तिलहर के उम्मरपुर ईदगाह में नमाज के दूसरे दिन लगने वाले मेले में जो देखा, समझा और सुना, वहीं लिखने का मन किया और लिख दिया। तिलहर के उम्मरपुर ईदगाह में नमाज के दूसरे दिन लगने वाले मेले में जो देखा, समझा और सुना, वहीं लिखने का मन किया और लिख दिया। वक्त बदलने के साथ सब कुछ बदलता है सिवाय जगह के। वक्त बदला, लोग बदले और मेले का रूप बदला। छोटे से बड़ा हो गया मेला। हां ये दूसरी बात है ईदगाह परिसर में बदलते वक्त के साथ मेले के लिए जगह कम हो गई, दूसरी बात कि कब्रिस्तान के अदब को भी समझते हुए, मेले का आयोजन बाहर रखा गया, इस बेहतरी की छिपाया नहीं जा सकता। मेला आमदनी का जरिए बने तब भी कोई बुराई नहीं लेकिन..? बीते 3 दशक आंखों देखी की किसी भी दुकानदार को मेले में किसी भी ठेले या दुकान के लिए धन वसूली का शिकार नहीं होना पड़ा। हां दरगाह पर होने वाले उर्स में कोई दुकानदार खुशी से 100 पचास दे दे वो अलग बात है। ईद उल फितर के बाद ईदगाहों के पास लगाने वाले छोटे से मेले की खूबसूरती यह कि छोटे छोटे बच्चे अपने अपने बड़े के साथ खुश होते हुए ईदगाह आते तो उनके लिए उनकी खुशी में मेले में लगी खिलौनों की, चाट पकौड़ी, रंग बिरंगे सेओ परवल, हलवा पराठा जैसी चीजों की छोटी खरीदारी भी और भी चार चांद लगा देती। इस एक दिन लगने वाले छोटे से मेले को भी मौका परस्त अपनी अपना कारोबार समझ, इन गरीब और छोटे दुकानदारों से धन वसूली करने से नहीं चूकते। बचपन में मैं भी अपने दादा और अब्बा के साथ नमाज के लिए कुछ नए की चाहत में ईदगाह जाय करता रहा हूं। बचपन में अक्सर उम्मरपुर के ईदगाह में साल में दो बार जान होता। एक दिन दादा, चाचा और अब्बा का नमाजी साथी बन कर तो फिर दूसरे दिन एक दिन के लिए लगने वाला मेला देखने के लिए। उस वक्त यह मेला सिर्फ छोटे बच्चों तक वो भी ईदगाह परिसर तक ही महदूद हुए करता था। आज वर्षों बाद बच्चों के साथ उम्मरपुर ईदगाह मेले में जाना हुआ तो देख कर काफी खुशी हुए लेकिन खुशी उस वक्त गुस्से में बदल गई जब एक झूले वाले और जंपिंग वाले और गुब्बारा बेचने वाले गरीब दंपति से दरगाह के नाम पर जबरन वसूली की हुई पता चली। हालांकि इस बीच कुछ ऐसे लोगों से भी मुलाकात हुई जिनके हिसाब से अगली बार अगर मेला दो दिन को लग जाए तो घर को कुछ और दिन चलाया जा सकता है भले ही जगह का किराया लिया जाए लेकिन सच बोल कर। बताया गया कि परमिशन के साथ दो दिन का मेला लगे और हर एक दुकानदार का किराया फिक्स हो तो परेशानी नहीं होगी। फिलहाल तो आज का हिसाब यह बताया कि लगने से पहले कुछ नहीं था और लगने के बाद बेतुकी वसूली दिल को तकलीफ दे गई।
तिलहर के उम्मरपुर ईदगाह में नमाज के दूसरे दिन लगने वाले मेले में जो देखा, समझा और सुना, वहीं लिखने का मन किया और लिख दिया। तिलहर के उम्मरपुर ईदगाह में नमाज के दूसरे दिन लगने वाले मेले में जो देखा, समझा और सुना, वहीं लिखने का मन किया और लिख दिया। वक्त बदलने के साथ सब कुछ बदलता है सिवाय जगह के। वक्त बदला, लोग बदले और मेले का रूप बदला। छोटे से बड़ा हो गया मेला। हां ये दूसरी बात है ईदगाह परिसर में बदलते वक्त के साथ मेले के लिए जगह कम हो गई, दूसरी बात कि कब्रिस्तान के अदब को भी समझते हुए, मेले का आयोजन बाहर रखा गया, इस बेहतरी की छिपाया नहीं जा सकता। मेला आमदनी का जरिए बने तब भी कोई बुराई नहीं लेकिन..? बीते 3 दशक आंखों देखी की किसी भी दुकानदार को मेले में किसी भी ठेले या दुकान के लिए धन वसूली का शिकार नहीं होना पड़ा। हां दरगाह पर होने वाले उर्स में कोई दुकानदार खुशी से 100 पचास दे दे वो अलग बात है। ईद उल फितर के बाद ईदगाहों के पास लगाने वाले छोटे से मेले की खूबसूरती यह कि छोटे छोटे बच्चे अपने अपने बड़े के साथ खुश होते हुए ईदगाह आते तो उनके लिए उनकी खुशी में मेले में लगी खिलौनों की, चाट पकौड़ी, रंग बिरंगे सेओ परवल, हलवा पराठा जैसी चीजों की छोटी खरीदारी भी और भी चार चांद लगा देती। इस एक दिन लगने वाले छोटे से मेले को भी मौका परस्त अपनी अपना कारोबार समझ, इन गरीब और छोटे दुकानदारों से धन वसूली करने से नहीं चूकते। बचपन में मैं भी अपने दादा और अब्बा के साथ नमाज के लिए कुछ नए की चाहत में ईदगाह जाय करता रहा हूं। बचपन में अक्सर उम्मरपुर के ईदगाह में साल में दो बार जान होता। एक दिन दादा, चाचा और अब्बा का नमाजी साथी बन कर तो फिर दूसरे दिन एक दिन के लिए लगने वाला मेला देखने के लिए। उस वक्त यह मेला सिर्फ छोटे बच्चों तक वो भी ईदगाह परिसर तक ही महदूद हुए करता था। आज वर्षों बाद बच्चों के साथ उम्मरपुर ईदगाह मेले में जाना हुआ तो देख कर काफी खुशी हुए लेकिन खुशी उस वक्त गुस्से में बदल गई जब एक झूले वाले और जंपिंग वाले और गुब्बारा बेचने वाले गरीब दंपति से दरगाह के नाम पर जबरन वसूली की हुई पता चली। हालांकि इस बीच कुछ ऐसे लोगों से भी मुलाकात हुई जिनके हिसाब से अगली बार अगर मेला दो दिन को लग जाए तो घर को कुछ और दिन चलाया जा सकता है भले ही जगह का किराया लिया जाए लेकिन सच बोल कर। बताया गया कि परमिशन के साथ दो दिन का मेला लगे और हर एक दुकानदार का किराया फिक्स हो तो परेशानी नहीं होगी। फिलहाल तो आज का हिसाब यह बताया कि लगने से पहले कुछ नहीं था और लगने के बाद बेतुकी वसूली दिल को तकलीफ दे गई।
- अलंकार अग्निहोत्री शाहजहांपुर में स्वागत हुआ और उन्होंने 2027 के इलेक्शन की लड़ने की तैयारी बताई1
- Post by Dharmendra kumar mishra1
- Post by User50284
- शाहजहाँपुर। जनपद में गोवंश के चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने जिले की सीमा से बाहर भूसे के परिवहन पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। संकट से बचने की तैयारी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जारी आदेश में कहा गया है कि गोआश्रय स्थलों में संरक्षित पशुओं के लिए भूसा अनिवार्य आहार है। अप्रैल में गेहूँ की कटाई शुरू होने के साथ ही भूसे के अंतर-राज्यीय और अंतर-जनपदीय व्यापार की आशंका बढ़ जाती है। डीएम के अनुसार, यदि भूसा बाहर भेजा गया तो जिले में चारे का भारी संकट खड़ा हो सकता है। अधिकारियों को सख्त निर्देश प्रशासन ने पुलिस, परिवहन विभाग, नगर निगम और सभी तहसीलदारों को आदेश दिया है कि वे सीमाओं पर कड़ी निगरानी रखें। यदि कोई भी वाहन अवैध रूप से भूसा बाहर ले जाते पकड़ा गया, तो उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन का यह कदम स्थानीय स्तर पर भूसे की कीमतों को नियंत्रित रखने और पशुधन को संरक्षित करने में सहायक सिद्ध होगा।1
- नौ वर्षों में विकास की रफ्तार तेज, गांव-गांव तक पहुंचीं योजनाएं: विधायक हरिप्रकाश वर्मा1
- शाहजहांपुर के नवागत पुलिस कप्तान सौरभ दीक्षित की पहली क्राइम मीटिंग में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर किसी को भावुक कर दिया। थाना रामचन्द्र मिशन के प्रभारी निरीक्षक धर्मेंद्र गुप्ता, लंगड़ाते हुए, हेड कांस्टेबल के कंधों का सहारा लेकर मीटिंग हॉल में पहुंचे। दरअसल, धर्मेंद्र गुप्ता का पैर होली के जुलूस के दौरान टूट गया था, लेकिन अपने कर्तव्य के प्रति समर्पण ने उन्हें मीटिंग में आने से नहीं रोका। आपका अपना शहर aapka apna sehar1
- जनपद शाहजहांपुर पुलिस अधीक्षक महोदय के निर्देश में अनुसार खबरें देखने के लिए चैनल को सब्सक्राइब लाइक करना ना भूले अनुभवी पत्रकारों की आवश्यकता है जॉइनिंग निशुल्क स्क्रीन पर दिए हुए व्हाट्सएप नंबर पर डिटेल्स भेजें समाज सेवा में सहयोग दें1
- चालक को पड़कर गाड़ी कर दी डीएम की गाड़ी आगे चल रही थी पीछे से सायरन बस्ती हुई गाड़ी निकल रही जो बार-बार सायरन बज रहा था डीएम के निर्देश पर तुरंत गाड़ी वाले को पड़कर गाड़ी1