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कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की 403 सीटों पर तैयारी को लेकर अपनी टिप्पणी दी है। उन्होंने इस दौरान बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की स्थिति का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां उनका 'क्या हाल कर दिया' गया है। मसूद ने स्पष्ट रूप से कहा कि 'लड़ाई' केवल राहुल गांधी के नेतृत्व में ही लड़ी जा सकती है।

7 hrs ago
user_गजेन्द्र कुमार सिंह
गजेन्द्र कुमार सिंह
Pindra, Varanasi•
7 hrs ago

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की 403 सीटों पर तैयारी को लेकर अपनी टिप्पणी दी है। उन्होंने इस दौरान बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की स्थिति का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां उनका 'क्या हाल कर दिया' गया है। मसूद ने स्पष्ट रूप से कहा कि 'लड़ाई' केवल राहुल गांधी के नेतृत्व में ही लड़ी जा सकती है।

More news from Varanasi and nearby areas
  • तृणमूल कांग्रेस की नेता सायोनी घोष से एयरपोर्ट पर पत्रकारों ने उनके एक पुराने बयान के संबंध में सवाल किए। इस दौरान, एक महिला पत्रकार ने उनके उस बयान का उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कहा था, "मैं चड्ढा नहीं हूं जो चड्ढी बन जाऊंगी।" पत्रकारों द्वारा पूछे गए इस सवाल का सायोनी घोष ने कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया और वे बिना प्रतिक्रिया दिए वहां से चली गईं।
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    तृणमूल कांग्रेस की नेता सायोनी घोष से एयरपोर्ट पर पत्रकारों ने उनके एक पुराने बयान के संबंध में सवाल किए। इस दौरान, एक महिला पत्रकार ने उनके उस बयान का उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कहा था, "मैं चड्ढा नहीं हूं जो चड्ढी बन जाऊंगी।" पत्रकारों द्वारा पूछे गए इस सवाल का सायोनी घोष ने कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया और वे बिना प्रतिक्रिया दिए वहां से चली गईं।
    user_गजेन्द्र कुमार सिंह
    गजेन्द्र कुमार सिंह
    Pindra, Varanasi•
    32 min ago
  • जलालपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सुरहुरपुर गाँव में हुई एक घटना के संबंध में क्षेत्राधिकारी केराकत, श्री अजय कुमार राय ने अपनी बाइट दी है।
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    जलालपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सुरहुरपुर गाँव में हुई एक घटना के संबंध में क्षेत्राधिकारी केराकत, श्री अजय कुमार राय ने अपनी बाइट दी है।
    user_Jitendra bahadur Dubey
    Jitendra bahadur Dubey
    Nurse केराकत, जौनपुर, उत्तर प्रदेश•
    20 min ago
  • न्यूज टू इंडिया से विनीत कुमार गुप्ता की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के चहनियां क्षेत्र में डीएलएड प्रशिक्षण-2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 15 जून 2026 से शुरू हो रही है। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी, प्रयागराज द्वारा जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, सभी इच्छुक अभ्यर्थी 8 जुलाई 2026 तक अपना पंजीकरण करा सकेंगे। खंडवारी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन, चहनियां के डायरेक्टर आशुतोष कुमार सिंह कैलाशी ने युवाओं से समय रहते आवेदन करने की अपील की है, इसे शिक्षक बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर बताया है। उन्होंने अभ्यर्थियों को आवेदन से पहले शासनादेश, पात्रता, आयु सीमा और अन्य दिशा-निर्देशों को ध्यान से पढ़ने की सलाह दी। डायरेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि फॉर्म में दर्ज की गई जानकारी को बाद में संशोधित नहीं किया जा सकेगा, इसलिए इसे मूल अभिलेखों से भली-भांति मिलान कर ही भरें। उन्होंने अंतिम तिथि का इंतजार न करने और सभी आवश्यक दस्तावेज पहले से ही तैयार रखने का आग्रह किया। आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 9 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है, जबकि भरे हुए आवेदन पत्र का प्रिंट लेने की अंतिम तिथि 11 जुलाई 2026 है। खंडवारी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन ग्रामीण छात्रों को किसी भी प्रकार की असुविधा से बचाने के लिए डीएलएड और बीएड की जानकारी व आवेदन प्रक्रिया में निःशुल्क मार्गदर्शन भी प्रदान कर रहा है। आशुतोष कुमार सिंह कैलाशी ने सभी पात्र अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देश के उज्ज्वल भविष्य की नींव गुणवत्तापूर्ण शिक्षक ही होते हैं, और डीएलएड प्रशिक्षण इस दिशा में पहला कदम है।
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    न्यूज टू इंडिया से विनीत कुमार गुप्ता की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के चहनियां क्षेत्र में डीएलएड प्रशिक्षण-2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 15 जून 2026 से शुरू हो रही है। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी, प्रयागराज द्वारा जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, सभी इच्छुक अभ्यर्थी 8 जुलाई 2026 तक अपना पंजीकरण करा सकेंगे।

खंडवारी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन, चहनियां के डायरेक्टर आशुतोष कुमार सिंह कैलाशी ने युवाओं से समय रहते आवेदन करने की अपील की है, इसे शिक्षक बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर बताया है। उन्होंने अभ्यर्थियों को आवेदन से पहले शासनादेश, पात्रता, आयु सीमा और अन्य दिशा-निर्देशों को ध्यान से पढ़ने की सलाह दी। डायरेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि फॉर्म में दर्ज की गई जानकारी को बाद में संशोधित नहीं किया जा सकेगा, इसलिए इसे मूल अभिलेखों से भली-भांति मिलान कर ही भरें। उन्होंने अंतिम तिथि का इंतजार न करने और सभी आवश्यक दस्तावेज पहले से ही तैयार रखने का आग्रह किया।

आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 9 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है, जबकि भरे हुए आवेदन पत्र का प्रिंट लेने की अंतिम तिथि 11 जुलाई 2026 है। खंडवारी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन ग्रामीण छात्रों को किसी भी प्रकार की असुविधा से बचाने के लिए डीएलएड और बीएड की जानकारी व आवेदन प्रक्रिया में निःशुल्क मार्गदर्शन भी प्रदान कर रहा है। आशुतोष कुमार सिंह कैलाशी ने सभी पात्र अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देश के उज्ज्वल भविष्य की नींव गुणवत्तापूर्ण शिक्षक ही होते हैं, और डीएलएड प्रशिक्षण इस दिशा में पहला कदम है।
    user_NEWS 2 INDIA
    NEWS 2 INDIA
    TV News Anchor सदर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के वाराणसी में सारनाथ थाना क्षेत्र के सुल्तानपुर गाँव की रहने वाली शिवकुमारी पटेल के पति पिछले 55 दिनों से लापता हैं। इस मामले में पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि वह 'दलाल' बन गई है और सच बोलने वालों के फोन छीनकर वीडियो हटा देती है। शिवकुमारी पटेल और उनके समर्थकों का कहना है कि पुलिसकर्मियों ने उनका मोबाइल फोन छीन लिया, उसमें से वीडियो डिलीट किए, और उनके साथ मारपीट भी की। इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, लोगों ने कहा है कि प्रशासन को 'सबक सिखाना ही होगा'।
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    उत्तर प्रदेश के वाराणसी में सारनाथ थाना क्षेत्र के सुल्तानपुर गाँव की रहने वाली शिवकुमारी पटेल के पति पिछले 55 दिनों से लापता हैं। इस मामले में पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि वह 'दलाल' बन गई है और सच बोलने वालों के फोन छीनकर वीडियो हटा देती है। शिवकुमारी पटेल और उनके समर्थकों का कहना है कि पुलिसकर्मियों ने उनका मोबाइल फोन छीन लिया, उसमें से वीडियो डिलीट किए, और उनके साथ मारपीट भी की। इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, लोगों ने कहा है कि प्रशासन को 'सबक सिखाना ही होगा'।
    user_Priyanshu
    Priyanshu
    Court reporter सदर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्र में मासिक शिवरात्रि के अवसर पर, सामाजिक संस्था आशा ट्रस्ट की रचनात्मक पहल पर एक विशेष आयोजन किया गया। मार्कंडेय महादेव मंदिर और गंगा-गोमती संगम घाट पर श्रद्धा के साथ-साथ स्वच्छता का संदेश भी गूंजा। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य मां गंगा को स्वच्छ रखना था, जिसके तहत गंगा-गोमती संगम पर बच्चों ने एक जन चेतना रैली भी निकाली और स्वच्छता का संदेश दिया।
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    वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्र में मासिक शिवरात्रि के अवसर पर, सामाजिक संस्था आशा ट्रस्ट की रचनात्मक पहल पर एक विशेष आयोजन किया गया। मार्कंडेय महादेव मंदिर और गंगा-गोमती संगम घाट पर श्रद्धा के साथ-साथ स्वच्छता का संदेश भी गूंजा। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य मां गंगा को स्वच्छ रखना था, जिसके तहत गंगा-गोमती संगम पर बच्चों ने एक जन चेतना रैली भी निकाली और स्वच्छता का संदेश दिया।
    user_NEWS 2 INDIA (NTI)
    NEWS 2 INDIA (NTI)
    Court reporter सदर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • सतीश पाल का sed #song#love#status#jbj#muick#prjent#up#now#short#vayrl#video#trending#topten goodLook
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    सतीश पाल का sed #song#love#status#jbj#muick#prjent#up#now#short#vayrl#video#trending#topten goodLook
    user_Satish pal
    Satish pal
    भदोही, भदोही, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • मानवाधिकार सुरक्षा एवं संरक्षण ऑर्गेनाइजेशन संगठन ने प्रथम राजा दिवस के शुभ अवसर पर सभी नागरिकों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। संगठन के अनुसार, राजा पर्व भारतीय संस्कृति, प्रकृति और नारी सम्मान से जुड़ा एक महत्वपूर्ण लोकपर्व है, जो विशेष रूप से आनंद, उत्साह और सामाजिक समरसता का संदेश देता है। इस अवसर पर, संगठन के प्रतिनिधियों ने राजा पर्व को हमारी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह पर्व प्रकृति के प्रति सम्मान, महिलाओं के गौरव तथा समाज में प्रेम, भाईचारे और सद्भाव को बढ़ावा देने का संदेश देता है। संगठन के रिपोर्टर सूर्य प्रकाश पाण्डेय ने सभी देशवासियों से अपील की कि वे अपनी संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करते हुए सामाजिक एकता, मानवता और आपसी सहयोग की भावना को मजबूत करें। मानवाधिकार सुरक्षा एवं संरक्षण ऑर्गेनाइजेशन संगठन ने इस प्रथम राजा दिवस पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं और अभिनंदन देते हुए 'संस्कृति का सम्मान, मानवता का उत्थान' के संदेश पर जोर दिया।
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    मानवाधिकार सुरक्षा एवं संरक्षण ऑर्गेनाइजेशन संगठन ने प्रथम राजा दिवस के शुभ अवसर पर सभी नागरिकों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। संगठन के अनुसार, राजा पर्व भारतीय संस्कृति, प्रकृति और नारी सम्मान से जुड़ा एक महत्वपूर्ण लोकपर्व है, जो विशेष रूप से आनंद, उत्साह और सामाजिक समरसता का संदेश देता है।

इस अवसर पर, संगठन के प्रतिनिधियों ने राजा पर्व को हमारी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह पर्व प्रकृति के प्रति सम्मान, महिलाओं के गौरव तथा समाज में प्रेम, भाईचारे और सद्भाव को बढ़ावा देने का संदेश देता है। संगठन के रिपोर्टर सूर्य प्रकाश पाण्डेय ने सभी देशवासियों से अपील की कि वे अपनी संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करते हुए सामाजिक एकता, मानवता और आपसी सहयोग की भावना को मजबूत करें। मानवाधिकार सुरक्षा एवं संरक्षण ऑर्गेनाइजेशन संगठन ने इस प्रथम राजा दिवस पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं और अभिनंदन देते हुए 'संस्कृति का सम्मान, मानवता का उत्थान' के संदेश पर जोर दिया।
    user_सूर्य प्रकाश पाण्डेय
    सूर्य प्रकाश पाण्डेय
    Voice of people Mariahu, Jaunpur•
    13 hrs ago
  • अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) तुलसी गबार्ड ने हाल ही में कुछ अवर्गीकृत दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। इन दस्तावेजों में दावा किया गया है कि अमेरिका ने दुनिया के 30 से अधिक देशों में स्थित 120 से ज्यादा जैविक प्रयोगशालाओं (बायोलैब्स) को वित्तीय सहायता प्रदान की है। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से लगभग 40 से अधिक बायोलैब्स यूक्रेन में स्थित हैं। बताया गया है कि इन प्रयोगशालाओं को अमेरिकी रक्षा विभाग के कोऑपरेटिव थ्रेट रिडक्शन (CTR) कार्यक्रम के तहत सहायता दी गई थी। इस कार्यक्रम का घोषित उद्देश्य शीत युद्ध के बाद बचे जैविक खतरों को नियंत्रित करना, महामारी संबंधी जोखिमों को कम करना, जैव सुरक्षा को मजबूत बनाना और वैज्ञानिक अनुसंधान को बेहतर बनाना था। दस्तावेजों में यह भी उल्लेख है कि कुछ प्रयोगशालाओं में एंथ्रेक्स, इबोला, सार्स (SARS), मर्स (MERS) और प्लेग जैसे खतरनाक रोगाणुओं पर अनुसंधान किया गया। इसके अतिरिक्त, कुछ स्थानों पर तथाकथित "गेन-ऑफ-फंक्शन रिसर्च" की संभावना भी जताई गई है, जिसमें वायरस या अन्य सूक्ष्म जीवों के व्यवहार को समझने के लिए उनमें नियंत्रित बदलाव किए जाते हैं। इन खुलासों के बाद तुलसी गबार्ड ने इन प्रयोगशालाओं की व्यापक समीक्षा और जांच के आदेश दिए हैं। इस जांच का उद्देश्य प्रयोगशालाओं की वास्तविक स्थिति, वहां चल रहे अनुसंधानों की प्रकृति और संभावित सुरक्षा जोखिमों का आकलन करना बताया गया है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कार्यक्रम किसी गुप्त जैविक हथियार परियोजना का हिस्सा नहीं था, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य सामूहिक विनाश के हथियारों (WMD) से जुड़े खतरों को रोकना और जैविक सुरक्षा को मजबूत बनाना था। यूक्रेन स्थित बायोलैब्स और अमेरिकी फंडिंग को लेकर पिछले कुछ वर्षों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस होती रही है और अब इन ताजा दस्तावेजों के सार्वजनिक होने के बाद इस मुद्दे पर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। अब सभी की नजर जांच के नतीजों और अमेरिकी प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
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    अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) तुलसी गबार्ड ने हाल ही में कुछ अवर्गीकृत दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। इन दस्तावेजों में दावा किया गया है कि अमेरिका ने दुनिया के 30 से अधिक देशों में स्थित 120 से ज्यादा जैविक प्रयोगशालाओं (बायोलैब्स) को वित्तीय सहायता प्रदान की है। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से लगभग 40 से अधिक बायोलैब्स यूक्रेन में स्थित हैं। बताया गया है कि इन प्रयोगशालाओं को अमेरिकी रक्षा विभाग के कोऑपरेटिव थ्रेट रिडक्शन (CTR) कार्यक्रम के तहत सहायता दी गई थी।

इस कार्यक्रम का घोषित उद्देश्य शीत युद्ध के बाद बचे जैविक खतरों को नियंत्रित करना, महामारी संबंधी जोखिमों को कम करना, जैव सुरक्षा को मजबूत बनाना और वैज्ञानिक अनुसंधान को बेहतर बनाना था। दस्तावेजों में यह भी उल्लेख है कि कुछ प्रयोगशालाओं में एंथ्रेक्स, इबोला, सार्स (SARS), मर्स (MERS) और प्लेग जैसे खतरनाक रोगाणुओं पर अनुसंधान किया गया। इसके अतिरिक्त, कुछ स्थानों पर तथाकथित "गेन-ऑफ-फंक्शन रिसर्च" की संभावना भी जताई गई है, जिसमें वायरस या अन्य सूक्ष्म जीवों के व्यवहार को समझने के लिए उनमें नियंत्रित बदलाव किए जाते हैं।

इन खुलासों के बाद तुलसी गबार्ड ने इन प्रयोगशालाओं की व्यापक समीक्षा और जांच के आदेश दिए हैं। इस जांच का उद्देश्य प्रयोगशालाओं की वास्तविक स्थिति, वहां चल रहे अनुसंधानों की प्रकृति और संभावित सुरक्षा जोखिमों का आकलन करना बताया गया है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कार्यक्रम किसी गुप्त जैविक हथियार परियोजना का हिस्सा नहीं था, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य सामूहिक विनाश के हथियारों (WMD) से जुड़े खतरों को रोकना और जैविक सुरक्षा को मजबूत बनाना था। यूक्रेन स्थित बायोलैब्स और अमेरिकी फंडिंग को लेकर पिछले कुछ वर्षों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस होती रही है और अब इन ताजा दस्तावेजों के सार्वजनिक होने के बाद इस मुद्दे पर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। अब सभी की नजर जांच के नतीजों और अमेरिकी प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
    user_गजेन्द्र कुमार सिंह
    गजेन्द्र कुमार सिंह
    Pindra, Varanasi•
    34 min ago
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