लखनऊ पूर्वी ज़ोन के इन्दिरा नगर स्थित अरविंदो चौकी क्षेत्र में कल दोपहर करीब 12 बजे एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ 'गेट खोलो जनगणना करना है' कहकर घर में घुसे दबंगों ने एक महिला, उसके पति और छोटे बच्चे के साथ मारपीट की। पीड़ित परिवार ने दबंगों पर लाखों के ज़ेवर, नगदी और मोबाइल लूट ले जाने का भी आरोप लगाया है। यह आरोप काशीनाथ तिवारी और उसकी पत्नी कालिन्दी तिवारी पर लगे हैं। इस मामले में इन्दिरा नगर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि उन्होंने पीड़ित महिला का मुकदमा दर्ज नहीं किया, जिसके कारण पीड़िता न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। बताया गया है कि पीड़िता के ससुर वीरेंद्र प्रताप सिंह ने काशीनाथ तिवारी को 35 लाख रुपए दिए थे, और पैसे वापस न कर पाने पर काशीनाथ ने वीरेंद्र को एग्रीमेंट कर अपना मकान दे दिया था, जिसमें वीरेंद्र की बहू और पुत्र रहते हैं। यह भी जानकारी मिली है कि काशीनाथ तिवारी पहले धोखाधड़ी के मामले में गाज़ीपुर थाने से जेल भी जा चुका है। वह अपने दर्जनों साथियों के साथ मकान खाली कराने पहुँचा था, जहाँ उसने घर में घुसकर मारपीट की। घटनास्थल पर पुलिस के आने के बावजूद दबंगों ने काफी देर तक उनसे बहसबाजी की और घर के कैमरे भी तोड़ दिए। पीड़िता का दावा है कि पड़ोस के कैमरे में दबंगों की फुटेज आई है। सूचना मिलने पर 112 और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुँची और किसी तरह मामले को शांत कराया। पुलिस ने घायलों को मेडिकल के लिए बुलाया भी था, लेकिन न तो उनका मेडिकल हुआ और न ही कोई मुकदमा दर्ज किया गया। पीड़ित परिवार काफी डरा और सहमा हुआ है। पीड़िता ने प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ और उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इन्दिरा नगर पुलिस इस मामले में मुकदमा दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करती है या यह मामला भी यूँ ही ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
लखनऊ पूर्वी ज़ोन के इन्दिरा नगर स्थित अरविंदो चौकी क्षेत्र में कल दोपहर करीब 12 बजे एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ 'गेट खोलो जनगणना करना है' कहकर घर में घुसे दबंगों ने एक महिला, उसके पति और छोटे बच्चे के साथ मारपीट की। पीड़ित परिवार ने दबंगों पर लाखों के ज़ेवर, नगदी और मोबाइल लूट ले जाने का भी आरोप लगाया है। यह आरोप काशीनाथ तिवारी और उसकी पत्नी कालिन्दी तिवारी पर लगे हैं। इस मामले में इन्दिरा नगर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि उन्होंने पीड़ित महिला का मुकदमा दर्ज नहीं किया, जिसके कारण पीड़िता न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। बताया गया है कि पीड़िता के ससुर वीरेंद्र प्रताप सिंह ने काशीनाथ तिवारी को 35 लाख रुपए दिए थे, और पैसे वापस न कर पाने पर काशीनाथ ने वीरेंद्र को एग्रीमेंट कर अपना मकान दे दिया था, जिसमें वीरेंद्र की बहू और पुत्र रहते हैं। यह भी जानकारी मिली है कि काशीनाथ तिवारी पहले धोखाधड़ी के मामले में गाज़ीपुर थाने से जेल भी जा चुका है। वह अपने दर्जनों साथियों के साथ मकान खाली कराने पहुँचा था, जहाँ उसने घर में घुसकर मारपीट की। घटनास्थल पर पुलिस के आने के बावजूद दबंगों ने काफी देर तक उनसे बहसबाजी की और घर के कैमरे भी तोड़ दिए। पीड़िता का दावा है कि पड़ोस के कैमरे में दबंगों की फुटेज आई है। सूचना मिलने पर 112 और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुँची और किसी तरह मामले को शांत कराया। पुलिस ने घायलों को मेडिकल के लिए बुलाया भी था, लेकिन न तो उनका मेडिकल हुआ और न ही कोई मुकदमा दर्ज किया गया। पीड़ित परिवार काफी डरा और सहमा हुआ है। पीड़िता ने प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ और उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इन्दिरा नगर पुलिस इस मामले में मुकदमा दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करती है या यह मामला भी यूँ ही ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
- चिकित्सकों को जीवन बचाने के उनके कार्य के लिए भगवान का दर्जा दिया जाता है, लेकिन जब सरकारी अस्पतालों में मरीज और उनके परिजन उपेक्षा, अभद्र व्यवहार या संवेदनहीनता का सामना करते हैं, तो यह विश्वास टूट जाता है। हालांकि सरकारी डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों पर काम का दबाव होता है, फिर भी मरीजों के साथ सम्मानजनक और मानवीय व्यवहार करना उनकी अहम जिम्मेदारी है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी अस्पताल जनता के टैक्स से चलते हैं और वहां मिलने वाली हर सेवा नागरिक का अधिकार है, न कि कोई एहसान। स्वास्थ्य व्यवस्था को तभी बेहतर माना जाएगा जब इलाज के साथ-साथ मरीज को सम्मान और संवेदनशील व्यवहार भी प्राप्त हो।1
- उत्तर प्रदेश के झांसी में एक 21 वर्षीय युवती ने अपने माता-पिता और बहन के शादी में जाने के बाद घर में अकेला पाकर आत्महत्या कर ली। मौके से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसमें युवती ने लिखा था, "मम्मी-पापा बहुत जी लिया, अब मन भर गया"। नोट में यह भी स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि "मेरी मौत के पीछे कोई नहीं है"।1
- कानपुर में पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर अजय ठाकुर को गिरफ्तार कर लिया है। बताया गया है कि वह 'बाबा पर हुए हमले' के मामले के बाद से फरार चल रहा था और पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही थी। सूत्रों के अनुसार, उसकी गिरफ्तारी रतनलाल नगर स्थित एक धुलाई केंद्र से की गई। गिरफ्तारी के दौरान, मौके पर मौजूद राहगीरों ने इस घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिसके बाद यह मामला चर्चा में आ गया। हालांकि, पुलिस की ओर से इस गिरफ्तारी और मामले के संबंध में एक विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है।2
- राजधानी लखनऊ के थाना ठाकुरगंज क्षेत्र स्थित पंपिंग स्टेशन के पास शनिवार, 27 जून 2026 को सुबह लगभग 5:30 बजे एक स्प्लेंडर मोटरसाइकिल (UP 32 LL 9468) दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में मोटरसाइकिल चालक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे एक स्कूटी से तत्काल केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया। हालांकि, इलाज के दौरान घायल युवक की दुखद मृत्यु हो गई। इस घटना ने एक बार फिर समय पर आपातकालीन सहायता और एम्बुलेंस सेवाओं की उपलब्धता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।1