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भीलवाड़ा ज़िले के कांवाखेड़ा वार्ड 27 में 9 जून को चम्बल परियोजना की पानी की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई है। कांवाखेड़ा नाले की पुलिया से गुज़र रही इस पाइपलाइन से हर रोज़ सैकड़ों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई है, क्योंकि एक तरफ जहाँ घरेलू नल कनेक्शनों में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिलता, वहीं दूसरी ओर बेवजह पानी व्यर्थ बह रहा है। इस समस्या को लेकर चम्बल जल परियोजना अधिकारी से फोन पर संपर्क कर शिकायत भी की गई थी, लेकिन इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई। कांग्रेस कच्ची बस्ती प्रकोष्ठ, भीलवाड़ा (शहर) के ज़िला उपाध्यक्ष राकेश देसाई ने संगठन के तत्वावधान में मांग की है कि इस समस्या का अतिशीघ्र समाधान किया जाए ताकि वार्ड वासियों को राहत मिल सके।
Rakesh Desai
भीलवाड़ा ज़िले के कांवाखेड़ा वार्ड 27 में 9 जून को चम्बल परियोजना की पानी की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई है। कांवाखेड़ा नाले की पुलिया से गुज़र रही इस पाइपलाइन से हर रोज़ सैकड़ों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई है, क्योंकि एक तरफ जहाँ घरेलू नल कनेक्शनों में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिलता, वहीं दूसरी ओर बेवजह पानी व्यर्थ बह रहा है। इस समस्या को लेकर चम्बल जल परियोजना अधिकारी से फोन पर संपर्क कर शिकायत भी की गई थी, लेकिन इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई। कांग्रेस कच्ची बस्ती प्रकोष्ठ, भीलवाड़ा (शहर) के ज़िला उपाध्यक्ष राकेश देसाई ने संगठन के तत्वावधान में मांग की है कि इस समस्या का अतिशीघ्र समाधान किया जाए ताकि वार्ड वासियों को राहत मिल सके।
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- भीलवाड़ा नगर निगम के वार्ड नंबर 27 में मुख्य मार्ग पर, एक पुलिस चौकी से कुछ ही दूरी पर, पीने के पानी की पाइपलाइन जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो गई है। 9 जून को सामने आई जानकारी के अनुसार, हर रोज़ पानी की सप्लाई होने के बावजूद, इन लीकेज के कारण हज़ारों लीटर पीने का पानी बेकार जा रहा है और नालियों में बह रहा है। इस समस्या के संबंध में जिला प्रशासन और चंबल परियोजना भीलवाड़ा को कई बार शिकायतें की गई हैं, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। विशेष रूप से, 15 दिन पूर्व की गई शिकायत का भी अब तक समाधान नहीं हुआ है। आरोप है कि संबंधित विभाग अपनी नैतिक जिम्मेदारी से काम नहीं कर रहे हैं, जिसके चलते मूल्यवान पेयजल की बर्बादी लगातार जारी है।2
- चित्तौड़गढ़ के बड़ीसादड़ी क्षेत्र में अपशिष्ट पदार्थों को हटाने के लिए जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। 8 जून, सोमवार को सहकारिता एवं नागरिक उड्डयन मंत्री गौतम दक की मौजूदगी में जिला प्रशासन, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के अधिकारियों और संघर्ष समिति के सदस्यों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में जनस्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया गया कि वर्षा ऋतु से पहले कैचमेंट क्षेत्र को पूरी तरह से साफ किया जाएगा। मंत्री गौतम दक ने हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अपशिष्ट पदार्थ हटाने के काम में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि मंगलवार से ही डंपरों की संख्या बढ़ाकर मलबे को युद्धस्तर पर हटाया जाए, क्योंकि यह आमजन के स्वास्थ्य से जुड़ा एक अत्यंत संवेदनशील विषय है, जिसकी नियमित निगरानी आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को मौके पर जाकर निरीक्षण करने और वर्षा प्रारंभ होने से पहले कैचमेंट एरिया से मलबा हटाने को पहली प्राथमिकता देने को कहा। बैठक में राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारियों को लिए गए सैंपलों की रिपोर्ट शीघ्र उपलब्ध कराने और लापरवाही पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों, जिनमें डॉ. विमल नागौरी, निवर्तमान पालिका उपाध्यक्ष मुस्तफा अली बोहरा, रणजीत झाला, प्रवीण दक और पूर्व विधायक प्रकाश चौधरी शामिल थे, ने अपनी चिंताओं और सुझावों से प्रशासन को अवगत कराया, जिस पर मंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों ने समाधानात्मक कार्रवाई का भरोसा दिलाया। जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने भी हिंदुस्तान जिंक की टीम को मंगलवार से अधिकतम संसाधनों के साथ मौके पर पहुंचकर अपशिष्ट हटाने का काम तेज करने के निर्देश दिए और समिति को लगातार निगरानी व प्रभावी कार्रवाई का आश्वासन दिया। हालांकि, जहां एक ओर मंत्री गौतम दक ने प्रशासन को निर्देश दिए हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने आरोप लगाए हैं और 'जहर मुक्त बड़ीसादड़ी संघर्ष समिति' में अभी भी संशय बना हुआ है।1
- BPSC अध्यापिका गुंजन के कथित प्रेमी से हुई बातचीत के बाद वीणा माधवी का उल्लेख सामने आया है।1
- चित्तौड़गढ़ में धर्म, संगठन और छात्र राजनीति से जुड़ी कई गतिविधियां सामने आईं। इन प्रमुख घटनाओं में महाकाल सेना में नई नियुक्तियां की गईं, लक्ष्मीनाथ मंदिर में कृष्ण जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया, और एनएसयूआई (NSUI) ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया।1
- राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा मंगलवार को बेगूं उपखंड क्षेत्र के उत्थन कलां गांव में जे के सीमेंट लिमिटेड की प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजना को पर्यावरणीय स्वीकृति (NOC) देने के लिए जनसुनवाई आयोजित की गई। इस जनसुनवाई की अध्यक्षता एसडीएम गंगरार पुनीत कुमार ने की, जिसमें बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण उपस्थित रहे। मेसर्स जे. के. सीमेंट लिमिटेड द्वारा बेगूं उपखंड क्षेत्र के चन्दाखेडी, ढोरिया, ठुकराई, परख्या खेडी, पालका, उत्थन कला, धारला, शादी और रायता गांवों में प्रस्तावित लाइम स्टोन उत्पादन परियोजना के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति मांगी गई है। यह जनसुनवाई परियोजना से संबंधित पर्यावरणीय प्रभावों और ग्रामीणों की चिंताओं को सुनने के उद्देश्य से आयोजित हुई। जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने परियोजना के संभावित पर्यावरणीय प्रभावों, जल स्रोतों, कृषि भूमि, रोजगार और स्थानीय जनजीवन पर पड़ने वाले असर को लेकर अपने विचार प्रस्तुत किए। पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया के तहत प्राप्त इन सुझावों और आपत्तियों को अंतिम प्रतिवेदन में शामिल कर सक्षम प्राधिकारी को भेजा जाएगा, जिसके आधार पर परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरी पर निर्णय लिया जाएगा। इस मौके पर एसडीएम गंगरार पुनीत कुमार के साथ आर ओ आरएसपीसीबी चित्तौड़गढ़ आशीष बोरासी, डीएसपी अंजलि सिंह, तहसीलदार गोपाल जीनगर, बीडीओ सुरेश गिरी गोस्वामी सहित आसपास क्षेत्र के सभी ग्रामीण और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।2
- भीलवाड़ा के आकोला क्षेत्र में आमल्दा से चैनपुरा माइन्स तक करीब 4 किलोमीटर लंबी सड़क पिछले कई वर्षों से जर्जर हालत में है, जिससे ग्रामीण बेहद परेशान हैं और आए दिन छोटे-बड़े हादसे हो रहे हैं। यह सड़क जगह-जगह से टूट चुकी है, जिससे वाहन चालकों और राहगीरों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि लगभग दो महीने पहले सड़क पर पैचवर्क का काम शुरू किया गया था, लेकिन ठेकेदार ने इसे अधूरा छोड़ दिया। काम केवल आमल्दा चौराहे से महलों का मानपुरा तक ही किया गया, और बाकी सड़क पर काम पूरा नहीं हो सका। कुछ जगहों पर तो गड्ढे इतने बड़े हो गए हैं कि दुर्घटनाओं का खतरा और भी बढ़ गया है, खासकर रात के समय वाहन चालकों को आवागमन में विशेष दिक्कतें आती हैं। यह महत्वपूर्ण मार्ग क्षेत्र के लगभग 8 से 10 गांवों को जोड़ता है, और प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग इसी बदहाल सड़क से गुजरते हैं। सड़क की खराब स्थिति के कारण बाइक सवारों सहित अन्य सभी वाहन चालकों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से जल्द से जल्द इस सड़क का निर्माण और मरम्मत कार्य पूरा करवाने की पुरजोर मांग की है।4
- राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में इन दिनों दो बड़े पर्यावरणीय मुद्दे जनचर्चा के केंद्र में हैं। एक तरफ चंदेरिया क्षेत्र में लगभग 2700 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित फर्टिलाइज़र प्लांट को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों द्वारा गहरी पर्यावरणीय चिंताएं जताई जा रही हैं, तो वहीं दूसरी ओर बड़ीसादड़ी क्षेत्र में जेरोफिक्स औद्योगिक अपशिष्ट की कथित अवैध डंपिंग का मामला सरकारी जांच और प्रशासनिक कार्रवाई का विषय बना हुआ है। सरकारी दस्तावेजों, निरीक्षण रिपोर्टों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों व नागरिकों द्वारा उठाए गए सवालों ने इन मामलों को केवल औद्योगिक परियोजनाओं तक सीमित न रखकर पर्यावरणीय सुरक्षा, औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन और प्रशासनिक जवाबदेही का महत्वपूर्ण मुद्दा बना दिया है। बड़ीसादड़ी में जेरोफिक्स प्रकरण में विरोधाभास सामने आया है। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (आरएसपीसीबी) ने रेलवे एम्बैंकमेंट निर्माण के लिए जेरोफिक्स के उपयोग की अनुमति नियंत्रित और शर्तबद्ध तरीके से दी थी। इस अनुमति में भूजल, मिट्टी, लीचेट, टीसीएलपी परीक्षण और दीर्घकालीन पर्यावरणीय निगरानी सहित अनेक शर्तें शामिल थीं। हालांकि, आरएसपीसीबी के ही निरीक्षण प्रतिवेदन और क्षेत्रीय अधिकारी के पत्र में विभिन्न स्थानों पर जेरोफिक्स जैसी सामग्री पाए जाने और कथित "अवैध डंपिंग" का उल्लेख है, जिसके बाद संयुक्त जांच और वैज्ञानिक परीक्षण की मांग तेज हो गई है। यह विरोधाभास इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष बनकर उभरा है। दूसरी तरफ, चंदेरिया क्षेत्र में प्रस्तावित फर्टिलाइज़र प्लांट को लेकर भी लंबे समय से विरोध जारी है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह क्षेत्र पहले से ही औद्योगिक गतिविधियों के प्रभाव में है, और किसी भी नई परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों का निष्पक्ष मूल्यांकन आवश्यक है। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि किसी भी औद्योगिक परियोजना की स्वीकृति से पहले उसके संभावित प्रभावों का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन सार्वजनिक होना चाहिए, ताकि स्थानीय समुदाय तथ्यों के आधार पर अपनी राय रख सके। स्थानीय स्तर पर अब यह चर्चा भी सामने आ रही है कि क्या जेरोफिक्स अपशिष्ट प्रबंधन और प्रस्तावित फर्टिलाइज़र प्लांट के बीच कोई तकनीकी या नीतिगत संबंध है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा या सार्वजनिक तकनीकी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं जो दोनों मामलों के बीच प्रत्यक्ष संबंध स्थापित करते हों, फिर भी नागरिक और सामाजिक संगठन सरकार व संबंधित एजेंसियों से कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछ रहे हैं। इनमें यह सवाल भी शामिल है कि क्या प्रस्तावित फर्टिलाइज़र प्लांट में जेरोफिक्स या उससे संबंधित किसी औद्योगिक उपोत्पाद के उपयोग की कोई योजना है, और यदि हां, तो उसकी तकनीकी व पर्यावरणीय जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है। साथ ही, वे परियोजना पर स्वतंत्र वैज्ञानिक संस्थानों से विस्तृत अध्ययन, बड़ीसादड़ी जेरोफिक्स प्रकरण और प्रस्तावित प्लांट के बीच तकनीकी संबंध, तथा स्थानीय समुदाय की प्रभावी भागीदारी और पारदर्शी जनसुनवाई सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। औद्योगिक परियोजनाओं के समर्थक जहां रोजगार, निवेश और क्षेत्रीय आर्थिक विकास की बात करते हैं, वहीं विरोध कर रहे स्थानीय लोग कहते हैं कि यदि विकास की कीमत प्रदूषित जल, प्रभावित कृषि भूमि, पर्यावरणीय असंतुलन और जनस्वास्थ्य पर बढ़ते खतरे के रूप में चुकानी पड़े, तो ऐसी परियोजनाओं पर व्यापक सार्वजनिक विमर्श और वैज्ञानिक परीक्षण आवश्यक हो जाते हैं। यही कारण है कि यह बहस अब केवल एक उद्योग या एक परियोजना तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि विकास और पर्यावरणीय संतुलन के मॉडल पर भी सवाल खड़े कर रही है। जनता और सामाजिक संगठनों की प्रमुख मांगों में बड़ीसादड़ी जेरोफिक्स प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच, कथित डंपिंग स्थलों के भूजल, मिट्टी और वायु की वैज्ञानिक जांच, सभी जांच रिपोर्टों एवं पर्यावरणीय अध्ययनों को सार्वजनिक करना, प्रस्तावित फर्टिलाइज़र प्लांट से संबंधित तकनीकी एवं पर्यावरणीय जानकारी सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराना, तथा पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया में स्थानीय समुदाय, स्वतंत्र विशेषज्ञों और वैज्ञानिक संस्थानों की भागीदारी सुनिश्चित करना शामिल है। चित्तौड़गढ़ में सामने आए ये दोनों घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि औद्योगिक विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय सुरक्षा और जनस्वास्थ्य की चिंताओं को भी समान महत्व देना आवश्यक है। उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों और स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों के बीच अब आवश्यकता इस बात की है कि संबंधित विभाग, पर्यावरणीय एजेंसियां और परियोजना प्रबंधन सभी तथ्यों को पारदर्शी रूप से सार्वजनिक करें, ताकि जनता के बीच व्याप्त आशंकाओं का वैज्ञानिक और तथ्यात्मक समाधान हो सके। क्योंकि विकास तभी सार्थक माना जाएगा, जब वह स्थानीय समुदाय के जल, जंगल, जमीन और जीवन की सुरक्षा के साथ आगे बढ़े।1
- जो लोग कुछ नया पाने की चाह में अपना घर-परिवार और बच्चों का भविष्य दाँव पर लगा रहे हैं, उन्हें सावधान रहने की चेतावनी दी गई है।1
- शहर के सुभाष नगर थाना क्षेत्र में प्रेम विवाह को लेकर चल रहा दो परिवारों के बीच का विवाद सोमवार रात्रि करीब 10 बजे खूनी संघर्ष में बदल गया। इस दौरान एक युवक को बातचीत के बहाने बहला-फुसलाकर बुलाया गया और उस पर चाकू से हमला कर दिया गया, जिसमें दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना की सूचना मिलते ही सीओ सदर भवानी सिंह मौके पर पहुंचे और मामले की जानकारी लेकर जांच शुरू करवाई। घायलों को उपचार के लिए महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घायल युवकों में से एक के परिजन मोहम्मद असलम ने मंगलवार सुबह करीब 10 बजे बताया कि उनके भतीजे नदीम ने कुछ समय पहले प्रेम विवाह किया था, जिसके बाद से ही दोनों परिवारों के बीच विवाद चल रहा था। सोमवार की रात दूसरे पक्ष के लोगों ने नदीम को बातचीत के लिए बुलाया था और उसके साथ उनका बेटा फरीन भी गया था। वहां पहुंचते ही घात लगाए बैठे आरोपियों ने दोनों पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। तत्काल घायलों को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां नदीम की हालत अत्यधिक गंभीर होने के कारण प्राथमिक उपचार के बाद उसे ट्रॉमा वार्ड से हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। पुलिस इस पूरे मामले की गहनता से तफ्तीश कर रही है।1