*पश्चिमी कमान में अंगदान जागरूकता कार्यक्रम — जीवन को आगे बढ़ाने की पहल* मनोज शर्मा,चंडीगढ़ । अंगदान करुणा और निःस्वार्थ भाव की सर्वोच्च भावना को दर्शाता है। किसी व्यक्ति का यह नेक निर्णय दूसरों के लिए नई आशा और जीवन का दूसरा अवसर बन सकता है। पश्चिमी कमान द्वारा 20 अगस्त 2026 को चंडीमंदिर में अंगदान जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह, एवीएसएम, एसएम**, जीओसी-इन-सी, पश्चिमी कमान ने की। यह कार्यक्रम 13 अगस्त को मनाए जाने वाले विश्व अंगदान दिवस के अवसर पर पश्चिमी कमान द्वारा आयोजित जागरूकता गतिविधियों की श्रृंखला का हिस्सा था। इसका उद्देश्य अंगदान के प्रति अधिक समझ विकसित करना और लोगों को जागरूक एवं सूचित तरीके से इसमें भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना था। कमांड अस्पताल, चंडीमंदिर के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञ व्याख्यान, प्रेरणादायक वीडियो और सार्थक संवाद शामिल रहे। इस दौरान अंगदान से जुड़ी प्रचलित भ्रांतियों और गलत धारणाओं को दूर करने, अंगदान के जीवनरक्षक महत्व को उजागर करने तथा प्रतिभागियों को अंगदान का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम का एक भावुक पहलू उन परिवारों का सम्मान था, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोने के गहरे दुख के बीच भी अंगदान के माध्यम से दूसरों को जीवन देने का निर्णय लिया। आर्मी कमांडर ने श्रीमती सुदेशना सिंह, मुख्यालय भर्ती क्षेत्र (पंजाब एवं जम्मू-कश्मीर), श्रीमती बी. अमृता, 15 सीओएसआर, श्रीमती शर्मिला मुखिया, 14 जीटीसी, लेफ्टिनेंट कर्नल हीरा सिंह, मुख्यालय भर्ती क्षेत्र (पंजाब एवं जम्मू-कश्मीर) तथा नायक थोंबरे कैलास, 19 गार्ड्स को उनके साहस, करुणा और जीवन बचाने में दिए गए अनुकरणीय योगदान के लिए सम्मानित किया। अंगदान को बढ़ावा देने में उल्लेखनीय योगदान देने वाले सेवारत कार्मिकों को भी मानवता की सेवा के लिए जीओसी-इन-सी प्रशंसा पत्र प्रदान किया गया। कार्यक्रम का समापन जागरूकता को सार्थक कदमों में बदलने, सूचित निर्णय लेने, स्वैच्छिक अंगदान का संकल्प लेने और समाज की अधिक भागीदारी का आह्वान करते हुए हुआ। इस पहल ने भारतीय सेना की निःस्वार्थ सेवा की भावना और कर्तव्य से आगे बढ़कर समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित किया। कार्यक्रम ने एक सरल लेकिन प्रभावशाली संदेश दिया—जीवन को आगे बढ़ाने में, एक व्यक्ति की विरासत कई लोगों के जीवन में जीवित रह सकती है।
*पश्चिमी कमान में अंगदान जागरूकता कार्यक्रम — जीवन को आगे बढ़ाने की पहल* मनोज शर्मा,चंडीगढ़ । अंगदान करुणा और निःस्वार्थ भाव की सर्वोच्च भावना को दर्शाता है। किसी व्यक्ति का यह नेक निर्णय दूसरों के लिए नई आशा और जीवन का दूसरा अवसर बन सकता है। पश्चिमी कमान द्वारा 20 अगस्त 2026 को चंडीमंदिर में अंगदान जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह, एवीएसएम, एसएम**, जीओसी-इन-सी, पश्चिमी कमान ने की। यह कार्यक्रम 13 अगस्त को मनाए जाने वाले विश्व अंगदान दिवस के अवसर पर पश्चिमी कमान
द्वारा आयोजित जागरूकता गतिविधियों की श्रृंखला का हिस्सा था। इसका उद्देश्य अंगदान के प्रति अधिक समझ विकसित करना और लोगों को जागरूक एवं सूचित तरीके से इसमें भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना था। कमांड अस्पताल, चंडीमंदिर के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञ व्याख्यान, प्रेरणादायक वीडियो और सार्थक संवाद शामिल रहे। इस दौरान अंगदान से जुड़ी प्रचलित भ्रांतियों और गलत धारणाओं को दूर करने, अंगदान के जीवनरक्षक महत्व को उजागर करने तथा प्रतिभागियों को अंगदान का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम का एक भावुक पहलू उन
परिवारों का सम्मान था, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोने के गहरे दुख के बीच भी अंगदान के माध्यम से दूसरों को जीवन देने का निर्णय लिया। आर्मी कमांडर ने श्रीमती सुदेशना सिंह, मुख्यालय भर्ती क्षेत्र (पंजाब एवं जम्मू-कश्मीर), श्रीमती बी. अमृता, 15 सीओएसआर, श्रीमती शर्मिला मुखिया, 14 जीटीसी, लेफ्टिनेंट कर्नल हीरा सिंह, मुख्यालय भर्ती क्षेत्र (पंजाब एवं जम्मू-कश्मीर) तथा नायक थोंबरे कैलास, 19 गार्ड्स को उनके साहस, करुणा और जीवन बचाने में दिए गए अनुकरणीय योगदान के लिए सम्मानित किया। अंगदान को बढ़ावा देने में उल्लेखनीय योगदान देने वाले सेवारत
कार्मिकों को भी मानवता की सेवा के लिए जीओसी-इन-सी प्रशंसा पत्र प्रदान किया गया। कार्यक्रम का समापन जागरूकता को सार्थक कदमों में बदलने, सूचित निर्णय लेने, स्वैच्छिक अंगदान का संकल्प लेने और समाज की अधिक भागीदारी का आह्वान करते हुए हुआ। इस पहल ने भारतीय सेना की निःस्वार्थ सेवा की भावना और कर्तव्य से आगे बढ़कर समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित किया। कार्यक्रम ने एक सरल लेकिन प्रभावशाली संदेश दिया—जीवन को आगे बढ़ाने में, एक व्यक्ति की विरासत कई लोगों के जीवन में जीवित रह सकती है।
- सनातन धर्म सदैव अडिग अमर पर युवा पीढ़ी ही पतन का बन रही आधार {ज्वलंत पारिवारिक सामाजिक विषय} चंडीगढ़ मंगलवार 25/08/2026 एम आरके विक्रमा शर्मा रक्षत शर्मा प्रस्तुति--- 👉🏻 बच्चों की शादी 20 वर्ष की उम्र में तो एक शताब्दी में 5 पीढ़ी 👉🏻 बच्चों की शादी 25 वर्ष की उम्र में तो एक शताब्दी में 4 पीढ़ी 👉🏻 बच्चों की शादी 33 वर्ष की उम्र में तो एक शताब्दी में 3 पीढ़ी साधारण गणना से पता चलता है कि हिन्दू जनसंख्या वृद्धि दर कहां जा रही है? विचारणीय तथ्य। *❗क्या हमारा समाज अगली सदी तक रहेगा ही नहीं?* — हिन्दू समाज के आत्ममंथन का समय आ गया है — आज चारों ओर एक अजीब-सा अंधकार फैल गया है। 🏚️ गाँव सूने, मोहल्ले खाली, और घरों में चुप्पी है। बेटियाँ 30–35 की उम्र तक कुंवारी। बेटे 35 पार कर चुके, पर विवाह नहीं। शादी होती है तो बहुत देर से… बच्चे होते हैं तो एक ही… और फिर तलाक़… टूटे हुए परिवार… माता-पिता अकेले… और पूरी पीढ़ी खोखली। क्या इसे “शिक्षित समाज” कहा जाए या “आत्मघाती समाज”? *⚠️ जनसंख्या घटने की चुपचाप चलती साजिश* मान लीजिए 100 लोग हैं = 50 जोड़े। अगर हर जोड़ा केवल एक संतान पैदा करता है — तो अगली पीढ़ी में बस 45-46 बचते हैं। फिर वही क्रम चला, तो तीसरी पीढ़ी में समाज लगभग शून्य। यह कोई डराने की बात नहीं — यह गणित है, और यह हो चुका है! गाँव उजड़ चुके हैं, शहरों में ऊँची इमारतें हैं पर उनमें संयुक्त परिवार नहीं बचे। *❗ क्यों नई बहुएँ “सिर्फ एक बच्चा” चाहती हैं?* ताकि जीवन का “आनंद” ले सकें ताकि करियर न रुके ताकि शरीर पर असर न पड़े ताकि समाज में “मॉडर्न” कहलाएँ क्या यही धर्म है❓ क्या यही हमारी संस्कृति है❓ क्या यही हमारे पूर्वजों की परंपरा थी❓ *🔥 सच्चाई यह है...* अब संतान प्रेम का परिणाम नहीं, बल्कि सोशल प्रूफ बन चुकी है। “देखो, हमारे भी एक बच्चा है…” यह सोच न केवल धर्महीन है, बल्कि भविष्यविहीन भी। *⚖️ सबसे बड़ा दोष — लड़की के पिता का!* वही पिता, जिसने 22-25 की उम्र में विवाह कर परिवार बसाया, आज अपनी बेटी को 30 तक “कुंवारी राजकुमारी” बनाए रखता है। कभी करियर के नाम पर, कभी “अच्छा लड़का नहीं मिला” कहकर, तो कभी दहेज और प्रतिष्ठा के भय से। 👉 नतीजा — बेटी अवसाद में, IVF में, या तलाक़ में जा रही है। और समाज — धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। *📉 हिन्दू समाज की भयावह तस्वीर* विवाह की औसत आयु: लड़का – 32 वर्ष, लड़की – 29 वर्ष औसतन संतान: 1 या 0.5 प्रति दंपत्ति हर 4 में 1 दंपत्ति – निःसंतान या चिकित्सीय समस्या डिवोर्स रेट – सबसे तेज़ वृद्धि दर हिन्दू समाज में हज़ारों युवक-युवतियाँ – विवाह योग्य होते हुए भी कुंवारे *🧘♂️ समाज के प्रबुद्ध क्या कर रहे हैं?* मौन। विवाह, परिवार और संतान — सबको त्याज्य विषय मान लिया गया है। पर यह धर्म नहीं, पलायन है। 👉 विवाह कोई सांसारिक बंधन नहीं — यह धर्म का स्तंभ है, यह वंश और संस्कार की निरंतरता का माध्यम है। *💥 आत्मस्वीकृति का समय* बेटी को “राजकुमारी” बनाकर विवेक से दूर किया। बेटे को जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया। विवाह को टालते रहे, और जब किया तो बहुत देर से। एक ही संतान — और फिर वही बिखराव, वही अकेलापन। *👨👩👧👦 अब क्या करना होगा?* 🔹 22 वर्ष के बाद पुत्र, 20 वर्ष के बाद पुत्री — विवाह को प्राथमिकता। 🔹 एक नहीं, कम से कम तीन संतानें — समाज की आवश्यकता। 🔹 समाज के अध्यक्ष, संत, विद्वान — इन विषयों पर खुलकर बोलें। 🔹 लड़की के पिता — बेटी की उम्र, भावनाएँ और भविष्य समझें। 👉 अपेक्षाएँ घटाइए, समझ बढ़ाइए — बेटी का जीवन बचाइए। *🕯️ अंतिम चेतावनी* अब नहीं चेते तो — 📉 ना युवक रहेंगे, ना युवतियाँ 📉 ना संतानें होंगी, ना संस्कार 📉 ना समाज रहेगा, ना मंदिर 🚩 और तब इतिहास में लिखा जाएगा — *“हिन्दू समाज — जिसने खुद को चुपचाप मिटा दिया।”*2
- ਗੁਰੂ ਨਾਨਕ ਸੋਸਾਇਟੀ ਦੇ ਬਿਲਕੁਲ ਸਾਹਮਣੇ. ਰੋਡ ਤੇ ਅੱਜ ਪ੍ਰੀ ਮਿਕਸ ਪਾਈ ਗਈ.. ਐਸਡੀਐਮ ਸਾਹਿਬ ਅਤੇ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਦਾ ਅਤੇ ਚੇਅਰਮੈਨ ਪ੍ਰਮਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਗੋਲਡੀ ਦਾ ਧੰਨਵਾਦ ਕਰਦਿਆਂ ਸਮਾਜ ਸੇਵੀ ਪ੍ਰਭਜੋਤ ਸਿੰਘ ਖਾਲਸਾ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਵਾਰਡ ਨੰਬਰ ਛੇ ਖਰਡ ਦੇ ਪਾਰਟੀ ਦੇ ਵਰਕਰਾਂ ਵੱਲੋਂ ਦੱਸੇ ਕੰਮ ਹੁਣ ਹੋਲੀ ਹੋਲੀ ਹੋਣੇ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਗਏ ਹਨ।1
- ਮੀਰੀ-ਪੀਰੀ ਖ਼ਾਲਸਾ ਮਾਰਚ ਦੇ ਸਵਾਗਤ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਸ਼੍ਰੋਮਣੀ ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਪ੍ਰਬੰਧਕ ਕਮੇਟੀ ਦੀ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਮੀਟਿੰਗ ਸ਼੍ਰੋਮਣੀ ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਪ੍ਰਬੰਧਕ ਕਮੇਟੀ ਵੱਲੋਂ ਸ੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਹਰਗੋਬਿੰਦ ਸਾਹਿਬ ਜੀ ਦੇ ਮੀਰੀ-ਪੀਰੀ ਸਿਧਾਂਤ ਨੂੰ ਸਮਰਪਿਤ ਸਜਾਏ ਜਾ ਰਹੇ ਖ਼ਾਲਸਾ ਮਾਰਚ ਦੇ ਸਵਾਗਤ ਅਤੇ ਪ੍ਰਬੰਧਾਂ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਇੱਕ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਮੀਟਿੰਗ ਕੀਤੀ ਗਈ। ਇਹ ਮੀਟਿੰਗ ਕਮੇਟੀ ਦੇ ਸਾਬਕਾ ਜੂਨੀਅਰ ਮੀਤ ਪ੍ਰਧਾਨ ਜਥੇਦਾਰ ਅਵਤਾਰ ਸਿੰਘ ਰਿਆ ਦੀ ਪ੍ਰਧਾਨਗੀ ਹੇਠ ਹੋਈ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਜ਼ਿਲ੍ਹੇ ਭਰ ਤੋਂ ਸ਼੍ਰੋਮਣੀ ਕਮੇਟੀ ਮੈਂਬਰਾਂ, ਸ਼੍ਰੋਮਣੀ ਅਕਾਲੀ ਦਲ ਦੇ ਆਗੂਆਂ ਅਤੇ ਵਰਕਰਾਂ ਨੇ ਵੱਡੀ ਗਿਣਤੀ ਵਿੱਚ ਸ਼ਮੂਲੀਅਤ ਕੀਤੀ। ਮੀਟਿੰਗ ਦੌਰਾਨ ਖ਼ਾਲਸਾ ਮਾਰਚ ਦੇ ਫਤਿਹਗੜ੍ਹ ਸਾਹਿਬ ਦੀ ਹੱਦ ਵਿੱਚ ਪਹੁੰਚਣ ਮੌਕੇ ਕੀਤੇ ਜਾਣ ਵਾਲੇ ਸਵਾਗਤੀ ਪ੍ਰਬੰਧਾਂ ਬਾਰੇ ਵਿਸਥਾਰ ਨਾਲ ਵਿਚਾਰ-ਵਟਾਂਦਰਾ ਕੀਤਾ ਗਿਆ। ਪੱਤਰਕਾਰਾਂ ਨਾਲ ਗੱਲਬਾਤ ਕਰਦਿਆਂ ਜਥੇਦਾਰ ਅਵਤਾਰ ਸਿੰਘ ਰਿਆ ਅਤੇ ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਸਾਹਿਬ ਦੇ ਮੈਨੇਜਰ ਗੁਰਦੀਪ ਸਿੰਘ ਕੰਗ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਸ੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਹਰਗੋਬਿੰਦ ਸਾਹਿਬ ਜੀ ਦੇ ਮੀਰੀ-ਪੀਰੀ ਖ਼ਾਲਸਾ ਮਾਰਚ ਨੂੰ ਸਮਰਪਿਤ ਇਹ ਨਗਰ ਕੀਰਤਨ 30 ਅਗਸਤ ਦੀ ਸ਼ਾਮ ਨੂੰ ਫਤਿਹਗੜ੍ਹ ਸਾਹਿਬ ਦੀ ਹੱਦ ਵਿੱਚ ਪਹੁੰਚੇਗਾ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਖ਼ਾਲਸਾ ਮਾਰਚ ਦੇ ਸਵਾਗਤ ਲਈ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਪੜਾਵਾਂ ’ਤੇ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਪ੍ਰਬੰਧ ਕੀਤੇ ਗਏ ਹਨ। ਇਲਾਕੇ ਦੀਆਂ ਸੰਗਤਾਂ ਵੱਲੋਂ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਥਾਵਾਂ ’ਤੇ ਸਜਾਵਟੀ ਗੇਟ ਲਗਾਉਣ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਲੰਗਰਾਂ ਦੇ ਪ੍ਰਬੰਧ ਵੀ ਕੀਤੇ ਜਾ ਰਹੇ ਹਨ। ਸੰਗਤਾਂ ਵੱਲੋਂ ਖ਼ਾਲਸਾ ਮਾਰਚ ਦਾ ਸ਼ਰਧਾ ਅਤੇ ਉਤਸ਼ਾਹ ਨਾਲ ਸਵਾਗਤ ਕਰਨ ਦੀਆਂ ਤਿਆਰੀਆਂ ਕੀਤੀਆਂ ਜਾ ਰਹੀਆਂ ਹਨ। ਜਥੇਦਾਰ ਰਿਆ ਅਤੇ ਮੈਨੇਜਰ ਗੁਰਦੀਪ ਸਿੰਘ ਕੰਗ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਖ਼ਾਲਸਾ ਮਾਰਚ ਦੇ ਰਾਤਰੀ ਠਹਿਰਾਓ ਲਈ 30 ਅਗਸਤ ਨੂੰ ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਸ੍ਰੀ ਫਤਿਹਗੜ੍ਹ ਸਾਹਿਬ ਵਿਖੇ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਪ੍ਰਬੰਧ ਕੀਤੇ ਗਏ ਹਨ। ਇਸ ਉਪਰੰਤ 31 ਅਗਸਤ ਨੂੰ ਸਵੇਰੇ 9 ਵਜੇ ਖ਼ਾਲਸਾ ਮਾਰਚ ਅਗਲੇ ਪੜਾਅ ਲਈ ਰਵਾਨਾ ਹੋਵੇਗਾ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਸ੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਹਰਗੋਬਿੰਦ ਸਾਹਿਬ ਜੀ ਵੱਲੋਂ ਦਰਸਾਏ ਮੀਰੀ-ਪੀਰੀ ਦੇ ਸਿਧਾਂਤ ਅਤੇ ਸਿੱਖ ਪੰਥ ਦੀਆਂ ਮਹਾਨ ਰਵਾਇਤਾਂ ਨਾਲ ਜੁੜੇ ਇਸ ਖ਼ਾਲਸਾ ਮਾਰਚ ਦਾ ਫਤਿਹਗੜ੍ਹ ਸਾਹਿਬ ਦੀ ਧਰਤੀ ’ਤੇ ਪਹੁੰਚਣਾ ਸਮੂਹ ਸੰਗਤਾਂ ਲਈ ਮਾਣ ਅਤੇ ਸ਼ਰਧਾ ਦਾ ਮੌਕਾ ਹੈ।1
- ਪੰਜਾਬ ਮੁਲਾਜ਼ਮ ਤੇ ਪੈਨਸ਼ਨਰਜ਼ ਸਾਂਝਾ ਫਰੰਟ ਅਤੇ ਸਾਂਝਾ ਮੁਲਾਜ਼ਮ ਮੰਚ, ਪੰਜਾਬ ਵੱਲੋਂ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਮੂਹ ਮੁਲਾਜ਼ਮਾਂ ਨੂੰ 27 ਅਗਸਤ ਨੂੰ ਸਮੂਹਿਕ ਛੁੱਟੀ ਤੇ ਜਾਣ ਦੀ ਅਪੀਲ। ਗੜ੍ਹਸ਼ੰਕਰ (ਅਸ਼ਵਨੀ ਸ਼ਰਮਾ) ਪੰਜਾਬ ਮੁਲਾਜ਼ਮ ਤੇ ਪੈਨਸ਼ਨਰਜ਼ ਸਾਂਝਾ ਫਰੰਟ ਅਤੇ ਸਾਂਝਾ ਮੁਲਾਜ਼ਮ ਮੰਚ, ਪੰਜਾਬ ਵੱਲੋਂ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਮੂਹ ਮੁਲਾਜ਼ਮਾਂ ਨੂੰ 27 ਅਗਸਤ ਨੂੰ ਸਮੂਹਿਕ ਛੁੱਟੀ ਤੇ ਜਾਣ ਦੀ ਅਪੀਲ। 27 ਅਗਸਤ ਨੂੰ ਬਾਜ਼ਾਰ ਖੁੱਲੇ ਰਹਿਣਗੇ ਅਤੇ ਸੜਕੀ ਆਵਾਜਾਈ ਬੰਦ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇਗੀ।1
- दिन दहाडे चोरी हुई दुकान में सरकार आखिर कर कया रही हैं भाई2
- ਨਗਰ ਨਿਗਮ ਲੁਧਿਆਣਾ ਦੀ ਮੀਟਿੰਗ ਬਣੀ ਜੰਗ ਦਾ ਅਖਾੜਾ, ਬੀਜੇਪੀ ਅਤੇ ਆਪ ਕੋਂਸਲਰਾ ਚ ਹੋਈ ਹੱਥੋਂ ਪਾਈ ਨਗਰ ਨਿਗਮ ਲੁਧਿਆਣਾ ਦੀ ਮੀਟਿੰਗ ਬਣੀ ਜੰਗ ਦਾ ਅਖਾੜਾ, ਬੀਜੇਪੀ ਅਤੇ ਆਪ ਕੋਂਸਲਰਾ ਚ ਹੋਈ ਹੱਥੋਂ ਪਾਈ1
- ਵੱਧ ਬਿਜਲੀ ਬਿਲ ਦੇ ਮਾਮਲਿਆਂ ਦੇ ਨਿਪਟਾਰੇ ਲਈ ਜਾਰੀ ਹੋਵੇਗਾ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਨੰਬਰ! 👉🏻 ਉਸ ਨੰਬਰ 'ਤੇ ਆਉਣ ਵਾਲ਼ੀਆਂ ਕਾਲਾਂ ਵਾਸਤੇ ਬੈਠੇਗੀ 20 ਮੈਂਬਰਾਂ ਦੀ ਟੀਮ 👉🏻 15 ਕੰਮ-ਕਾਜੀ ਦਿਨਾਂ 'ਚ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇਗੀ ਵੱਧ ਬਣੇ ਹੋਏ ਬਿਲ ਦੀ ਪੜਤਾਲ 👉🏻 ਭਵਿੱਖ 'ਚ ਮੁਸ਼ਕਿਲਾਂ ਤੋਂ ਬਚਾਅ ਲਈ ਸਾਫ਼ਟਵੇਅਰ 'ਚ ਕੀਤੇ ਗਏ ਬਦਲਾਅ - ਤਰੁਨਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ ਸੌਂਦ ਕੈਬਿਨੇਟ ਮੰਤਰੀ, ਪੰਜਾਬ1
- ਜਦੋਂ ਅਚਾਨਕ ਰੋਡ ਤੇ ਬੰਦ ਖੜੀ ਗੱਡੀ ਵਿੱਚ ਬੈਠੇ ਇੱਕ ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਆ ਗਿਆ ਹਾਰਟ ਅਟੈਕ ਕੁਰਾਲੀ ਤੋਂ ਬੱਦੀ ਰੋਡ ਤੇ ਸਥਿਤ ਇਕ ਜੂਸ ਦੀ ਦੁਕਾਨ ਤੇ ਗੱਡੀ ਸਵਾਰ ਜੂਸ ਪੀਣ ਲਈ ਰੁਕਦੇ ਹਨ।ਗੱਡੀ ਦਾ ਡਰਾਈਵਰ ਅਤੇ ਉਸ ਨਾਲ ਦੀ ਇੱਕ ਹੋਰ ਮਹਿਲਾ ਬਾਥਰੂਮ ਲਈ ਗੱਡੀ ਵਿੱਚ ਬੈਠੇ ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਲਾਕ ਕਰਕੇ ਚਲੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ। ਪਿੱਛੋਂ ਅਚਾਨਕ ਗੱਡੀ ਵਿੱਚ ਬੈਠੇ ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਹਾਰਟ ਅਟੈਕ ਆ ਗਿਆ ਤੇ ਗੱਡੀ ਲਾਕ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਉਸ ਨੂੰ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾ ਮਿਲਣ ਕਾਰਨ ਉਸ ਦੀ ਜਾਨ ਚਲੀ ਗਈ।1