क्वालीफायर-2 में राजस्थान रॉयल्स की हार के बाद डगआउट में छाई खामोशी और मायूसी ने एक ऐसी कहानी बयां की, जहाँ एक खिलाड़ी ने पूरी दुनिया का दिल तो जीता, लेकिन ट्रॉफी उसके हाथों से फिसल गई। इस पूरे सीजन के सबसे बड़े युवा तूफान, वैभव सूर्यवंशी, के चेहरे पर हार का दर्द साफ झलक रहा था। मैदान पर झुके हुए सिर और नम आँखों ने यह दिखाया कि यह हार उन्हें भीतर तक तोड़ गई थी। वैभव उन खिलाड़ियों में से हैं जो सिर्फ खेलने नहीं उतरते, बल्कि जीत को जीते हैं, और यही कारण है कि 90 से अधिक रन बनाने के बावजूद वह खुश नहीं, बल्कि खुद से नाराज़ दिखते हैं, क्योंकि उनके लिए व्यक्तिगत रिकॉर्ड से ज़्यादा टीम की जीत मायने रखती है। इस पूरे सीजन में 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी का बल्ला किसी चमत्कार से कम नहीं रहा, जिन्होंने महज 16 पारियों में 776 रन बनाए। उनके स्ट्राइक रेट और निडर अंदाज ने दुनिया भर के बड़े-बड़े क्रिकेट विशेषज्ञों को हैरान कर दिया, क्योंकि वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के दिग्गज गेंदबाजों, करोड़ों की कीमत वाले स्टार खिलाड़ियों और विश्व क्रिकेट के अनुभवी कप्तानों के सामने बिना किसी डर के बल्लेबाजी कर रहे थे। सबसे आश्चर्यजनक बात यह थी कि वह बड़े मंचों पर सबसे खतरनाक साबित होते थे। प्लेऑफ जैसे दबाव भरे मुकाबलों में जहाँ बड़े-बड़े बल्लेबाज कांप जाते हैं, वहाँ वैभव का बल्ला और आग उगलने लगता था। उन्होंने सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ 29 गेंदों पर 97 रन और फिर गुजरात टाइटंस के खिलाफ क्वालीफायर-2 में 47 गेंदों पर 96 रन बनाए। ये आंकड़े किसी साधारण खिलाड़ी के नहीं, बल्कि उस खिलाड़ी के संकेत हैं जो आने वाले समय में क्रिकेट की पूरी परिभाषा बदल सकता है। ऐसा लगने लगा था कि वह अकेले दम पर राजस्थान रॉयल्स को ट्रॉफी तक पहुंचा देंगे, हालांकि प्लेऑफ के उस हाई-वोल्टेज मुकाबले में राजस्थान की गेंदबाजी बिखर गई और वैभव की यादगार पारी भी टीम को फाइनल तक नहीं पहुंचा सकी, यह दर्शाता है कि क्रिकेट कभी-कभी सिर्फ प्रदर्शन से नहीं, बल्कि किस्मत से भी चलता है। अब यह बात पूरी दुनिया समझ चुकी है कि भारतीय क्रिकेट का आने वाला कल सिर्फ उज्ज्वल नहीं है, बल्कि उसका नाम वैभव सूर्यवंशी है।
क्वालीफायर-2 में राजस्थान रॉयल्स की हार के बाद डगआउट में छाई खामोशी और मायूसी ने एक ऐसी कहानी बयां की, जहाँ एक खिलाड़ी ने पूरी दुनिया का दिल तो जीता, लेकिन ट्रॉफी उसके हाथों से फिसल गई। इस पूरे सीजन के सबसे बड़े युवा तूफान, वैभव सूर्यवंशी, के चेहरे पर हार का दर्द साफ झलक रहा था। मैदान पर झुके हुए सिर और नम आँखों ने यह दिखाया कि यह हार उन्हें भीतर तक तोड़ गई थी। वैभव उन खिलाड़ियों में से हैं जो सिर्फ खेलने नहीं उतरते, बल्कि जीत को जीते हैं, और यही कारण है कि 90 से अधिक रन बनाने के बावजूद वह खुश नहीं, बल्कि खुद से नाराज़ दिखते हैं, क्योंकि उनके लिए व्यक्तिगत रिकॉर्ड से ज़्यादा टीम की जीत मायने रखती है। इस पूरे सीजन में 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी का बल्ला किसी चमत्कार से कम नहीं रहा, जिन्होंने महज 16 पारियों में 776 रन बनाए। उनके स्ट्राइक रेट और निडर अंदाज ने दुनिया भर के बड़े-बड़े क्रिकेट विशेषज्ञों को हैरान कर दिया, क्योंकि वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के दिग्गज गेंदबाजों, करोड़ों की कीमत वाले स्टार खिलाड़ियों और विश्व क्रिकेट के अनुभवी कप्तानों के सामने बिना किसी डर के बल्लेबाजी कर रहे थे। सबसे आश्चर्यजनक बात यह थी कि वह बड़े मंचों पर सबसे खतरनाक साबित होते थे। प्लेऑफ जैसे दबाव भरे मुकाबलों में जहाँ बड़े-बड़े बल्लेबाज कांप जाते हैं, वहाँ वैभव का बल्ला और आग उगलने लगता था। उन्होंने सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ 29 गेंदों पर 97 रन और फिर गुजरात टाइटंस के खिलाफ क्वालीफायर-2 में 47 गेंदों पर 96 रन बनाए। ये आंकड़े किसी साधारण खिलाड़ी के नहीं, बल्कि उस खिलाड़ी के संकेत हैं जो आने वाले समय में क्रिकेट की पूरी परिभाषा बदल सकता है। ऐसा लगने लगा था कि वह अकेले दम पर राजस्थान रॉयल्स को ट्रॉफी तक पहुंचा देंगे, हालांकि प्लेऑफ के उस हाई-वोल्टेज मुकाबले में राजस्थान की गेंदबाजी बिखर गई और वैभव की यादगार पारी भी टीम को फाइनल तक नहीं पहुंचा सकी, यह दर्शाता है कि क्रिकेट कभी-कभी सिर्फ प्रदर्शन से नहीं, बल्कि किस्मत से भी चलता है। अब यह बात पूरी दुनिया समझ चुकी है कि भारतीय क्रिकेट का आने वाला कल सिर्फ उज्ज्वल नहीं है, बल्कि उसका नाम वैभव सूर्यवंशी है।
- महाराजगंज जिले के सोहरौना राजा बड़ा टोला गांव में कीर्तन यादव के घर के पास स्थित नाली की स्थिति बेहद खराब है, जिसके कारण यह अक्सर गंदगी और कूड़े से जाम हो जाती है। इस समस्या के चलते घरों की नींव में पानी भर जाता है और पानी का उचित बहाव नहीं हो पाता, जिससे जलभराव की गंभीर स्थिति बनी रहती है। गंदगी और जमा हुए पानी से भारी संख्या में मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है। ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से गुजारिश की है कि नाली की ऊंचाई बढ़ाकर उसे सड़क के स्तर पर लाया जाए ताकि पानी का बहाव सुचारु रूप से हो सके, साथ ही नाली और आसपास की गंदगी व कूड़े-कचरे की तत्काल साफ-सफाई भी करवाई जाए।1
- महाराजगंज जिले के बागापार स्थित लक्ष्मी गैस एजेंसी में उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर प्राप्त करने के लिए अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। एजेंसी द्वारा गैस वितरण के नाम पर लोगों को बहुत परेशान किया जाता है, जिसके चलते कई ग्राहक सिलेंडर पाने की उम्मीद में वहीं रातें बिताने पर मजबूर हैं, फिर भी सभी को गैस नहीं मिल पाती। बताया गया है कि यह एजेंसी होम डिलीवरी की सुविधा देने के बजाय अपने गोदाम से ही गैस सिलेंडर वितरित करती है, जिससे जनता की परेशानी और बढ़ गई है।2
- पंडित देवीशरण शास्त्री ने लोगों को किसी भी प्रकार की समस्या को लेकर चिंतित होने पर बिना किसी झिझक के उनसे फोन पर संपर्क करने का आमंत्रण दिया है। उन्होंने संपर्क करने वाले व्यक्तियों को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही, दिनांक 31-05-2026 के लिए सभी चंद्रराशियों का राशिफल भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इच्छुक व्यक्ति पंडित देवीशरण शास्त्री से 6307689226 पर संपर्क कर सकते हैं।1
- महराजगंज जिले के कोल्हुई थाना क्षेत्र अंतर्गत शिकारगढ़ गांव में एक हृदयविदारक सड़क दुर्घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। मिट्टी से लदी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट में आने से 12 वर्षीय बालक आतिश की दर्दनाक मौत हो गई। बताया गया है कि ट्रैक्टर की चपेट में आने से बालक गंभीर रूप से घायल हुआ था, जिसने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। इस दुखद घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर छा गई है। पुलिस ने मामले की सूचना मिलते ही जांच शुरू कर दी है।1