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रीवा न्यू बस स्टैंड में खुलेआम चल रहा है नशे का धंधा बना है यादव कलर चाय में आप देख सकते हैं नशा खुद कर रहा है और करवा रहा बैठ के चार लोगों को

23 hrs ago
user_बुद्धसेन चौरसिया
बुद्धसेन चौरसिया
Photographer रायपुर - करचुलियां, रीवा, मध्य प्रदेश•
23 hrs ago

रीवा न्यू बस स्टैंड में खुलेआम चल रहा है नशे का धंधा बना है यादव कलर चाय में आप देख सकते हैं नशा खुद कर रहा है और करवा रहा बैठ के चार लोगों को

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  • अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है आप तो देखे होंगे मेरा मकान गिर चुका है 2 मार्च तीसरे महीने में गिरा है सरकार से यही निवेदन है कि जल्द से जल्द मेरा समाधान किया जाए और मैं ऑनलाइन कंप्लेंट भी किया है मगर कुछ लॉक नहीं चाहते हैं मैं अपनी कंप्लेंट बोलते हैं कि अपना कंप्लेंट ऑफिस ले लो मेरा कंप्लेंट नंबर है 3772 80 23 और सबसे यही निवेदन है कि आवास का किसी भाई का अगर आवास आता है जल्द से जल्द उसे इंसान का समाधान किया जाए जैसे मैं आज मेरे रहने के लिए जगह नहीं है कोई दूसरा भाई इस मुसीबत में ना आए जैसा मैं हूं इसीलिए अपने भाई दोस्त बंदूक और सरकार से यही निवेदन करता हूं जल्द से जल्द समाधान किया जाए मैं गांव का निवासी हूं पंकज कुमार सेन ग्राम खर पोस्ट भरतपुर और मेरा रामपुर लेकिन तहसील लगता है और जिला सीधी मध्य प्रदेश का हूं यही निवेदन है कि जल्द से जल्द समाधान किया जाए जय हिंद जय भारत
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    अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है आप तो देखे होंगे मेरा मकान गिर चुका है 2 मार्च तीसरे महीने में गिरा है सरकार से यही निवेदन है कि जल्द से जल्द मेरा समाधान किया जाए और मैं ऑनलाइन कंप्लेंट भी किया है मगर कुछ लॉक नहीं चाहते हैं मैं अपनी कंप्लेंट बोलते हैं कि अपना कंप्लेंट ऑफिस ले लो मेरा कंप्लेंट नंबर है 3772 80 23 और सबसे यही निवेदन है कि आवास का किसी भाई का अगर आवास आता है जल्द से जल्द उसे इंसान का समाधान किया जाए जैसे मैं आज मेरे रहने के लिए जगह नहीं है कोई दूसरा भाई इस मुसीबत में ना आए जैसा मैं हूं इसीलिए अपने भाई दोस्त बंदूक और सरकार से यही निवेदन करता हूं जल्द से जल्द समाधान किया जाए मैं गांव का निवासी हूं पंकज कुमार सेन ग्राम खर पोस्ट भरतपुर और मेरा रामपुर लेकिन तहसील लगता है और जिला सीधी मध्य प्रदेश का हूं यही निवेदन है कि जल्द से जल्द समाधान किया जाए जय हिंद जय भारत
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    Pankaj Kumar sen
    Nurse रामपुर नैकिन, सीधी, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
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    Abhishek Pandey
    Huzur, Rewa•
    16 hrs ago
  • "वो अपने बच्चों को गले लगाना चाहता था, उन्हें चूमना चाहता था... लेकिन उसे मिला तो सिर्फ अपमान, आरोप और बेबसी। रीवा के घोघर मोहल्ले के रहने वाले चंदन पाल अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन पीछे छोड़ गए हैं एक ऐसा सुलगता हुआ सवाल, जो हमारे समाज के 'मजबूत' होने के दावे पर तमाचा है।" अपनी मौत से ठीक पहले चंदन ने एक वीडियो बनाया। उस वीडियो में एक पति की रुलाई नहीं, बल्कि एक टूटे हुए इंसान की आखिरी चीख थी। चंदन अपनी पत्नी और ससुराल वालों की प्रताड़ना से इस कदर टूट चुके थे कि उन्होंने अपनी जीवनलीला समाप्त करने जैसा खौफनाक कदम उठा लिया। उन्होंने आत्महत्या के लिए उसी जगह को चुना, जहाँ उनका ससुराल था—रायपुर कर्चुलियान।" चंदन का आरोप था कि उनकी पत्नी के गलत आचरण और ससुराल पक्ष के दबाव ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा। जहाँ भी वो किराए का कमरा लेते, विवाद उनके पीछे पहुँच जाता। जब एक पति ने अपनी गृहस्थी बचाने के लिए विरोध किया, तो उसे ही प्रताड़ित किया गया। सबसे बड़ा दर्द? उसे उसके अपने मासूम बच्चों से मिलने तक नहीं दिया गया।" यह कहानी सिर्फ चंदन पाल की नहीं है। यह उन अनगिनत पुरुषों की है जो 'लोग क्या कहेंगे' और 'कानूनी जटिलताओं' के डर से घुट-घुट कर जीते हैं। हमारे समाज में अक्सर माना जाता है कि पुरुष रो नहीं सकता, पुरुष पीड़ित नहीं हो सकता। लेकिन चंदन की आँखों के आँसू बताते हैं कि मानसिक शोषण किसी का भी जेंडर नहीं देखता।" चंदन ने अपने आखिरी संदेश में मांग की है कि उसकी मौत के जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई हो। चंदन तो चले गए, पर पीछे छोड़ गए वो मासूम बच्चे जिनकी चीखें शायद ताउम्र इस समाज को कचोटती रहेंगी। सवाल ये है कि आखिर कब तक रिश्तों की आड़ में यह मानसिक कत्ल होता रहेगा? क्या हमारा कानून और समाज पुरुषों के खिलाफ हो रही इस प्रताड़ना को गंभीरता से लेगा?"
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    "वो अपने बच्चों को गले लगाना चाहता था, उन्हें चूमना चाहता था... लेकिन उसे मिला तो सिर्फ अपमान, आरोप और बेबसी। रीवा के घोघर मोहल्ले के रहने वाले चंदन पाल अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन पीछे छोड़ गए हैं एक ऐसा सुलगता हुआ सवाल, जो हमारे समाज के 'मजबूत' होने के दावे पर तमाचा है।"
अपनी मौत से ठीक पहले चंदन ने एक वीडियो बनाया। उस वीडियो में एक पति की रुलाई नहीं, बल्कि एक टूटे हुए इंसान की आखिरी चीख थी। चंदन अपनी पत्नी और ससुराल वालों की प्रताड़ना से इस कदर टूट चुके थे कि उन्होंने अपनी जीवनलीला समाप्त करने जैसा खौफनाक कदम उठा लिया। उन्होंने आत्महत्या के लिए उसी जगह को चुना, जहाँ उनका ससुराल था—रायपुर कर्चुलियान।"
चंदन का आरोप था कि उनकी पत्नी के गलत आचरण और ससुराल पक्ष के दबाव ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा। जहाँ भी वो किराए का कमरा लेते, विवाद उनके पीछे पहुँच जाता। जब एक पति ने अपनी गृहस्थी बचाने के लिए विरोध किया, तो उसे ही प्रताड़ित किया गया। सबसे बड़ा दर्द? उसे उसके अपने मासूम बच्चों से मिलने तक नहीं दिया गया।"
यह कहानी सिर्फ चंदन पाल की नहीं है। यह उन अनगिनत पुरुषों की है जो 'लोग क्या कहेंगे' और 'कानूनी जटिलताओं' के डर से घुट-घुट कर जीते हैं। हमारे समाज में अक्सर माना जाता है कि पुरुष रो नहीं सकता, पुरुष पीड़ित नहीं हो सकता। लेकिन चंदन की आँखों के आँसू बताते हैं कि मानसिक शोषण किसी का भी जेंडर नहीं देखता।"
चंदन ने अपने आखिरी संदेश में मांग की है कि उसकी मौत के जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई हो। चंदन तो चले गए, पर पीछे छोड़ गए वो मासूम बच्चे जिनकी चीखें शायद ताउम्र इस समाज को कचोटती रहेंगी।
सवाल ये है कि आखिर कब तक रिश्तों की आड़ में यह मानसिक कत्ल होता रहेगा? क्या हमारा कानून और समाज पुरुषों के खिलाफ हो रही इस प्रताड़ना को गंभीरता से लेगा?"
    user_Prime 24 News
    Prime 24 News
    हुजूर, रीवा, मध्य प्रदेश•
    17 hrs ago
  • Post by Deepesh Pandey Dist Chief Director ACFI Rewa
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    Post by Deepesh Pandey Dist Chief Director ACFI Rewa
    user_Deepesh Pandey Dist Chief Director ACFI Rewa
    Deepesh Pandey Dist Chief Director ACFI Rewa
    NGO Worker हुजूर नगर, रीवा, मध्य प्रदेश•
    17 hrs ago
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