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बरेली के खुदागंज थाना क्षेत्र के बखौरा गांव में 28 वर्षीय विवाहिता शिवानी की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस ने फरार चल रहे उसके पति अंकित और सास को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है। मायके पक्ष ने आरोप लगाया था कि चार पहिया वाहन की मांग पूरी न होने पर शिवानी की हत्या कर उसके शव को फंदे से लटका दिया गया था। पुलिस ने इस मामले में शिकायत मिलने के बाद मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। फिलहाल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर इस प्रकरण में आगे की कार्रवाई जारी है।
सचिन मिश्रा
बरेली के खुदागंज थाना क्षेत्र के बखौरा गांव में 28 वर्षीय विवाहिता शिवानी की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस ने फरार चल रहे उसके पति अंकित और सास को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है। मायके पक्ष ने आरोप लगाया था कि चार पहिया वाहन की मांग पूरी न होने पर शिवानी की हत्या कर उसके शव को फंदे से लटका दिया गया था। पुलिस ने इस मामले में शिकायत मिलने के बाद मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। फिलहाल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर इस प्रकरण में आगे की कार्रवाई जारी है।
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- बरेली के भोजिपुरा इलाके से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ गौकशी के एक शातिर बदमाश को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तारी के दौरान मौके से भारी मात्रा में गौकशी के उपकरण भी बरामद किए गए हैं।1
- बरेली के सुभाषनगर क्षेत्र के रोदी गांव में एक युवती की संदिग्ध मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है। मृतका रूबी की मां सोनवती पत्नी राजू ने आरोप लगाया है कि मोहल्ले के ही सूरज पुत्र निरंजन ने उनकी बेटी को प्रेमजाल में फंसाकर जहर दिया। मां ने अधिकारियों को दिए शिकायती पत्र में बताया कि रूबी और सूरज के बीच लंबे समय से संबंध थे, जिसकी जानकारी परिवार को नहीं थी। जब परिवार ने रूबी का विवाह कहीं और तय कर दिया, तो सूरज ने कथित तौर पर रूबी को 28 अप्रैल की सुबह अपने साथ मरने की बात कहकर घर से बुलाया और गंगा किनारे ले जाकर जहर खिला दिया। घर लौटने पर रूबी की हालत बिगड़ी, जिसके बाद उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों के अनुसार, चिकित्सकीय जांच में जहर सेवन की पुष्टि होने के बाद पुलिस को सूचना दी गई और शव का पोस्टमार्टम भी कराया गया। मृतका की मां ने यह भी आरोप लगाया है कि घटना के बाद भी आरोपी सूरज सोशल मीडिया पर मृतका की तस्वीरें और पोस्ट डालकर परिवार का मजाक उड़ा रहा है और खुलेआम कह रहा है कि उसने ही रूबी को जहर दिया था। इसके अलावा, शिकायत में कहा गया है कि आरोपी अब मृतका की 16 वर्षीय छोटी बहन तनु को रास्ते में रोककर अश्लील टिप्पणियां करता है और जान से मारने की धमकी देता है, जिससे पीड़ित परिवार लगातार भय और दबाव का सामना कर रहा है। सोनवती ने यह भी बताया कि 9 जून की सुबह सूरज, उसके परिजन और कुछ अन्य लोग उनके घर में घुस आए और परिवार पर हमला कर दिया, जिससे कई लोगों को चोटें आईं और घायलों का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया है। पीड़ित परिवार ने पुलिस प्रशासन से इस मामले में रिपोर्ट दर्ज करने, आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।1
- बरेली के थाना इज्जत नगर क्षेत्र से एक मामला सामने आया है, जिसमें एक पीड़ित ने दबंगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस पूरे मामले को लेकर पीड़ित ने प्रशासन से इंसाफ की गुहार लगाई है।1
- बरेली में कैनविज क्रेडिट कोऑपरेटिव कंपनी में निवेश की गई अपनी रकम वापस न मिलने से परेशान निवेशकों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। पीड़ितों ने जिलाधिकारी को संबोधित एक ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा है, जिसमें उन्होंने मामले की विशेष जांच दल (एसआईटी) से हो रही कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। निवेशकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई, तो वे 15 जून से कलेक्ट्रेट परिसर में बेमियादी धरना और आमरण अनशन शुरू करेंगे। पीड़ितों का आरोप है कि कंपनी के संचालकों और एजेंटों ने कम समय में धनराशि दोगुनी करने तथा आकर्षक ब्याज का लालच देकर उनसे करोड़ों रुपये निवेश कराए। उनका कहना है कि कई बार शिकायतें दिए जाने के बावजूद कोई अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई और कई मामलों में तो पीड़ितों को मुकदमों की प्रगति की जानकारी तक नहीं दी जा रही है। पीड़ितों की ओर से अपनी बात रख रहे सुरेंद्र कुमार ने आरोप लगाया कि कंपनी से जुड़े लोगों ने विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों और मध्यमवर्गीय परिवारों को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर निवेश कराया, और उनका दावा है कि इस घोटाले की वास्तविक राशि मीडिया में सामने आ रहे आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव के कारण कई परिवार गंभीर संकट में हैं। एक अन्य पीड़िता सपना सिंह ने बताया कि कंपनी के एजेंटों ने उनके परिवार और रिश्तेदारों को 22 माह में रकम दोगुनी होने और प्रतिमाह ब्याज मिलने का भरोसा देकर निवेश कराया था, लेकिन निवेश के बदले दिए गए कई चेक बाद में बाउंस हो गए। उनका कहना है कि अब उन्हें रकम मांगने पर केवल आश्वासन मिलता है और धमकियाँ भी मिल रही हैं। सुरेंद्र कुमार ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए, आरोपितों और उनसे जुड़े लोगों की चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों तथा अन्य वित्तीय लेनदेन की गहन जांच कराई जाए और पीड़ितों की धनराशि वापस दिलाई जाए। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. के.पी. सिंह, जो आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं, ने प्रशासन से पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में अभी तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है और यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो 15 जून से प्रस्तावित आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। पीड़ितों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि मामले में दर्ज मुकदमों की स्थिति सार्वजनिक की जाए, आरोपितों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए और निवेशकों की फंसी हुई रकम वापस दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। इस शिकायत के दौरान के.पी. सिंह, प्रमोद कुमार, अनुज भारती, सूरजपाल, ज्ञानप्रकाश, सक्सेना, मिश्री लाल, वीरेंद्र पाल, पवन सक्सेना, सुरेंद्र, अमन पटेल, विमला देवी, सपना सिंह, दुलारो देवी, पूनम, रामलली, अंकित पटेल, कमल कुमार, आरती, लता पटेल और पंकज त्रिपाठी सहित कई अन्य लोग मौजूद थे।2
- बरेली की थाना बारादरी पुलिस ने एक वांछित अभियुक्त मोईन अली को गिरफ्तार किया है, जिस पर फर्जी कंपनी बनाकर बेनामी धनराशि को हवाला के माध्यम से संदिग्ध और अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल करने का आरोप है। पुलिस ने अभियुक्त के कब्जे से ₹3 लाख नकद, एक मोबाइल फोन और कंपनी संचालन से संबंधित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। यह मामला दिनांक 07.06.2026 को थाना बारादरी में मु0अ0सं0 752/2026 की धाराओं 61(2)/111/318(4)/336(3)/338/340(2) बीएनएस के तहत पंजीकृत किया गया था। इसमें मोईन अली द्वारा फर्जी कंपनी के जरिए बैंक खाते संचालित कर बेनामी धनराशि प्राप्त करने और फिर उसे हवाला नेटवर्क के माध्यम से विभिन्न व्यक्तियों तक पहुंचाने का खुलासा हुआ था। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बरेली ने अभियुक्त की गिरफ्तारी के लिए एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया था। पुलिस टीम ने मुखबिर की सूचना पर दिनांक 09.06.2026 को हज्जियापुर मोड़ स्थित कोल्ड डिपो के पास से मोईन अली को पकड़ा। उसके पास से ₹3 लाख रुपये नकद, एक मोबाइल फोन, और के.जी.एन. एंटरप्राइजेज का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, मंडी समिति लाइसेंस, जीएसटी रिटर्न फॉर्म 3B सहित अन्य व्यावसायिक अभिलेख बरामद हुए। पूछताछ में मोईन अली ने बताया कि उसके परिचित जमीर के दूरभाष के माध्यम से उसकी जीशान अली नामक व्यक्ति से बात हुई थी। जीशान अली ने उसे फर्जी कंपनी बनाकर अपने नाम से बैंक खाता खुलवाने और उस खाते में आने वाली बड़ी धनराशि को कमीशन के बदले अलग-अलग लोगों तक पहुंचाने का प्रस्ताव दिया था। इसी उद्देश्य से उसने अपने नाम से "के.जी.एन. एंटरप्राइजेज" नामक कंपनी स्थापित की, जिसका कार्यालय आशुतोष सिटी, पीलीभीत बाईपास रोड, बरेली में खोला गया था। कंपनी का उद्देश्य वास्तविक व्यापार करना नहीं था, बल्कि बैंक खातों से धनराशि प्राप्त कर उसे टोकन प्रणाली और हवाला नेटवर्क के जरिए विभिन्न व्यक्तियों तक पहुंचाना था। उसने बताया कि वह पहले दिल्ली जाकर व्हाट्सएप पर प्राप्त टोकन के आधार पर संबंधित व्यक्तियों को धनराशि देता था, और बाद में हवाला कारोबार से जुड़े व्यक्तियों के माध्यम से धन का लेन-देन होने लगा। अभियुक्त को अपने खिलाफ मुकदमा दर्ज होने की जानकारी मिल गई थी और वह बरेली छोड़कर जाने की तैयारी में था, तभी पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार अभियुक्त को आवश्यक विधिक कार्रवाई के बाद माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है।1
- उत्तर प्रदेश के बरेली में कैनविज क्रेडिट कोऑपरेटिव कंपनी में निवेश की गई अपनी रकम वापस न मिलने से आक्रोशित निवेशकों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। पीड़ित निवेशकों ने जिलाधिकारी को संबोधित एक ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा है, जिसमें मामले की विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा की जा रही कार्रवाई की स्थिति को सार्वजनिक करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। निवेशकों का आरोप है कि कंपनी के संचालकों और एजेंटों ने लोगों को कम समय में धनराशि दोगुनी करने और आकर्षक ब्याज का लालच देकर करोड़ों रुपये का निवेश कराया। उनका कहना है कि कई बार शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद कोई अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, और कई मामलों में पीड़ितों को उनके मुकदमों की प्रगति की जानकारी तक नहीं दी जा रही। पीड़ितों की ओर से अपनी आवाज उठा रहे सुरेंद्र कुमार ने आरोप लगाया कि कंपनी से जुड़े लोगों ने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और मध्यमवर्गीय परिवारों को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर निवेश इकट्ठा किया। उनका दावा है कि इस घोटाले की वास्तविक राशि मीडिया में सामने आ रहे आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है। सुरेंद्र कुमार ने यह भी बताया कि आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव के कारण कई परिवार गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। एक अन्य पीड़िता सपना सिंह ने बताया कि कंपनी के एजेंटों ने उनके परिवार और रिश्तेदारों को 22 महीने में रकम दोगुनी करने और हर महीने ब्याज देने का भरोसा दिलाकर निवेश करवाया था, लेकिन निवेश के बदले दिए गए कई चेक बाद में बाउंस हो गए। उनका कहना है कि अब रकम मांगने पर सिर्फ आश्वासन मिलता है, और धमकियाँ भी मिलने लगी हैं। निवेशकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो 15 जून से कलेक्ट्रेट परिसर में बेमियादी धरना और आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। इस आंदोलन को समर्थन दे रहे सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. के.पी. सिंह ने प्रशासन से पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने भी आरोप लगाया कि इस मामले में अब तक कोई अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है और यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो 15 जून से प्रस्तावित आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। पीड़ितों ने प्रशासन से स्पष्ट मांग की है कि मामले में दर्ज मुकदमों की स्थिति को सार्वजनिक किया जाए, आरोपितों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए, और निवेशकों की फंसी हुई रकम वापस दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। शिकायत सौंपते समय डॉ. के.पी. सिंह, प्रमोद कुमार, अनुज भारती, सूरजपाल, ज्ञानप्रकाश, सक्सेना, मिश्री लाल, वीरेंद्र पाल, पवन सक्सेना, सुरेंद्र, अमन पटेल, विमला देवी, सपना सिंह, दुलारो देवी, पूनम, रामलली, अंकित पटेल, कमल कुमार, आरती, लता पटेल, पंकज त्रिपाठी सहित कई अन्य निवेशक मौजूद थे।1
- उसाबा थाना क्षेत्र के गांव फुलचियाई में एक झगड़े के मौके पर पहुँचे डायल 112 के पुलिसकर्मियों ने अभद्रता की।1
- बदायूं जिले के मूसाझाग थाना क्षेत्र के महेरा गांव में जमीनी विवाद को लेकर उस समय तनाव फैल गया, जब दो पक्ष आमने-सामने आ गए। इस दौरान हैरानी की बात यह रही कि पुलिस की मौजूदगी में ही दोनों पक्षों के बीच जमकर ईंट-पत्थर और डंडे चले। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह विवाद जमीन को लेकर लंबे समय से चला आ रहा था। ग्रामीणों और सरदारों के बीच शुरू हुई कहासुनी देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई, जिसमें दोनों ओर से ईंट-पत्थर फेंके गए और डंडों का इस्तेमाल किया गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। इस झड़प में कई लोगों के घायल होने की सूचना है।3