बिहार/भोजपुर/पटना में भारत भूषण तिवारी के कथित पुलिस एनकाउंटर में मौत के बाद एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि उन्होंने वर्षों पहले ही अपना श्राद्ध कर लिया था। उनकी मां ने राजस्थान पत्रिका से बात करते हुए बताया कि तिवारी ने अपने परिजनों से यह भी स्पष्ट कर दिया था कि वह शादी नहीं करेंगे, जिसकी वजहें अब सामने आई हैं। तिवारी ने परिवार को बताया था कि पुलिस और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी उनके काम से नाराज हैं और कभी भी उनकी हत्या करवा सकते हैं। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने और बाबूजी के पास पैसे न होने का हवाला देते हुए उन्होंने आशंका जताई थी कि उनकी मौत के बाद परिवार वाले शायद श्राद्ध न कर पाएं, इसलिए उन्होंने खुद ही अपना श्राद्ध कर लिया था ताकि बाद में किसी को परेशानी न हो। शादी न करने के पीछे भी यही विचार था; उनकी मां के अनुसार, वे कहते थे कि समाज सेवा के कारण उनके कई दुश्मन बन गए हैं और उनके पास कई लोगों के काले कारनामों की जानकारी है, जिसके चलते उनके जीवन का कोई भरोसा नहीं। ऐसी स्थिति में, वह अपनी पत्नी और बच्चों की देखभाल को लेकर चिंतित थे। भारत भूषण तिवारी का मानना था कि गरीब, दलित और जरूरतमंद लोग ही उनका परिवार हैं और उनकी सेवा करना ही उनका धर्म है, इसी सोच के साथ उन्होंने आजीवन अविवाहित रहने का फैसला किया था। भारत भूषण तिवारी की मौत के बाद उनके परिजनों ने स्पष्ट किया है कि वे तब तक उनका श्राद्ध नहीं करेंगे जब तक उनकी मां के जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती। परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि पुलिस ने गांव में तीन गोलियां लगने की बात कही थी, लेकिन जब उन्हें शव मिला तो उस पर पांच गोलियों के निशान थे, जिनमें से दो निजी अंगों के पास लगी थीं। उन्होंने पुलिस से इन अतिरिक्त गोलियों के बारे में जवाब मांगा है। भारत की बहन ने आरोप लगाया कि उन्हें बेहद करीब से सटाकर गोली मारी गई थी और पुलिस ने हिरासत में लेने के बाद उनकी बेरहमी से पिटाई भी की थी। परिजनों के अनुसार, घटना के दौरान भारत की मां और भाभी ने पुलिसकर्मियों को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें वहां से हटा दिया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और पुलिस की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
बिहार/भोजपुर/पटना में भारत भूषण तिवारी के कथित पुलिस एनकाउंटर में मौत के बाद एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि उन्होंने वर्षों पहले ही अपना श्राद्ध कर लिया था। उनकी मां ने राजस्थान पत्रिका से बात करते हुए बताया कि तिवारी ने अपने परिजनों से यह भी स्पष्ट कर दिया था कि वह शादी नहीं करेंगे, जिसकी वजहें अब सामने आई हैं। तिवारी ने परिवार को बताया था कि पुलिस और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी उनके काम से नाराज हैं और कभी भी उनकी हत्या करवा सकते हैं। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने और बाबूजी के पास पैसे न होने का हवाला देते हुए उन्होंने आशंका जताई थी कि उनकी मौत के बाद परिवार वाले शायद श्राद्ध न कर पाएं, इसलिए उन्होंने खुद ही अपना श्राद्ध कर लिया था ताकि बाद में किसी को परेशानी न हो। शादी न करने के पीछे भी यही विचार था; उनकी मां के अनुसार, वे कहते थे कि समाज सेवा के कारण उनके कई दुश्मन बन गए हैं और उनके पास कई लोगों के काले कारनामों की जानकारी है, जिसके चलते उनके जीवन का कोई भरोसा नहीं। ऐसी स्थिति में, वह अपनी पत्नी और बच्चों की देखभाल को लेकर चिंतित थे। भारत भूषण तिवारी का मानना था कि गरीब, दलित और जरूरतमंद लोग ही उनका परिवार हैं और उनकी सेवा करना ही उनका धर्म है, इसी सोच के साथ उन्होंने आजीवन अविवाहित रहने का फैसला किया था। भारत भूषण तिवारी की मौत के बाद उनके परिजनों ने स्पष्ट किया है कि वे तब तक उनका श्राद्ध नहीं करेंगे जब तक उनकी मां के जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती। परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि पुलिस ने गांव में तीन गोलियां लगने की बात कही थी, लेकिन जब उन्हें शव मिला तो उस पर पांच गोलियों के निशान थे, जिनमें से दो निजी अंगों के पास लगी थीं। उन्होंने पुलिस से इन अतिरिक्त गोलियों के बारे में जवाब मांगा है। भारत की बहन ने आरोप लगाया कि उन्हें बेहद करीब से सटाकर गोली मारी गई थी और पुलिस ने हिरासत में लेने के बाद उनकी बेरहमी से पिटाई भी की थी। परिजनों के अनुसार, घटना के दौरान भारत की मां और भाभी ने पुलिसकर्मियों को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें वहां से हटा दिया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और पुलिस की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
- बिहार के लखीसराय से नीट परीक्षा को लेकर एक बड़े खुलासे का दावा किया गया है, जहाँ कथित तौर पर कुछ अभ्यर्थियों की जगह दूसरे छात्रों को परीक्षा में बैठाने की एक सुनियोजित साजिश रची गई थी। इस पूरे मामले में एक मेडिकल छात्र की भूमिका उजागर हुई है, जिसने कथित तौर पर 40 लाख रुपये लेकर इस धोखाधड़ी के नेटवर्क को संचालित किया। जानकारी के अनुसार, लखीसराय में आयोजित नीट परीक्षा के दौरान यह योजना बनाई गई थी कि कुछ परीक्षार्थियों के स्थान पर दूसरे व्यक्ति परीक्षा देंगे। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस कार्य के लिए एक बड़ी रकम का लेन-देन किया गया था और एक संगठित गिरोह सक्रिय रूप से इस साजिश में शामिल था। बताया गया है कि मेडिकल की पढ़ाई कर रहा एक छात्र ही इस पूरे नेटवर्क का हिस्सा था और उसने ही कथित तौर पर 40 लाख रुपये लेकर परीक्षार्थियों के बदले दूसरे छात्रों को परीक्षा में बैठाने की योजना बनाई थी।1
- आदरणीय नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में कार्यरत भारतीय जनता पार्टी के क्रीडा प्रकोष्ठ संयोजक सतीश राजू ने अंतर्राष्ट्रीय अर्निस् खेल विजेता अंशु को सम्मानित किया। यह सम्मान अंतर्राष्ट्रीय अर्निस् खेल में उनकी उत्कृष्ट उपलब्धि और जीत के उपलक्ष्य में प्रदान किया गया।1
- पटना सिटी के चकबुरी गली स्थित ऐतिहासिक कबीर मठ परिसर में सतगुरु कबीर प्रकटोत्सव के अवसर पर एक भव्य वार्षिक सत्संग एवं श्रद्धा समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं और कबीर पंथ के अनुयायियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति दर्ज की गई, जिससे पूरे परिसर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिकता का वातावरण बना रहा और आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। बिहार सरकार के मंत्री रत्नेश सादा इस समारोह के मुख्य अतिथि रहे। अपने संबोधन में, उन्होंने सतगुरु कबीर के विचारों को आज के समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया। मंत्री सादा ने रेखांकित किया कि कबीरदास जी ने समाज को अंधविश्वास, पाखंड और भेदभाव से दूर रहकर सत्य, मानव सेवा और आत्मचिंतन का मार्ग दिखाया था। उन्होंने लोगों से कबीर के इन महत्वपूर्ण संदेशों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। साथ ही, मंत्री रत्नेश सादा ने कबीरदास के प्रसिद्ध दोहे “बुरा जो देखन मैं चला...” का उल्लेख करते हुए आत्मनिरीक्षण के महत्व पर जोर दिया। दिनभर चले इस समारोह के दौरान सत्संग, भजन-कीर्तन, चौका-आरती एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने कबीर वाणी का श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कबीर के विचारों को सामाजिक समरसता, मानवता और आपसी सद्भाव को मजबूत करने वाला बताया। समारोह के अंत में संत-महात्माओं और विशिष्ट अतिथियों का सम्मान किया गया। आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए समाज में मानवता, सद्भाव और आध्यात्मिक जागरूकता को आगे बढ़ाने के अपने संकल्प को दोहराया।1
- तिरहुत प्रमंडल के एमएलसी ब्रजवासी ने शिक्षक के अधिकारों से जुड़े मुद्दे पर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस मामले को लेकर सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर जमकर भड़ास निकाली।1
- माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में, खेल की दुनिया में देश का नाम गर्व से ऊंचा करने वाली विश्व चैंपियन अंशु कुमारी को सम्मानित किया गया। यह सम्मान बिहार भाजपा के क्रीड़ा प्रकोष्ठ के संयोजक सतीश राजू और क्षेत्रीय वार्ड पार्षद पिंकी यादव द्वारा प्रदान किया गया। अंशु कुमारी ने अपनी इस उपलब्धि से देश का नाम रोशन कर सभी को गौरवान्वित किया है।1
- भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी युवक भरत तिवारी के निधन के बाद, भोजपुरी गायक सह अभिनेता खेसारी लाल यादव उनके परिजनों से मिलने गांव पहुँचे। भरत तिवारी की मौत को लेकर परिजन समेत ग्रामीण पुलिस एनकाउंटर पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। खेसारी लाल यादव अचानक अपने लोगों के साथ भरत तिवारी के घर पहुँचे और उनकी माँ, पिता व अन्य परिजनों से मुलाकात कर पूरी घटना की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने परिवार को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया और एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी प्रदान की। बातचीत में खेसारी ने बताया कि बिहार के सीएम सम्राट चौधरी हैं और उन्होंने न्यायिक जांच कराने का निर्देश दिया है। उन्होंने पीड़ित परिवार से पटना चलने का आग्रह किया, यह कहते हुए कि यह लड़ाई सबकी है और इसे मिलकर लड़ना होगा क्योंकि केवल घर बैठे रहने से काम नहीं चलेगा। खेसारी ने जोर देकर कहा कि अगर एनकाउंटर हुआ है तो इसकी जांच अवश्य होनी चाहिए और वह पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं और आगे भी रहेंगे। खेसारी लाल यादव के गाँव पहुँचते ही उनके प्रशंसकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, देखते ही देखते वहाँ हजारों लोग जमा हो गए। परिवार के सदस्यों से काफी देर तक बातचीत करने के बाद खेसारी लाल यादव पटना के लिए रवाना हो गए। भरत तिवारी की मौत के बाद से ही उनके परिजनों से मिलने के लिए लोगों का तांता लगा हुआ है, और सभी पुलिस एनकाउंटर पर लगातार गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।1
- पटना जंक्शन से सामने आए एक वायरल वीडियो में इंक्वायरी काउंटर पर तैनात एक रेलवे कर्मचारी अपनी कुर्सी पर आराम करता हुआ दिखाई दे रहा है, जबकि कई यात्री जानकारी प्राप्त करने के लिए उसके सामने खड़े नजर आ रहे थे। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने रेलवे सेवाओं की गुणवत्ता और कर्मचारियों की जवाबदेही के संबंध में एक नई बहस छेड़ दी है।1
- बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी पर एक बड़ी बात कही है। यह टिप्पणी राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है।1