“किडनी बचाओ, धरती बचाओ” : विश्व किडनी दिवस 2026 ने दी मानवता को दोहरी चेतावनी स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ की कलम से “किडनी बचाओ, धरती बचाओ” : विश्व किडनी दिवस 2026 ने दी मानवता को दोहरी चेतावनी हरिद्वार, 12 मार्च। विश्व किडनी दिवस 2026 इस बार केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि मानव और प्रकृति दोनों के अस्तित्व का संदेश लेकर आया है। “सभी के लिए किडनी स्वास्थ्य – लोगों की देखभाल, पृथ्वी की रक्षा” थीम के साथ मनाए जा रहे इस दिवस ने साफ संकेत दिया है कि यदि किडनियां सुरक्षित नहीं रहीं तो जीवन भी सुरक्षित नहीं रहेगा। विशेषज्ञों के अनुसार आज दुनिया में हर 100 में से लगभग 15–20 लोग किसी न किसी स्तर की क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) से पीड़ित हैं। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और अनियंत्रित जीवनशैली इसके प्रमुख कारण बन रहे हैं। चिंता की बात यह है कि यह बीमारी अक्सर बिना लक्षणों के बढ़ती है और कई मरीजों को तब पता चलता है जब किडनी लगभग जवाब दे चुकी होती है। फोर्टिस अस्पताल समूह के नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञ प्रो. (डॉ.) संजीव गुलाटी के अनुसार किडनी एक बार गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो जाए तो उसे पूरी तरह ठीक करना लगभग असंभव होता है। इसलिए बचाव ही सबसे बड़ा उपचार है। इस वर्ष की थीम ने किडनी उपचार के पर्यावरणीय प्रभाव की ओर भी ध्यान दिलाया है। डायलिसिस जैसी जीवनरक्षक प्रक्रिया में भारी मात्रा में पानी, बिजली और प्लास्टिक सामग्री का उपयोग होता है, जो पृथ्वी पर पर्यावरणीय दबाव बढ़ाता है। ऐसे में टिकाऊ स्वास्थ्य सेवाएं, जल पुनर्चक्रण, ऊर्जा-कुशल मशीनें और टेलीमेडिसिन जैसी तकनीकें भविष्य की आवश्यकता बनती जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोग समय रहते रक्तचाप और शुगर नियंत्रित रखें, संतुलित आहार लें, नियमित व्यायाम करें और अनावश्यक दवाओं से बचें, तो किडनी रोग के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। संदेश स्पष्ट है— किडनी की रक्षा केवल शरीर की रक्षा नहीं, बल्कि पृथ्वी के भविष्य की भी रक्षा है। – स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़
“किडनी बचाओ, धरती बचाओ” : विश्व किडनी दिवस 2026 ने दी मानवता को दोहरी चेतावनी स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ की कलम से “किडनी बचाओ, धरती बचाओ” : विश्व किडनी दिवस 2026 ने दी मानवता को दोहरी चेतावनी हरिद्वार, 12 मार्च। विश्व किडनी दिवस 2026 इस बार केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि मानव और प्रकृति दोनों के अस्तित्व का संदेश लेकर आया है। “सभी के लिए किडनी स्वास्थ्य – लोगों की देखभाल, पृथ्वी की रक्षा” थीम के साथ मनाए जा रहे इस दिवस ने साफ संकेत दिया है कि यदि किडनियां सुरक्षित नहीं रहीं तो जीवन भी सुरक्षित नहीं रहेगा। विशेषज्ञों के अनुसार आज दुनिया में हर 100 में से लगभग 15–20 लोग किसी न किसी स्तर की क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) से पीड़ित हैं। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और अनियंत्रित जीवनशैली इसके प्रमुख कारण बन रहे हैं। चिंता की बात यह है कि यह बीमारी अक्सर बिना लक्षणों के बढ़ती है और कई मरीजों को तब पता चलता है जब किडनी लगभग जवाब दे चुकी होती है। फोर्टिस अस्पताल समूह के नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञ प्रो. (डॉ.) संजीव गुलाटी के अनुसार किडनी एक बार गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो जाए तो उसे पूरी तरह ठीक करना लगभग असंभव होता है। इसलिए बचाव ही सबसे बड़ा उपचार है। इस वर्ष की थीम ने किडनी उपचार के पर्यावरणीय प्रभाव की ओर भी ध्यान दिलाया है। डायलिसिस जैसी जीवनरक्षक प्रक्रिया में भारी मात्रा में पानी, बिजली और प्लास्टिक सामग्री का उपयोग होता है, जो पृथ्वी पर पर्यावरणीय दबाव बढ़ाता है। ऐसे में टिकाऊ स्वास्थ्य सेवाएं, जल पुनर्चक्रण, ऊर्जा-कुशल मशीनें और टेलीमेडिसिन जैसी तकनीकें भविष्य की आवश्यकता बनती जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोग समय रहते रक्तचाप और शुगर नियंत्रित रखें, संतुलित आहार लें, नियमित व्यायाम करें और अनावश्यक दवाओं से बचें, तो किडनी रोग के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। संदेश स्पष्ट है— किडनी की रक्षा केवल शरीर की रक्षा नहीं, बल्कि पृथ्वी के भविष्य की भी रक्षा है। – स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़
- बढ़ेड़ी राजपुताना में हाफ़िज़ साहब की दरगाह पर मौला अली अलैहिस्सलाम की वफ़ात पर अकीदतमंदों ने पेश किया जिक्र-ए-अली और दुरूदो-सलाम बढ़ेड़ी राजपुताना स्थित दरगाह हाफ़िज़ साहब पर Ali ibn Abi Talib मौला अली अलैहिस्सलाम की वफ़ात के मौके पर अकीदत और एहतराम के साथ खास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में अकीदतमंदों और स्थानीय लोगों ने दरगाह पर हाज़िरी लगाई और जिक्र-ए-अली तथा दुरूदो-सलाम का नज़रा **Prophet Muhammad हज़रत मोहम्मद ﷺ की बारगाह-ए-रिसालत में पेश किया। कार्यक्रम की शुरुआत कुरआन-ए-पाक की तिलावत से हुई, जिसके बाद उलेमा-ए-कराम ने मौला अली अलैहिस्सलाम की जिंदगी, उनकी बहादुरी, इल्म और इंसाफ के पैगाम पर रोशनी डाली। उलेमा ने कहा कि मौला अली की जिंदगी इंसानियत, सच्चाई और न्याय का बेहतरीन नमूना है, जिससे आज भी पूरी उम्मत को सीख लेनी चाहिए। इस मौके पर जिक्र-ए-अली की महफिल सजाई गई, जिसमें अकीदतमंदों ने बड़े अदब और एहतराम के साथ दुरूदो-सलाम पढ़कर अपनी अकीदत पेश की। साथ ही मुल्क में अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली के लिए खास दुआएं भी की गईं। दरगाह परिसर में कार्यक्रम के दौरान अनुशासन और शांति का माहौल रहा। आयोजन के अंत में मौजूद लोगों को तबर्रुक भी वितरित किया गया।1
- Post by Dpk Chauhan1
- उत्तराखंड के कई इलाकों में इन दिनों मौसम असामान्य रूप से बदला नजर आ रहा है। कहीं तेज धूप तो कहीं बादलों की मौजूदगी के कारण आसमान में दिनभर उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। हरिद्वार में तो पिछले दो दिनों से सुबह दिसंबर की तरह धुंध देखने को मिल रही है। हालांकि फिलहाल बारिश कहीं दर्ज नहीं की गई है और तापमान भी सामान्य से अधिक बना हुआ है। मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश के कई पर्वतीय जिलों में अभी आंशिक बादल बने रह सकते हैं और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश भी हो सकती है। विभाग का अनुमान है कि इस पूरे सप्ताह मौसम का मिजाज इसी तरह बदला रह सकता है।1
- 🚨 हरिद्वार में बिना सत्यापन रहने वालों पर पुलिस का शिकंजा 🔴 1500 लोगों की जांच, 260 मकान मालिक और प्रतिष्ठान संचालकों पर 26 लाख का चालान ✍️ स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ हरिद्वार, 11 मार्च 2026। तीर्थनगरी हरिद्वार में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कोतवाली नगर पुलिस ने एक बड़ा और सख्त सत्यापन अभियान चलाया। थाना क्षेत्र में बाहरी राज्यों से आकर रह रहे मजदूरों, कर्मचारियों, किरायेदारों तथा फड़-ठेली संचालकों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए पुलिस की कई टीमें गठित कर अलग-अलग क्षेत्रों में भेजी गईं। 🔎 होटल, धर्मशाला और कॉलोनियों में पुलिस की अचानक जांच अभियान के दौरान पुलिस टीमों ने होटल, धर्मशाला, जिम, आवासीय कॉलोनियों और किराए के मकानों में काम करने वाले कर्मचारियों तथा रहने वाले व्यक्तियों की मौके पर ही जांच और सत्यापन किया। जांच में यह भी सामने आया कि कई मकान मालिक और प्रतिष्ठान संचालक बिना सत्यापन के ही कर्मचारियों और किरायेदारों को रखे हुए थे। ⚡ 1500 लोगों का सत्यापन, लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई विशेष अभियान के दौरान अब तक करीब 1500 लोगों का सत्यापन किया जा चुका है। वहीं जिन मकान मालिकों, होटल संचालकों और धर्मशाला प्रबंधकों ने कर्मचारियों या किरायेदारों का पुलिस सत्यापन नहीं कराया था, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई। पुलिस ने उत्तराखंड पुलिस एक्ट की धारा-83 के तहत 260 चालान करते हुए ₹26,00,000 (छब्बीस लाख रुपये) का कोर्ट चालान किया है और संबंधित रिपोर्ट माननीय न्यायालय को भेजी जा रही है। ⚠️ तीर्थनगरी की सुरक्षा से समझौता नहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हरिद्वार जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक शहर में देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग आते हैं। ऐसे में बाहरी व्यक्तियों का सत्यापन कराना कानून व्यवस्था और सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद जरूरी है। 📢 मकान मालिकों को सख्त चेतावनी पुलिस ने मकान मालिकों, होटल संचालकों और संस्थानों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि किरायेदारों, नौकरों और कर्मचारियों का सत्यापन अनिवार्य रूप से कराएं, अन्यथा भविष्य में भी इसी प्रकार की सख्त कार्रवाई की जाएगी। 🚔 अभियान जारी रहेगा कोतवाली नगर पुलिस के अनुसार यह सत्यापन अभियान आगे भी जारी रहेगा। पुलिस का उद्देश्य तीर्थनगरी में किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर समय रहते रोक लगाना और शहर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना है। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद हरिद्वार में बिना सत्यापन रह रहे लोगों और उन्हें शरण देने वाले मकान मालिकों में हड़कंप मच गया है।4
- 5 अप्रेल को तीन मंदिरों मे होंगी भगवान महर्षि कश्यप जी की मूर्ति की स्थापना Mintoo Kashyap ने खानपुर विधायक Umesh Kumar को किया आभार व्यत।1
- The Aman Times हर्रा वाला/डोईवाला से खबर हैं _ देहरादून के नकरौंदा क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसे में कार की टक्कर से 2 वर्षीय मासूम की मौत हो गई। सूचना मिलते ही हर्रावाला चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। पुलिस के अनुसार परवीन (2 वर्ष) पुत्र स्वर्गीय रामलाल, निवासी गूलर घाटी भद्रकाली मंदिर नकरौंदा को टैक्सी चालक अनुराग निवासी मंगलम गार्डन नकरौंदा ने अपनी टैक्सी से कुचल दिया। चालक घायल बच्चे को लेकर खुद रायपुर अस्पताल पहुंचा, जहां डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए कोरोनेशन अस्पताल भेज दिया है। वहीं टैक्सी चालक और वाहन को हिरासत में लेकर आगे की कार्रवाई की जा रही है। मामले में मृतक बच्चे की मां रिंकू देवी की तहरीर पर कोतवाली डोईवाला में FIR संख्या 62/26 धारा 281 और 106(1) BNS के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।1
- रुड़की शहर वासियों से अपील अपना जुगाड़ खुद करें... बेचारे भले आदमी को मेयर (मेयर पति)बनाकर फंसा दिया रुड़की की जनता ने...1
- 🔴 हरकी पैड़ी से कनखल तक एनएमसीजी की विशेषज्ञ टीम का निरीक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन पर हुआ मंथन 🔴 कुंभ मेले में स्वच्छता सबसे बड़ी चुनौती, 6 फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की तैयारी 🔴 करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन से पहले गंगा की पवित्रता बचाने की रणनीति पर प्रशासन सक्रिय ✍️ स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ की कलम से हरिद्वार, 11 मार्च 2026। विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक आयोजनों में शामिल हरिद्वार कुंभ मेला की तैयारियां अब तेज होती दिखाई दे रही हैं। आगामी वर्ष कुंभ मेले में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं के हरिद्वार पहुंचने की संभावना को देखते हुए मेला प्रशासन ने गंगा की निर्मलता और मेला क्षेत्र की स्वच्छता को अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखा है। इसी कड़ी में मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका की पहल पर राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के विशेषज्ञों की टीम ने बुधवार को कुंभ क्षेत्र का व्यापक भ्रमण किया। टीम ने मेला प्रशासन के साथ ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, सीवरेज व्यवस्था और सैनिटेशन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा की। 🔹 हरकी पैड़ी से बैरागी कैंप तक जमीन पर उतरी जांच एनएमसीजी की टीम ने मेला प्रशासन, नगर निगम और पेयजल निगम के अधिकारियों के साथ हरकी पैड़ी, बैरागी कैंप, दक्ष द्वीप, कनखल, नीलधारा और गौरीशंकर जैसे प्रमुख क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान इन क्षेत्रों में आगामी कुंभ मेले के दौरान कचरा प्रबंधन, सीवरेज व्यवस्था और सफाई सुविधाओं की वर्तमान स्थिति तथा प्रस्तावित व्यवस्थाओं का बारीकी से आकलन किया गया। 🔹 गंगा की पवित्रता बचाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती निरीक्षण के बाद आयोजित बैठक में मेलाधिकारी सोनिका ने स्पष्ट कहा कि कुंभ मेले के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में गंगा की निर्मलता और मेला क्षेत्र की स्वच्छता बनाए रखना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी। उन्होंने कहा कि इतने बड़े आयोजन में कूड़ा प्रबंधन, सीवरेज नियंत्रण और पर्याप्त शौचालय व्यवस्था सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है, जिसके लिए वैज्ञानिक और प्रभावी रणनीति तैयार की जा रही है। 🔹 वैज्ञानिक तकनीक और कुंभ के अनुभव से बनेगी रणनीति बैठक के दौरान एनएमसीजी के विशेषज्ञों ने नई तकनीकों, विभिन्न शोध अध्ययनों और प्रयागराज कुंभ के अनुभवों को साझा किया। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि मेला क्षेत्र में कूड़ेदान, कचरा संग्रहण केंद्र, अपशिष्ट परिवहन व्यवस्था और अस्थायी शिविरों में कचरा निस्तारण की वैज्ञानिक व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि गंगा में प्रदूषण का खतरा कम किया जा सके। 🔹 6 फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का प्रस्ताव कुंभ मेले के दौरान बढ़ने वाले सीवरेज दबाव को देखते हुए 06 फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (FSTP) स्थापित करने की योजना भी प्रस्तावित की गई है। इसके अलावा अस्थायी शौचालयों की स्थापना, सेप्टेज प्रबंधन, घाटों की नियमित सफाई और कचरा पृथक्करण की विस्तृत कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई। 🔹 विशेषज्ञों और अधिकारियों की मौजूदगी में हुई अहम बैठक इस दौरान विशेषज्ञ टीम में टेरी स्कूल ऑफ एडवांस्ड स्टडीज के प्रो. शलीन सिंघल, होकाईडो यूनिवर्सिटी जापान के प्रो. राम अवतार, आईआईटी बीएचयू के रिसर्च एसोसिएट डॉ. तरुण यादव, तथा स्टेट मिशन फॉर क्लीन गंगा उत्तराखंड के आरबीएम डॉ. सिद्धार्थ श्रीवास्तव शामिल रहे। बैठक में नगर निगम हरिद्वार के आयुक्त नंदन सिंह, अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती, उप मेलाधिकारी मनजीत सिंह गिल, तथा पेयजल निगम की परियोजना प्रबंधक (गंगा) मीनाक्षी मित्तल वशिष्ठ सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। 🔎 सवाल जो अब भी खड़े हैं हरिद्वार की पहचान गंगा की पवित्रता और कुंभ की आस्था से जुड़ी है। लेकिन हर कुंभ में करोड़ों लोगों की भीड़ के बीच स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती साबित होती रही है। अब सवाल यह है कि बैठकों और योजनाओं के बाद क्या इस बार व्यवस्थाएं वास्तव में जमीन पर उतर पाएंगी, या फिर गंगा की निर्मलता केवल कागजों और बैठकों तक ही सीमित रह जाएगी। ✍️ स्वतंत्र पत्रकार – रामेश्वर गौड़3