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प्रयागराज शाहगंज क्षेत्र में एक मकान गिर गया है सौदागर मस्जिद के पास
Journalist Abhishek Gupta Ji
प्रयागराज शाहगंज क्षेत्र में एक मकान गिर गया है सौदागर मस्जिद के पास
- Sakshi tripathiChail, Kaushambi😤on 5 February
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- Post by JGE News1
- नैनी में बुजुर्ग की निर्मम हत्या, खून से लथपथ चारपाई पर मिला शव प्रयागराज के यमुनापार क्षेत्र में एक बुजुर्ग की धारदार हथियार से हत्या किए जाने से इलाके में सनसनी फैल गई। नैनी थाना क्षेत्र के धनुआ गांव निवासी 70 वर्षीय हजारी लाल भारतीय की अज्ञात हमलावरों ने बेरहमी से हत्या कर दी। बताया जाता है कि मृतक घर से कुछ दूरी पर बालू और गिट्टी के ठेके पर चौकीदारी का काम करता था। शुक्रवार सुबह जब वह देर तक नहीं उठा तो बेटा गंगा भारतीय उसे जगाने पहुंचा। इस दौरान उसने देखा कि पिता का शव चारपाई पर खून से लथपथ पड़ा है, जिससे परिवार में कोहराम मच गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। फील्ड यूनिट, डॉग स्क्वायड और फॉरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं। प्रारंभिक जांच में मृतक के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान मिले हैं। छाती, आंख और चेहरे पर वार किए जाने के संकेत मिले हैं, जिससे हत्या की वारदात बेहद क्रूर प्रतीत हो रही है। पुलिस मामले की जांच आपसी रंजिश, लूटपाट समेत हर एंगल से कर रही है। फिलहाल हत्यारों का कोई सुराग नहीं लग सका है और पुलिस जल्द खुलासा करने का दावा कर रही है।1
- प्रयागराज के नैनी थाने में 27 मार्च को हुए हंगामे के मामले में दो दरोगा लाइन हाजिर कर दिए गए हैं। इनमें गंगोत्री नगर चौकी प्रभारी शिवजी गुप्ता और आशीष यादव शामिल हैं। मामला एक रिटायर फौजी से संबंधित है, जिनका आरोप है कि उन्हें थाने में पीटा गया। मामले की गंभीरता से जांच के लिए अफसरों ने तीन सदस्यीय कमेटी भी गठित कर दी है।1
- Post by Manish Susari संपादकस्थानीयsi न्यूज़1
- Post by Questions News1
- Post by द कहर न्यूज़ एजेंसी1
- प्रयागराज जनपद के मेजा तहसील क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से हो रही बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। चैत्र के महीने में जहां खेतों में गेहूं की फसल पककर तैयार खड़ी थी और किसान कटाई की तैयारियों में जुटे थे, वहीं कुदरत की इस मार ने उनकी साल भर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। बर्बादी का मंजर मेजा के विभिन्न गांवों (जैसे उरुवा, सिरसा और मांडा से सटे इलाके) में बारिश के साथ चली तेज हवाओं के कारण गेहूं की फसल खेतों में ही बिछ गई है। विशेषज्ञों और अनुभवी किसानों का मानना है कि फसल के गिरने से दानों में नमी बढ़ जाती है, जिससे दाने काले पड़ने और सड़ने की आशंका रहती है। * कटाई में बाधा: जो फसलें कटने के लिए तैयार थीं, वे अब कीचड़ और नमी के कारण कंबाइन हार्वेस्टर से काटना असंभव हो गया है। * लागत की मार: बीज, खाद, सिंचाई और कड़ी धूप में की गई रखवाली के बाद जब मुनाफे का समय आया, तो प्रकृति के प्रकोप ने निवेश को भी संकट में डाल दिया है। * भूसे का संकट: बारिश के कारण गेहूं का डंठल काला पड़ रहा है, जिससे पशुओं के चारे (भूसे) की गुणवत्ता और मात्रा दोनों प्रभावित होगी। किसानों की मांग खेतों में भीगी हुई फसल को देखकर अन्नदाता की आंखों में आंसू हैं। मेजा के स्थानीय किसानों ने प्रशासन से राजस्व टीम द्वारा जल्द से जल्द नुकसान का सर्वे कराने और उचित मुआवजे की मांग की है। > "हमने सोचा था कि फसल बेचकर कर्ज चुकाएंगे और घर के जरूरी काम निपटाएंगे, लेकिन अब तो लागत निकलना भी मुश्किल लग रहा है।" — एक स्थानीय किसान > निष्कर्ष: यह समय किसानों के लिए अत्यंत कठिन है। यदि सरकार और प्रशासन त्वरित कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और दैवीय आपदा राहत कोष से सहायता प्रदान नहीं करते हैं, तो क्षेत्र के किसानों के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा।2
- Post by Questions News4