ओबीसी महासभा का एक प्रतिनिधिमंडल 29 मई, 2026 को दमोह में माननीय कलेक्टर कार्यालय दमोह और दमोह पुलिस महोदय से मुलाकात करेगा। यह मुलाकात महेंद्र सिंह लोधी को प्रशासन और नर्स की प्रताड़नाओं के कारण हुई कथित आत्महत्या के बाद न्याय न मिलने पर हो रही है, जिसके लिए पूर्व में भी बड़े आंदोलन किए गए थे। महासभा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि संवाद के बाद भी उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में वे फिर एक बड़ा आंदोलन करेंगे। पूरे देश में यह बात ज्ञात है कि महेंद्र सिंह लोधी को प्रशासन और नर्स की प्रताड़नाओं के चलते फांसी लगाकर अपनी जान देनी पड़ी थी। इस घटना के बाद दो बड़े आंदोलन हुए: पहला, रनेह थाना का घेराव जिसमें 7 से 8 हज़ार लोग उपस्थित थे। दूसरा आंदोलन 11 फरवरी को तब हुआ जब महेंद्र सिंह लोधी की विधवा पत्नी अपने 6 माह के बच्चे के साथ लगभग 100 किलोमीटर पैदल चलकर अस्थियां लेकर आईं, जिसमें दमोह समेत आसपास के कई जिलों से क्रांतिकारी साथी शामिल हुए। हालांकि, उस समय माननीय कलेक्टर महोदय से संवाद चल रहा था, लेकिन कुछ 'फर्जी पत्रकारों' ने 'पत्रकारिता को शर्मसार' करते हुए आंदोलन को असफल करने के लिए 'बहुत बड़ा षड्यंत्र' रचा। इस षड्यंत्र के कारण महेंद्र सिंह लोधी को न्याय नहीं मिल पाया और कई निर्दोष लोगों पर ST SC एक्ट के तहत झूठे मुकदमे दर्ज करवा दिए गए। पुलिस प्रशासन ने भी कई 'क्रांतिकारी' साथियों को उठाकर प्रताड़ित किया और 19 नामजद सहित 100 लोगों पर मुकदमे किए। पुलिस प्रशासन की 'क्रूरता' के विरोध में ओबीसी महासभा ने 28 फरवरी को एक 'महा आंदोलन' की घोषणा की थी। दमोह लोकसभा सांसद राहुल लोधी, मंत्री धर्मेंद्र लोधी जी, अन्य नेता, तथा कलेक्टर और एसपी महोदयजी के साथ हुए संवाद के बाद यह आंदोलन निरस्त कर दिया गया था। इसके उपरांत, 22 फरवरी, 2026 को ओबीसी महासभा के प्रतिनिधिमंडल को बुलाया गया, और प्रशासन के साथ चर्चा के बाद एक SIT (विशेष जांच दल) गठित की गई थी। इस SIT को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए पत्र में लिखित रूप से 15 दिन का समय दिया गया था, लेकिन 'आज दिनांक तक' कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई है। ओबीसी महासभा ने अपनी मांगों को एक पत्र में सूचीबद्ध किया है, जिन पर अब तक 'गौर नहीं किया गया' है। महासभा की एक बात बिल्कुल स्पष्ट है कि उन दोषियों पर 'कार्यवाही होना चाहिए जिन्होंने आंदोलन को सफल करने के लिए गलत प्रयास किया'। कल के प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से बृजेंद्र यादव (राष्ट्रीय महासचिव, अशोकनगर), डॉ. नारायण पटेल (राष्ट्रीय कार्यालय प्रभारी), राकेश लोधी (कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष, कटनी), कब कुशवाहा (कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष, टीकमगढ़), हेमराज घोषी (कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष युवा मोर्चा, सागर), विनोद पटेल (प्रदेश महासचिव, छतरपुर), कृष्णकांत पटेल (प्रदेश सचिव), चरण पटेल (किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष, छतरपुर), रानी रैकवार (कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष महिला मोर्चा, छतरपुर), बृजभान यादव (सागर जिलाध्यक्ष), राम भगत कुशवाहा (पन्ना जिलाध्यक्ष), उत्तम नापित (टीकमगढ़ जिलाध्यक्ष), रवि लोधी (दमोह जिलाध्यक्ष), तीरथ कुशवाहा (छतरपुर जिलाध्यक्ष), छोटे पटेल (जबलपुर जिलाध्यक्ष), दीनदयाल कुशवाहा (निवाड़ी जिलाध्यक्ष), सीताराम लोधी (कटनी जिलाध्यक्ष), और बृजेश रैकवार (आधार कार्ड जिलाध्यक्ष पन्ना) शामिल होंगे। इस सूची में दमोह के लगभग 20 'क्रांतिकारी साथियों' के नाम शामिल नहीं हैं जो बैठक में उपस्थित रहेंगे। प्रशासन के आदेशानुसार, प्रतिनिधिमंडल में लगभग 40 से 50 लोग उपस्थित रहेंगे, जिसका आयोजन 'ओबीसी एससी एससी संगठन भारत' की 'राष्ट्रीय कोर कमेटी' द्वारा किया जा रहा है।
ओबीसी महासभा का एक प्रतिनिधिमंडल 29 मई, 2026 को दमोह में माननीय कलेक्टर कार्यालय दमोह और दमोह पुलिस महोदय से मुलाकात करेगा। यह मुलाकात महेंद्र सिंह लोधी को प्रशासन और नर्स की प्रताड़नाओं के कारण हुई कथित आत्महत्या के बाद न्याय न मिलने पर हो रही है, जिसके लिए पूर्व में भी बड़े आंदोलन किए गए थे। महासभा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि संवाद के बाद भी उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में वे फिर एक बड़ा आंदोलन करेंगे। पूरे देश में यह बात ज्ञात है कि महेंद्र सिंह लोधी को प्रशासन और नर्स की प्रताड़नाओं के चलते फांसी लगाकर अपनी जान देनी पड़ी थी। इस घटना के बाद दो बड़े आंदोलन हुए: पहला, रनेह थाना का घेराव जिसमें 7 से 8 हज़ार लोग उपस्थित थे। दूसरा आंदोलन 11 फरवरी को तब हुआ जब महेंद्र सिंह लोधी की विधवा पत्नी अपने 6 माह के बच्चे के साथ लगभग 100 किलोमीटर पैदल चलकर अस्थियां लेकर आईं, जिसमें दमोह समेत आसपास के कई जिलों से क्रांतिकारी साथी शामिल हुए। हालांकि, उस समय माननीय कलेक्टर महोदय से संवाद चल रहा था,
लेकिन कुछ 'फर्जी पत्रकारों' ने 'पत्रकारिता को शर्मसार' करते हुए आंदोलन को असफल करने के लिए 'बहुत बड़ा षड्यंत्र' रचा। इस षड्यंत्र के कारण महेंद्र सिंह लोधी को न्याय नहीं मिल पाया और कई निर्दोष लोगों पर ST SC एक्ट के तहत झूठे मुकदमे दर्ज करवा दिए गए। पुलिस प्रशासन ने भी कई 'क्रांतिकारी' साथियों को उठाकर प्रताड़ित किया और 19 नामजद सहित 100 लोगों पर मुकदमे किए। पुलिस प्रशासन की 'क्रूरता' के विरोध में ओबीसी महासभा ने 28 फरवरी को एक 'महा आंदोलन' की घोषणा की थी। दमोह लोकसभा सांसद राहुल लोधी, मंत्री धर्मेंद्र लोधी जी, अन्य नेता, तथा कलेक्टर और एसपी महोदयजी के साथ हुए संवाद के बाद यह आंदोलन निरस्त कर दिया गया था। इसके उपरांत, 22 फरवरी, 2026 को ओबीसी महासभा के प्रतिनिधिमंडल को बुलाया गया, और प्रशासन के साथ चर्चा के बाद एक SIT (विशेष जांच दल) गठित की गई थी। इस SIT को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए पत्र में लिखित रूप से 15 दिन का समय दिया गया था, लेकिन 'आज दिनांक तक' कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई है। ओबीसी महासभा ने अपनी मांगों को एक पत्र में सूचीबद्ध किया
है, जिन पर अब तक 'गौर नहीं किया गया' है। महासभा की एक बात बिल्कुल स्पष्ट है कि उन दोषियों पर 'कार्यवाही होना चाहिए जिन्होंने आंदोलन को सफल करने के लिए गलत प्रयास किया'। कल के प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से बृजेंद्र यादव (राष्ट्रीय महासचिव, अशोकनगर), डॉ. नारायण पटेल (राष्ट्रीय कार्यालय प्रभारी), राकेश लोधी (कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष, कटनी), कब कुशवाहा (कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष, टीकमगढ़), हेमराज घोषी (कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष युवा मोर्चा, सागर), विनोद पटेल (प्रदेश महासचिव, छतरपुर), कृष्णकांत पटेल (प्रदेश सचिव), चरण पटेल (किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष, छतरपुर), रानी रैकवार (कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष महिला मोर्चा, छतरपुर), बृजभान यादव (सागर जिलाध्यक्ष), राम भगत कुशवाहा (पन्ना जिलाध्यक्ष), उत्तम नापित (टीकमगढ़ जिलाध्यक्ष), रवि लोधी (दमोह जिलाध्यक्ष), तीरथ कुशवाहा (छतरपुर जिलाध्यक्ष), छोटे पटेल (जबलपुर जिलाध्यक्ष), दीनदयाल कुशवाहा (निवाड़ी जिलाध्यक्ष), सीताराम लोधी (कटनी जिलाध्यक्ष), और बृजेश रैकवार (आधार कार्ड जिलाध्यक्ष पन्ना) शामिल होंगे। इस सूची में दमोह के लगभग 20 'क्रांतिकारी साथियों' के नाम शामिल नहीं हैं जो बैठक में उपस्थित रहेंगे। प्रशासन के आदेशानुसार, प्रतिनिधिमंडल में लगभग 40 से 50 लोग उपस्थित रहेंगे, जिसका आयोजन 'ओबीसी एससी एससी संगठन भारत' की 'राष्ट्रीय कोर कमेटी' द्वारा किया जा रहा है।
- एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। डेढ़ साल के मासूम आरव की मौत के पीछे की जो कहानी उजागर हुई है, उसने लोगों को स्तब्ध कर दिया है। आरोप है कि एकतरफा शादी की चाहत और इसी से पैदा हुई नाराजगी ने एक युवक को हैवान बना दिया, जिसका नतीजा इस मासूम की मौत के रूप में सामने आया।1
- Post by Ajay Ahirwal1
- Available for Sale - Bike Brand : हीरो स्प्लेंडर प्लस Model : 2023 24 मॉडल Year of Registration : 20,11,2023 Price (₹) : 65,000 City / Locality : पटना बुजुर्ग तहसील जिला सागर Vehicle Type : Bike Vehicle Condition : Like new Fuel Type : Petrol 2023 24 मॉडल मात्र 15000 चली हुई पूरी गाड़ी बिल्कुल ओरिजिनल है डिमांड है 65000 फाइनल 60,000 से कम वाले परेशान ना हो8
- बुंदेलखंड के संत विपिन बिहारी जी और नवीन बिहारी जी पूर्व मंत्री प्रभु सिंह ठाकुर के गृह निवास धनोरा पहुँचे। उन्होंने स्वर्गीय राम सिंह ठाकुर के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। परिवार ने पारंपरिक तेरहवीं की प्रथा न अपनाकर उनकी स्मृति में वृक्षों का वितरण कर एक अनूठी पहल की है। संत विपिन बिहारी जी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि उधम सिंह दाऊ, पूर्व मंत्री प्रभु सिंह ठाकुर के बड़े भाई और अशोक सिंह, इंदर सिंह, राजेंद्र सिंह के पिता श्री राम सिंह जी की तेरहवीं न करके उनकी स्मृति में वृक्षों का वितरण करना पर्यावरण के प्रति उनके परिवार के लगाव को दर्शाता है। उन्होंने जोर दिया कि यदि आज हम जितना पानी कूलरों में डाल रहे हैं, उतने वृक्ष लगाए होते और वे कटे न होते, तो हमें आज पेड़ लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। संत ने सभी से अनुरोध किया कि इस परंपरा को अपनाकर 'हरि के नाम पर हरियाली लगाएं' ताकि शुद्ध वातावरण और शुद्ध वायु प्राप्त हो सके। उन्होंने धनोरा परिवार को आडंबरों से बचकर वृक्षारोपण की ओर कदम बढ़ाने के लिए साधुवाद दिया, इसे समाज के लिए एक प्रेरणादायक पहल बताया। गौरतलब है कि स्वर्गीय राम सिंह ठाकुर स्वयं एक सुलझे हुए, पशु एवं प्रकृति प्रेमी व्यक्ति थे। उनके निधन के बाद परिवार ने तेरहवीं की प्रथा न कर श्रद्धांजलि सभा में वृक्ष वितरण का निर्णय लिया था, जो उनके प्रकृति प्रेम की विरासत को आगे बढ़ाता है।4
- यह संदेश दिया गया है कि 'नया भारत' कैसा होगा, चाहे वह जाति-मुक्त समाज की ओर बढ़े या न बढ़े, इसका भविष्य पूरी तरह से आप सभी लोगों पर निर्भर करता है।1
- विश्व तम्बाकू निषेध दिवस के अवसर पर बीना में गायत्री शक्ति पीठ द्वारा नशा मुक्ति जन-जागरण हेतु एक भव्य बाइक रैली का आयोजन किया गया। यह रैली रविवार सुबह 9:00 बजे गायत्री शक्ति पीठ परिसर से प्रारंभ हुई, जिसमें बड़ी संख्या में युवा, समाजसेवी और श्रद्धालु उत्साहपूर्वक शामिल हुए। रैली का मुख्य उद्देश्य समाज में नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाना और युवाओं को नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करना था। प्रतिभागियों ने “नशा छोड़ें, जीवन जोड़ें” तथा “धूम्रपान छोड़ें, स्वस्थ जीवन अपनाएं” जैसे नारों के साथ शहर के विभिन्न मार्गों से होकर जन-जागरण किया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि उसके परिवार और पूरे समाज को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से स्वयं नशामुक्त जीवन अपनाने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का कर्तव्य निभाने का आह्वान किया। रैली में युवाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया और समाज में एक सकारात्मक संदेश देने का संकल्प लिया। आयोजकों ने सभी उपस्थित जनों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे जागरूकता अभियानों को जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई। कार्यक्रम का समापन गायत्री शक्ति पीठ परिसर में “नशा मुक्त भारत – स्वस्थ भारत” के संकल्प के साथ हुआ।4
- सागर के व्यस्त राधा तिराहे पर कोतवाली थाना पुलिस का आम जनता के साथ एक बार फिर संवेदनहीन और आक्रामक व्यवहार देखने को मिला। बीती शाम वाहन चेकिंग के दौरान कोतवाली थाना प्रभारी मनीष सिंघल की मौजूदगी में पुलिसकर्मियों ने मर्यादाओं को ताक पर रखकर मनमानी की, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिस ने एक बाइक चालक को रोका और बिना शालीनता के सीधे उसकी गाड़ी से चाबी निकाल ली। जब नागरिक ने पुलिस के इस गैर-कानूनी और अपमानजनक व्यवहार का विरोध किया, तो पुलिसकर्मी अपनी गलती सुधारने के बजाय उल्टा उसी पर भड़क गए। इस तीखी बहसबाजी के कारण व्यस्त तिराहे पर राहगीरों की भारी भीड़ जमा हो गई। खुद को घिरता और किरकिरी होते देख पुलिस ने अपनी कमियों को छुपाने के लिए सत्ता और वर्दी का रौब दिखाना शुरू कर दिया। स्थिति को संभालने के बजाय, पुलिस ने तत्काल सख्ती दिखाते हुए उस युवक को एक अपराधी की तरह हिरासत में ले लिया। पुलिस ने अपनी कार्रवाई को सही ठहराने के लिए युवक के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम की धारा 185 के तहत आनन-फानन में प्रकरण दर्ज किया और उसका वाहन जब्त कर लिया। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का हवाला देकर आरोपी को माननीय न्यायालय में पेश किया गया। इस पूरी घटना से स्पष्ट है कि कोतवाली पुलिस आम जनता के साथ मित्रवत व्यवहार करने के बजाय डराने और दबाने की नीति पर काम कर रही है।1