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एक बेहद भावुक क्षण में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक शहीद फौजी की मां को वीर चक्र सौंपते हुए उन्हें गले लगाया। इस दौरान, स्वयं राष्ट्रपति मुर्मू भी रोने लगीं, और दोनों महिलाएं इस मार्मिक पल में फूट-फूटकर रोईं। यह दृश्य इस बात का प्रतीक बना कि आखिर दोनों मां ही तो थीं, जिन्होंने एक समान मानवीय संवेदना के साथ इस पल को महसूस किया।

1 hr ago
user_Vinod Rastogi
Vinod Rastogi
चाणक्यपुरी, नई दिल्ली, दिल्ली•
1 hr ago

एक बेहद भावुक क्षण में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक शहीद फौजी की मां को वीर चक्र सौंपते हुए उन्हें गले लगाया। इस दौरान, स्वयं राष्ट्रपति मुर्मू भी रोने लगीं, और दोनों महिलाएं इस मार्मिक पल में फूट-फूटकर रोईं। यह दृश्य इस बात का प्रतीक बना कि आखिर दोनों मां ही तो थीं, जिन्होंने एक समान मानवीय संवेदना के साथ इस पल को महसूस किया।

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  • एक बेहद भावुक क्षण में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक शहीद फौजी की मां को वीर चक्र सौंपते हुए उन्हें गले लगाया। इस दौरान, स्वयं राष्ट्रपति मुर्मू भी रोने लगीं, और दोनों महिलाएं इस मार्मिक पल में फूट-फूटकर रोईं। यह दृश्य इस बात का प्रतीक बना कि आखिर दोनों मां ही तो थीं, जिन्होंने एक समान मानवीय संवेदना के साथ इस पल को महसूस किया।
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    एक बेहद भावुक क्षण में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक शहीद फौजी की मां को वीर चक्र सौंपते हुए उन्हें गले लगाया। इस दौरान, स्वयं राष्ट्रपति मुर्मू भी रोने लगीं, और दोनों महिलाएं इस मार्मिक पल में फूट-फूटकर रोईं। यह दृश्य इस बात का प्रतीक बना कि आखिर दोनों मां ही तो थीं, जिन्होंने एक समान मानवीय संवेदना के साथ इस पल को महसूस किया।
    user_Vinod Rastogi
    Vinod Rastogi
    चाणक्यपुरी, नई दिल्ली, दिल्ली•
    1 hr ago
  • उपयोगकर्ता alam_malik143143 ने लोगों से उनके YouTube, Instagram और Facebook चैनलों को फॉलो करने का आग्रह किया है।
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    उपयोगकर्ता alam_malik143143 ने लोगों से उनके YouTube, Instagram और Facebook चैनलों को फॉलो करने का आग्रह किया है।
    user_Nazir Khan
    Nazir Khan
    Artist सिविल लाइन्स, मध्य दिल्ली, दिल्ली•
    13 hrs ago
  • आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम स्थित राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINL) के संयंत्र में सोमवार, 8 जून को एक बड़ा हादसा हो गया, जहाँ पिघला हुआ लोहा श्रमिकों पर गिरने से कम से कम आठ मजदूरों की जान चली गई। यह घटना संयंत्र परिसर के SMS-2 और STC-3 ताप संयंत्र में हुई, जिससे पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस के मुताबिक, बाल्टीनुमा कंटेनर में रखे पिघले लोहे को क्रेन के जरिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा रहा था, और इसी दौरान वह नीचे काम कर रहे श्रमिकों पर गिर गया। अधिकारियों ने बताया कि लोहे का तापमान लगभग 1,600 डिग्री सेल्सियस था, जिसने इस हादसे को अत्यंत घातक बना दिया। हादसे में घायल हुए अन्य लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस दुखद घटना पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक, उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ राहत और सहायता कार्यों में तेजी लाने तथा पीड़ित परिवारों को हरसंभव मदद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन और संयंत्र प्रबंधन ने इस घटना की जांच शुरू कर दी है, जिसमें यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि क्रेन संचालन या सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक तो नहीं हुई थी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि घटना के तुरंत बाद राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया था, जिसके तहत मौके पर बचाव दलों को तैनात कर प्रभावित क्षेत्र को खाली करा लिया गया।
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    आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम स्थित राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINL) के संयंत्र में सोमवार, 8 जून को एक बड़ा हादसा हो गया, जहाँ पिघला हुआ लोहा श्रमिकों पर गिरने से कम से कम आठ मजदूरों की जान चली गई। यह घटना संयंत्र परिसर के SMS-2 और STC-3 ताप संयंत्र में हुई, जिससे पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस के मुताबिक, बाल्टीनुमा कंटेनर में रखे पिघले लोहे को क्रेन के जरिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा रहा था, और इसी दौरान वह नीचे काम कर रहे श्रमिकों पर गिर गया। अधिकारियों ने बताया कि लोहे का तापमान लगभग 1,600 डिग्री सेल्सियस था, जिसने इस हादसे को अत्यंत घातक बना दिया। हादसे में घायल हुए अन्य लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

इस दुखद घटना पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक, उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ राहत और सहायता कार्यों में तेजी लाने तथा पीड़ित परिवारों को हरसंभव मदद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन और संयंत्र प्रबंधन ने इस घटना की जांच शुरू कर दी है, जिसमें यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि क्रेन संचालन या सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक तो नहीं हुई थी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि घटना के तुरंत बाद राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया था, जिसके तहत मौके पर बचाव दलों को तैनात कर प्रभावित क्षेत्र को खाली करा लिया गया।
    user_Vipin Singh
    Vipin Singh
    Delhi Cantonment, New Delhi•
    13 hrs ago
  • कई देशों में शांति का संदेश दे चुके 'पीस डॉग' अलोका ने मेनका गांधी के दिल्ली स्थित आवास पर उनसे मुलाकात की। अपनी विश्व शांति यात्रा के बाद हुई इस खास भेंट में, 'शांति दूत' अलोका ने सौहार्द, करुणा और सह-अस्तित्व का सशक्त संदेश दिया। इस दौरान मेनका गांधी और अलोका के बीच विश्व शांति और पशु कल्याण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
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    कई देशों में शांति का संदेश दे चुके 'पीस डॉग' अलोका ने मेनका गांधी के दिल्ली स्थित आवास पर उनसे मुलाकात की। अपनी विश्व शांति यात्रा के बाद हुई इस खास भेंट में, 'शांति दूत' अलोका ने सौहार्द, करुणा और सह-अस्तित्व का सशक्त संदेश दिया। इस दौरान मेनका गांधी और अलोका के बीच विश्व शांति और पशु कल्याण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
    user_Shamim Khan
    Shamim Khan
    Local News Reporter महरौली, दक्षिण दिल्ली, दिल्ली•
    15 hrs ago
  • पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं, और अब विधायकों की बगावत के बाद पार्टी में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। टीएमसी के 14 सांसदों ने ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया है, जिसका प्रभाव न केवल बंगाल बल्कि देश की राजनीति पर भी पड़ सकता है। इन 14 टीएमसी सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नेता और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पर एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और बीजेपी नेता व त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब देब भी मौजूद थे। यह घटनाक्रम तब सामने आया जब राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर ने सोमवार को अपनी राज्यसभा सदस्यता और टीएमसी से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद टीएमसी के पांच सांसद सुखेंदु शेखर से मिलने पहुंचे, और फिर यह खबर आई कि टीएमसी के 14 सांसद भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ये 14 सांसद सुखेंदु शेखर की तरह इस्तीफा देंगे या पार्टी को तोड़ने का प्रयास करेंगे? इन बागी सांसदों के सामने पहला और कानूनी रूप से स्पष्ट रास्ता यह है कि वे लोकसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप दें, जैसा कि सुखेंदु शेखर ने राज्यसभा सभापति को किया है। इस्तीफा देने से उन पर दल-बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित होने का खतरा नहीं रहेगा, और वे अपनी मर्जी से भाजपा या किसी अन्य दल में शामिल हो सकेंगे। हालांकि, इस्तीफा देने का मतलब यह होगा कि उनकी सांसदी तुरंत चली जाएगी और उन सीटों पर उपचुनाव होंगे। भले ही बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद बीजेपी के पक्ष में माहौल है, लेकिन उपचुनाव में दोबारा जीत दर्ज करना इन सांसदों के लिए एक बड़ी अग्निपरीक्षा होगी। अगर वे उपचुनाव हारते हैं तो संसद से बाहर हो जाएंगे, लेकिन जीतने पर सत्ता में भागीदार बन सकते हैं। दूसरा विकल्प टीएमसी को तोड़कर एक नया गुट बनाना है। भारत के संविधान की 10वीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत किसी भी पार्टी को कानूनी रूप से तोड़ने के लिए दो-तिहाई (2/3) सांसदों का एक साथ आना अनिवार्य है। संसद में टीएमसी के पास वर्तमान में 28 लोकसभा सांसद हैं, ऐसे में पार्टी तोड़ने या नया गुट बनाने के लिए 19 लोकसभा सांसदों की आवश्यकता होगी। 14 लोकसभा सांसदों की यह संख्या दो-तिहाई के आंकड़े को छूने के लिए नाकाफी है। इसलिए, इस संख्या बल के साथ 'पार्टी तोड़ना' कानूनी रूप से संभव नहीं दिख रहा है, और यदि ये सांसद बिना पर्याप्त बहुमत के अलग गुट बनाने का दावा करते हैं, तो लोकसभा अध्यक्ष उन्हें अयोग्य घोषित कर सकते हैं, जिससे उनका मामला फंस सकता है। तीसरा विकल्प यह है कि ये लोकसभा सदस्य सदन के भीतर टीएमसी के आधिकारिक व्हिप (आदेश) का उल्लंघन करें, जैसे किसी महत्वपूर्ण विधेयक पर सरकार के पक्ष में वोट करना। ऐसा करने पर टीएमसी नेतृत्व लोकसभा अध्यक्ष से इनकी सदस्यता रद्द करने की सिफारिश करेगा। अयोग्य घोषित होने के बाद, इन सांसदों को अगले 6 महीने के भीतर चुनाव लड़कर वापस आना होगा। कई बागी नेता इस विकल्प को चुनते हैं ताकि वे खुद को 'शहीद' के रूप में पेश कर सकें। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इन 14 टीएमसी सांसदों के पीछे देश की सत्ताधारी पार्टी का हाथ हो सकता है, जिससे उनकी रणनीति बेहद सोची-समझी होने की संभावना है। बागी गुट के नेता फिलहाल कानूनी जानकारों से सलाह ले रहे हैं ताकि उनकी सदस्यता तुरंत न जाए, और वे संसद सत्र के दौरान अपनी रणनीति का खुलासा कर सकते हैं। इन 14 बागी सांसदों के लिए आगे की राह कांटों भरी है, क्योंकि बिना दो-तिहाई बहुमत के पार्टी तोड़ना नामुमकिन है, और इस्तीफा देने का मतलब अपने राजनीतिक जीवन को दांव पर लगाना है। अब देखना यह होगा कि ये सांसद 'एकला चलो' की रणनीति अपनाते हैं या फिर किसी बड़ी राष्ट्रीय पार्टी की छत्रछाया में अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत करते हैं।
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    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं, और अब विधायकों की बगावत के बाद पार्टी में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। टीएमसी के 14 सांसदों ने ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया है, जिसका प्रभाव न केवल बंगाल बल्कि देश की राजनीति पर भी पड़ सकता है। इन 14 टीएमसी सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नेता और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पर एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और बीजेपी नेता व त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब देब भी मौजूद थे।

यह घटनाक्रम तब सामने आया जब राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर ने सोमवार को अपनी राज्यसभा सदस्यता और टीएमसी से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद टीएमसी के पांच सांसद सुखेंदु शेखर से मिलने पहुंचे, और फिर यह खबर आई कि टीएमसी के 14 सांसद भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ये 14 सांसद सुखेंदु शेखर की तरह इस्तीफा देंगे या पार्टी को तोड़ने का प्रयास करेंगे?

इन बागी सांसदों के सामने पहला और कानूनी रूप से स्पष्ट रास्ता यह है कि वे लोकसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप दें, जैसा कि सुखेंदु शेखर ने राज्यसभा सभापति को किया है। इस्तीफा देने से उन पर दल-बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित होने का खतरा नहीं रहेगा, और वे अपनी मर्जी से भाजपा या किसी अन्य दल में शामिल हो सकेंगे। हालांकि, इस्तीफा देने का मतलब यह होगा कि उनकी सांसदी तुरंत चली जाएगी और उन सीटों पर उपचुनाव होंगे। भले ही बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद बीजेपी के पक्ष में माहौल है, लेकिन उपचुनाव में दोबारा जीत दर्ज करना इन सांसदों के लिए एक बड़ी अग्निपरीक्षा होगी। अगर वे उपचुनाव हारते हैं तो संसद से बाहर हो जाएंगे, लेकिन जीतने पर सत्ता में भागीदार बन सकते हैं।

दूसरा विकल्प टीएमसी को तोड़कर एक नया गुट बनाना है। भारत के संविधान की 10वीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत किसी भी पार्टी को कानूनी रूप से तोड़ने के लिए दो-तिहाई (2/3) सांसदों का एक साथ आना अनिवार्य है। संसद में टीएमसी के पास वर्तमान में 28 लोकसभा सांसद हैं, ऐसे में पार्टी तोड़ने या नया गुट बनाने के लिए 19 लोकसभा सांसदों की आवश्यकता होगी। 14 लोकसभा सांसदों की यह संख्या दो-तिहाई के आंकड़े को छूने के लिए नाकाफी है। इसलिए, इस संख्या बल के साथ 'पार्टी तोड़ना' कानूनी रूप से संभव नहीं दिख रहा है, और यदि ये सांसद बिना पर्याप्त बहुमत के अलग गुट बनाने का दावा करते हैं, तो लोकसभा अध्यक्ष उन्हें अयोग्य घोषित कर सकते हैं, जिससे उनका मामला फंस सकता है।

तीसरा विकल्प यह है कि ये लोकसभा सदस्य सदन के भीतर टीएमसी के आधिकारिक व्हिप (आदेश) का उल्लंघन करें, जैसे किसी महत्वपूर्ण विधेयक पर सरकार के पक्ष में वोट करना। ऐसा करने पर टीएमसी नेतृत्व लोकसभा अध्यक्ष से इनकी सदस्यता रद्द करने की सिफारिश करेगा। अयोग्य घोषित होने के बाद, इन सांसदों को अगले 6 महीने के भीतर चुनाव लड़कर वापस आना होगा। कई बागी नेता इस विकल्प को चुनते हैं ताकि वे खुद को 'शहीद' के रूप में पेश कर सकें। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इन 14 टीएमसी सांसदों के पीछे देश की सत्ताधारी पार्टी का हाथ हो सकता है, जिससे उनकी रणनीति बेहद सोची-समझी होने की संभावना है। बागी गुट के नेता फिलहाल कानूनी जानकारों से सलाह ले रहे हैं ताकि उनकी सदस्यता तुरंत न जाए, और वे संसद सत्र के दौरान अपनी रणनीति का खुलासा कर सकते हैं।

इन 14 बागी सांसदों के लिए आगे की राह कांटों भरी है, क्योंकि बिना दो-तिहाई बहुमत के पार्टी तोड़ना नामुमकिन है, और इस्तीफा देने का मतलब अपने राजनीतिक जीवन को दांव पर लगाना है। अब देखना यह होगा कि ये सांसद 'एकला चलो' की रणनीति अपनाते हैं या फिर किसी बड़ी राष्ट्रीय पार्टी की छत्रछाया में अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत करते हैं।
    user_Mohit Badtiya
    Mohit Badtiya
    Civil Lines, Central Delhi•
    18 hrs ago
  • लोकसभा चुनाव 2024 के बाद से विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक एक बार फिर सक्रिय हो गया है और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इसकी अहम बैठक हो रही है। इस बैठक में गठबंधन में शामिल 23 पार्टियों के नेता हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव और टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी के साथ मौजूद हैं। इस बैठक में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय यानी थलपति विजय की अगुवाई वाली टीवीके के प्रतिनिधियों के शामिल होने की अटकलें थीं। ऐसा माना जा रहा था कि इंडिया ब्लॉक से डीएमके के बाहर होने के बाद टीवीके इस बैठक के माध्यम से आधिकारिक तौर पर गठबंधन में प्रवेश कर सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस संबंध में कांग्रेस ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि इस बैठक के लिए केवल उन्हीं दलों को न्योता दिया गया है, जिनका संसद में प्रतिनिधित्व है। थलपति विजय की टीवीके संसद में प्रतिनिधित्व के इस मापदंड पर खरी नहीं उतरती, इसलिए उन्हें इंडिया ब्लॉक की मीटिंग में आमंत्रित नहीं किया गया। बैठक में शिवसेना (यूबीटी) की ओर से पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े हैं। वहीं, महाराष्ट्र से ही इंडिया ब्लॉक के एक अन्य घटक दल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) से सुप्रिया सुले मौजूद हैं। मीटिंग में तृणमूल कांग्रेस से पार्टी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी के साथ-साथ राज्यसभा में पार्टी के नेता डेरेक ओ'ब्रायन भी शामिल हैं। सपा से अखिलेश यादव, CPM से जॉन ब्रिटास, CPI से डी राजा, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग से पीके कुंजलिकुट्टी, केरल कांग्रेस से जोस के मणि, आरएसपी से एनके प्रेमचंद्रन, वीसीके से टी थिरुमावलन, एमडीएमके की ओर से वाइको और आरजेडी से तेजस्वी यादव भी इस बैठक में मौजूद हैं।
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    लोकसभा चुनाव 2024 के बाद से विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक एक बार फिर सक्रिय हो गया है और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इसकी अहम बैठक हो रही है। इस बैठक में गठबंधन में शामिल 23 पार्टियों के नेता हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव और टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी के साथ मौजूद हैं।

इस बैठक में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय यानी थलपति विजय की अगुवाई वाली टीवीके के प्रतिनिधियों के शामिल होने की अटकलें थीं। ऐसा माना जा रहा था कि इंडिया ब्लॉक से डीएमके के बाहर होने के बाद टीवीके इस बैठक के माध्यम से आधिकारिक तौर पर गठबंधन में प्रवेश कर सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस संबंध में कांग्रेस ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि इस बैठक के लिए केवल उन्हीं दलों को न्योता दिया गया है, जिनका संसद में प्रतिनिधित्व है। थलपति विजय की टीवीके संसद में प्रतिनिधित्व के इस मापदंड पर खरी नहीं उतरती, इसलिए उन्हें इंडिया ब्लॉक की मीटिंग में आमंत्रित नहीं किया गया।

बैठक में शिवसेना (यूबीटी) की ओर से पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े हैं। वहीं, महाराष्ट्र से ही इंडिया ब्लॉक के एक अन्य घटक दल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) से सुप्रिया सुले मौजूद हैं। मीटिंग में तृणमूल कांग्रेस से पार्टी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी के साथ-साथ राज्यसभा में पार्टी के नेता डेरेक ओ'ब्रायन भी शामिल हैं। सपा से अखिलेश यादव, CPM से जॉन ब्रिटास, CPI से डी राजा, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग से पीके कुंजलिकुट्टी, केरल कांग्रेस से जोस के मणि, आरएसपी से एनके प्रेमचंद्रन, वीसीके से टी थिरुमावलन, एमडीएमके की ओर से वाइको और आरजेडी से तेजस्वी यादव भी इस बैठक में मौजूद हैं।
    user_Rekha Panchal
    Rekha Panchal
    Delhi Cantonment, New Delhi•
    19 hrs ago
  • तृणमूल कांग्रेस में बड़ी राजनीतिक हलचल सामने आई है, जहाँ पार्टी के 14 बागी सांसदों ने दिल्ली में पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की। यह महत्वपूर्ण बैठक बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई, जिसमें बीजेपी नेता और त्रिपुरा के पूर्व सीएम बिप्लब देब भी शामिल थे। पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी आज ही दिल्ली पहुंचे थे, और सूत्रों के अनुसार उन्होंने दोपहर 1 बजे के बाद भूपेंद्र यादव के घर जाकर इन सांसदों से मुलाकात की। दोपहर 2 बजे के बाद शुभेंदु अधिकारी वहां से निकल गए। इस घटनाक्रम से पहले, आज ही राज्यसभा और पार्टी से इस्तीफा देने वाले राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय से भी दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस के पांच सांसदों ने मुलाकात की। सुखेंदु शेखर रॉय एक दशक से अधिक समय तक राज्यसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे पुराने सदस्यों में से एक थे। उनसे मिलने वाले सांसदों में बर्दमान पूर्व से शर्मिला सरकार, हावड़ा से प्रसून बनर्जी, कूचबिहार से जगदीश बसुनिया, झारग्राम से कालिपद सोरेन और बांकुरा से अरूप चक्रवर्ती शामिल थे। इन मुलाकातों से टीएमसी की राजनीति को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, क्योंकि पार्टी में पहले से ही सांसदों के बीच विभाजन की खबरें हैं और ममता बनर्जी की विधायकों पर पकड़ ढीली पड़ने के बाद अब संसदीय खेमे को भी झटका लगा है। बंगाल में ममता के खिलाफ बगावत करने वाले बागी विधायक और नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने सुखेंदु के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से सुखेंदु से बात नहीं की है, लेकिन वे उनकी अधिकांश बातों से सहमत हैं, खासकर संसद के उच्च सदन के कामकाज को लेकर। उन्होंने इसे निराशाजनक बताया कि सुखेंदु जैसे कद के सांसद को पिछली कतार में धकेल दिया गया और भविष्यवाणी की कि, “आज सुखेंदु आवाज़ उठा रहे हैं; कल दूसरे भी ऐसा ही करेंगे।” यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब ममता बनर्जी स्वयं इंडिया ब्लॉक की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली में हैं, और अभिषेक बनर्जी भी उनके साथ हैं। आज सोनिया गांधी और ममता बनर्जी के बीच गर्मजोशी से मुलाकात भी हुई। टीएमसी के लोकसभा में कुल 28 सांसद हैं, और पार्टी में किसी भी संवैधानिक विभाजन को मान्यता प्राप्त करने के लिए कम से कम 19 सांसदों का एक गुट में आना आवश्यक है। हालांकि, सांसद इस्तीफा देने के लिए स्वतंत्र हैं।
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    तृणमूल कांग्रेस में बड़ी राजनीतिक हलचल सामने आई है, जहाँ पार्टी के 14 बागी सांसदों ने दिल्ली में पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की। यह महत्वपूर्ण बैठक बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई, जिसमें बीजेपी नेता और त्रिपुरा के पूर्व सीएम बिप्लब देब भी शामिल थे। पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी आज ही दिल्ली पहुंचे थे, और सूत्रों के अनुसार उन्होंने दोपहर 1 बजे के बाद भूपेंद्र यादव के घर जाकर इन सांसदों से मुलाकात की। दोपहर 2 बजे के बाद शुभेंदु अधिकारी वहां से निकल गए।

इस घटनाक्रम से पहले, आज ही राज्यसभा और पार्टी से इस्तीफा देने वाले राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय से भी दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस के पांच सांसदों ने मुलाकात की। सुखेंदु शेखर रॉय एक दशक से अधिक समय तक राज्यसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे पुराने सदस्यों में से एक थे। उनसे मिलने वाले सांसदों में बर्दमान पूर्व से शर्मिला सरकार, हावड़ा से प्रसून बनर्जी, कूचबिहार से जगदीश बसुनिया, झारग्राम से कालिपद सोरेन और बांकुरा से अरूप चक्रवर्ती शामिल थे। इन मुलाकातों से टीएमसी की राजनीति को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, क्योंकि पार्टी में पहले से ही सांसदों के बीच विभाजन की खबरें हैं और ममता बनर्जी की विधायकों पर पकड़ ढीली पड़ने के बाद अब संसदीय खेमे को भी झटका लगा है।

बंगाल में ममता के खिलाफ बगावत करने वाले बागी विधायक और नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने सुखेंदु के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से सुखेंदु से बात नहीं की है, लेकिन वे उनकी अधिकांश बातों से सहमत हैं, खासकर संसद के उच्च सदन के कामकाज को लेकर। उन्होंने इसे निराशाजनक बताया कि सुखेंदु जैसे कद के सांसद को पिछली कतार में धकेल दिया गया और भविष्यवाणी की कि, “आज सुखेंदु आवाज़ उठा रहे हैं; कल दूसरे भी ऐसा ही करेंगे।”

यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब ममता बनर्जी स्वयं इंडिया ब्लॉक की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली में हैं, और अभिषेक बनर्जी भी उनके साथ हैं। आज सोनिया गांधी और ममता बनर्जी के बीच गर्मजोशी से मुलाकात भी हुई। टीएमसी के लोकसभा में कुल 28 सांसद हैं, और पार्टी में किसी भी संवैधानिक विभाजन को मान्यता प्राप्त करने के लिए कम से कम 19 सांसदों का एक गुट में आना आवश्यक है। हालांकि, सांसद इस्तीफा देने के लिए स्वतंत्र हैं।
    user_Mohit Badtiya
    Mohit Badtiya
    Civil Lines, Central Delhi•
    19 hrs ago
  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास ओमान तट से लगभग 15 समुद्री मील दूर एक व्यावसायिक मालवाहक जहाज पर संदिग्ध ड्रोन या मिसाइल हमले में एक बड़ा धमाका हुआ है। पलाउ देश का झंडा लगे इस जहाज के इंजन रूम में जोरदार विस्फोट के बाद आग लग गई और उसमें तेजी से पानी भरने लगा, जिससे उसकी स्थिरता बिगड़ गई और डूबने का खतरा पैदा हो गया। जहाज पर कम से कम 24 भारतीय नाविक सवार थे, जिसकी पुष्टि फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया ने की है, और उन्होंने तुरंत मदद के लिए डिस्ट्रेस कॉल (एसओएस) जारी किया है। इस घटना में कुछ क्रू मेंबर्स को नुकसान भी पहुंचा है, क्योंकि नाविकों ने जहाज में बहुत तेजी से पानी भरने की सूचना दी। बचाव कार्य और मुश्किल हो गया है क्योंकि जहाज की लाइफबोट्स भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण क्षेत्रीय तनाव पहले से ही बहुत अधिक है। गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल परिवहन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां हाल के दिनों में कई जहाजों पर हमले हो चुके हैं।
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    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास ओमान तट से लगभग 15 समुद्री मील दूर एक व्यावसायिक मालवाहक जहाज पर संदिग्ध ड्रोन या मिसाइल हमले में एक बड़ा धमाका हुआ है। पलाउ देश का झंडा लगे इस जहाज के इंजन रूम में जोरदार विस्फोट के बाद आग लग गई और उसमें तेजी से पानी भरने लगा, जिससे उसकी स्थिरता बिगड़ गई और डूबने का खतरा पैदा हो गया। जहाज पर कम से कम 24 भारतीय नाविक सवार थे, जिसकी पुष्टि फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया ने की है, और उन्होंने तुरंत मदद के लिए डिस्ट्रेस कॉल (एसओएस) जारी किया है।

इस घटना में कुछ क्रू मेंबर्स को नुकसान भी पहुंचा है, क्योंकि नाविकों ने जहाज में बहुत तेजी से पानी भरने की सूचना दी। बचाव कार्य और मुश्किल हो गया है क्योंकि जहाज की लाइफबोट्स भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण क्षेत्रीय तनाव पहले से ही बहुत अधिक है। गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल परिवहन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां हाल के दिनों में कई जहाजों पर हमले हो चुके हैं।
    user_Ragini Garg
    Ragini Garg
    Civil Lines, Central Delhi•
    16 hrs ago
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