशि भी देने का दिया आदेश, मामला पास्को कोर्ट द्वारा फांसी की सज़ा सुनाए जाने से जुड़ा है। बांदा से सुरेश साहू की रिपोर्ट।
- बांदा महुआ ब्लॉक के अंतर्गत पिथोराबाद में रसद दुकानों का निर्माण में ग्राम प्रधान व सदस्य ने मिलकर जिलाधिकारी जे.रिभा से सचिव शशि प्रकाश के ऊपर दबंगई के बल पर कार्य करने के लगाए आरोप1
- #Apkiawajdigital बांदा/चित्रकूट | विशेष संवाददाता इंसानियत को शर्मसार करने वाले देश के सबसे बड़े 'चाइल्ड एब्यूज' कांड में शुक्रवार को न्याय का वह हथौड़ा चला, जिसकी गूँज पूरे देश में सुनाई दी। बांदा की विशेष पॉक्सो अदालत ने 34 मासूम बच्चों के साथ कुकर्म करने, उनके अश्लील वीडियो बनाकर विदेशी पोर्न साइट्स को बेचने वाले मुख्य आरोपी रामभवन और साक्ष्यों को मिटाने में उसकी मददगार पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इस मामले को 'जघन्यतम' श्रेणी में रखते हुए स्पष्ट किया कि मासूमों के बचपन को नीलाम करने वालों के लिए समाज में कोई जगह नहीं है। CBI की चार्जशीट ने खोली दरिंदगी की परतें चित्रकूट में सिंचाई विभाग में तैनात रहा कनिष्ठ सहायक रामभवन (निलंबित) वर्षों से मासूमों को अपनी हवस का शिकार बना रहा था। मामला तब खुला जब 2020 में सीबीआई ने इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। जांच में सामने आया कि रामभवन न केवल बच्चों का शारीरिक शोषण करता था, बल्कि डार्क वेब और पोर्न साइट्स के जरिए उनकी अस्मत का सौदा भी करता था। उसकी पत्नी दुर्गावती पर गवाहों को धमकाने और सबूतों से छेड़छाड़ के गंभीर आरोप सिद्ध हुए, जिसके चलते कोर्ट ने उसे भी मृत्युदंड का भागीदार माना। न्याय की जीत: पीड़ितों को 10-10 लाख का मरहम विशेष न्यायाधीश ने फैसले के साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ा निर्देश दिया है कि सभी 34 पीड़ित बच्चों को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता तत्काल प्रदान की जाए। अधिवक्ताओं के अनुसार, गवाहों के टूटने और डराने-धमकाने के बावजूद सीबीआई की ठोस पैरवी ने दोषियों को फंदे तक पहुँचाया है। निष्कर्ष: "यह फैसला केवल एक सजा नहीं, बल्कि उन 34 परिवारों के घावों पर मरहम है, जिनका बचपन इस दरिंदे ने उजाड़ दिया था। बांदा कोर्ट का यह निर्णय देश भर के चाइल्ड एब्यूज मामलों में नजीर बनेगा।"1
- Post by Mamta chaurasiya1
- नानी के यहाँ शादी समारोह में शामिल होने आई थी मासूम,सड़क किनारे खेलने के दौरान हुआ हादसा,घटना की जानकारी होते ही ग्रामीणों ने बाँदा टांडा मार्ग पर लगाया जाम,सूचना मिलते ही मौके पर पहुँची पुलिस,ग्रामीणों को समझाबुझाकर खुलवाया जाम,पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा, मामला तिंदवारी थाना के माटा गांव का।1
- बांदा की विशेष पॉक्सो अदालत ने आज एक ऐतिहासिक और कठोर फैसला सुनाते हुए बच्चों के खिलाफ जघन्य अपराध करने वाले सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर (जेई) रामभवन और उनकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाई है। यह फैसला न केवल न्याय की जीत है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि मासूम बच्चों के साथ हैवानियत करने वालों को कोई बख्शीश नहीं मिलेगी। 31 अक्टूबर 2020 को चित्रकूट जिले में सिंचाई विभाग में तैनात जेई रामभवन पर 3 से 18 वर्ष के कम से कम 33 मासूम बच्चों के साथ दुष्कर्म करने, उनके अश्लील वीडियो बनाकर डार्क वेब और इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड करने का मामला सामने आया था। आरोपी ने इन वीडियो को लगभग 47 देशों में बेचकर और प्रसारित करके अपराध की कमाई की थी। जांच में बड़ा खुलासा हुआ कि इस क्रूर कृत्य में उसकी पत्नी दुर्गावती भी पूरी तरह शामिल थी। सीबीआई ने इस संवेदनशील मामले की जांच संभाली, इंटरपोल और विदेशी एजेंसियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। सीबीआई ने 79 गवाहों (जिनमें 29 पीड़ित बच्चे शामिल) के बयान दर्ज किए, डिजिटल साक्ष्य जब्त किए और घटनास्थल से महत्वपूर्ण सबूत बरामद किए। चार्जशीट दाखिल होने के बाद बांदा की विशेष पॉक्सो अदालत में लंबी सुनवाई चली। विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह अपराध "सबसे दुर्लभ में दुर्लभ" श्रेणी का है। अदालत ने दोनों पति-पत्नी को मौत की सजा सुनाई और आदेश दिया कि उन्हें "मरते दम तक फंदे पर लटकाया जाए"। साथ ही, राज्य सरकार को निर्देश दिए गए कि प्रत्येक पीड़ित बच्चे को 10-10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाए। आरोपी के पास से बरामद धनराशि भी पीड़ित बच्चों में वितरित की जाए। यह फैसला पिछले 6 महीनों में इस अदालत द्वारा सुनाई गई तीसरी फांसी की सजा है, जो बच्चों के खिलाफ अपराधों पर न्यायपालिका के सख्त रवैये को दर्शाता है। सीबीआई के अधिकारी और उनके अधिवक्ता फैसले के समय मौजूद रहे। शासकीय अधिवक्ता सौरभ सिंह ने पैरवी में अहम भूमिका निभाई। यह फैसला उन 33 निर्दोष बच्चों के लिए न्याय की एक किरण है, जिनकी मासूमियत को कुचलने की कोशिश की गई थी। समाज को ऐसे राक्षसों से सतर्क रहने और बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि बनाने की जरूरत है।1
- बांदा देहात कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत के ग्राम पंचायत गुरेह गांव के पास एक अनियंत्रित ट्रक ट्रेलर एक मकान के अंदर ज घुसा घर में सो रहे एक वृद्ध व्यक्ति की मौत हो गई , घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने परिजनों के साथ रोड पर जाम लगा दिया , मौके पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को आश्वासन देकर समझा बुझाकर शांत करवाया तब जाकर परिजनों ने जाम खोला । मृतक का नाम सहादेव पुत्र चुनुबाद 53 वर्ष बताई गई है।1
- Singh1
- #Apkiawajdigital बांदा/चित्रकूट | इंसानियत को शर्मसार करने वाले बांदा के बहुचर्चित 'चाइल्ड एब्यूज' मामले में शुक्रवार को विशेष पॉक्सो अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने 34 मासूम बच्चों का यौन शोषण करने और उनके अश्लील वीडियो पोर्न साइट्स पर बेचने के दोषी मुख्य अभियुक्त रामभवन और उसकी सहयोगी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत के इस फैसले ने समाज में एक कड़ा संदेश दिया है कि बच्चों के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों के लिए कानून में कोई माफी नहीं है। साक्ष्यों से छेड़छाड़ पर पत्नी को भी सजा-ए-मौत चित्रकूट में सिंचाई विभाग में तैनात रहा रामभवन पिछले कुछ वर्षों से निलंबित चल रहा था। सीबीआई ने 2020 में इस मामले की कमान संभाली थी और चार्जशीट दाखिल की थी। जांच में पाया गया कि रामभवन मासूमों को अपनी हवस का शिकार बनाता था, वहीं उसकी पत्नी दुर्गावती साक्ष्यों को मिटाने और गवाहों को धमकाने में बराबर की साझीदार थी। अदालत ने दोनों की भूमिका को अक्षम्य मानते हुए फांसी के फंदे तक पहुँचाया। प्रमुख बिंदु: एक नजर में दोषी: रामभवन (निलंबित कनिष्ठ सहायक, सिंचाई विभाग) और उसकी पत्नी दुर्गावती। जुर्म: 34 मासूमों से कुकर्म, अश्लील वीडियो बनाना और उन्हें डार्क वेब/पोर्न साइट्स पर बेचना। मुआवजा: माननीय न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि प्रत्येक पीड़ित बच्चे को 10-10 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाए। CBI की भूमिका: दिल्ली से आई सीबीआई टीम ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया था। न्यायालय की टिप्पणी मामले की गंभीरता और दरिंदगी की सीमा को देखते हुए, पॉक्सो कोर्ट ने इसे 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' श्रेणी के करीब माना। अधिवक्ताओं के अनुसार, ट्रायल के दौरान पेश किए गए साक्ष्य इतने पुख्ता थे कि बचाव पक्ष के पास कोई ठोस दलील नहीं बची थी।1