बाल श्रम के उन्मूलन के प्रायसों पर उठे सवाल छोटे बच्चों से कराया जा रहा काम *बाल श्रम के उन्मूलन के प्रयासों बावजूद, स्थिति अभी भी गंभीर ..* *जमीनी स्तर पर इसकी प्रभावशीलता पर सवाल उठते रहते .* बाराबंकी । बाल श्रम का मतलब है कि बच्चों को वयस्कों की तरह काम करने और आर्थिक गतिविधि में भाग लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है। आई एल ओ अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार यह नियम तेरह वर्ष या सत्रह वर्ष तक के लोगों पर लागू होता है। हालांकि आई एल ओ सदस्यों के केवल चौथे हिस्से ने संबंधित सम्मेलन की पुष्टि की है, लेकिन श्रम करने के लिये इस आयु सीमा को आम तौर पर स्वीकार किया जाता है। बाल श्रम किसी भी काम में बच्चों के रोजगार को संदर्भित करता है जो उनके बचपन से वंचित करता है, नियमित स्कूल में भाग लेने की उनकी क्षमता में हस्तक्षेप करता है, और यह मानसिक रूप से, शारीरिक रूप से, सामाजिक या नैतिक रूप से उनके जीवन के लिये खतरनाक और हानिकारक है। बाल श्रम मूल रूप से बच्चों द्वारा किये गये अनौपचारिक कार्यों से अलग है जैसे कि अन्य बच्चों की रक्षा करना, या यहां और वहां सहायता करना। अधिकांश देशों में बाल श्रम पर रोक लगा दी गयी है। इन दिनों हम जनपद के कुछ चाय स्टाल, होटल और अन्य छोटी दुकानों में काम कर रहे कई नाबालिग लड़कों को देखते हैं। कुछ ईंट कारखानों जैसे विशाल कारखानों में काम करते हैं। यह बाल श्रम के अन्तर्गत आता है, और मुख्य कारण यह है कि बाल श्रम क्यों होता है ? वो है गरीबी । गौर करें जनपद की नगरपालिका ईजी डे के आसपास किस तरह पानी बताशा आदि पर कार्य करतें दिख सकतें हैं । दो प्रकार के काम हैं जो नाबालिग कर सकते हैं कुछ काम जो वे अपनी स्वीकृति से करते हैं, क्योंकि यह उनके लिये आसान होते है, या उन्हें करने में कठिनाई नहीं होती है। बच्चे परिवार में अच्छी तरह से एकीकृत होकर रहते हैं तो वहां भी वे अपने माँ बाप के कुछ कार्य कर सकते है। बच्चों के द्वारा शिक्षा के अलावा इस प्रकार के काम को किया जा सकता है। अन्य प्रकार के काम करना जो मुश्किल होते है, या वास्तविकता अलग है हालांकि तथ्य यह है कि बाल श्रम हर जगह शामिल है लेकिन यह अक्सर छुपाया जाता है । इस काम के तीन से अधिक चौथाई बच्चे कृषि के क्षेत्र में काम करते है, या इसे परिवार के संदर्भ में घर पर किये गये गतिविधियों के साथ करना पड़ता है। परंपरागत रूप से, एक बाल श्रम को 5 से 14 साल की अवधि में एक बच्चे के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो श्रम कर रहा है, या तो भुगतान किया गया है या भुगतान नहीं किया गया है। ’बाल श्रम’ शब्द का प्रयोग आमतौर पर उन बच्चों द्वारा किए गए किसी भी काम के संदर्भ में किया जाता है जो शिक्षा और आवश्यक मनोरंजन के अवसरों को कम करने वाले अपने पूर्ण शारीरिक विकास में हस्तक्षेप करते हैं। बाल श्रम के उन्मूलन के लिये किये गये कई प्रयासों के बावजूद, स्थिति अभी भी गंभीर है। बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 अधिनियम कुछ निर्दिष्ट खतरनाक व्यवसायों में बच्चों के रोजगार पर रोक लगाता है। राष्ट्रीय बाल श्रम नीति , पहली बार राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजनाएं (एन सी एल पी) शुरू की गई थीं। एन सी एल पी क्षेत्र-विशिष्ट हैं; समयबद्ध परियोजनाएं जहां खतरनाक रोजगार में लगे बच्चों के वापसी और पुनर्वास के लिए प्राथमिकता दी जाती है। राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना (एन सी एल पी) का मुख्य उद्देश्य इस देश में बाल श्रम के प्रसार को खत्म करना है। चर्चायें यें ! कि जनपद का बाल श्रम विभाग तब सवालों के घेरे में आता हैं जब बाजारों , ढाबों या कारखनों में खुलेआम बच्चों से मजदूरी करायी जाती हैं। हालांकि प्रशासन और श्रम विभाग द्वारा समय-समय पर विशेष अभियान चलाकर नोटिस जारी किए जाते हैं, फिर भी जमीनी स्तर पर इसकी प्रभावशीलता पर सवाल उठते रहते हैं।
बाल श्रम के उन्मूलन के प्रायसों पर उठे सवाल छोटे बच्चों से कराया जा रहा काम *बाल श्रम के उन्मूलन के प्रयासों बावजूद, स्थिति अभी भी गंभीर ..* *जमीनी स्तर पर इसकी प्रभावशीलता पर सवाल उठते रहते .* बाराबंकी । बाल श्रम का मतलब है कि बच्चों को वयस्कों की तरह काम करने और आर्थिक गतिविधि में भाग लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है। आई एल ओ अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार यह नियम तेरह वर्ष या सत्रह वर्ष तक के लोगों पर लागू होता है। हालांकि आई एल ओ सदस्यों के केवल चौथे हिस्से ने संबंधित सम्मेलन की पुष्टि की है, लेकिन श्रम करने के लिये इस आयु सीमा को आम तौर पर स्वीकार किया जाता है। बाल श्रम किसी भी काम में बच्चों के रोजगार को संदर्भित करता है जो उनके बचपन से वंचित करता है, नियमित स्कूल में भाग लेने की उनकी क्षमता में हस्तक्षेप करता है, और यह मानसिक रूप से, शारीरिक रूप से, सामाजिक या नैतिक रूप से उनके जीवन के लिये खतरनाक और हानिकारक है। बाल श्रम मूल रूप से बच्चों द्वारा किये गये अनौपचारिक कार्यों से अलग है जैसे कि अन्य बच्चों की रक्षा करना, या यहां और वहां सहायता करना। अधिकांश देशों में बाल श्रम पर रोक लगा दी गयी है। इन दिनों हम जनपद के कुछ चाय स्टाल, होटल और अन्य छोटी दुकानों में काम कर रहे कई नाबालिग लड़कों को देखते हैं। कुछ ईंट कारखानों जैसे विशाल कारखानों में काम करते हैं। यह बाल श्रम के अन्तर्गत आता है, और मुख्य कारण यह है कि बाल श्रम क्यों होता है ? वो है गरीबी । गौर करें जनपद की नगरपालिका ईजी डे के आसपास किस तरह पानी बताशा आदि पर कार्य करतें दिख सकतें हैं । दो प्रकार के काम हैं जो नाबालिग कर सकते हैं कुछ काम जो वे अपनी स्वीकृति से करते हैं, क्योंकि यह उनके लिये आसान होते है, या उन्हें करने में कठिनाई नहीं होती है। बच्चे परिवार में अच्छी तरह से एकीकृत होकर रहते हैं तो वहां भी वे अपने माँ बाप के कुछ कार्य कर सकते है। बच्चों के द्वारा शिक्षा के अलावा इस प्रकार के काम को किया जा सकता है। अन्य प्रकार के काम करना जो मुश्किल होते है, या वास्तविकता अलग है हालांकि तथ्य यह है कि बाल श्रम हर जगह शामिल है लेकिन यह अक्सर छुपाया जाता है । इस काम के तीन से अधिक चौथाई बच्चे कृषि के क्षेत्र में काम करते है, या इसे परिवार के संदर्भ में घर पर किये गये गतिविधियों के साथ करना पड़ता है। परंपरागत रूप से, एक बाल श्रम को 5 से 14 साल की अवधि में एक बच्चे के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो श्रम कर रहा है, या तो भुगतान किया गया है या भुगतान नहीं किया गया है। ’बाल श्रम’ शब्द का प्रयोग आमतौर पर उन बच्चों द्वारा किए गए किसी भी काम के संदर्भ में किया जाता है जो शिक्षा और आवश्यक मनोरंजन के अवसरों को कम करने वाले अपने पूर्ण शारीरिक विकास में हस्तक्षेप करते हैं। बाल श्रम के उन्मूलन के लिये किये गये कई प्रयासों के बावजूद, स्थिति अभी भी गंभीर है। बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 अधिनियम कुछ निर्दिष्ट खतरनाक व्यवसायों में बच्चों के रोजगार पर रोक लगाता है। राष्ट्रीय बाल श्रम नीति , पहली बार राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजनाएं (एन सी एल पी) शुरू की गई थीं। एन सी एल पी क्षेत्र-विशिष्ट हैं; समयबद्ध परियोजनाएं जहां खतरनाक रोजगार में लगे बच्चों के वापसी और पुनर्वास के लिए प्राथमिकता दी जाती है। राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना (एन सी एल पी) का मुख्य उद्देश्य इस देश में बाल श्रम के प्रसार को खत्म करना है। चर्चायें यें ! कि जनपद का बाल श्रम विभाग तब सवालों के घेरे में आता हैं जब बाजारों , ढाबों या कारखनों में खुलेआम बच्चों से मजदूरी करायी जाती हैं। हालांकि प्रशासन और श्रम विभाग द्वारा समय-समय पर विशेष अभियान चलाकर नोटिस जारी किए जाते हैं, फिर भी जमीनी स्तर पर इसकी प्रभावशीलता पर सवाल उठते रहते हैं।
- बाराबंकी के बंकी ब्लॉक CHC का मंत्री जी ने किया निरीक्षण उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री सुरेश राही के बाराबंकी की जाटा बरौली सीएचसी का निरीक्षण करते समय ग्रामीणों ने किया विरोध1
- *PM मोदी को गाली देने वाली लड़की ने माफी मांगी:* हाथ जोड़कर बोली- मैं 15 साल की हूं, गलती पर शर्मिंदा हूं; नोएडा में दर्ज हुई थी FIR विरोध प्रदर्शन के दौरान अभद्र टिप्पणी: दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक छात्र प्रदर्शन (NEET परीक्षा विवाद / पेपर लीक को लेकर) के दौरान लड़की ने कैमरे के सामने पीएम मोदी के खिलाफ अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किया था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ.नोएडा में दर्ज हुई थी FIR: इस आपत्तिजनक वीडियो का संज्ञान लेते हुए गाजियाबाद की एक महिला वकील की शिकायत पर नोएडा के एक्सप्रेस-वे थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत जीरो FIR दर्ज की गई थी, जिसे बाद में जांच के लिए दिल्ली पुलिस को ट्रांसफर कर दिया गया.पीएम मोदी का बड़प्पन: मामले के तूल पकड़ने पर पीएम मोदी ने देर रात सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने कहा, "मैं गाली देने वाले बच्चों को माफ करना चाहता हूं। बचपन में गलतियां होती हैं, मैं उनके आक्रोश को समझता हूं। गुमराह को सही राह दिखाना कठिन है, लेकिन मैं यह काम करूंगा।"लड़की ने क्या कहा?: प्रधानमंत्री के इस संदेश के बाद नाबालिग लड़की ने वीडियो जारी कर रोते हुए कहा, "मैं अभी मात्र 15 साल की हूं। जंतर-मंतर पर कुछ लोगों के उकसावे और बहकावे में आकर मैंने वो गंदी बातें बोली थीं। मैंने जो किया वो माफी के लायक नहीं है, लेकिन मैं बहुत शर्मिंदा हूं। यह मेरी पहली और आखिरी गलती है।" ब्रेकिंग न्यूज़ संवाददाता आशीष मिश्रा लखनऊ1
- जलभराव से बेहाल ग्रामीण, प्रधान ने कहा "112 बुला लो", खंड विकास अधिकारी ने मांगी एप्लीकेशन *जलभराव से बेहाल ग्रामीण, प्रधान ने कहा "112 बुला लो", खंड विकास अधिकारी ने मांगी एप्लीकेशन* *लंभुआ, सुल्तानपुर*। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां गांवों को "स्मार्ट गांव" बनाने का सपना देख रहे हैं, वहीं लंभुआ ब्लॉक के ग्राम सूर्यभान पट्टी , भूअरहवा में ग्रामीण गंदे पानी से होकर गुजरने को मजबूर हैं। ग्राम में बृजेश वर्मा के घर के पास बीच रास्ते में भारी जलभराव हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव आने-जाने का यही एकमात्र रास्ता है। कुछ दबंगों द्वारा आगे पानी की निकासी बाधित कर दिए जाने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। समस्या से परेशान होकर ग्रामीणों ने इसकी शिकायत ग्राम प्रधान शिवकुमार से की। आरोप है कि प्रधान ने समस्या सुनने के बजाय कहा - "112 बुला लीजिए, अभी हम पढ़ाने में व्यस्त हैं।" इसके बाद ग्रामीणों ने खंड विकास अधिकारी लंभुआ को फोन पर अवगत कराया तो उन्होंने एप्लीकेशन देने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि महीनों से समस्या बनी हुई है लेकिन समाधान के नाम पर सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा है। गंदे पानी में होकर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को रोजाना निकलना पड़ रहा है जिससे बीमारी फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि तत्काल जलभराव की समस्या का समाधान कर रास्ते को आवागमन योग्य बनाया जाए।1
- सबसे अधिक हमें कपिल सिब्बल ने लूटा है। 😭 कपिल सिब्बल राम मंदिर की लड़ाई हार गया। कपिल सिब्बल ट्रिपल तलाक की लड़ाई हार गया। कपिल सिब्बल Article 370 की लड़ाई हार गया। कपिल सिब्बल CAA/NRC की लड़ाई हार गया। कपिल सिब्बल शरजील इमाम और उमर खालिद का case हार गया। करोड़ों रूपए लूट लिये। 😂 सबसे अधिक हमें कपिल सिब्बल ने लूटा है। 😭 कपिल सिब्बल राम मंदिर की लड़ाई हार गया। कपिल सिब्बल ट्रिपल तलाक की लड़ाई हार गया। कपिल सिब्बल Article 370 की लड़ाई हार गया। कपिल सिब्बल CAA/NRC की लड़ाई हार गया। कपिल सिब्बल शरजील इमाम और उमर खालिद का case हार गया। करोड़ों रूपए लूट लिये। 😂 कपिल सिब्बल ट्रिपल तलाक की लड़ाई हार गया। कपिल सिब्बल Article 370 की लड़ाई हार गया। कपिल सिब्बल CAA/NRC की लड़ाई हार गया। कपिल सिब्बल शरजील इमाम और उमर खालिद का case हार गया। करोड़ों रूपए लूट लिये। 😂1
- सीसीटीवी में कैद हुए पांच चोर, फिर भी कार्रवाई नहीं लगभग 6दिन बाद मुकदमा दर्ज,* *दो सप्ताह बाद गांव के उत्तर चरी के खेत में मिला संदूक; पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल* सुल्तानपुर। कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के *ग्राम पंचायत मलिकपुर (अहिरौली)* निवासी रामलाल यादव के घर हुई लाखों रुपये की चोरी के मामले में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पीड़ित का आरोप है कि घटना के लगभग चार दिन बाद पुलिस ने मुकदमा तो दर्ज कर लिया, लेकिन सीसीटीवी फुटेज में पांच संदिग्ध चोर स्पष्ट दिखाई देने के बावजूद अब तक न तो किसी की गिरफ्तारी की गई और न ही फुटेज के आधार पर प्रभावी कार्रवाई की गई। पीड़ित रामलाल यादव के अनुसार *18/19 जुलाई 2026 की रात करीब 12:53 बजे पांच अज्ञात चोर घर में घुसकर संदूक में रखे लगभग एक लाख रुपये के कीमती आभूषण, आधार कार्ड, वोटर कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक तथा करीब 25 हजार रुपये नकद चोरी कर ले गए थे*। पूरी घटना घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में *रिकॉर्ड* हो गई, जिसमें पांचों चोरों की गतिविधियां स्पष्ट दिखाई दे रही हैं। पीड़ित का कहना है कि घटना के करीब एक सप्ताह बाद चोरी किया गया संदूक उसके घर के उत्तर दिशा में स्थित चरी के खेत में पड़ा मिला। संदूक में रखे सभी कीमती सामान और नकदी गायब थे। इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी गई, लेकिन आरोप है कि पुलिस मौके पर पहुंचना भी उचित नहीं समझी। पीड़ित ने यहां तक कहा कि यदि पुलिस घटनास्थल पर नहीं आ सकती तो कम से कम वीडियो ही बनवा ले, लेकिन इस दिशा में भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। रामलाल यादव का आरोप है कि पुलिस अब तक न तो *सीसीटीवी फुटेज की गंभीरता से जांच कर रही है और न ही पीड़ित को कोई ठोस सहायता मिल रही है। उनका कहना है कि यदि पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर गंभीरता से जांच करे तो चोरी की घटना का खुलासा करना कठिन नहीं होगा, क्योंकि *फुटेज में पांचों संदिग्ध स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।* पीड़ित ने पुलिस प्रशासन से मामले की निष्पक्ष एवं त्वरित जांच कर दोषियों की गिरफ्तारी तथा चोरी गए सामान की बरामदगी की मांग की है। वहीं क्षेत्र में इस घटना को लेकर लोगों के बीच भी पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा बनी हुई है।1