राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद (रेसा) ने शिक्षा विभाग में व्याप्त प्रशासनिक विसंगतियों, पदोन्नति के सीमित अवसरों और शिक्षकों-प्रधानाचार्यों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। परिषद के आह्वान पर, बुधवार को सीमलवाड़ा ब्लॉक इकाई ने मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री के नाम 22 सूत्रीय मांग-पत्र उपखंड अधिकारी को सौंपते हुए शीघ्र समाधान की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशभर का शिक्षा सेवा संवर्ग आंदोलन के लिए बाध्य होगा। रेसा पदाधिकारियों ने बताया कि राज्य का सबसे बड़ा विभाग होने के बावजूद शिक्षा विभाग के प्रशासनिक ढांचे में समय के अनुकूल सुधार नहीं किए गए हैं, जिसके कारण विद्यालयों और शिक्षा अधिकारियों को अनेक प्रशासनिक कठिनाइयाँ झेलनी पड़ रही हैं। संगठन का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था शिक्षा प्रशासन को कमजोर कर रही है और इससे शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। ज्ञापन में प्रमुख रूप से प्रधानाचार्यों के पदोन्नति अवसरों का मुद्दा उठाया गया है। परिषद ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में लगभग 19 हजार प्रधानाचार्य कार्यरत हैं, जबकि उनके ऊपर के प्रशासनिक पदों की संख्या अत्यंत सीमित है, जैसे जिला शिक्षा अधिकारी के मात्र 534, उपनिदेशक के 67, संयुक्त निदेशक के 18 और अतिरिक्त निदेशक के केवल तीन पद स्वीकृत हैं। ऐसे में, अधिकांश प्रधानाचार्य पूरी सेवा अवधि में पदोन्नति से वंचित रह जाते हैं। परिषद ने मांग की कि प्रधानाचार्य एवं जिला शिक्षा अधिकारी के बीच एक नया पदोन्नति पद तत्काल सृजित किया जाए। संगठन का कहना है कि एसीबीईओ, एडीईओ, सहायक निदेशक, एपीसी, वरिष्ठ व्याख्याता तथा नोडल एवं संकुल विद्यालयों में कार्यरत पदों का उन्नयन कर नए पदों का सृजन किया जा सकता है, जिससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार भी नहीं पड़ेगा। रेसा ने वर्ष 2026-27 की लंबित विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) बैठकों को शीघ्र आयोजित करने की मांग की है। इसके साथ ही, जिला शिक्षा अधिकारी से लेकर अतिरिक्त निदेशक स्तर तक नए पदों के सृजन और कैडर पुनर्गठन की आवश्यकता बताई गई, क्योंकि संगठन का मानना है कि वर्तमान प्रशासनिक ढाँचा विभाग की बढ़ती आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि राज्य के नवगठित आठ जिलों के गठन को लगभग तीन वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन वहां अभी तक मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी (सीडीईओ), अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक (एडीपीसी) तथा डाइट कार्यालयों की स्थापना नहीं हो सकी है, जिससे शिक्षा प्रशासन प्रभावित हो रहा है। परिषद ने इन कार्यालयों की तत्काल स्वीकृति और पदस्थापन की मांग की। वहीं, परिषद ने कहा कि एक-एक प्रधानाचार्य को पीईईओ एवं यूसीईईओ के रूप में पाँच से तीस विद्यालयों तक के प्रशासनिक कार्यों, वेतन भुगतान और पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है, लेकिन इतने अतिरिक्त कार्य के बावजूद कोई विशेष आर्थिक लाभ नहीं दिया जा रहा। संगठन ने इस अतिरिक्त जिम्मेदारी के बदले मूल वेतन का 10 प्रतिशत विशेष भत्ता देने की मांग की तथा चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर पीईईओ व्यवस्था का बहिष्कार किया जाएगा। रेसा ने शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को शिक्षा के अतिरिक्त गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति दिलाने की मांग भी उठाई है। संगठन का कहना है कि जनगणना और चुनाव जैसे आवश्यक कार्यों को छोड़कर शिक्षकों को अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में नहीं लगाया जाना चाहिए। साथ ही, बार-बार आयोजित होने वाली वीडियो कॉन्फ्रेंस, रैलियों, चित्रकला एवं निबंध प्रतियोगिताओं के नाम पर जारी आदेशों पर भी रोक लगाने की मांग की गई। परिषद ने विद्यालयों में निर्माण कार्य, निविदा प्रक्रिया, कार्यादेश तथा भवन सुरक्षा प्रमाण-पत्र जैसी तकनीकी जिम्मेदारियां प्रधानाचार्यों से हटाकर एडीपीसी कार्यालय के तकनीकी विशेषज्ञों को सौंपने की मांग की, क्योंकि संगठन का कहना है कि इन कार्यों के कारण शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं। ज्ञापन में बिना प्रारंभिक जांच के प्रधानाचार्यों को एपीओ अथवा निलंबित किए जाने की कार्रवाई पर भी चिंता जताई गई है। परिषद ने मांग की कि किसी भी शिकायत पर उचित जांच के बाद ही कार्रवाई की जाए, ताकि अधिकारियों का मनोबल बना रहे। अंत में, रेसा ने शिक्षा विभाग सीधे विद्यार्थियों, शिक्षकों और समाज के भविष्य से जुड़ा होने के कारण विभागीय नीतियों और प्रशासनिक निर्णयों में अनुभवी शिक्षा अधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया, यह मानते हुए कि इससे शिक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी, जवाबदेह और परिणामोन्मुखी बन सकेगी। ज्ञापन सौंपने के दौरान रेसा ब्लॉक समन्वयक प्राचार्य धनपाल भोई, विनोद पाटीदार, अभिनंदन सिंह, नागेंद्र सिंह झाला, महेंद्र कुमार लबाना, नरवरलाल लबाना, मोहम्मद इशाक, राजेंद्र सिंह चौहान, हरिशचंद्र सिंह सहित परिषद के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद (रेसा) ने शिक्षा विभाग में व्याप्त प्रशासनिक विसंगतियों, पदोन्नति के सीमित अवसरों और शिक्षकों-प्रधानाचार्यों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। परिषद के आह्वान पर, बुधवार को सीमलवाड़ा ब्लॉक इकाई ने मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री के नाम 22 सूत्रीय मांग-पत्र उपखंड अधिकारी को सौंपते हुए शीघ्र समाधान की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशभर का शिक्षा सेवा संवर्ग आंदोलन के लिए बाध्य होगा। रेसा पदाधिकारियों ने बताया कि राज्य का सबसे बड़ा विभाग होने के बावजूद शिक्षा विभाग के प्रशासनिक ढांचे में समय के अनुकूल सुधार नहीं किए गए हैं, जिसके कारण विद्यालयों और शिक्षा अधिकारियों को अनेक प्रशासनिक कठिनाइयाँ झेलनी पड़ रही हैं। संगठन का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था शिक्षा प्रशासन को कमजोर कर रही है और इससे शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। ज्ञापन में प्रमुख रूप से प्रधानाचार्यों के पदोन्नति अवसरों का मुद्दा उठाया गया है। परिषद ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में लगभग 19 हजार प्रधानाचार्य कार्यरत हैं, जबकि उनके ऊपर के प्रशासनिक पदों की संख्या अत्यंत सीमित है, जैसे जिला शिक्षा अधिकारी के मात्र 534, उपनिदेशक के 67, संयुक्त निदेशक के 18 और अतिरिक्त निदेशक के केवल तीन पद स्वीकृत हैं। ऐसे में, अधिकांश प्रधानाचार्य पूरी सेवा अवधि में पदोन्नति से वंचित रह जाते हैं। परिषद ने मांग की कि प्रधानाचार्य एवं जिला शिक्षा अधिकारी के बीच एक नया पदोन्नति पद तत्काल सृजित किया जाए। संगठन का कहना है कि एसीबीईओ, एडीईओ, सहायक निदेशक, एपीसी, वरिष्ठ व्याख्याता तथा नोडल एवं संकुल विद्यालयों में कार्यरत पदों का उन्नयन कर नए पदों का सृजन किया जा सकता है, जिससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार भी नहीं पड़ेगा। रेसा ने वर्ष 2026-27 की लंबित विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) बैठकों को शीघ्र आयोजित करने की मांग की है। इसके साथ ही, जिला शिक्षा अधिकारी से लेकर अतिरिक्त निदेशक स्तर तक नए पदों के सृजन और कैडर पुनर्गठन की आवश्यकता बताई गई, क्योंकि संगठन का मानना है कि वर्तमान प्रशासनिक ढाँचा विभाग की बढ़ती आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि राज्य के नवगठित आठ जिलों के गठन को लगभग तीन वर्ष बीत
चुके हैं, लेकिन वहां अभी तक मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी (सीडीईओ), अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक (एडीपीसी) तथा डाइट कार्यालयों की स्थापना नहीं हो सकी है, जिससे शिक्षा प्रशासन प्रभावित हो रहा है। परिषद ने इन कार्यालयों की तत्काल स्वीकृति और पदस्थापन की मांग की। वहीं, परिषद ने कहा कि एक-एक प्रधानाचार्य को पीईईओ एवं यूसीईईओ के रूप में पाँच से तीस विद्यालयों तक के प्रशासनिक कार्यों, वेतन भुगतान और पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है, लेकिन इतने अतिरिक्त कार्य के बावजूद कोई विशेष आर्थिक लाभ नहीं दिया जा रहा। संगठन ने इस अतिरिक्त जिम्मेदारी के बदले मूल वेतन का 10 प्रतिशत विशेष भत्ता देने की मांग की तथा चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर पीईईओ व्यवस्था का बहिष्कार किया जाएगा। रेसा ने शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को शिक्षा के अतिरिक्त गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति दिलाने की मांग भी उठाई है। संगठन का कहना है कि जनगणना और चुनाव जैसे आवश्यक कार्यों को छोड़कर शिक्षकों को अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में नहीं लगाया जाना चाहिए। साथ ही, बार-बार आयोजित होने वाली वीडियो कॉन्फ्रेंस, रैलियों, चित्रकला एवं निबंध प्रतियोगिताओं के नाम पर जारी आदेशों पर भी रोक लगाने की मांग की गई। परिषद ने विद्यालयों में निर्माण कार्य, निविदा प्रक्रिया, कार्यादेश तथा भवन सुरक्षा प्रमाण-पत्र जैसी तकनीकी जिम्मेदारियां प्रधानाचार्यों से हटाकर एडीपीसी कार्यालय के तकनीकी विशेषज्ञों को सौंपने की मांग की, क्योंकि संगठन का कहना है कि इन कार्यों के कारण शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं। ज्ञापन में बिना प्रारंभिक जांच के प्रधानाचार्यों को एपीओ अथवा निलंबित किए जाने की कार्रवाई पर भी चिंता जताई गई है। परिषद ने मांग की कि किसी भी शिकायत पर उचित जांच के बाद ही कार्रवाई की जाए, ताकि अधिकारियों का मनोबल बना रहे। अंत में, रेसा ने शिक्षा विभाग सीधे विद्यार्थियों, शिक्षकों और समाज के भविष्य से जुड़ा होने के कारण विभागीय नीतियों और प्रशासनिक निर्णयों में अनुभवी शिक्षा अधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया, यह मानते हुए कि इससे शिक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी, जवाबदेह और परिणामोन्मुखी बन सकेगी। ज्ञापन सौंपने के दौरान रेसा ब्लॉक समन्वयक प्राचार्य धनपाल भोई, विनोद पाटीदार, अभिनंदन सिंह, नागेंद्र सिंह झाला, महेंद्र कुमार लबाना, नरवरलाल लबाना, मोहम्मद इशाक, राजेंद्र सिंह चौहान, हरिशचंद्र सिंह सहित परिषद के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
- राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद (रेसा) ने शिक्षा विभाग में व्याप्त प्रशासनिक विसंगतियों, पदोन्नति के सीमित अवसरों और शिक्षकों-प्रधानाचार्यों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। परिषद के आह्वान पर, बुधवार को सीमलवाड़ा ब्लॉक इकाई ने मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री के नाम 22 सूत्रीय मांग-पत्र उपखंड अधिकारी को सौंपते हुए शीघ्र समाधान की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशभर का शिक्षा सेवा संवर्ग आंदोलन के लिए बाध्य होगा। रेसा पदाधिकारियों ने बताया कि राज्य का सबसे बड़ा विभाग होने के बावजूद शिक्षा विभाग के प्रशासनिक ढांचे में समय के अनुकूल सुधार नहीं किए गए हैं, जिसके कारण विद्यालयों और शिक्षा अधिकारियों को अनेक प्रशासनिक कठिनाइयाँ झेलनी पड़ रही हैं। संगठन का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था शिक्षा प्रशासन को कमजोर कर रही है और इससे शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। ज्ञापन में प्रमुख रूप से प्रधानाचार्यों के पदोन्नति अवसरों का मुद्दा उठाया गया है। परिषद ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में लगभग 19 हजार प्रधानाचार्य कार्यरत हैं, जबकि उनके ऊपर के प्रशासनिक पदों की संख्या अत्यंत सीमित है, जैसे जिला शिक्षा अधिकारी के मात्र 534, उपनिदेशक के 67, संयुक्त निदेशक के 18 और अतिरिक्त निदेशक के केवल तीन पद स्वीकृत हैं। ऐसे में, अधिकांश प्रधानाचार्य पूरी सेवा अवधि में पदोन्नति से वंचित रह जाते हैं। परिषद ने मांग की कि प्रधानाचार्य एवं जिला शिक्षा अधिकारी के बीच एक नया पदोन्नति पद तत्काल सृजित किया जाए। संगठन का कहना है कि एसीबीईओ, एडीईओ, सहायक निदेशक, एपीसी, वरिष्ठ व्याख्याता तथा नोडल एवं संकुल विद्यालयों में कार्यरत पदों का उन्नयन कर नए पदों का सृजन किया जा सकता है, जिससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार भी नहीं पड़ेगा। रेसा ने वर्ष 2026-27 की लंबित विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) बैठकों को शीघ्र आयोजित करने की मांग की है। इसके साथ ही, जिला शिक्षा अधिकारी से लेकर अतिरिक्त निदेशक स्तर तक नए पदों के सृजन और कैडर पुनर्गठन की आवश्यकता बताई गई, क्योंकि संगठन का मानना है कि वर्तमान प्रशासनिक ढाँचा विभाग की बढ़ती आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि राज्य के नवगठित आठ जिलों के गठन को लगभग तीन वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन वहां अभी तक मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी (सीडीईओ), अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक (एडीपीसी) तथा डाइट कार्यालयों की स्थापना नहीं हो सकी है, जिससे शिक्षा प्रशासन प्रभावित हो रहा है। परिषद ने इन कार्यालयों की तत्काल स्वीकृति और पदस्थापन की मांग की। वहीं, परिषद ने कहा कि एक-एक प्रधानाचार्य को पीईईओ एवं यूसीईईओ के रूप में पाँच से तीस विद्यालयों तक के प्रशासनिक कार्यों, वेतन भुगतान और पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है, लेकिन इतने अतिरिक्त कार्य के बावजूद कोई विशेष आर्थिक लाभ नहीं दिया जा रहा। संगठन ने इस अतिरिक्त जिम्मेदारी के बदले मूल वेतन का 10 प्रतिशत विशेष भत्ता देने की मांग की तथा चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर पीईईओ व्यवस्था का बहिष्कार किया जाएगा। रेसा ने शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को शिक्षा के अतिरिक्त गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति दिलाने की मांग भी उठाई है। संगठन का कहना है कि जनगणना और चुनाव जैसे आवश्यक कार्यों को छोड़कर शिक्षकों को अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में नहीं लगाया जाना चाहिए। साथ ही, बार-बार आयोजित होने वाली वीडियो कॉन्फ्रेंस, रैलियों, चित्रकला एवं निबंध प्रतियोगिताओं के नाम पर जारी आदेशों पर भी रोक लगाने की मांग की गई। परिषद ने विद्यालयों में निर्माण कार्य, निविदा प्रक्रिया, कार्यादेश तथा भवन सुरक्षा प्रमाण-पत्र जैसी तकनीकी जिम्मेदारियां प्रधानाचार्यों से हटाकर एडीपीसी कार्यालय के तकनीकी विशेषज्ञों को सौंपने की मांग की, क्योंकि संगठन का कहना है कि इन कार्यों के कारण शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं। ज्ञापन में बिना प्रारंभिक जांच के प्रधानाचार्यों को एपीओ अथवा निलंबित किए जाने की कार्रवाई पर भी चिंता जताई गई है। परिषद ने मांग की कि किसी भी शिकायत पर उचित जांच के बाद ही कार्रवाई की जाए, ताकि अधिकारियों का मनोबल बना रहे। अंत में, रेसा ने शिक्षा विभाग सीधे विद्यार्थियों, शिक्षकों और समाज के भविष्य से जुड़ा होने के कारण विभागीय नीतियों और प्रशासनिक निर्णयों में अनुभवी शिक्षा अधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया, यह मानते हुए कि इससे शिक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी, जवाबदेह और परिणामोन्मुखी बन सकेगी। ज्ञापन सौंपने के दौरान रेसा ब्लॉक समन्वयक प्राचार्य धनपाल भोई, विनोद पाटीदार, अभिनंदन सिंह, नागेंद्र सिंह झाला, महेंद्र कुमार लबाना, नरवरलाल लबाना, मोहम्मद इशाक, राजेंद्र सिंह चौहान, हरिशचंद्र सिंह सहित परिषद के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।2
- डूंगरपुर शहर के वार्ड नंबर 1 स्थित श्री कल्लाजी शिव अन्नपूर्णा पंच धाम, राजपुर में गुरुदेव महंत श्री गोपालदास जी महाराज के सानिध्य में 13 और 14 जून 2026 को आयोजित होने वाले दो दिवसीय भव्य ‘श्री विष्णु महायाग’ की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। धार्मिक आस्था और वैदिक परंपरा से ओतप्रोत इस महत्वपूर्ण आयोजन में वागड़, मेवाड़, मारवाड़ सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है, जहाँ विष्णु यज्ञ की दिव्य अग्नि से राजपुर धाम आलोकित होगा। महायाग का शुभारंभ 13 जून, शनिवार को सुबह 10 बजे एक विशाल कलश यात्रा के साथ होगा। इसके बाद पवित्र पीपल वृक्ष के नीचे प्रायश्चित संकल्प, स्थापित देवताओं का पूजन, रुद्राभिषेक एवं होमात्मक आहुतियां दी जाएंगी। प्रथम दिवस का मुख्य आकर्षण एक भव्य संत सम्मेलन रहेगा, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के प्रख्यात संत-महात्मा धर्मसभा को संबोधित करेंगे। इस आयोजन में परम् पूज्य बेणेश्वर धाम के पीठाधीश्वर गुरुदेव महंत श्री अच्यूतानंद जी महाराज मुख्य अतिथि के रूप में अपना सानिध्य एवं आशीर्वाद प्रदान करेंगे। महाआरती के पश्चात् श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी की विशेष व्यवस्था की गई है। द्वितीय दिवस, 14 जून, रविवार को प्रातःकाल से ही श्री विष्णु सहस्त्रनाम जप और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम आरंभ होगा, जिसके उपरांत यज्ञ की पूर्णाहुति दी जाएगी। दूसरे दिन भी संत समागम एवं सत्संग का आयोजन किया जाएगा, और दोपहर में महाआरती के बाद एक विशाल भंडारे (महाप्रसाद) का आयोजन रखा गया है। धाम के महंत वैष्णव परिवार एवं राजपुर ग्रामवासियों ने क्षेत्र के समस्त सनातन धर्म प्रेमियों से इस दो दिवसीय महायाग में सपरिवार उपस्थित होकर धर्म लाभ लेने और ठाकुरजी का आशीर्वाद प्राप्त करने की हार्दिक अपील की है।3
- जेठाना में मुख्यमंत्री बजट घोषणा 2026-27 के अंतर्गत स्वीकृत बस स्टैंड से सीताराम आश्रम वाया पाडाकला सड़क निर्माण कार्य के मार्ग में हुए अतिक्रमण को प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई कर हटा दिया है। यह कार्रवाई अधिशासी अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, सागवाड़ा के निवेदन पर तथा उपखंड अधिकारी, सागवाड़ा के आदेशों की पालना में की गई। दरअसल, मौजा जेठाना में प्रस्तावित 5.50 मीटर चौड़ी सड़क के रास्ते पर ग्रामीणों द्वारा अतिक्रमण किए जाने की शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत के आधार पर, तहसील प्रशासन, राजस्व विभाग, सार्वजनिक निर्माण विभाग और पुलिस जाप्ते की एक संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया। इस कार्रवाई के दौरान राजस्व टीम से भू-अभिलेख निरीक्षक वृत्त जेठाना यशपाल सिंह पंवार और पटवारी हल्का जेठाना पूनम सेवक उपस्थित रहे। सार्वजनिक निर्माण विभाग, सागवाड़ा से अधिशासी अभियंता माधव जोरवाल और कनिष्ठ अभियंता कीर्तेश पाटीदार भी मौजूद थे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया था। तहसीलदार डॉ. रमेश चन्द्र वडेरा ने बताया कि सड़क निर्माण कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए और मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत स्वीकृत परियोजना समय पर पूरी हो सके, इसी उद्देश्य से यह अतिक्रमण हटाया गया है। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे सार्वजनिक विकास कार्यों में सहयोग करें।1
- मंगलवार को डूंगरपुर जिले में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान ने सफलतापूर्वक 10 वर्ष पूरे किए, जिसके उपलक्ष्य में जिलेभर के समस्त स्वास्थ्य संस्थानों पर उत्सव जैसा माहौल रहा। इस ऐतिहासिक पड़ाव के तहत सैकड़ों गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को विशेष जांच, परामर्श और उपचार सेवाओं का सीधा लाभ प्रदान किया गया। सुबह से ही स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसवपूर्व जांचों के लिए लाभार्थियों की भारी भीड़ देखी गई। इस दौरान हीमोग्लोबिन की कमी से ग्रसित महिलाओं को विशेष जांच के बाद आवश्यकतानुसार एफसीएम इंजेक्शन लगाए गए, वहीं पात्र महिलाओं को 'मां वाउचर योजना' के तहत निःशुल्क सोनोग्राफी की सुविधा भी मुहैया कराई गई। अभियान के तहत दी जा रही सुविधाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए आरसीएचओ डॉ. लोकेश कुमार परमार ने विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। डॉ. परमार ने ओबरी सीएचसी, आंतरी पीएचसी, बिलिया बडगामा और बरबोदनियां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने वहां मौजूद गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों से सीधा संवाद कर चिकित्सा सेवाओं पर फीडबैक लिया तथा केंद्रों पर उपलब्ध सुविधाओं पर संतोष व्यक्त किया। निरीक्षण के दौरान आरसीएचओ ने 'मां वाउचर योजना' के तहत जारी निःशुल्क सोनोग्राफी वाउचर्स की भी समीक्षा की और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि निर्धारित मानदंडों के अनुसार हर पात्र लाभार्थी तक यह वाउचर अनिवार्य रूप से पहुंचना चाहिए। यह अभियान वर्ष 2016 में शुरू हुआ था, जिसका मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। आज इसी उद्देश्य के तहत जिले में सैकड़ों महिलाओं को निःशुल्क दवाइयां, जांच और उचित पोषण की समझाइश देकर लाभान्वित किया गया।1
- डूंगरपुर जिले के धम्बोला थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसे में 25 वर्षीय युवक राकेश शंकर डामोर की मौके पर ही मौत हो गई। यह दुखद घटना उस वक्त हुई जब राकेश अपने नए खरीदे ट्रैक्टर को खेत की जुताई के लिए ले जा रहे थे। जानकारी के अनुसार, राकेश ने घटना से ठीक एक दिन पहले ही यह ट्रैक्टर खरीदा था, और अगले ही दिन रास्ते में ट्रैक्टर अचानक अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसा इतना भीषण था कि ट्रैक्टर के नीचे दबने से उनकी दर्दनाक मौत हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही धम्बोला थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने ग्रामीणों और परिजनों की मदद से राकेश के शव को बाहर निकालकर सीमलवाड़ा अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया। इस हृदय विदारक घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। मृतक राकेश अपने पीछे लगभग छह माह का एक मासूम बेटा छोड़ गए हैं, और नए ट्रैक्टर की खुशी के तुरंत बाद मातम में बदल जाने से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर हादसे की जांच शुरू कर दी है।1
- डूंगरपुर जिले में चितरी पुलिस थाना द्वारा 'ऑपरेशन संस्कार' के तहत बड़ी कार्रवाई की गई है। इस अभियान के तहत, पुलिस ने तेज गति से बाइक चलाने और स्टंट करने वाले चालकों की 23 बाइकें जब्त की हैं। इसके अतिरिक्त, शराब पीकर वाहन चलाने वाले चार व्यक्तियों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) के तहत कार्रवाई की गई। 'ऑपरेशन संस्कार' के अंतर्गत ही, आम शांति भंग करने के आरोप में सात गैरसायलन व्यक्तियों को भी गिरफ्तार किया गया है। यह निरंतर कार्रवाई डूंगरपुर जिले में श्रीमान पुलिस अधीक्षक महोदय द्वारा चलाए जा रहे 'ऑपरेशन संस्कार' के तहत चितरी थाने पर जनसुनवाई में दिए गए निर्देशों के पालन में की जा रही है।3
- डूंगरपुर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष श्रीमती दीपा गुर्जर के निर्देशानुसार और राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के एक्शन प्लान के तहत 09 जून 2026 को एक दिवसीय विधिक जागरूकता शिविर का सफल आयोजन किया गया। राजस्थान राज्य भारत स्काउट व गाइड कौशल विकास प्रशिक्षण शिविर के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों को साइबर क्राइम और 'गुड टच-बैड टच' जैसे संवेदनशील विषयों पर जागरूक किया गया। प्राधिकरण के सचिव श्री किरण कुमार चौहान ने मुख्य वक्ता के रूप में बच्चों को साइबर क्राइम की चुनौती के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बच्चों को सचेत किया कि इंटरनेट या सोशल मीडिया पर किसी भी समस्या या धोखाधड़ी का सामना करने पर डरने की बजाय, तुरंत अपने गुरुजनों, परिवार के बड़े सदस्यों या सीधे विधिक सेवा प्राधिकरण को सूचित करें। इसके अतिरिक्त, सचिव चौहान ने बच्चों को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु 'गुड टच-बैड टच' की जानकारी बेहद संवेदनशील और सरल भाषा में दी, ताकि वे किसी भी प्रकार के शोषण से स्वयं को बचा सकें। इससे पूर्व, लीगल एड डिफेंस काउंसिल श्री हितेष भंडारी ने शिविर में उपस्थित बच्चों को निशुल्क विधिक सहायता और प्राधिकरण के कार्यों के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। बच्चों ने इस शिविर में अत्यंत उत्साह के साथ भाग लिया और सुरक्षा से संबंधित इन आवश्यक नियमों को भली-भांति समझा। इस अवसर पर स्काउट प्रभारी तुलसीराम, सहायक शिविर संचालक कन्हैयालाल, ललित बरंडा, भेरूलाल कटारा, सुशीला डामोर, कमला खांट, कविता, चन्द्रशेखर और आरती चौहान सहित कई गणमान्य व्यक्तियों और संभागियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।1
- डूंगरपुर नगर परिषद के सुंदर सिंह भंडारी सभा भवन में मंगलवार को प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के अंतर्गत एक लोक कल्याण मेला, स्वनिधि महोत्सव और स्वनिधि कैंप का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य योजना से जुड़े स्ट्रीट वेंडर्स को प्रोत्साहित करना और उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देना था। कार्यक्रम के दौरान दिव्यांग और महिला स्ट्रीट वेंडर्स को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। साथ ही, खेल और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले स्ट्रीट वेंडर्स के बच्चों को भी पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर कुल 20 बच्चों को स्टेशनरी सामग्री और प्रशस्ति पत्र वितरित किए गए। इसके अतिरिक्त, 13 दिव्यांगजनों, 7 विधवा महिलाओं, टाउन वेंडिंग कमेटी (टीवीसी) की 3 महिलाओं, 40 महिला स्ट्रीट वेंडर्स और 18 पुरुष स्ट्रीट वेंडर्स को भी प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। नगर परिषद आयुक्त प्रकाश डूडी ने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों का स्वागत और सम्मान किया। समारोह की अध्यक्षता भाजपा जिला सह-प्रभारी नरेंद्र मीणा ने की, जबकि भाजपा जिलाध्यक्ष अशोक पटेल मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। इस मौके पर जिला महामंत्री पंकज जैन, हंसमुख पंड्या, सुरमार परमार, ईश्वर लबाना, जयेश लोधावरा, राजेश पाटीदार, गुणवंत कलाल, बृजेश वसीटा, राजेश पंचाल सहित कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक भी उपस्थित थे। इस कार्यक्रम का आयोजन नव भूमिका मानव विकास संस्थान, जयपुर के तत्वावधान में किया गया। संस्थान के प्रतिनिधि मनीष यादव ने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के प्रावधानों, लाभों और पात्रता से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने लाभार्थियों को समय पर ऋण का पुनर्भुगतान करके आगामी ऋण सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए भी प्रेरित किया। कार्यक्रम का संचालन जिला मिशन प्रबंधक मलय पंड्या और गीतेश पंड्या ने किया, जबकि आभार प्रकाश जैन द्वारा व्यक्त किया गया। इस आयोजन में बड़ी संख्या में स्ट्रीट वेंडर्स, लाभार्थी और आमजन उपस्थित रहे, जिन्होंने ऐसे कार्यक्रमों को हितकारी बताते हुए भविष्य में भी इन्हें नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।1