सज्जनगढ़ के पर्यावरण- संवेदनशील क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख ‘मानी गई अनुमति’ के आधार पर पर्यावरणीय प्रतिबंधों को दरकिनार नहीं किया जा सकता- न्यायमूर्ति समीर जैन जोधपुर राजस्थान उच्च न्यायालय की जोधपुर पीठ ने सज्जनगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के आसपास स्थित पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र में निर्माण से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए संबंधित रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया।न्यायमूर्ति समीर जैन ने स्पष्ट किया कि सामान्य विकास कानून के तहत उपलब्ध मानी गई अनुमति के आधार पर पर्यावरणीय कानूनों एवं विशेष प्रतिबंधों को निष्प्रभावी नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि सज्जनगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के आसपास लागू विशेष पर्यावरणीय प्रावधानों तथा क्षेत्रीय विकास योजना के विपरीत किए गए निर्माण को केवल सामान्य विकास कानून अथवा प्राधिकरण द्वारा समय पर निर्णय नहीं लिए जाने के आधार पर वैध नहीं माना जा सकता। मानी गई अनुमति का सिद्धांत ऐसी गतिविधि को वैधता प्रदान नहीं कर सकता,जिस पर विशेष पर्यावरणीय व्यवस्था के तहत स्पष्ट प्रतिबंध हो। न्यायालय के समक्ष यह तथ्य भी आया कि संबंधित निर्माण अभयारण्य से एक किलोमीटर के भीतर स्थित है और वहां लागू पर्यावरणीय प्रतिबंधों के बावजूद निर्माण किया गया।न्यायालय ने कहा कि पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र में विकास गतिविधियों को सामान्य शहरी निर्माण की तरह नहीं देखा जा सकता तथा ऐसे क्षेत्रों की पारिस्थितिक संवेदनशीलता की रक्षा करना आवश्यक है। न्यायालय ने संबंधित प्राधिकरणों द्वारा अनधिकृत निर्माण के विरुद्ध की गई सीलबंदी एवं ध्वस्तीकरण की कार्रवाई में हस्तक्षेप करने से इनकार किया।साथ ही यह स्पष्ट किया कि केवल भारी निवेश हो जाने अथवा निर्माण पूरा हो जाने से अनधिकृत निर्माण को संरक्षण का अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता। निर्णय में 13 फरवरी 2017 की पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र संबंधी अधिसूचना तथा क्षेत्रीय विकास योजना को महत्वपूर्ण माना गया। न्यायालय ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सावधानी के सिद्धांत तथा लोक न्यास सिद्धांत का भी उल्लेख किया और कहा कि पर्यावरणीय संरक्षण से जुड़े वैधानिक दायित्वों को प्रभावी रूप से लागू किया जाना आवश्यक है। भारत सरकार की ओर से वरिष्ठ विधि अधिकारी भारत व्यास द्वारा पर्यावरणीय कानूनों एवं पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र से संबंधित विधिक पक्ष न्यायालय के समक्ष रखे जाने का उल्लेख भी मामले में है।एडवोकेट विनय कांत सक्सेना, भारत सरकार के स्थायी अधिवक्ता,राजस्थान उच्च न्यायालय,ने बताया कि यह निर्णय पर्यावरण-संवेदनशील एवं वन्यजीव क्षेत्रों में अनधिकृत निर्माण के नियमन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।उन्होंने कहा कि सामान्य विकास संबंधी अनुमति के आधार पर ऐसे निर्माण को संरक्षण नहीं दिया जा सकता,जो विशेष पर्यावरणीय प्रावधानों के विपरीत हो। उन्होंने बताया कि न्यायालय के इस निर्णय से यह विधिक स्थिति स्पष्ट होती है कि विशेष पर्यावरणीय प्रतिबंधों के अधीन क्षेत्रों में सामान्य विकास संबंधी प्रावधानों का उपयोग उन प्रतिबंधों को दरकिनार करने के लिए नहीं किया जा सकता। यह निर्णय सज्जनगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के आसपास पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र के संरक्षण तथा अनधिकृत निर्माण के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सज्जनगढ़ के पर्यावरण- संवेदनशील क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख ‘मानी गई अनुमति’ के आधार पर पर्यावरणीय प्रतिबंधों को दरकिनार नहीं किया जा सकता- न्यायमूर्ति समीर जैन जोधपुर राजस्थान उच्च न्यायालय की जोधपुर पीठ ने सज्जनगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के आसपास स्थित पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र में निर्माण से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए संबंधित रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया।न्यायमूर्ति समीर जैन ने स्पष्ट किया कि सामान्य विकास कानून के तहत उपलब्ध मानी गई अनुमति के आधार पर पर्यावरणीय कानूनों एवं विशेष प्रतिबंधों को निष्प्रभावी नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि सज्जनगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के आसपास लागू विशेष पर्यावरणीय प्रावधानों तथा क्षेत्रीय विकास योजना के विपरीत किए गए निर्माण को केवल सामान्य विकास कानून अथवा प्राधिकरण द्वारा समय पर निर्णय नहीं लिए जाने के आधार पर वैध नहीं माना जा सकता। मानी गई अनुमति का सिद्धांत ऐसी गतिविधि को वैधता प्रदान नहीं कर सकता,जिस पर विशेष पर्यावरणीय व्यवस्था के तहत स्पष्ट प्रतिबंध हो। न्यायालय के समक्ष यह तथ्य भी आया कि संबंधित निर्माण अभयारण्य से एक किलोमीटर के भीतर स्थित है और वहां लागू पर्यावरणीय प्रतिबंधों के बावजूद निर्माण किया गया।न्यायालय ने कहा कि पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र में विकास गतिविधियों को सामान्य शहरी निर्माण की तरह नहीं देखा जा सकता तथा ऐसे क्षेत्रों की पारिस्थितिक संवेदनशीलता की रक्षा करना आवश्यक है। न्यायालय ने संबंधित प्राधिकरणों द्वारा अनधिकृत निर्माण के विरुद्ध की गई सीलबंदी एवं ध्वस्तीकरण की कार्रवाई में हस्तक्षेप करने से इनकार किया।साथ ही यह स्पष्ट किया कि केवल भारी निवेश हो जाने अथवा निर्माण पूरा हो जाने से अनधिकृत निर्माण को संरक्षण का अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता। निर्णय में 13 फरवरी 2017 की पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र संबंधी अधिसूचना तथा क्षेत्रीय विकास योजना को महत्वपूर्ण माना गया। न्यायालय ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सावधानी के सिद्धांत तथा लोक न्यास सिद्धांत का भी उल्लेख किया और कहा कि पर्यावरणीय संरक्षण से जुड़े वैधानिक दायित्वों को प्रभावी रूप से लागू किया जाना आवश्यक है। भारत सरकार की ओर से वरिष्ठ विधि अधिकारी भारत व्यास द्वारा पर्यावरणीय कानूनों एवं पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र से संबंधित विधिक पक्ष न्यायालय के समक्ष रखे जाने का उल्लेख भी मामले में है।एडवोकेट विनय कांत सक्सेना, भारत सरकार के स्थायी अधिवक्ता,राजस्थान उच्च न्यायालय,ने बताया कि यह निर्णय पर्यावरण-संवेदनशील एवं वन्यजीव क्षेत्रों में अनधिकृत निर्माण के नियमन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।उन्होंने कहा कि सामान्य विकास संबंधी अनुमति के आधार पर ऐसे निर्माण को संरक्षण नहीं दिया जा सकता,जो विशेष पर्यावरणीय प्रावधानों के विपरीत हो। उन्होंने बताया कि न्यायालय के इस निर्णय से यह विधिक स्थिति स्पष्ट होती है कि विशेष पर्यावरणीय प्रतिबंधों के अधीन क्षेत्रों में सामान्य विकास संबंधी प्रावधानों का उपयोग उन प्रतिबंधों को दरकिनार करने के लिए नहीं किया जा सकता। यह निर्णय सज्जनगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के आसपास पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र के संरक्षण तथा अनधिकृत निर्माण के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
- Post by अब्दुल सत्तार3
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- अजमेर में दुकान का ताला तोड़कर चोरी! ₹70 हजार तक की नकदी पार, CCTV में कैद हुआ चोर अजमेर के कृष्ण गंज थाना क्षेत्र के शास्त्रीनगर में एक दुकान में चोरी की वारदात सामने आई है। 14 सितंबर की सुबह करीब 3 से 4 बजे अज्ञात चोरों ने दुकान का ताला तोड़कर गल्ले में रखे ₹1600 नकद और मिट्टी के गुल्लक में जमा करीब ₹60 से ₹70 हजार की रकम चोरी कर ली। वारदात दुकान में लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई। पीड़ित की शिकायत पर कृष्ण गंज थाना पुलिस ने BNS की धारा 305(a) के तहत मामला दर्ज कर CCTV फुटेज के आधार पर जांच और चोरों की तलाश शुरू कर दी है।1
- राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में भाजपा को मिला जनादेश जनसेवा, विकास और सुशासन के संकल्प पर जनता की मुहर है। हमारी सरकार शहरी विकास, बेहतर नागरिक सुविधाओं, सुदृढ़ आधारभूत ढांचे और पारदर्शी सुशासन के माध्यम से शहरों के सर्वांगीण विकास को नई गति दे रही है। इस ऐतिहासिक जनादेश के लिए प्रदेश की देवतुल्य जनता का हृदय से धन्यवाद एवं आभार! भाजपा के सभी कर्मठ कार्यकर्ताओं को उनके अथक परिश्रम और समर्पण के लिए हार्दिक बधाई! #सशक्त_शहर_समृद्ध_राजस्थान #कोने_कोने_में_भाजपा1
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- नसीराबाद के लोहरवाड़ा में गूंजे गणपति के जयकारे, श्री सिद्धिविनायक महाराज का विशाल मेला धूमधाम से भरा नसीराबाद के लोहरवाड़ा में गूंजे गणपति के जयकारे, श्री सिद्धिविनायक महाराज का विशाल मेला धूमधाम से भरा1
- पीसांगन :नगरपालिका अध्यक्ष पद के लिए आज जीरो नामांकन,कल नामांकन की आखिरी तारीख... पीसांगन नगरपालिका अध्यक्ष चुनाव के पहले दिन आज एक भी पर्चा दाखिल नहीं हुआ। रिटर्निंग अधिकारी मोहन चौधरी के अनुसार नामांकन 15-16 सितंबर तक होना है। कल 16 सितंबर आखिरी तारीख है। 17 को जांच, आवश्यक हुआ तो 21 को होगा मतदान।2
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