अजब एमपी के गजब कारनामे: “8 सेकंड की ‘वीडियो सरकार’ बनाम जमीनी सच्चाई—बाड़ी में सोम कंपनी की खुली लूट पर आबकारी तंत्र बेनकाब, अधिकारी की चुप्पी या संरक्षण?” रितिक जैन | बाड़ी (रायसेन) बाड़ी में शराब ठेकों पर जो खेल सामने आया है, वह अब एक सामान्य अनियमितता का मामला नहीं रहा, बल्कि यह सीधे-सीधे सिस्टम की विश्वसनीयता, प्रशासनिक ईमानदारी और कानून के पालन पर बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो गया है, जहां एक तरफ जनता से खुलेआम अतिरिक्त वसूली की जा रही है और दूसरी तरफ जिम्मेदार विभाग 8 सेकंड के वीडियो के सहारे “सब ठीक” का भ्रम फैलाने में लगा हुआ है। 20 तारीख को आबकारी अधिकारी सुनील कुमार मीणा (बरेली) द्वारा व्हाट्सएप ग्रुप में एक छोटा सा वीडियो डालकर दावा किया गया कि बाड़ी की शराब दुकानों पर ओवररेटिंग के खिलाफ कार्रवाई कर दी गई है और अब सभी रेट एमआरपी के अनुरूप हो गए हैं, लेकिन यह दावा अगले ही दिन जमीनी हकीकत के सामने पूरी तरह ढह गया और विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर संदेह खड़ा कर गया। 21 तारीख को हमारी टीम जब मौके पर पहुंची, तो जो सामने आया वह चौंकाने वाला ही नहीं बल्कि विभागीय दावों की खुली पोल खोलने वाला था, क्योंकि बियर कैन जिस पर एमआरपी 140 रुपए अंकित है, उसे 150 रुपए में बेचा जा रहा था, वहीं सफेद क्वार्टर जिसकी एमआरपी 75 रुपए है, वह 100 रुपए में खुलेआम बेची जा रही थी, यानी विभाग की तथाकथित कार्रवाई के अगले ही दिन ठेकेदार उसी अंदाज में नियमों को ठेंगा दिखाते नजर आए। दुकान पर रेट लिस्ट टंगी हुई थी, लेकिन उसका पालन कहीं नजर नहीं आया, जिससे यह साफ हो गया कि नियम सिर्फ दिखावे के लिए हैं और असल में ग्राहकों से मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं, यह कोई आकस्मिक गलती नहीं बल्कि एक संगठित और निरंतर चलने वाला वसूली तंत्र है, जो बिना किसी भय के संचालित हो रहा है। स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब दुकान के पास संचालित अहाता सामने आता है, जहां खुलेआम बैठाकर शराब पिलाई जा रही है, जो सीधे तौर पर कानून और व्यवस्था दोनों को चुनौती देता है, अब सवाल यह उठता है कि क्या यह सब बिना विभाग की जानकारी के संभव है या फिर यह सब कुछ “जानबूझकर नजरअंदाज” किया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल उस तथाकथित “जांच वीडियो” पर है, जिसमें सिर्फ एक व्यक्ति से कीमत पूछकर पूरी दुकान को क्लीन चिट दे दी गई, न कोई विस्तृत निरीक्षण, न कोई दस्तावेजी कार्रवाई, न कोई सार्वजनिक रिपोर्ट, और अगले ही दिन उसी स्थान पर वही पुरानी लूट जारी मिलना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि यह कार्रवाई नहीं बल्कि सच्चाई को दबाने का प्रयास था। अब सीधे सवाल आबकारी अधिकारी सुनील कुमार मीणा पर खड़े होते हैं कि अगर कार्रवाई हुई थी तो उसका रिकॉर्ड कहां है, कितने चालान काटे गए, कितने ठेकों पर कार्रवाई हुई, कितना जुर्माना वसूला गया, और क्यों यह सब जानकारी जनता से छिपाई जा रही है, या फिर यह माना जाए कि पूरी कार्रवाई सिर्फ व्हाट्सएप वीडियो तक सीमित थी और जमीनी स्तर पर कुछ भी नहीं बदला। सोम कंपनी की भूमिका भी इस पूरे मामले में बेहद गंभीर नजर आती है, क्योंकि बार-बार शिकायतों और खुलासों के बावजूद यदि उसी तरीके से ओवररेटिंग जारी रहती है, तो यह संकेत देता है कि ठेकेदार को कानून का कोई डर नहीं है, और यह भी संभव है कि उसे किसी स्तर पर संरक्षण प्राप्त हो, जो पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है। स्थानीय जनता में इस पूरे मामले को लेकर गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है, क्योंकि एक तरफ उन्हें हर बोतल पर अतिरिक्त पैसा देना पड़ रहा है और दूसरी तरफ जिम्मेदार अधिकारी जवाब देने से बचते नजर आते हैं, जिससे यह मामला अब सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि जवाबदेही से भागने का प्रतीक बन गया है। अब यह मुद्दा स्थानीय स्तर से निकलकर राज्य स्तर तक पहुंचने की कगार पर है, क्योंकि यदि जमीनी हकीकत और विभागीय दावों में इतना बड़ा अंतर है, तो यह केवल एक ठेके की समस्या नहीं बल्कि पूरे आबकारी सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल है, और यदि इसे समय रहते नहीं रोका गया तो यह मामला बड़ा जनआक्रोश बन सकता है। मध्यप्रदेश में शराब व्यवस्था को लेकर सख्ती और पारदर्शिता की बात की जाती है, लेकिन बाड़ी की यह स्थिति उन दावों की सच्चाई उजागर कर रही है, , या फिर यह भी सिर्फ फाइलों और वीडियो में दबकर रह जाएगा। अब हालात ऐसे हैं कि या तो विभाग जमीन पर उतरकर वास्तविक कार्रवाई करे और ठोस परिणाम दिखाए, या फिर यह मान लिया जाए कि सिस्टम ने ठेकेदारों के सामने घुटने टेक दिए हैं और जनता को लूट के लिए छोड़ दिया गया है। क्या बाड़ी में कानून जिंदा है या सिर्फ व्हाट्सएप वीडियो में दिखाया जा रहा है, और अगर जिम्मेदार अधिकारी अब भी नहीं जागे तो यह मामला सिर्फ खबर नहीं रहेगा बल्कि जवाब मांगती आवाज बनकर पूरे प्रदेश में गूंजेगा।
अजब एमपी के गजब कारनामे: “8 सेकंड की ‘वीडियो सरकार’ बनाम जमीनी सच्चाई—बाड़ी में सोम कंपनी की खुली लूट पर आबकारी तंत्र बेनकाब, अधिकारी की चुप्पी या संरक्षण?” रितिक जैन | बाड़ी (रायसेन) बाड़ी में शराब ठेकों पर जो खेल सामने आया है, वह अब एक सामान्य अनियमितता का मामला नहीं रहा, बल्कि यह सीधे-सीधे सिस्टम की विश्वसनीयता, प्रशासनिक ईमानदारी और कानून के पालन पर बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो गया है, जहां एक तरफ जनता से खुलेआम अतिरिक्त वसूली की जा रही है और दूसरी तरफ जिम्मेदार विभाग 8 सेकंड के वीडियो के सहारे “सब ठीक” का भ्रम फैलाने में लगा हुआ है। 20 तारीख को आबकारी अधिकारी सुनील कुमार मीणा (बरेली) द्वारा व्हाट्सएप ग्रुप में एक छोटा सा वीडियो डालकर दावा किया गया कि बाड़ी की शराब दुकानों पर ओवररेटिंग के खिलाफ कार्रवाई कर दी गई है और अब सभी रेट एमआरपी के अनुरूप हो गए हैं, लेकिन यह दावा अगले ही दिन जमीनी हकीकत के सामने पूरी तरह ढह गया और विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर संदेह खड़ा कर गया। 21 तारीख को हमारी टीम जब मौके पर पहुंची, तो जो सामने आया वह चौंकाने वाला ही नहीं बल्कि विभागीय दावों की खुली पोल खोलने वाला था, क्योंकि बियर कैन जिस पर एमआरपी 140 रुपए अंकित है, उसे 150 रुपए में बेचा जा रहा था, वहीं सफेद क्वार्टर जिसकी एमआरपी 75 रुपए है, वह 100 रुपए में खुलेआम बेची जा रही थी, यानी विभाग की तथाकथित कार्रवाई के अगले ही दिन ठेकेदार उसी अंदाज में नियमों को ठेंगा दिखाते नजर आए। दुकान पर रेट लिस्ट टंगी हुई थी, लेकिन उसका पालन कहीं नजर नहीं आया, जिससे यह साफ हो गया कि नियम सिर्फ दिखावे के लिए हैं और असल में ग्राहकों से मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं, यह कोई आकस्मिक गलती नहीं बल्कि एक संगठित और निरंतर चलने वाला वसूली तंत्र है, जो बिना किसी भय के संचालित हो रहा है। स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब दुकान के पास संचालित अहाता सामने आता है, जहां खुलेआम बैठाकर शराब पिलाई जा रही है, जो सीधे तौर पर कानून और व्यवस्था दोनों को चुनौती देता है, अब सवाल यह उठता है कि क्या यह सब बिना विभाग की जानकारी के संभव है या फिर यह सब कुछ “जानबूझकर नजरअंदाज” किया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल उस तथाकथित “जांच वीडियो” पर है, जिसमें सिर्फ एक व्यक्ति से कीमत पूछकर पूरी दुकान को क्लीन चिट दे दी गई, न कोई विस्तृत निरीक्षण, न कोई दस्तावेजी कार्रवाई, न कोई सार्वजनिक रिपोर्ट, और अगले ही दिन उसी स्थान पर वही पुरानी लूट जारी मिलना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि यह कार्रवाई नहीं बल्कि सच्चाई को दबाने का प्रयास था। अब सीधे सवाल आबकारी अधिकारी सुनील कुमार मीणा पर खड़े होते हैं कि अगर कार्रवाई हुई थी तो उसका रिकॉर्ड कहां है, कितने चालान काटे गए, कितने ठेकों पर कार्रवाई हुई, कितना जुर्माना वसूला गया, और क्यों यह सब जानकारी जनता से छिपाई जा रही है, या फिर यह माना जाए कि पूरी कार्रवाई सिर्फ व्हाट्सएप वीडियो तक सीमित थी और जमीनी स्तर पर कुछ भी नहीं बदला। सोम कंपनी की भूमिका भी इस पूरे मामले में बेहद गंभीर नजर आती है, क्योंकि बार-बार शिकायतों और खुलासों के बावजूद यदि उसी तरीके से ओवररेटिंग जारी रहती है, तो यह संकेत देता है कि ठेकेदार को कानून का कोई डर नहीं है, और यह भी संभव है कि उसे किसी स्तर पर संरक्षण प्राप्त हो, जो पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है। स्थानीय जनता में इस पूरे मामले को लेकर गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है, क्योंकि एक तरफ उन्हें हर बोतल पर अतिरिक्त पैसा देना पड़ रहा है और दूसरी तरफ जिम्मेदार अधिकारी जवाब देने से बचते नजर आते हैं, जिससे यह मामला अब सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि जवाबदेही से भागने का प्रतीक बन गया है। अब यह मुद्दा स्थानीय स्तर से निकलकर राज्य स्तर तक पहुंचने की कगार पर है, क्योंकि यदि जमीनी हकीकत और विभागीय दावों में इतना बड़ा अंतर है, तो यह केवल एक ठेके की समस्या नहीं बल्कि पूरे आबकारी सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल है, और यदि इसे समय रहते नहीं रोका गया तो यह मामला बड़ा जनआक्रोश बन सकता है। मध्यप्रदेश में शराब व्यवस्था को लेकर सख्ती और पारदर्शिता की बात की जाती है, लेकिन बाड़ी की यह स्थिति उन दावों की सच्चाई उजागर कर रही है, , या फिर यह भी सिर्फ फाइलों और वीडियो में दबकर रह जाएगा। अब हालात ऐसे हैं कि या तो विभाग जमीन पर उतरकर वास्तविक कार्रवाई करे और ठोस परिणाम दिखाए, या फिर यह मान लिया जाए कि सिस्टम ने ठेकेदारों के सामने घुटने टेक दिए हैं और जनता को लूट के लिए छोड़ दिया गया है। क्या बाड़ी में कानून जिंदा है या सिर्फ व्हाट्सएप वीडियो में दिखाया जा रहा है, और अगर जिम्मेदार अधिकारी अब भी नहीं जागे तो यह मामला सिर्फ खबर नहीं रहेगा बल्कि जवाब मांगती आवाज बनकर पूरे प्रदेश में गूंजेगा।
- भोपाल के नमो वन पार्क को मिलेगा नया रूप 🌿✨ महापौर मालती राय ने लालघाटी स्थित निर्माणाधीन पार्क का किया निरीक्षण, अधिकारियों को गुणवत्ता और समयसीमा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश। शहर के इस नए आकर्षण को लेकर सभी में उत्साह 🙌 #Bhopal #NamoVanPark #Development #CityUpdate #GreenBhopal1
- मध्य प्रदेश कांग्रेस महासचिव प्रवक्ता अमित शर्मा ने महिला आरक्षण बिल पर कहा कि प्रधानमंत्री और भाजपा शार्ट टर्म मेमोरी लॉस से पीड़ित हैं, देश को गुमराह करना बंद करें।1
- मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हिंदू बचाओ मंच समिति के कार्यकर्ता चंद्रशेखर तिवारी ने लेंसकार्ट के शोरूम पहुंचकर वहां के कर्मचारियों को बिंदी और कलवा लगाकर उसके प्रति विरोध जताया1
- भोपाल के संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) क्षेत्र में विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का मामला सामने आया है। शिकायत के अनुसार, कथा वाचक मुकेश शर्मा ने कमलेश नाथानी से उनके बेटे को विदेश में नौकरी दिलाने का आश्वासन देकर कुल 1 लाख 50 हजार रुपए लिए।1
- Post by Naved khan1
- Post by शाहिद खान रिपोर्टर1
- भोपाल,, महिला आरक्षण को लेकर मचे सियासी घमासान में आरोप प्रत्यारोप के बाद मप्र में बीजेपी और कांग्रेस दोनों प्रमुख राजनीतिक दल अब सड़को पर उतर गए हैं,, बीजेपी की आक्रोश रैली का जवाब आज महिला कांग्रेस ने सड़क पर उतर कर दिया,, आज भोपाल में महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पीसीसी से बीजेपी कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला,, मगर पुलिस और जिला प्रशासन ने बीच रास्ते में बेरिकेटिंग करके उन्हें रोक दिया,, इस दौरान महिला कांग्रेस ने सांकेतिक रूप से लॉलीपॉप और झुनझुना के पोस्टर, बैनर, तख्तियां लहराए,, अपने आंदोलन के दौरान महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पीसीसी के बाहर ही सरकार का पुतला दहन किया,, महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रीना बोरासी ने कहा कि, पूरे प्रदेश में इस तरह के प्रदर्शन आयोजित हो रहे हे,, बीजेपी पर झूठ फैलाने का आरोप लगाते हुए रीना बोरासी ने कहा कि, महिला आरक्षण बिल के समर्थन में कांग्रेस है, और इसे तत्काल लागू किया जाना चाहिए, यह महिला आरक्षण के आड़ में परिसीमन लागू कर रहे थे,, विरोध परिसीमन बिल का था,, आंदोलन आगे भी जारी रहेगा,, बाइट - रीना बोरासी, प्रदेश अध्यक्ष, महिला कांग्रेस मप्र4
- *SENIOR CITIZENS Can Put "E" In front of their car while driving* 🚗 🚗🚗 *Oh! 😳 Didn't know this.*1
- Post by Naved khan1