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हनुमानगढ़ी के निर्माण की वो हकीकत अब सबके सामने आ रही है जो पहले कभी कैमरे पर नहीं आई थी। एक वरिष्ठ पत्रकार ने अपनी जुबानी इस पूरे सच को खुलकर बयां किया है।
आपकी ताकत अयोध्या
हनुमानगढ़ी के निर्माण की वो हकीकत अब सबके सामने आ रही है जो पहले कभी कैमरे पर नहीं आई थी। एक वरिष्ठ पत्रकार ने अपनी जुबानी इस पूरे सच को खुलकर बयां किया है।
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- हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने राम मंदिर दान विवाद को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए महंत राजू दास ने साफ तौर पर कहा है कि इस दान विवाद में कर्मचारी दोषी हैं, मंदिर नहीं।1
- अयोध्या के गुप्तारघाट स्थित सरयू नदी में नाव पर बैठकर युवाओं द्वारा मटन और बियर की पार्टी करने का वीडियो वायरल होने और इस मामले में हुई गिरफ्तारी के बाद, वीडियो बनाने वाले युवक ने खुद सोशल मीडिया पर आकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है।1
- अयोध्या के मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत रामपुर जोहन (बिजईनपुर) में सड़क निर्माण कार्य को अधूरा छोड़ दिए जाने से स्थिति गंभीर बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदार सड़क के दोनों किनारों पर केवल मिट्टी की पटाई करके काम अधूरा छोड़ गया है और पिछले लगभग एक महीने से साइट पर वापस नहीं लौटा है। बरसात के कारण अब पूरी सड़क पर पानी भर गया है, जिससे राहगीरों, किसानों और खासकर स्कूल जाने वाले बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़क पर गिट्टी या पत्थर नहीं डलवाए जाने की वजह से रास्ता पूरी तरह जलमग्न हो चुका है और लोग फिसलकर गिरने की आशंका के बीच आवागमन करने को मजबूर हैं। इस अव्यवस्था से परेशान स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग और जिला प्रशासन से तुरंत संज्ञान लेने की अपील की है। ग्रामीणों ने मांग की है कि सड़क पर तत्काल गिट्टी व पत्थर डालकर आवागमन बहाल किया जाए, जलभराव के स्थायी समाधान के लिए नाली व ड्रेनेज की व्यवस्था की जाए और बीच में काम छोड़ने वाले लापरवाह ठेकेदार के खिलाफ जांच कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।1
- अयोध्या के मिल्कीपुर तहसील अंतर्गत विकासखंड हैरिंगटनगंज की ग्राम पंचायत रामपुर जोहन (बिजैयानपुर) में सड़क निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां एक ठेकेदार सड़क के दोनों किनारों पर केवल मिट्टी की पटाई कर कार्य अधूरा छोड़कर पिछले लगभग एक महीने से मौके पर नहीं लौटा है। अधूरे निर्माण और बरसात के कारण पूरी सड़क पानी से लबालब भर गई है, जिससे राहगीरों, किसानों और विशेष रूप से स्कूल जाने वाले बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ठेकेदार कम से कम सड़क पर गिट्टी या पत्थर ही डलवा देता, तो लोगों को इतनी कठिनाई नहीं होती। जलभराव के कारण सड़क की स्थिति बदतर हो गई है और लोग आए दिन फिसलकर गिरने का खतरा झेल रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और जिला प्रशासन से इस समस्या का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। लोगों की मांग है कि सड़क पर तुरंत गिट्टी या पत्थर डालकर आवागमन बहाल किया जाए, जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए और अधूरा काम छोड़कर गायब हुए ठेकेदार के खिलाफ जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाए।1
- जुलाई के महीने में अयोध्या खाली-खाली नजर आ रही है। इस पर एक वरिष्ठ पत्रकार ने बड़ा खुलासा करते हुए इसके पीछे की असली वजह बताई है।1
- उत्तर प्रदेश में मानसून पूरी तरह से आ चुका है और पिछले दो से तीन दिनों से लगातार रिमझिम बारिश हो रही है। इस बारिश के कारण मौसम में काफी ठंडक बनी हुई है। वहीं, किसान भाई भी अपनी खेती-बारी के लिए इस मानसूनी बारिश की आशा कर रहे हैं। 'आज सुबह टाइम्स' के लिए लाल चंद सोनी की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में लगातार हो रही इस बरसात से मौसम ठंडा बना हुआ है।1
- अयोध्या जिले के रुदौली में एनएच 27 पर स्थित भेलसर चौराहे के पास हल्की सी बारिश भी लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। यहाँ एनएच 27 की दोनों सर्विस रोड इन दिनों सड़क कम और तालाब ज्यादा नजर आ रही हैं। थोड़ी देर की बारिश होते ही पूरा इलाका जलमग्न हो जाता है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात इतने खराब हैं कि दोपहिया वाहन चालक पानी के बीच से धीरे-धीरे निकलने को मजबूर हैं, जबकि चारपहिया वाहन चालक पानी की गहराई का अंदाजा लगाते हुए जोखिम उठाकर गुजर रहे हैं। इस जलभराव से सबसे ज्यादा परेशानी पैदल चलने वाले राहगीरों को हो रही है, जिन्हें कई जगहों पर जूते-चप्पल हाथ में लेकर पानी से गुजरना पड़ रहा है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि जलभराव के कारण ग्राहक दुकानों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे उनके व्यापार पर बुरा असर पड़ रहा है। इस दुर्दशा पर स्थानीय लोग तीखे सवाल उठा रहे हैं कि हेलमेट न पहनने पर तो जुर्माना निर्धारित है, लेकिन सड़क पर पानी जमा रहने का चालान कब होगा? लोग यह भी पूछ रहे हैं कि क्या इसी बदहाली के लिए उन्हें टोल टैक्स देना पड़ता है? क्षेत्रवासियों का आरोप है कि सड़क किनारे बने नाले आज तक अधूरे पड़े हैं, जिसके चलते बारिश के पानी की निकासी नहीं हो पाती और सड़क कुछ ही मिनटों में 'स्विमिंग पूल' में तब्दील हो जाती है। एनएचएआई (NHAI) और प्रशासन को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन जिम्मेदार विभाग केवल आश्वासन देकर चुप हो जाता है। अब स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि अधूरे नालों का निर्माण तत्काल पूरा कराया जाए, जल निकासी की स्थायी व्यवस्था की जाए, पंपिंग व्यवस्था से पानी निकाला जाए और नियमित सफाई अभियान चलाया जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई, तो यह जलभराव किसी बड़े हादसे की वजह बन सकता है। फिलहाल सवाल यही बना हुआ है कि क्या एनएच 27 की सर्विस रोड दोबारा सड़क बनेगी या हर बरसात में 'मिनी समंदर' का रूप ही धारण किए रहेगी?1
- अयोध्या के हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़े जाने के दावों को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इन दावों को पूरी तरह से गलत बताते हुए स्पष्ट किया है कि हनुमानगढ़ी में कभी भी नमाज नहीं पढ़ी गई है। उनके अनुसार, हनुमानगढ़ी सदियों से हिंदू श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रही है और यहां नमाज पढ़े जाने की बात ऐतिहासिक तथ्यों से किसी भी तरह मेल नहीं खाती है। इसलिए लोगों को इस प्रकार के दावों से बचना चाहिए और इतिहास को केवल तथ्यों के आधार पर ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए। हनुमानगढ़ी के इतिहास का जिक्र करते हुए पूर्व सांसद ने बताया कि बाराबंकी के एक मुस्लिम व्यक्ति ने इसके निर्माण में योगदान दिया था। उन्होंने दावा किया कि इस बात का उल्लेख वहां मौजूद शिलालेख में भी है। बृजभूषण शरण सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि किसी मुस्लिम व्यक्ति द्वारा मंदिर के निर्माण में योगदान देने का अर्थ यह कदापि नहीं निकाला जा सकता कि वहां कभी नमाज अदा की गई थी। यह पूरा मामला हाल के दिनों में हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज को लेकर दिए गए बयानों के बाद गरमाया है, जिसके बाद से यह विषय राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इसी पृष्ठभूमि में पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का यह खंडन सामने आया है। इस संवेदनशील मुद्दे पर अलग-अलग नेताओं के विरोधाभासी दावों को देखते हुए, किसी भी ऐतिहासिक तथ्य को अंतिम रूप से स्वीकार करने से पहले आधिकारिक अभिलेखों, शिलालेखों और प्रमाणित ऐतिहासिक स्रोतों की जांच करने पर जोर दिया गया है।1