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on 12 November
user_Ravi Kumar
Ravi Kumar
Social Media Manager Chakia(Pipra), Purbi Champaran•
on 12 November
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  • चकिया (पूर्वी चंपारण): अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर चकिया नगर परिषद द्वारा स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण को लेकर जागरूकता रैली एवं झांकी निकाली गई। यह कार्यक्रम नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार सरकार के तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के तहत 08 मार्च से 14 मार्च 2026 तक महिलाओं के सम्मान में विशेष सम्मान समारोह शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में कार्य कर रही महिलाओं, महिला समूहों और सफाई कर्मियों को सम्मानित करना तथा समाज में उनके योगदान को सराहना है। इस अवसर पर साहिबगंज रोड स्थित राजकीय माध्यमिक विद्यालय उर्दू की छात्राओं ने स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण से संबंधित झांकी और जागरूकता रैली निकाली। रैली स्कूल परिसर से निकलकर चकिया नगर के विभिन्न मार्गों से होते हुए नगर परिषद कार्यालय परिसर पहुंची। रैली में बड़ी संख्या में छात्राओं, महिला समूहों की सदस्याओं, सफाई कर्मियों और स्थानीय लोगों ने भाग लेकर स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया। यह कार्यक्रम जन विकास समिति (Jan Vikas Samiti) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है, जो स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए एक CSR पहल के रूप में कार्य कर रही है। चकिया नगर परिषद द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं के योगदान को सम्मान देने के साथ-साथ समाज में स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। अगर आप चाहें तो मैं इसे टीवी रिपोर्टिंग स्टाइल (एंकर इंट्रो + रिपोर्टर पैकेज + समापन) में भी बना सकता हूँ, जिससे यह और प्रोफेशनल न्यूज स्क्रिप्ट बन जाएगी।
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    चकिया (पूर्वी चंपारण):
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर चकिया नगर परिषद द्वारा स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण को लेकर जागरूकता रैली एवं झांकी निकाली गई। यह कार्यक्रम नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार सरकार के तत्वावधान में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के तहत 08 मार्च से 14 मार्च 2026 तक महिलाओं के सम्मान में विशेष सम्मान समारोह शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में कार्य कर रही महिलाओं, महिला समूहों और सफाई कर्मियों को सम्मानित करना तथा समाज में उनके योगदान को सराहना है।
इस अवसर पर साहिबगंज रोड स्थित राजकीय माध्यमिक विद्यालय उर्दू की छात्राओं ने स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण से संबंधित झांकी और जागरूकता रैली निकाली। रैली स्कूल परिसर से निकलकर चकिया नगर के विभिन्न मार्गों से होते हुए नगर परिषद कार्यालय परिसर पहुंची।
रैली में बड़ी संख्या में छात्राओं, महिला समूहों की सदस्याओं, सफाई कर्मियों और स्थानीय लोगों ने भाग लेकर स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया।
यह कार्यक्रम जन विकास समिति (Jan Vikas Samiti) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है, जो स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए एक CSR पहल के रूप में कार्य कर रही है।
चकिया नगर परिषद द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं के योगदान को सम्मान देने के साथ-साथ समाज में स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
अगर आप चाहें तो मैं इसे टीवी रिपोर्टिंग स्टाइल (एंकर इंट्रो + रिपोर्टर पैकेज + समापन) में भी बना सकता हूँ, जिससे यह और प्रोफेशनल न्यूज स्क्रिप्ट बन जाएगी।
    user_Prabhat Ranjan Ranjan
    Prabhat Ranjan Ranjan
    मोतिहारी, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    11 hrs ago
  • (जयचंद्र कुमार राज्य सचिव बिहार दैनिक अयोध्या टाइम्स बिहार) मुजफ्फरपुर, 11 मार्च 2026 तिरहुत प्रमंडल अंतर्गत बाल संरक्षण के क्षेत्र में पारस्परिक बेहतर संबंध, प्रभावी समन्वय तथा बहुविभागीय उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रमंडल स्तरीय विचार गोष्ठी सह संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम समग्र एवं हॉलिस्टिक चाइल्ड प्रोटेक्शन सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विभागों, संस्थाओं तथा प्रशासनिक इकाइयों के बीच समन्वय को और अधिक प्रभावी बनाने पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता तिरहुत प्रमंडल के प्रमंडलीय आयुक्त श्री गिरिवर दयाल सिंह ने की। इस अवसर पर तिरहुत प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले सभी छह जिलों—मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, वैशाली, पश्चिम चंपारण एवं पूर्वी चंपारण—के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, बाल संरक्षण तंत्र से जुड़े अधिकारी, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि तथा संबंधित संस्थाओं के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता की।यह कार्यक्रम विशेष रूप से मिशन वात्सल्य, किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, तथा बाल संरक्षण से संबंधित अन्य विधिक एवं नीतिगत प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के बीच साझा समझ विकसित करना, उनकी भूमिकाओं एवं जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना, समयबद्ध कार्रवाई को प्रोत्साहित करना तथा बचाव से लेकर पुनर्वास तक की संपूर्ण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, संवेदनशील और उत्तरदायी बनाना था। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए जिलाधिकारी मुजफ्फरपुर श्री सुब्रत कुमार सेन ने अपने संबोधन में बाल संरक्षण के विषय को अत्यंत संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं प्रशासनिक तंत्र को अधिक जागरूक और उत्तरदायी बनाने में सहायक सिद्ध होती हैं। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों से अपील की कि वे इस कार्यशाला से प्राप्त अनुभव और सुझावों का उपयोग अपने-अपने जिलों में बाल संरक्षण प्रणाली को मजबूत करने में करें।अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रमंडलीय आयुक्त श्री गिरिवर दयाल सिंह ने बच्चों के अधिकारों और उनके हितों की रक्षा को प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और समग्र विकास केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह प्रशासन, पुलिस, न्यायिक संस्थाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, सामाजिक सुरक्षा तथा समुदाय—सभी की साझा जिम्मेदारी है।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा बच्चों की देखरेख और संरक्षण के लिए विभिन्न संस्थागत व्यवस्थाएं स्थापित की गई हैं, जिनमें किशोर न्याय परिषद, बाल सुधार गृह, पर्यवेक्षण गृह एवं अन्य बाल देखरेख संस्थान शामिल हैं। इन संस्थानों का प्रभावी संचालन तथा वहां रह रहे बच्चों के खान-पान, स्वास्थ्य, शिक्षा और समुचित देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। प्रमंडलीय आयुक्त ने कहा कि बाल संरक्षण तंत्र को प्रभावी बनाने के लिए विभागों के बीच नियमित संवाद, स्पष्ट भूमिका निर्धारण, समयबद्ध प्रतिक्रिया और उत्तरदायी कार्य संस्कृति विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस प्रकार का प्रमंडल स्तरीय कार्यक्रम बिहार में पहली बार आयोजित किया गया है और तिरहुत प्रमंडल राज्य का पहला प्रमंडल है जिसने समग्र बाल संरक्षण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस प्रकार की पहल की है। उन्होंने इसे एक अनुकरणीय प्रयास बताते हुए कहा कि यह पहल केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि बाल संरक्षण को प्रशासनिक प्राथमिकता के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।उन्होंने उपस्थित सभी जिलों के अधिकारियों से आग्रह किया कि बाल संरक्षण के एजेंडे को जिला स्तर तक सीमित न रखते हुए इसे प्रखंड और पंचायत स्तर तक भी प्रभावी रूप से लागू किया जाए। इससे जमीनी स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित होगा, जोखिमग्रस्त बच्चों की समय पर पहचान संभव होगी तथा स्थानीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि यदि बाल संरक्षण की समझ, प्रणाली और जवाबदेही को ब्लॉक एवं पंचायत स्तर तक मजबूत किया जाए तो बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण की पूरी प्रक्रिया अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख हो सकती है। प्रमंडलीय आयुक्त ने यह भी रेखांकित किया कि बाल संरक्षण के मामलों में केवल बैठकों का आयोजन पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित फॉलो-अप, अनुश्रवण, जवाबदेही निर्धारण, गुणवत्तापूर्ण दस्तावेजीकरण तथा विभागों के बीच वास्तविक कार्यगत समन्वय को संस्थागत रूप देना भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी जिलों को निर्देश दिया कि बाल संरक्षण को बहुविभागीय एजेंडा के रूप में स्वीकार करते हुए इसे प्रशासनिक कार्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए।कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से प्रस्तुतीकरण दिया गया। इनमें बचाव (रेस्क्यू), प्रस्तुतीकरण प्रक्रिया, सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट, व्यक्तिगत देखभाल योजना, पुनर्वास, पुनर्स्थापन, परिवार आधारित वैकल्पिक देखभाल, आफ्टर केयर, बाल श्रम, बाल विवाह, चिकित्सा सहायता, दस्तावेजीकरण, केस फॉलो-अप, अंतर-जिला समन्वय, संस्थागत देखरेख तथा निगरानी तंत्र जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।इस अवसर पर डीआईजी तिरहुत रेंज ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बाल संरक्षण के मामलों में पुलिस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पुलिस, प्रशासन और अन्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय से बाल संरक्षण से संबंधित मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकती है। कार्यक्रम में यूनिसेफ से जुड़े विशेषज्ञ अजय कुमार ने बाल संरक्षण की अवधारणा, बच्चों के अधिकारों की मूल भावना तथा संबंधित विधिक प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण केवल विधिक हस्तक्षेप का विषय नहीं है बल्कि यह बच्चों की गरिमा, सुरक्षा, विकास, पुनर्वास और अधिकार आधारित दृष्टिकोण से जुड़ा व्यापक सामाजिक एवं प्रशासनिक दायित्व है।कार्यशाला के दौरान पुनर्वास प्रक्रिया तथा गुणवत्तापूर्ण केस मैनेजमेंट पर भी महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किया गया। इसमें बताया गया कि बाल संरक्षण के मामलों में केवल रेस्क्यू या प्रोडक्शन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावी फॉलो-अप, व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप पुनर्वास योजना, सही दस्तावेजीकरण, केस ट्रैकिंग, नियमित समीक्षा और बच्चे केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना अत्यंत आवश्यक है। सत्र के दौरान बाल कल्याण समिति की भूमिका तथा समय पर हस्तक्षेप के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों को बताया गया कि जब किसी बच्चे के मामले में समय पर उचित मंच पर कार्रवाई होती है तो उसके जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनती है।कार्यक्रम में अंतर-विभागीय समन्वय को और अधिक मजबूत बनाने के उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि जिला प्रशासन, पुलिस, जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय परिषद, श्रम विभाग, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा अन्य संबंधित संस्थाएं समन्वित रूप से कार्य करें तो बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में न केवल देरी कम होगी बल्कि बच्चों को बेहतर और अधिक समग्र सहायता मिल सकेगी। इस अवसर पर उदयन केयर से जुड़े विशेषज्ञ जितेंद्र पंडित ने फैमिली बेस्ड अल्टरनेटिव केयर एवं आफ्टर केयर पर महत्वपूर्ण सत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे के लिए संस्थागत देखभाल अंतिम विकल्प नहीं होनी चाहिए, बल्कि जहां संभव हो परिवार आधारित वैकल्पिक देखभाल को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बाल देखरेख संस्थानों से बाहर आने वाले युवाओं के लिए जीवन कौशल, शिक्षा, रोजगार, आर्थिक स्वावलंबन तथा गरिमापूर्ण पुनर्स्थापन सुनिश्चित करना राज्य और समाज की साझा जिम्मेदारी है।कार्यक्रम के अंत में यह स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया कि बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण, देखरेख, पुनर्वास और उनके उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक इच्छाशक्ति, संस्थागत अभिसरण, गुणवत्तापूर्ण केस मैनेजमेंट, समयबद्ध हस्तक्षेप, वैकल्पिक देखभाल, आफ्टर केयर तथा जमीनी स्तर तक सक्रिय समन्वय अनिवार्य है।तिरहुत प्रमंडल द्वारा आयोजित यह प्रमंडल स्तरीय विचार गोष्ठी सह संवेदीकरण कार्यक्रम राज्य में बाल संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। विशेषज्ञों और अधिकारियों ने इसे एक प्रेरक एवं अनुकरणीय मॉडल बताते हुए उम्मीद जताई कि इस पहल से न केवल तिरहुत प्रमंडल बल्कि पूरे राज्य में बाल संरक्षण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी।
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    (जयचंद्र कुमार राज्य सचिव बिहार दैनिक अयोध्या टाइम्स बिहार) 
मुजफ्फरपुर, 11 मार्च 2026
तिरहुत प्रमंडल अंतर्गत बाल संरक्षण के क्षेत्र में पारस्परिक बेहतर संबंध, प्रभावी समन्वय तथा बहुविभागीय उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रमंडल स्तरीय विचार गोष्ठी सह संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम समग्र एवं हॉलिस्टिक चाइल्ड प्रोटेक्शन सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विभागों, संस्थाओं तथा प्रशासनिक इकाइयों के बीच समन्वय को और अधिक प्रभावी बनाने पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता तिरहुत प्रमंडल के प्रमंडलीय आयुक्त श्री गिरिवर दयाल सिंह ने की। इस अवसर पर तिरहुत प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले सभी छह जिलों—मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, वैशाली, पश्चिम चंपारण एवं पूर्वी चंपारण—के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, बाल संरक्षण तंत्र से जुड़े अधिकारी, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि तथा संबंधित संस्थाओं के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता की।यह कार्यक्रम विशेष रूप से मिशन वात्सल्य, किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, तथा बाल संरक्षण से संबंधित अन्य विधिक एवं नीतिगत प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के बीच साझा समझ विकसित करना, उनकी भूमिकाओं एवं जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना, समयबद्ध कार्रवाई को प्रोत्साहित करना तथा बचाव से लेकर पुनर्वास तक की संपूर्ण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, संवेदनशील और उत्तरदायी बनाना था।
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए जिलाधिकारी मुजफ्फरपुर श्री सुब्रत कुमार सेन ने अपने संबोधन में बाल संरक्षण के विषय को अत्यंत संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं प्रशासनिक तंत्र को अधिक जागरूक और उत्तरदायी बनाने में सहायक सिद्ध होती हैं। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों से अपील की कि वे इस कार्यशाला से प्राप्त अनुभव और सुझावों का उपयोग अपने-अपने जिलों में बाल संरक्षण प्रणाली को मजबूत करने में करें।अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रमंडलीय आयुक्त श्री गिरिवर दयाल सिंह ने बच्चों के अधिकारों और उनके हितों की रक्षा को प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और समग्र विकास केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह प्रशासन, पुलिस, न्यायिक संस्थाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, सामाजिक सुरक्षा तथा समुदाय—सभी की साझा जिम्मेदारी है।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा बच्चों की देखरेख और संरक्षण के लिए विभिन्न संस्थागत व्यवस्थाएं स्थापित की गई हैं, जिनमें किशोर न्याय परिषद, बाल सुधार गृह, पर्यवेक्षण गृह एवं अन्य बाल देखरेख संस्थान शामिल हैं। इन संस्थानों का प्रभावी संचालन तथा वहां रह रहे बच्चों के खान-पान, स्वास्थ्य, शिक्षा और समुचित देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
प्रमंडलीय आयुक्त ने कहा कि बाल संरक्षण तंत्र को प्रभावी बनाने के लिए विभागों के बीच नियमित संवाद, स्पष्ट भूमिका निर्धारण, समयबद्ध प्रतिक्रिया और उत्तरदायी कार्य संस्कृति विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस प्रकार का प्रमंडल स्तरीय कार्यक्रम बिहार में पहली बार आयोजित किया गया है और तिरहुत प्रमंडल राज्य का पहला प्रमंडल है जिसने समग्र बाल संरक्षण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस प्रकार की पहल की है। उन्होंने इसे एक अनुकरणीय प्रयास बताते हुए कहा कि यह पहल केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि बाल संरक्षण को प्रशासनिक प्राथमिकता के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।उन्होंने उपस्थित सभी जिलों के अधिकारियों से आग्रह किया कि बाल संरक्षण के एजेंडे को जिला स्तर तक सीमित न रखते हुए इसे प्रखंड और पंचायत स्तर तक भी प्रभावी रूप से लागू किया जाए। इससे जमीनी स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित होगा, जोखिमग्रस्त बच्चों की समय पर पहचान संभव होगी तथा स्थानीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि यदि बाल संरक्षण की समझ, प्रणाली और जवाबदेही को ब्लॉक एवं पंचायत स्तर तक मजबूत किया जाए तो बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण की पूरी प्रक्रिया अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख हो सकती है।
प्रमंडलीय आयुक्त ने यह भी रेखांकित किया कि बाल संरक्षण के मामलों में केवल बैठकों का आयोजन पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित फॉलो-अप, अनुश्रवण, जवाबदेही निर्धारण, गुणवत्तापूर्ण दस्तावेजीकरण तथा विभागों के बीच वास्तविक कार्यगत समन्वय को संस्थागत रूप देना भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी जिलों को निर्देश दिया कि बाल संरक्षण को बहुविभागीय एजेंडा के रूप में स्वीकार करते हुए इसे प्रशासनिक कार्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए।कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से प्रस्तुतीकरण दिया गया। इनमें बचाव (रेस्क्यू), प्रस्तुतीकरण प्रक्रिया, सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट, व्यक्तिगत देखभाल योजना, पुनर्वास, पुनर्स्थापन, परिवार आधारित वैकल्पिक देखभाल, आफ्टर केयर, बाल श्रम, बाल विवाह, चिकित्सा सहायता, दस्तावेजीकरण, केस फॉलो-अप, अंतर-जिला समन्वय, संस्थागत देखरेख तथा निगरानी तंत्र जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।इस अवसर पर डीआईजी तिरहुत रेंज ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बाल संरक्षण के मामलों में पुलिस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पुलिस, प्रशासन और अन्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय से बाल संरक्षण से संबंधित मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकती है।
कार्यक्रम में यूनिसेफ से जुड़े विशेषज्ञ अजय कुमार ने बाल संरक्षण की अवधारणा, बच्चों के अधिकारों की मूल भावना तथा संबंधित विधिक प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण केवल विधिक हस्तक्षेप का विषय नहीं है बल्कि यह बच्चों की गरिमा, सुरक्षा, विकास, पुनर्वास और अधिकार आधारित दृष्टिकोण से जुड़ा व्यापक सामाजिक एवं प्रशासनिक दायित्व है।कार्यशाला के दौरान पुनर्वास प्रक्रिया तथा गुणवत्तापूर्ण केस मैनेजमेंट पर भी महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किया गया। इसमें बताया गया कि बाल संरक्षण के मामलों में केवल रेस्क्यू या प्रोडक्शन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावी फॉलो-अप, व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप पुनर्वास योजना, सही दस्तावेजीकरण, केस ट्रैकिंग, नियमित समीक्षा और बच्चे केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना अत्यंत आवश्यक है।
सत्र के दौरान बाल कल्याण समिति की भूमिका तथा समय पर हस्तक्षेप के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों को बताया गया कि जब किसी बच्चे के मामले में समय पर उचित मंच पर कार्रवाई होती है तो उसके जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनती है।कार्यक्रम में अंतर-विभागीय समन्वय को और अधिक मजबूत बनाने के उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि जिला प्रशासन, पुलिस, जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय परिषद, श्रम विभाग, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा अन्य संबंधित संस्थाएं समन्वित रूप से कार्य करें तो बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में न केवल देरी कम होगी बल्कि बच्चों को बेहतर और अधिक समग्र सहायता मिल सकेगी।
इस अवसर पर उदयन केयर से जुड़े विशेषज्ञ जितेंद्र पंडित ने फैमिली बेस्ड अल्टरनेटिव केयर एवं आफ्टर केयर पर महत्वपूर्ण सत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे के लिए संस्थागत देखभाल अंतिम विकल्प नहीं होनी चाहिए, बल्कि जहां संभव हो परिवार आधारित वैकल्पिक देखभाल को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बाल देखरेख संस्थानों से बाहर आने वाले युवाओं के लिए जीवन कौशल, शिक्षा, रोजगार, आर्थिक स्वावलंबन तथा गरिमापूर्ण पुनर्स्थापन सुनिश्चित करना राज्य और समाज की साझा जिम्मेदारी है।कार्यक्रम के अंत में यह स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया कि बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण, देखरेख, पुनर्वास और उनके उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक इच्छाशक्ति, संस्थागत अभिसरण, गुणवत्तापूर्ण केस मैनेजमेंट, समयबद्ध हस्तक्षेप, वैकल्पिक देखभाल, आफ्टर केयर तथा जमीनी स्तर तक सक्रिय समन्वय अनिवार्य है।तिरहुत प्रमंडल द्वारा आयोजित यह प्रमंडल स्तरीय विचार गोष्ठी सह संवेदीकरण कार्यक्रम राज्य में बाल संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। विशेषज्ञों और अधिकारियों ने इसे एक प्रेरक एवं अनुकरणीय मॉडल बताते हुए उम्मीद जताई कि इस पहल से न केवल तिरहुत प्रमंडल बल्कि पूरे राज्य में बाल संरक्षण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी।
    user_दैनिक अयोध्या टाईम्स बिहार
    दैनिक अयोध्या टाईम्स बिहार
    Newspaper publisher पकड़ी दयाल, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    19 hrs ago
  • like subscribe kar comment kare ki kis per video bana kar aploge ko intetainmet ko badhaye
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    like subscribe kar comment kare ki kis per video bana kar aploge ko intetainmet ko badhaye
    user_Chandan kumar
    Chandan kumar
    तरियानी चौक, शिवहर, बिहार•
    10 hrs ago
  • ​🚨 BREAKING NEWS 🚨 लोकेशन: मोहम्मदपुर पावर हाउस के सामने (NH-28) ​आज एक भीषण सड़क हादसे में प्रियांशु राज की गाड़ी से एक छोटा बच्चा कुचला गया। मौके पर तनाव का माहौल है और घायल बच्चे को अस्पताल पहुँचाया गया है। स्थानीय लोगों में गहरा रोष। प्रशासन मौके पर मौजूद। ​#NH28 #AccidentNews #Mohammadpur #BreakingNews #RoadSafety
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    ​🚨 BREAKING NEWS 🚨
लोकेशन: मोहम्मदपुर पावर हाउस के सामने (NH-28)
​आज एक भीषण सड़क हादसे में प्रियांशु राज की गाड़ी से एक छोटा बच्चा कुचला गया। मौके पर तनाव का माहौल है और घायल बच्चे को अस्पताल पहुँचाया गया है। स्थानीय लोगों में गहरा रोष। प्रशासन मौके पर मौजूद।
​#NH28 #AccidentNews #Mohammadpur #BreakingNews #RoadSafety
    user_सब्जी मंडी बढ़ेया मोर
    सब्जी मंडी बढ़ेया मोर
    Salesperson बरौली, गोपालगंज, बिहार•
    7 hrs ago
  • babhangama Gali ka road is gaon Mein Koi Kam nahin Karta Hai road ka
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    babhangama Gali ka road is gaon Mein Koi Kam nahin Karta Hai road ka
    user_Samsuddin Khan
    Samsuddin Khan
    रीगा, सीतामढ़ी, बिहार•
    9 hrs ago
  • गोपालगंज हथुआ राज के कुत्ते को वफादारी देखे और एक प्यारा कमेंट
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    गोपालगंज हथुआ राज के कुत्ते को वफादारी देखे और एक प्यारा कमेंट
    user_AGS live
    AGS live
    Local News Reporter बरौली, गोपालगंज, बिहार•
    19 hrs ago
  • (जयचंद्र कुमार राज्य सचिव बिहार दैनिक अयोध्या टाइम्स बिहार) मुजफ्फरपुर। यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में वैशाली जिले के दो प्रतिभाशाली युवाओं ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए जिले और बिहार का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। उनकी इस उपलब्धि पर तिरहुत प्रमंडल के प्रमंडलीय आयुक्त श्री गिरिवर दयाल सिंह ने आयुक्त कार्यालय सभागार में दोनों सफल अभ्यर्थियों को पुष्पगुच्छ प्रदान कर सम्मानित किया तथा बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। वैशाली जिले के बिदुपुर प्रखंड के दिलावरपुर निवासी उज्जवल प्रियांक ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 10वीं रैंक प्राप्त कर बड़ी सफलता हासिल की है। वहीं हाजीपुर प्रखंड के दिग्घी निवासी अभिषेक चौहान ने 102वीं रैंक प्राप्त कर जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है। इस अवसर पर प्रमंडलीय आयुक्त श्री गिरिवर दयाल सिंह ने दोनों सफल अभ्यर्थियों की लगन, मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सफलता न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे समाज और राज्य के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि कठिन परिश्रम, दृढ़ संकल्प और लक्ष्य के प्रति समर्पण से किसी भी ऊंचाई को प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने दोनों अभ्यर्थियों को अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बताया। आयुक्त ने इस सफलता के पीछे माता-पिता और अभिभावकों के संघर्ष, त्याग और सहयोग की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि परिवार का सहयोग और सकारात्मक वातावरण युवाओं को बड़ी उपलब्धियां हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस अवसर पर प्रमंडल अंतर्गत सभी जिलों के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, उप विकास आयुक्त तथा अपर समाहर्ता सहित कई प्रशासनिक पदाधिकारी उपस्थित थे, जिन्होंने भी दोनों सफल अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं दीं।
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    (जयचंद्र कुमार राज्य सचिव बिहार दैनिक अयोध्या टाइम्स बिहार)
मुजफ्फरपुर। यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में वैशाली जिले के दो प्रतिभाशाली युवाओं ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए जिले और बिहार का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। उनकी इस उपलब्धि पर तिरहुत प्रमंडल के प्रमंडलीय आयुक्त श्री गिरिवर दयाल सिंह ने आयुक्त कार्यालय सभागार में दोनों सफल अभ्यर्थियों को पुष्पगुच्छ प्रदान कर सम्मानित किया तथा बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। वैशाली जिले के बिदुपुर प्रखंड के दिलावरपुर निवासी उज्जवल प्रियांक ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 10वीं रैंक प्राप्त कर बड़ी सफलता हासिल की है। वहीं हाजीपुर प्रखंड के दिग्घी निवासी अभिषेक चौहान ने 102वीं रैंक प्राप्त कर जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है। इस अवसर पर प्रमंडलीय आयुक्त श्री गिरिवर दयाल सिंह ने दोनों सफल अभ्यर्थियों की लगन, मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सफलता न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे समाज और राज्य के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि कठिन परिश्रम, दृढ़ संकल्प और लक्ष्य के प्रति समर्पण से किसी भी ऊंचाई को प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने दोनों अभ्यर्थियों को अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बताया। आयुक्त ने इस सफलता के पीछे माता-पिता और अभिभावकों के संघर्ष, त्याग और सहयोग की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि परिवार का सहयोग और सकारात्मक वातावरण युवाओं को बड़ी उपलब्धियां हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस अवसर पर प्रमंडल अंतर्गत सभी जिलों के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, उप विकास आयुक्त तथा अपर समाहर्ता सहित कई प्रशासनिक पदाधिकारी उपस्थित थे, जिन्होंने भी दोनों सफल अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं दीं।
    user_दैनिक अयोध्या टाईम्स बिहार
    दैनिक अयोध्या टाईम्स बिहार
    Newspaper publisher पकड़ी दयाल, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    20 hrs ago
  • Post by Chandan kumar
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    Post by Chandan kumar
    user_Chandan kumar
    Chandan kumar
    तरियानी चौक, शिवहर, बिहार•
    10 hrs ago
  • परदेश गया लड़का आर्मी का लेफ्टिनेंट बनकर जब गाँव लौटा फिर क्या हुआ देखिये।।
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    परदेश गया लड़का आर्मी का लेफ्टिनेंट बनकर जब गाँव लौटा फिर क्या हुआ देखिये।।
    user_AGS live
    AGS live
    Local News Reporter बरौली, गोपालगंज, बिहार•
    19 hrs ago
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