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jharkhand me (बीड़ी पत्ता) pata ke lekar
Narayan Kumar Singh
jharkhand me (बीड़ी पत्ता) pata ke lekar
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- ध्यान के वक्त का एक वीडियो चुपके से बनाया! इस वीडियो में आवाज़ नहीं है क्योंकि सब ध्यान में हैं। सोचिए कहीं आप जाते हैं और वहाँ बैठते ही चाय पानी व परिचय के बाद कहा जाये कि- आइए थोड़ा ध्यान कर लेते हैं, तो कितना अजीब लगेगा। पर एक दुनिया ऐसी है जो इस दिखावटी दुनिया से अलग आपको एक नई दुनिया में प्रवेश का राह दिखाती है।1
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- भाजपा डोमचांच ग्रामीण मंडल की नई कार्यसमिति घोषित, सुनील भारती बने अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी के कोडरमा जिला अध्यक्ष अनूप जोशी की सहमति से डोमचांच ग्रामीण मंडल की नई कार्यसमिति घोषित कर दी गई है। मंडल अध्यक्ष सुनील कुमार भारती ने रविवार को पदाधिकारियों की सूची जारी की। जिला अध्यक्ष अनूप जोशी ने रविवार को 1 बजे बताया कि नई समिति में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए अनुभवी और युवा कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी गई है। संगठन विस्तार और आगामी कार्यक्रमों को गति देने के उद्देश्य से विभिन्न पदों पर नियुक्तियां की गई हैं। जारी सूची के अनुसार सुनील कुमार भारती को अध्यक्ष बनाया गया है। उपाध्यक्ष के रूप में कैलाश यादव, प्रवीण कुमार, बबीता कुमारी और सविता कुमारी को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं पारिजात सिंह, नवीन कुमार और अरुणोदय कुमार सिंह को महामंत्री नियुक्त किया गया है। मंत्री पद पर अनिल तुरी, लक्ष्मी कुमारी और निरंजु देवी को जगह मिली है। इसके अलावा प्रदीप यादव को कोषाध्यक्ष, रोहन राणा को कार्यालय मंत्री, मुकेश गोस्वामी को सोशल मीडिया प्रभारी तथा हर्ष कुमार को आईटी सेल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंडल अध्यक्ष सुनील कुमार भारती ने कहा कि वे जिला नेतृत्व के भरोसे पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे और नई टीम के साथ मिलकर केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के साथ संगठन को पंचायत स्तर तक मजबूत करेंगे। नवनियुक्त पदाधिकारियों को कार्यकर्ताओं और स्थानीय समर्थकों ने बधाई दी है।1
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- मध्यप्रदेश को देश का हिर्दय कहाँ जहाँ हैँ! लेकिन इसी हिर्दय प्रदेश से एक हिर्दयविदारक तस्वीर सामने आई हैँ! मध्यप्रदेश से आई ईस तस्वीर ने इन दिनों पूरे देश को भीतर तक झकझोर कर रख दिया है। यह कोई साधारण तस्वीर नहीं हैँ बल्कि यह ममता, त्याग और एक माँ के अटूट प्रेम की ऐसी कहानी है जिसे शब्दों में बाँधना आसान नहीं। बताया जा रहा है कि नर्मदा नदी में हुए एक दर्दनाक हादसे के दौरान एक माँ अपने छोटे से मासूम बेटे के साथ पानी में फँस गई। मौत सामने खड़ी थी, सांसें थमने को थी लेकिन उस माँ ने आखिरी पल तक अपने बेटे का साथ नहीं छोड़ा। ईस पुरे तस्वीर में दिल दहला देने वाली बात यह है कि माँ ने लाइफ जैकेट पहन रखी थी। चाहती तो शायद अपनी जान बचा सकती थी, किनारे तक पहुँच सकती थी, अपनी ज़िंदगी को एक और मौका दे सकती थी। लेकिन उस पल में उसने खुद को नहीं, अपने बच्चे को चुना। उसने अपने बेटे को सीने से इस कदर चिपका लिया मानो कह रही हो “तू है तो मैं हूँ और तू नहीं, तो मैं भी नहीं। रेस्क्यू टीम जब मौके पर पहुँची, तो जो दृश्य सामने आया उसने हर किसी की आँखें नम कर दीं। माँ और बेटा दोनों एक ही लाइफ जैकेट में, एक दूसरे से लिपटे हुए थे जैसे मौत भी उनके रिश्ते को अलग नहीं कर पाई। यह सिर्फ एक हादसा नहीं है, बल्कि यह माँ के प्रेम की वो पराकाष्ठा है जहाँ अपनी सांसों से ज्यादा अहम अपने बच्चे की सांसें हो जाती हैं। यह तस्वीर हमें याद दिलाती है कि माँ का दिल कितना विशाल होता है!वो अपने बच्चे के लिए हर दर्द, हर मुश्किल, यहाँ तक कि मौत को भी गले लगा लेती है। आज यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल जरूर है, लेकिन इसके पीछे छिपी कहानी हर दिल में एक खालीपन और एक गहरी टीस छोड़ जाती है। आइए अब आपको पुरी खबर को विस्तार से बताते है!लेकिन उससे पहले ईस विडिओ को शेयर कर दीजियेगा!और माँ केलिए दो शब्द कमेंट बॉक्स में जरूर लिखियेगा! मध्यप्रदेश के जबलपुर से आई ईस तस्वीर ने पूरे देश की संवेदनाओं को झकझोर दिया है। यह सिर्फ एक दु:खद दृश्य नहीं, बल्कि हमारी व्यवस्थाओं पर एक मौन लेकिन तीखा सवाल है। बरगी डैम में हुए ईस क्रूज़ हादसे में 9 जिंदगियां बुझ गईं, जबकि 28 लोगों को बचा लिया गया। बचाव दल SDRF, NDRF और पुलिस ने सराहनीय तत्परता दिखाई। लेकिन सवाल यह है कि क्या ऐसी त्रासदियों को होने से पहले रोका नहीं जा सकता था क्या! पर्यटन और मनोरंजन के नाम पर चलने वाली जल परिवहन सेवाओं में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन होना चाहिए था ! पर अक्सर यह कागजों तक सीमित रह जाता है। क्या उस क्रूज़ में यात्रियों की संख्या निर्धारित सीमा के भीतर थी! क्या सभी के लिए पर्याप्त और अलग अलग लाइफ जैकेट उपलब्ध थे ! क्या चालक और स्टाफ प्रशिक्षित थे? क्या मौसम और जल स्तर की स्थिति का आकलन किया गया था! ये वही बुनियादी प्रश्न हैं जिनके जवाब हर हादसे के बाद धुंधले पड़ जाते हैं। इस घटना की सबसे मार्मिक तस्वीर, मां की अंतिम पकड़ दिख रही हैँ जो हमें यह याद दिलाती है कि संकट की घड़ी में इंसान अपनी आखिरी ताकत भी अपनों को बचाने में लगा देता है। लेकिन राज्य और व्यवस्था की जिम्मेदारी है कि ऐसी घड़ी आने ही न दे। हर मौत के बाद मुआवजा और जांच की घोषणाएं होती हैं, पर क्या उनसे व्यवस्था सुधरती है! जरूरत है सख्त और पारदर्शी कार्रवाई की! दोषियों की जवाबदेही तय हो, सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कठोर दंड हो, और सभी जल पर्यटन गतिविधियों के लिए अनिवार्य सुरक्षा ऑडिट लागू किया जाए। स्थानीय प्रशासन को नियमित निरीक्षण, लाइसेंसिंग और आपातकालीन तैयारी की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। यह हादसा केवल एक खबर नहीं है बल्कि यह चेतावनी है। अगर अब भी हमने सबक नहीं लिया, तो ऐसी मार्मिक तस्वीरें बार बार हमारे सामने आती रहेंगी। एक मां ने अपने बच्चे को आखिरी सांस तक नहीं छोड़ा! क्या हमारी व्यवस्था भी अपनी जिम्मेदारी को इतनी ही मजबूती से पकड़ पाएगी?लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं दिखता हैँ! यहां तो सिर्फ दिख रहा हैँ बस माँ की आखिरी पकड़ और सिस्टम की ढीली पकड़!ईस विडिओ से ये सिख मिलती हैँ की लहरें तो शांत हो जाएंगी लेकिन उस मां की ममता और इस हादसे का दर्द हमेशा गूंजता रहेगा बाक़ी ईस विडिओ को देख कर कमेंट बॉक्स में माँ केलिए दो शब्द माँ तुझे सलाम जरूर लिखियेगा, धन्यवाद1