चुनाव आयोग पर कालिख, पुतले को लात और राहुल की PPT क्लास : जयराम बोले, कांग्रेस का मानसिक संतुलन बिगड़ा शिमला। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने चुनाव आयोग विवाद को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। शिमला में पत्रकारों से बातचीत में जयराम ने कहा कि 13 साल से सत्ता से बाहर होने के कारण कांग्रेस हताशा और निराशा में है और अब देश में अराजकता और अफरा-तफरी का माहौल बनाकर सत्ता हथियाने की कोशिश कर रही है। जयराम ठाकुर ने कहा कि यह बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि एक तरफ कांग्रेस नेता संविधान की किताब हाथ में लेकर पूरे देश में घूमते हैं, लोकसभा में शपथ के दौरान संविधान की कॉपी हाथ में लेते हैं, और दूसरी तरफ उसी संविधान से बनी संवैधानिक संस्थाओं पर देश-विदेश में बेबुनियाद आरोप लगाते हैं। राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अब उन्होंने नई टेक्नोलॉजी अपनाई है। पीपीटी बनाकर प्रेजेंटेशन देते हैं और मीडिया को क्लासरूम में बच्चों की तरह प्रोफेसर बनकर पढ़ाने की कोशिश करते हैं। यह देश के लिए हास्यास्पद स्थिति है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जिस मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगा रही है, उनका कार्यकाल अभी दो साल भी पूरा नहीं हुआ है, जबकि कांग्रेस खुद 13 साल से सत्ता से बाहर है। जयराम ने कहा कि तीनों चुनाव आयुक्तों की बैठक के बाद चुनाव आयोग ने जो प्रेस नोट जारी किया है, उससे दूध का दूध पानी का पानी हो गया है। कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखा गया पत्र कोई डिसेंटिंग नोट नहीं था। वह आयोग की किसी नीति या आईटी सिस्टम एसआईआर के खिलाफ नहीं था, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी की प्रशासनिक कार्यप्रणाली तक सीमित था। राहुल गांधी जो बातें एक अंग्रेजी अखबार के हवाले से कह रहे हैं, वह तथ्यहीन और कल्पना पर आधारित हैं। कांग्रेस के समय के चुनाव आयुक्तों का इतिहास गिनाते हुए जयराम ने कहा कि 1982 से 1985 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे आरके त्रिवेदी को बाद में गुजरात का राज्यपाल बनाया गया। मात्र 15 दिन के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त रहीं रमा देवी को हिमाचल और फिर कर्नाटक का राज्यपाल बनाया गया। टीएन शेषन 1990 से 1996 तक रहे, बाद में राष्ट्रपति का चुनाव लड़ा और 1999 में गांधीनगर से आडवाणी के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ा। एमएस गिल 1996 से 2001 तक चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव आयुक्त रहे, रिटायरमेंट के बाद कांग्रेस में शामिल हुए, राज्यसभा गए और 10 साल तक केंद्र में मंत्री रहे। 1991 के चुनाव का जिक्र करते हुए जयराम ने कहा कि लोकसभा चुनाव चार चरणों में होने थे, दो चरण हो चुके थे, 20 मई को मतदान के बाद 21 मई की रात राजीव गांधी की हत्या हुई और बाकी दो चरण जो 23 और 26 मई को होने थे, उन्हें टालकर 12 और 15 जून को कर दिया गया। 21 दिन तक चुनाव टाले गए। बीच में 28 मई को देशभर में 33 जगह अस्थि कलश जुलूस निकालकर सहानुभूति का माहौल बनाया गया। नतीजा यह हुआ कि हत्या से पहले 211 सीटों पर कांग्रेस को सिर्फ 50 सीटें मिलीं और हत्या के बाद 310 सीटों पर 176 सीटें मिलीं। वोट चोरी के आरोप पर जयराम ने कहा कि भाजपा तो 2014 में सत्ता में आई, कांग्रेस के वोट तो दशकों से चोरी हो रहे हैं। ओडिशा में 1999 के बाद 25 साल से कांग्रेस सत्ता में नहीं, बंगाल में 1977 के बाद कांग्रेस का सफाया हो गया, बिहार में 1990 के बाद, यूपी में 1989 के बाद, तमिलनाडु में 1967 के बाद कांग्रेस सत्ता में नहीं आई। तब वोट चोरी याद नहीं आई। जब मोदी तीसरी बार लोकतांत्रिक तरीके से जीते तब वोट चोरी याद आई। उन्होंने कहा कि जब भी चोर शब्द का इस्तेमाल किया गया, कांग्रेस को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। हिमाचल का जिक्र करते हुए जयराम ने कहा कि यहां कांग्रेस ने हद कर दी। चुनाव आयोग के दफ्तर में जाकर बोर्ड पर कालिख पोती गई, पुतले को लातों-जूतों से मारा गया। प्रभारी रजनी पाटिल, संवैधानिक पद पर बैठे डिप्टी सीएम और मंत्री सब वहां गए। एक नेता बोला कि वह चुनाव आयोग को आग लगा देगा। यह वही चुनाव आयोग है जिसने इनकी जीत का परिणाम निकाला और आज यह सरकार चला रहे हैं। सत्ता में बैठकर संवैधानिक संस्थाओं का अपमान दिमागी दिवालियापन है। इनको लगता है सत्ता सिर्फ गांधी परिवार के लिए बनी है। एसआईआर के विरोध पर जयराम ने कहा कि इसका एक ही मकसद है, देश के बाहर के लोगों को लाकर मतदान करवाना और उनके बलबूते सत्ता में आना। बंगाल में भाजपा सरकार बनी तो बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर निकालने की चिंता कांग्रेस और इंडी गठबंधन को क्यों हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि जरूरत होगी तो वह इस मामले को सुनने को तैयार है। कांग्रेस पूरी तरह एक्सपोज हो गई है।
चुनाव आयोग पर कालिख, पुतले को लात और राहुल की PPT क्लास : जयराम बोले, कांग्रेस का मानसिक संतुलन बिगड़ा शिमला। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने चुनाव आयोग विवाद को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। शिमला में पत्रकारों से बातचीत में जयराम ने कहा कि 13 साल से सत्ता से बाहर होने के कारण कांग्रेस हताशा और निराशा में है और अब देश में अराजकता और अफरा-तफरी का माहौल बनाकर सत्ता हथियाने की कोशिश कर रही है। जयराम ठाकुर ने कहा कि यह बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि एक तरफ कांग्रेस नेता संविधान की किताब हाथ में लेकर पूरे देश में घूमते हैं, लोकसभा में शपथ के दौरान संविधान की कॉपी हाथ में लेते हैं, और दूसरी तरफ उसी संविधान से बनी संवैधानिक संस्थाओं पर देश-विदेश में बेबुनियाद आरोप लगाते हैं। राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अब उन्होंने नई टेक्नोलॉजी अपनाई है। पीपीटी बनाकर प्रेजेंटेशन देते हैं और मीडिया को क्लासरूम में बच्चों की तरह प्रोफेसर बनकर पढ़ाने की कोशिश करते हैं। यह देश के लिए हास्यास्पद स्थिति है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जिस मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगा रही है, उनका कार्यकाल अभी दो साल भी पूरा नहीं हुआ है, जबकि कांग्रेस खुद 13 साल से सत्ता से बाहर है। जयराम ने कहा कि तीनों चुनाव आयुक्तों की बैठक के बाद चुनाव आयोग ने जो प्रेस नोट जारी किया है, उससे दूध का दूध पानी का पानी हो गया है। कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखा गया पत्र कोई डिसेंटिंग नोट नहीं था। वह आयोग की किसी नीति या आईटी सिस्टम एसआईआर के खिलाफ नहीं था, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी की प्रशासनिक कार्यप्रणाली तक सीमित था। राहुल गांधी जो बातें एक अंग्रेजी अखबार के हवाले से कह रहे हैं, वह तथ्यहीन और कल्पना पर आधारित हैं। कांग्रेस के समय के चुनाव आयुक्तों का इतिहास गिनाते हुए जयराम ने कहा कि 1982 से 1985 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे आरके त्रिवेदी को बाद में गुजरात का राज्यपाल बनाया गया। मात्र 15 दिन के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त रहीं रमा देवी को हिमाचल और फिर कर्नाटक का राज्यपाल बनाया गया। टीएन शेषन 1990 से 1996 तक रहे, बाद में राष्ट्रपति का चुनाव लड़ा और 1999 में गांधीनगर से आडवाणी के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ा। एमएस गिल 1996 से 2001 तक चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव आयुक्त रहे, रिटायरमेंट के बाद कांग्रेस में शामिल हुए, राज्यसभा गए और 10 साल तक केंद्र में मंत्री रहे। 1991 के चुनाव का जिक्र करते हुए जयराम ने कहा कि लोकसभा चुनाव चार चरणों में होने थे, दो चरण हो चुके थे, 20 मई को मतदान के बाद 21 मई की रात राजीव गांधी की हत्या हुई और बाकी दो चरण जो 23 और 26 मई को होने थे, उन्हें टालकर 12 और 15 जून को कर दिया गया। 21 दिन तक चुनाव टाले गए। बीच में 28 मई को देशभर में 33 जगह अस्थि कलश जुलूस निकालकर सहानुभूति का माहौल बनाया गया। नतीजा यह हुआ कि हत्या से पहले 211 सीटों पर कांग्रेस को सिर्फ 50 सीटें मिलीं और हत्या के बाद 310 सीटों पर 176 सीटें मिलीं। वोट चोरी के आरोप पर जयराम ने कहा कि भाजपा तो 2014 में सत्ता में आई, कांग्रेस के वोट तो दशकों से चोरी हो रहे हैं। ओडिशा में 1999 के बाद 25 साल से कांग्रेस सत्ता में नहीं, बंगाल में 1977 के बाद कांग्रेस का सफाया हो गया, बिहार में 1990 के बाद, यूपी में 1989 के बाद, तमिलनाडु में 1967 के बाद कांग्रेस सत्ता में नहीं आई। तब वोट चोरी याद नहीं आई। जब मोदी तीसरी बार लोकतांत्रिक तरीके से जीते तब वोट चोरी याद आई। उन्होंने कहा कि जब भी चोर शब्द का इस्तेमाल किया गया, कांग्रेस को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। हिमाचल का जिक्र करते हुए जयराम ने कहा कि यहां कांग्रेस ने हद कर दी। चुनाव आयोग के दफ्तर में जाकर बोर्ड पर कालिख पोती गई, पुतले को लातों-जूतों से मारा गया। प्रभारी रजनी पाटिल, संवैधानिक पद पर बैठे डिप्टी सीएम और मंत्री सब वहां गए। एक नेता बोला कि वह चुनाव आयोग को आग लगा देगा। यह वही चुनाव आयोग है जिसने इनकी जीत का परिणाम निकाला और आज यह सरकार चला रहे हैं। सत्ता में बैठकर संवैधानिक संस्थाओं का अपमान दिमागी दिवालियापन है। इनको लगता है सत्ता सिर्फ गांधी परिवार के लिए बनी है। एसआईआर के विरोध पर जयराम ने कहा कि इसका एक ही मकसद है, देश के बाहर के लोगों को लाकर मतदान करवाना और उनके बलबूते सत्ता में आना। बंगाल में भाजपा सरकार बनी तो बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर निकालने की चिंता कांग्रेस और इंडी गठबंधन को क्यों हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि जरूरत होगी तो वह इस मामले को सुनने को तैयार है। कांग्रेस पूरी तरह एक्सपोज हो गई है।
- नौतोड़ अधिकार पर सरकार की चुप्पी से जनजातीय समाज में नाराजगी, राज्यपाल को ज्ञापन के बावजूद समाधान नहीं शिमला। नौतोड़ भूमि अधिकार को लेकर प्रदेश सरकार की चुप्पी से जनजातीय समाज में भारी नाराजगी है। जनजातीय सलाहकार परिषद के सदस्य केसर नेगी ने सरकार पर जनजातीय भावनाओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्यपाल को ज्ञापन सौंपे जाने के बावजूद आज तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। केसर नेगी ने कहा कि नौतोड़ का मुद्दा जनजातीय समाज की आजीविका और पहचान से जुड़ा है। दशकों से लोग इस भूमि पर काबिज हैं, खेती-बाड़ी कर रहे हैं, लेकिन सरकार की उदासीनता के कारण उन्हें आज भी अपने हक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय सलाहकार परिषद के माध्यम से भी यह मुद्दा कई बार उठाया गया, राज्यपाल को ज्ञापन दिया गया, लेकिन सरकार की ओर से कोई स्पष्ट नीति सामने नहीं आई। इससे जनजातीय क्षेत्रों में रोष बढ़ता जा रहा है। केसर नेगी ने चेतावनी देते हुए कहा कि जनजातीय भावनाओं की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार को जल्द इस पर निर्णय लेना होगा, अन्यथा जनजातीय समाज आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होगा।1
- नैना देवी टोबा के पास बस की ब्रेक फेल सभी लोग सुरक्षित नैना से वापिस जा रहे थे लोग नैना देवी टोबा के पास बस की ब्रेक फेल सभी लोग सुरक्षित नैना से वापिस जा रहे थे लोग1
- हिमाचल आजतक की विशेष रिपोर्ट शहनाज़ भाटिया के साथ,खबरें 8 तक1
- बलेरा पंचायत के चडेरा गांव में पहुंचने पर लोकप्रिय विधायक संजय अवस्थी का स्थानीय लोगों ने किया गर्मजोशी स्वागत बलेरा पंचायत के चडेरा गांव में पहुंचने पर लोकप्रिय विधायक संजय अवस्थी का स्थानीय लोगों ने किया गर्मजोशी स्वागत1
- आप देख रहे हैं DK न्यूज़ नालागढ़, हिमाचल प्रदेश। पंचायत करसौली, गांव देवली में ग्रेनेड मिलने से मचा हड़कंप। ग्रेनेड मिलने की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा और लोगों की सुरक्षा को देखते हुए रोड को दोनों तरफ से बंद कर दिया गया। वहीं ग्रेनेड के नजदीक जितने भी घर हैं, उन्हें खाली करवाया गया, ताकि लोगों की जान-माल की सुरक्षा की जा सके। लेकिन अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह ग्रेनेड यहां आया कहां से? अगर किसी गांव में ग्रेनेड जैसी खतरनाक चीज पहुंच रही है, तो यह निश्चित तौर पर गंभीर जांच का विषय है। पुलिस प्रशासन को इस मामले को सामान्य घटना मानकर नहीं छोड़ना चाहिए, बल्कि इसकी पूरी गहराई से जांच होनी चाहिए कि ग्रेनेड यहां तक कैसे पहुंचा और इसके पीछे पूरा मामला क्या है। जानकारी यह भी सामने आ रही है कि दो परिवारों के बीच विवाद चल रहा था, और इसी मामले के संबंध में सलीम नाम के एक युवक को पुलिस अपने साथ लेकर गई है। हालांकि उसकी भूमिका क्या है और इस ग्रेनेड से उसका कोई संबंध है या नहीं, इसकी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही होगी। अब सवाल यह भी है कि अगर इलाके में ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, तो क्या पुलिस व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत नहीं है? हमारे क्षेत्र के वर्तमान विधायक बाबा हरदीप सिंह जी को भी इस घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थिति का जायजा लेना चाहिए और सरकार के सामने क्षेत्र की कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को रखना चाहिए। अगर नालागढ़ थाने या संबंधित पुलिस चौकी में स्टाफ की कमी है, तो सरकार और पुलिस विभाग को उस कमी को दूर करने पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि पुलिस की मौजूदगी और कार्रवाई प्रभावी रहे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद मिल सके। आज सवाल सिर्फ एक ग्रेनेड मिलने का नहीं है। सवाल यह है कि आखिर यह ग्रेनेड यहां आया कहां से और इसके पीछे पूरी कहानी क्या है? इस मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आए और इलाके के लोगों के मन में जो डर पैदा हुआ है, वह दूर हो सके। आप इस मामले को लेकर क्या सोचते हैं? कमेंट करके अपनी राय जरूर बताइए और खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। DK न्यूज़ नालागढ़ को फॉलो करना न भूलें। मैं हूं शम्मी राजपूत, DK न्यूज़ नालागढ़, हिमाचल प्रदेश। आप देख रहे हैं DK न्यूज़ नालागढ़, हिमाचल प्रदेश। पंचायत करसौली, गांव देवली में ग्रेनेड मिलने से मचा हड़कंप। ग्रेनेड मिलने की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा और लोगों की सुरक्षा को देखते हुए रोड को दोनों तरफ से बंद कर दिया गया। वहीं ग्रेनेड के नजदीक जितने भी घर हैं, उन्हें खाली करवाया गया, ताकि लोगों की जान-माल की सुरक्षा की जा सके। लेकिन अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह ग्रेनेड यहां आया कहां से? अगर किसी गांव में ग्रेनेड जैसी खतरनाक चीज पहुंच रही है, तो यह निश्चित तौर पर गंभीर जांच का विषय है। पुलिस प्रशासन को इस मामले को सामान्य घटना मानकर नहीं छोड़ना चाहिए, बल्कि इसकी पूरी गहराई से जांच होनी चाहिए कि ग्रेनेड यहां तक कैसे पहुंचा और इसके पीछे पूरा मामला क्या है। जानकारी यह भी सामने आ रही है कि दो परिवारों के बीच विवाद चल रहा था, और इसी मामले के संबंध में सलीम नाम के एक युवक को पुलिस अपने साथ लेकर गई है। हालांकि उसकी भूमिका क्या है और इस ग्रेनेड से उसका कोई संबंध है या नहीं, इसकी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही होगी। अब सवाल यह भी है कि अगर इलाके में ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, तो क्या पुलिस व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत नहीं है? हमारे क्षेत्र के वर्तमान विधायक बाबा हरदीप सिंह जी को भी इस घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थिति का जायजा लेना चाहिए और सरकार के सामने क्षेत्र की कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को रखना चाहिए। अगर नालागढ़ थाने या संबंधित पुलिस चौकी में स्टाफ की कमी है, तो सरकार और पुलिस विभाग को उस कमी को दूर करने पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि पुलिस की मौजूदगी और कार्रवाई प्रभावी रहे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद मिल सके। आज सवाल सिर्फ एक ग्रेनेड मिलने का नहीं है। सवाल यह है कि आखिर यह ग्रेनेड यहां आया कहां से और इसके पीछे पूरी कहानी क्या है? इस मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आए और इलाके के लोगों के मन में जो डर पैदा हुआ है, वह दूर हो सके। आप इस मामले को लेकर क्या सोचते हैं? कमेंट करके अपनी राय जरूर बताइए और खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। DK न्यूज़ नालागढ़ को फॉलो करना न भूलें। मैं हूं शम्मी राजपूत, DK न्यूज़ नालागढ़, हिमाचल प्रदेश।1
- पंचकूला के मदनपुर ह*त्या*कां*ड में बड़ा फैसला, पत्नी और प्रेमी को उ*म्र*कै*द की सजा पंचकूला के मदनपुर ह*त्या*कां*ड में बड़ा फैसला, पत्नी और प्रेमी को उ*म्र*कै*द की सजा पंचकूला के सेक्टर-26 स्थित मदनपुर गांव के चर्चित हत्याकांड में अदालत ने फैसला सुनाते हुए मृतक की पत्नी और उसके प्रेमी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। मामला 22 फरवरी 2022 का है। आरोप है कि दोनों ने मिलकर पति की हत्या की और शव को गटर में फेंक दिया था। CCTV फुटेज में दोनों आरोपियों को कंधे पर शव ले जाते हुए देखा गया था। ख़बरें 24 TRICITY NEWS को Follow, Like और Share करें। आपकी खबर • आपकी आवाज़1
- पंचकूला हाईवे पर स्टंटबाजी पड़ी भारी! 45 हजार का चालान, बाइक-स्कूटी जब्त… स्टंटबाजों ने मांगी माफी! पंचकूला-शिमला हाईवे पर स्टंटबाजी करने वालों पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। चंडीमंदिर टोल प्लाजा के पास बाइक और स्कूटी से खतरनाक स्टंट का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने दोनों वाहन चालकों की पहचान कर कार्रवाई की। पुलिस ने दोनों वाहनों के कुल 45 हजार रुपये के चालान किए और बाइक-स्कूटी को इंपाउंड कर लिया। कार्रवाई में यह भी सामने आया कि एक चालक नाबालिग था। दोनों युवकों को सूरजपुर ट्रैफिक थाने बुलाकर स्टंटबाजी के खतरों के बारे में समझाया गया। युवकों ने अपनी गलती मानी और माफी भी मांगी। पुलिस कमिश्नर आईपीएस पंकज नैन ने युवाओं को साफ संदेश दिया—सड़क स्टंट करने का मैदान नहीं है। आपकी बाइक के साथ सिर्फ आप नहीं, बल्कि कई परिवारों की जिंदगी भी सड़क पर सफर करती है। पुलिस ने साफ कर दिया है कि हाईवे और शहर की प्रमुख सड़कों पर खतरनाक ड्राइविंग और स्टंटबाजी करने वालों पर निगरानी जारी रहेगी।1
- पंचायत चुनाव में हार के बाद सीएम सुक्खू सेफ सीट तलाश रहे हैं, जयराम के दावे पर भड़के नरेश चौहान बोले- क्या ज्योतिषी बन गए हैं नेता प्रतिपक्ष शिमला। हिमाचल की सियासत में बयानबाजी का पारा एक बार फिर चढ़ गया है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने दावा किया था कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पंचायत चुनाव में हार से सहम गए हैं और अब अगला विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए सेफ सीट तलाश रहे हैं। इस दावे पर मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने तीखा पलटवार किया है। चौहान ने कहा कि क्या जयराम ठाकुर ज्योतिषी बन गए हैं जो मुख्यमंत्री के मन की बात जानने का दावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के अंदरूनी माहौल की वजह से जयराम ठाकुर खुद दबाव में हैं और इसी दबाव में वह इस तरह के बयान दे रहे हैं। सियासी गलियारों में इस जुबानी जंग को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हुई मनोवैज्ञानिक लड़ाई के तौर पर देखा जा रहा है। भाजपा पंचायत चुनाव के नतीजों को सरकार के खिलाफ जनादेश बताना चाहती है, वहीं कांग्रेस इसे खारिज कर रही है। अपने पलटवार में चौहान ने सुक्खू को हिमाचल के हितों की लड़ाई लड़ने वाला मुख्यमंत्री बताया। उन्होंने वाइल्ड फ्लावर हॉल की वापसी, बीबीएमबी में हिमाचल के हक और किशाऊ समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार प्रदेश के हितों के लिए काम कर रही है और दिल्ली के सामने झुकने वाली नहीं है। चौहान ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केंद्र से हिमाचल को अपेक्षित मदद नहीं मिल रही है, केंद्र ने प्रदेश को मिलने वाली आरडीजी बंद कर दी, लेकिन भाजपा नेताओं ने इस पर चुप्पी साध रखी है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू आत्मनिर्भर हिमाचल के लिए काम कर रहे हैं और प्रदेश की जनता यह समझ चुकी है।1