भारत सरकार द्वारा वर्ष 2026 में पद्मश्री सम्मान के लिए चयनित हुए पर्यावरणविद् मोहन नागर, जिन्हें 'जल पुरुष' के नाम से जाना जाता है, जल और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण विकास के क्षेत्र में अपने उल्लेखनीय योगदान के लिए देशभर में पहचाने जाते हैं। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की पचोर तहसील के रायपुरिया गांव से ताल्लुक रखने वाले नागर का जीवन समाज और प्रकृति के प्रति समर्पण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिनका बैतूल क्षेत्र से भी जुड़ाव है। उन्होंने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के लिए अपना जीवन समर्पित किया है। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में 75,000 से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण और पुनर्स्थापन शामिल है, जिससे हजारों लोगों को पेयजल मिला, किसानों की सिंचाई बेहतर हुई और जल संकट से जूझ रहे कई गांवों को राहत मिली। मोहन नागर ने केवल जल संरक्षण तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि वृक्षारोपण, जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता अभियानों के माध्यम से समाज में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाई, जिससे ग्रामीण समुदायों को आत्मनिर्भर बनने और सतत विकास की दिशा में प्रेरणा मिली। आजादी का अमृत महोत्सव के दौरान, उनके मार्गदर्शन में सतपुड़ा क्षेत्र की 75 पहाड़ियों पर 75 हजार जल संरचनाओं का निर्माण और व्यापक वृक्षारोपण अभियान जनभागीदारी आधारित पर्यावरण संरक्षण का एक उदाहरण बना। आदिवासी क्षेत्रों में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिसके चलते बैतूल का बाचा गांव 'सौर गांव' के रूप में पहचान बना सका। नागर को भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा समर्थित राष्ट्रीय जल प्रहरी पुरस्कार (2019) और जल नायक पुरस्कार (2020) से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें भूजल संरक्षण में अग्रणी भूमिका के लिए भाऊराव देवरस सेवा सम्मान (2024-25) और मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रायोजित प्रतिष्ठित दुष्यंत कुमार कृति साहित्य अकादमी पुरस्कार (2014) भी मिला है, जो उनकी कविता 'चतुर्मास' के माध्यम से पर्यावरण और ग्रामीण भारत के विषयों को उजागर करने के लिए दिया गया था। मोहन नागर मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष भी बनाए गए हैं और वर्तमान में प्रदेश के 55 जिलों में अपने कार्यकर्ताओं के साथ जल संरक्षण, नदियों, वन और पर्यावरण बचाने के लिए कार्य कर रहे हैं। उनकी निष्ठा, दूरदर्शिता और अथक परिश्रम को देखते हुए, राष्ट्रपति ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया है।
भारत सरकार द्वारा वर्ष 2026 में पद्मश्री सम्मान के लिए चयनित हुए पर्यावरणविद् मोहन नागर, जिन्हें 'जल पुरुष' के नाम से जाना जाता है, जल और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण विकास के क्षेत्र में अपने उल्लेखनीय योगदान के लिए देशभर में पहचाने जाते हैं। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की पचोर तहसील के रायपुरिया गांव से ताल्लुक रखने वाले नागर का जीवन समाज और प्रकृति के प्रति समर्पण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिनका बैतूल क्षेत्र से भी जुड़ाव है। उन्होंने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के लिए अपना जीवन समर्पित किया है। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में 75,000 से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण और पुनर्स्थापन शामिल है, जिससे हजारों लोगों को पेयजल मिला, किसानों की सिंचाई बेहतर हुई और जल संकट से जूझ रहे कई गांवों को राहत मिली। मोहन नागर ने केवल जल संरक्षण तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि वृक्षारोपण, जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता अभियानों के माध्यम से समाज में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाई, जिससे ग्रामीण समुदायों को आत्मनिर्भर बनने और सतत विकास की दिशा में प्रेरणा मिली। आजादी का अमृत महोत्सव के दौरान, उनके मार्गदर्शन में सतपुड़ा क्षेत्र की 75 पहाड़ियों पर 75 हजार जल संरचनाओं का निर्माण और व्यापक वृक्षारोपण अभियान जनभागीदारी आधारित पर्यावरण संरक्षण का एक उदाहरण बना। आदिवासी क्षेत्रों में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिसके चलते बैतूल का बाचा गांव 'सौर गांव' के रूप में पहचान बना सका। नागर को भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा समर्थित राष्ट्रीय जल प्रहरी पुरस्कार (2019) और जल नायक पुरस्कार (2020) से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें भूजल संरक्षण में अग्रणी भूमिका के लिए भाऊराव देवरस सेवा सम्मान (2024-25) और मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रायोजित प्रतिष्ठित दुष्यंत कुमार कृति साहित्य अकादमी पुरस्कार (2014) भी मिला है, जो उनकी कविता 'चतुर्मास' के माध्यम से पर्यावरण और ग्रामीण भारत के विषयों को उजागर करने के लिए दिया गया था। मोहन नागर मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष भी बनाए गए हैं और वर्तमान में प्रदेश के 55 जिलों में अपने कार्यकर्ताओं के साथ जल संरक्षण, नदियों, वन और पर्यावरण बचाने के लिए कार्य कर रहे हैं। उनकी निष्ठा, दूरदर्शिता और अथक परिश्रम को देखते हुए, राष्ट्रपति ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया है।
- 23 जून के मौसम अपडेट के अनुसार, मालवा क्षेत्र में बारिश, बादल और तेज हवाओं की संभावना जताई गई है। यह मौसम का अनुमान विशेष रूप से राजगढ़, जीरापुर, नलखेड़ा और आगर मालवा के लिए दिया गया है। Lok Jeevika News पर इस मौसम संबंधी ताजा हाल की पूरी खबर उपलब्ध है।1
- ग्राम तिलावत गोविंद के अपेक्स इंटरनेशनल स्कूल में एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। जानकारी के अनुसार, स्कूल प्रबंधन पर बच्चों को ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) नहीं देने और बिना किसी वैध प्रवेश के ही उनसे पैसे की मांग करने का गंभीर आरोप है। यह पूरा मामला स्कूल में चल रही कथित अनियमितताओं की ओर इशारा करता है।1
- शाजापुर जिले के सलसलाई नगर में पाँच दिनों से चल रहा श्री विष्णु महायज्ञ और बाबा रामदेव प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव सोमवार को धूमधाम से संपन्न हो गया। इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान के अंतिम दिन नगर में आस्था का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिसमें आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। अनुष्ठान के समापन अवसर पर, यज्ञआचार्य निखिल शर्मा के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ महायज्ञ की पूर्णाहूति दी गई। आचार्य द्वारा विधि-विधान से बाबा रामदेव की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न करवाई गई, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। इस दौरान उपस्थित भक्तों ने 'बाबा रामदेव की जय' के जयकारे लगाए। यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद मुख्य मंदिर परिसर में बाबा रामदेव की भव्य महाआरती की गई। आरती के पश्चात आयोजित 'महाभंडारे' में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। आयोजन समिति ने बड़ी संख्या में आए भक्तों की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए थे, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो। पाँच दिवसीय इस धार्मिक आयोजन के कारण पूरे नगर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने बाबा रामदेव के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। आयोजन समिति के सदस्यों ने सभी धर्मप्रेमी बंधुओं का आभार व्यक्त करते हुए इस समारोह को क्षेत्र में शांति और सद्भाव का प्रतीक बताया।1
- लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में भीषण आग लग गई है। इस दुखद घटना में कई लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं।1
- सुसनेर में CWSN (चाइल्ड विद स्पेशल नीड्स) बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर गहन मंथन किया गया है। इस चर्चा के बाद, 24 जून को विशेष रूप से एक दिव्यांग शिविर का आयोजन किया जाएगा।1
- सुसनेर के स्टेट बैंक चौराहे पर बीच सड़क में एक कार खड़ी कर उसका चालक गायब हो गया, जिसके कारण यातायात बुरी तरह बाधित हो गया। इस लापरवाही के चलते लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, जिससे वाहनों की आवाजाही में बाधा उत्पन्न हुई। यातायात बाधित होने की सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल मौके पर पहुँची। पुलिस ने संबंधित चालक और उसकी गाड़ी को थाने ले जाकर स्थिति को नियंत्रित किया और यातायात को सामान्य बहाल किया।1
- सनातन धर्म में हनुमान जी को शक्ति, भक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से बजरंगबली की पूजा करने से भय, संकट और नकारात्मकता दूर होती है। नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ मन को शांति और आत्मविश्वास प्रदान करता है। कहा जाता है कि जहां हनुमान जी का स्मरण होता है, वहां भगवान श्रीराम की कृपा भी बनी रहती है। इसलिए, हर दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ हनुमान जी का नाम जपने से जीवन में सकारात्मकता लाई जा सकती है।1
- भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष चिंतामण राठौर को भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य नियुक्त किया गया है।1
- सुसनेर के वार्ड 10 में, मस्जिद वाली गली के रहवासियों ने सीसी रोड और पक्की नाली के निर्माण की एक प्रमुख मांग उठाई है। अपनी इस मांग को लेकर, वार्ड के निवासियों ने नगर पालिका अध्यक्ष को एक लिखित आवेदन भी सौंपा है।1