गुड्डू राम मांझी का जीवन संघर्ष, त्याग और समाज सेवा की एक प्रेरणादायक मिसाल है, जिन्होंने अपना जीवन जनजातीय समाज, विशेषकर बिरहोर जनजाति के उत्थान और विकास के लिए समर्पित कर दिया है। बचपन से ही सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे मांझी ने अपनी अनेक व्यक्तिगत कठिनाइयों और अभावों को पीछे छोड़ समाज के हित में कार्य करना अपना लक्ष्य बनाया। उनका बचपन खलबोरा गांव में 10x10 फीट के घास-फूस के घर और सीमित संसाधनों के बीच बीता, जहाँ परिवार कनकी, कोदो, कुटकी जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थों और मजदूरी पर निर्भर था। घने जंगलों से घिरे इस गांव में जंगली हाथियों और अन्य जानवरों का खतरा बना रहता था। बिजली के अभाव में अलाव की रोशनी में पढ़ाई करते हुए, कई बार भोजन न मिलने के बावजूद, गुड्डू मांझी प्रतिदिन तीन किलोमीटर पैदल चलकर दर्रीडीह प्राथमिक शाला जाते थे और शिक्षा का मार्ग नहीं छोड़ा। उनके पिता ने उन्हें शैशवावस्था में ही माता के साथ छोड़ दिया था, जिसके बाद उनके नाना सुंदरसाय मांझी ने माता कोईता बाई का विवाह करू राम मांझी से कराया, जिन्होंने उनका पालन-पोषण किया। मिडिल स्कूल की शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने समाज सेवा को ही अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया। उनके गांव में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव था। बीमार व्यक्तियों को अस्पताल पहुंचाने के लिए आठ किलोमीटर तक कंधों पर ढोना पड़ता था, जिसने उन्हें समाज के लिए कुछ बड़ा करने की प्रेरणा दी। दशरथ मांझी और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तिलका मांझी के संघर्षमय जीवन से प्रेरित होकर, गुड्डू मांझी ने अपने गांव में सड़क निर्माण का संकल्प लिया और वर्ष 2005 से सक्रिय रूप से समाज सेवा शुरू की। उनके प्रयासों का परिणाम रहा कि वर्ष 2014 में उन्होंने तत्कालीन सांसद और वर्तमान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से धर्मजयगढ़ विश्राम गृह में मुलाकात कर खलबोरा क्षेत्र के लिए सड़क निर्माण की मांग रखी। उनके निवेदन पर सांसद ने जिला प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद गांव के लिए सड़क निर्माण की स्वीकृति मिली। सिर्फ सड़क ही नहीं, बल्कि गांव में बिजली सुविधा उपलब्ध कराने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने शासन-प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से लगातार संपर्क कर बिरहोर समुदाय की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया। वर्ष 2014 से 2026 के मध्य उन्होंने बिरहोर, कोरवा और अन्य विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास, सम्मान और अधिकारों के लिए उल्लेखनीय प्रयास जारी रखे। इसी क्रम में उन्होंने जशपुर राजपरिवार के सदस्य और जनप्रतिनिधि माननीय प्रबल प्रताप सिंह जूदेव जी से मुलाकात की, जहाँ उन्होंने स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव जी के जनजातीय समाज के प्रति समर्पण को याद किया और आगामी कार्ययोजना पर चर्चा कर मार्गदर्शन प्राप्त किया। इसके बाद, उन्होंने वरिष्ठ समाजसेवी एवं वर्तमान में राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त छत्तीसगढ़ अंत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष माननीय सुरेंद्र बेसरा जी से मुलाकात कर जनजातीय बहुल क्षेत्रों में विभिन्न विकास कार्यों की मांग रखी, जिस पर अध्यक्ष महोदय ने संज्ञान लेते हुए प्रस्तावों को मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत करने हेतु पत्राचार किया। हाल ही में, दिनांक 27 मार्च 2026 को गुड्डू राम मांझी के नेतृत्व में बिरहोर समाज के प्रमुख एवं प्रांताध्यक्ष केंदा राम बिरहोर और पद्मश्री सम्मानित खलबोरा निवासी जागेश्वर राम यादव ने छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी के गृह ग्राम बगिया स्थित कैंप कार्यालय में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में सहभागिता की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से सौजन्य भेंट कर वनांचल एवं आदिवासी बहुल ग्रामों में प्रधानमंत्री जनमन योजना के प्रभावी एवं पूर्ण क्रियान्वयन की मांग की। उन्होंने विशेष पिछड़ी जनजातियों के सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक विकास के लिए करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की स्वीकृति हेतु आवेदन भी प्रस्तुत किया, जिसका उद्देश्य समुदाय को मूलभूत सुविधाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सड़क, पेयजल एवं रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। आज गुड्डू राम मांझी एक निष्ठावान, जुझारू और दृढ़ संकल्पित सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में पहचाने जाते हैं। उनका मानना है कि जनजातीय समाज का समग्र विकास तभी संभव है जब शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, और इसी उद्देश्य के साथ वे लगातार समाजहित में सक्रिय रहकर जनजातीय समुदाय के अधिकारों एवं विकास के लिए प्रयासरत हैं। गुड्डू राम मांझी संघर्ष, संकल्प और समाज सेवा की एक सच्ची मिसाल हैं।
गुड्डू राम मांझी का जीवन संघर्ष, त्याग और समाज सेवा की एक प्रेरणादायक मिसाल है, जिन्होंने अपना जीवन जनजातीय समाज, विशेषकर बिरहोर जनजाति के उत्थान और विकास के लिए समर्पित कर दिया है। बचपन से ही सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे मांझी ने अपनी अनेक व्यक्तिगत कठिनाइयों और अभावों को पीछे छोड़ समाज के हित में कार्य करना अपना लक्ष्य बनाया। उनका बचपन खलबोरा गांव में 10x10 फीट के घास-फूस के घर और सीमित संसाधनों के बीच बीता, जहाँ परिवार कनकी, कोदो, कुटकी जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थों और मजदूरी पर निर्भर था। घने जंगलों से घिरे इस गांव में जंगली हाथियों और अन्य जानवरों का खतरा बना रहता था। बिजली के अभाव में अलाव की रोशनी में पढ़ाई करते हुए, कई बार भोजन न मिलने के बावजूद, गुड्डू मांझी प्रतिदिन तीन किलोमीटर पैदल चलकर दर्रीडीह प्राथमिक शाला जाते थे और शिक्षा का मार्ग नहीं छोड़ा। उनके पिता ने उन्हें शैशवावस्था में ही माता के साथ छोड़ दिया था, जिसके बाद उनके नाना सुंदरसाय मांझी ने माता कोईता बाई का विवाह करू राम मांझी से कराया, जिन्होंने
उनका पालन-पोषण किया। मिडिल स्कूल की शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने समाज सेवा को ही अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया। उनके गांव में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव था। बीमार व्यक्तियों को अस्पताल पहुंचाने के लिए आठ किलोमीटर तक कंधों पर ढोना पड़ता था, जिसने उन्हें समाज के लिए कुछ बड़ा करने की प्रेरणा दी। दशरथ मांझी और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तिलका मांझी के संघर्षमय जीवन से प्रेरित होकर, गुड्डू मांझी ने अपने गांव में सड़क निर्माण का संकल्प लिया और वर्ष 2005 से सक्रिय रूप से समाज सेवा शुरू की। उनके प्रयासों का परिणाम रहा कि वर्ष 2014 में उन्होंने तत्कालीन सांसद और वर्तमान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से धर्मजयगढ़ विश्राम गृह में मुलाकात कर खलबोरा क्षेत्र के लिए सड़क निर्माण की मांग रखी। उनके निवेदन पर सांसद ने जिला प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद गांव के लिए सड़क निर्माण की स्वीकृति मिली। सिर्फ सड़क ही नहीं, बल्कि गांव में बिजली सुविधा उपलब्ध कराने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने शासन-प्रशासन, जनप्रतिनिधियों
और अधिकारियों से लगातार संपर्क कर बिरहोर समुदाय की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया। वर्ष 2014 से 2026 के मध्य उन्होंने बिरहोर, कोरवा और अन्य विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास, सम्मान और अधिकारों के लिए उल्लेखनीय प्रयास जारी रखे। इसी क्रम में उन्होंने जशपुर राजपरिवार के सदस्य और जनप्रतिनिधि माननीय प्रबल प्रताप सिंह जूदेव जी से मुलाकात की, जहाँ उन्होंने स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव जी के जनजातीय समाज के प्रति समर्पण को याद किया और आगामी कार्ययोजना पर चर्चा कर मार्गदर्शन प्राप्त किया। इसके बाद, उन्होंने वरिष्ठ समाजसेवी एवं वर्तमान में राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त छत्तीसगढ़ अंत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष माननीय सुरेंद्र बेसरा जी से मुलाकात कर जनजातीय बहुल क्षेत्रों में विभिन्न विकास कार्यों की मांग रखी, जिस पर अध्यक्ष महोदय ने संज्ञान लेते हुए प्रस्तावों को मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत करने हेतु पत्राचार किया। हाल ही में, दिनांक 27 मार्च 2026 को गुड्डू राम मांझी के नेतृत्व में बिरहोर समाज के प्रमुख एवं प्रांताध्यक्ष केंदा राम बिरहोर और पद्मश्री सम्मानित खलबोरा निवासी जागेश्वर
राम यादव ने छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी के गृह ग्राम बगिया स्थित कैंप कार्यालय में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में सहभागिता की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से सौजन्य भेंट कर वनांचल एवं आदिवासी बहुल ग्रामों में प्रधानमंत्री जनमन योजना के प्रभावी एवं पूर्ण क्रियान्वयन की मांग की। उन्होंने विशेष पिछड़ी जनजातियों के सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक विकास के लिए करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की स्वीकृति हेतु आवेदन भी प्रस्तुत किया, जिसका उद्देश्य समुदाय को मूलभूत सुविधाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सड़क, पेयजल एवं रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। आज गुड्डू राम मांझी एक निष्ठावान, जुझारू और दृढ़ संकल्पित सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में पहचाने जाते हैं। उनका मानना है कि जनजातीय समाज का समग्र विकास तभी संभव है जब शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, और इसी उद्देश्य के साथ वे लगातार समाजहित में सक्रिय रहकर जनजातीय समुदाय के अधिकारों एवं विकास के लिए प्रयासरत हैं। गुड्डू राम मांझी संघर्ष, संकल्प और समाज सेवा की एक सच्ची मिसाल हैं।
- धर्मजयगढ़ वनमंडल के बोरो वन परिक्षेत्र में वन विभाग ने देर रात एक जेसीबी मशीन को जब्त किया है। यह कार्रवाई बोरो रेंज के जबगा बीट क्षेत्र में की गई, जहाँ संरक्षित वन (पीएफ) क्षेत्र में संदिग्ध परिस्थितियों में जेसीबी मशीन मिली। जब्त की गई मशीन को धर्मजयगढ़ काष्ठागार में सुरक्षित रखा गया है और मामले की गहनता से जांच की जा रही है। वन विभाग को बीती रात सूचना मिली थी कि पीएफ क्षेत्र में जेसीबी मशीन के माध्यम से अवैध निर्माण या खुदाई जैसी गतिविधियां चल रही हैं। इस सूचना पर वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुँचे और जबगा बीट के कक्ष क्रमांक 600 के पीएफ जंगल क्षेत्र में देर रात जेसीबी मशीन को पाया। विभागीय अधिकारियों ने मशीन जब्त कर ली है और अब यह पता लगाया जा रहा है कि यह जेसीबी जंगल क्षेत्र में किस उद्देश्य से लाई गई थी और क्या वहां कोई अवैध गतिविधि संचालित की जा रही थी। यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि धर्मजयगढ़ वन क्षेत्र में पिछले कुछ समय से जेसीबी मशीनों के जरिए जंगल भूमि को नुकसान पहुँचाने और अवैध निर्माण की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। फिलहाल, वन विभाग इस मामले की जांच में जुटा हुआ है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इसमें क्या तथ्य सामने आते हैं और विभाग संबंधित लोगों के खिलाफ क्या वैधानिक कार्रवाई करेगा। संरक्षित वन क्षेत्र के भीतर आधी रात को जेसीबी मशीन की मौजूदगी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनके जवाब जांच के निष्कर्षों के बाद ही सामने आ सकेंगे।4
- छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के करतला में एक घटना सामने आई है, जहाँ ग्रामीणों ने पौधारोपण के लिए की जा रही 14 एकड़ भूमि के सीमांकन का कड़ा विरोध किया। इस दौरान मौके पर काफी हंगामा हुआ, जिसके चलते प्रशासनिक अधिकारियों को सीमांकन की कार्रवाई रोकनी पड़ी।1
- Post by बजरंग पटवा1
- कोरबा नगर निगम द्वारा स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्वच्छता जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसी कड़ी में, आईटीआई चौक रामपुर, कोरबा में कलाकारों ने नुक्कड़ नाटक की एक मनमोहक प्रस्तुति दी। इस नुक्कड़ नाटक के माध्यम से कलाकारों ने आम जनता को स्वच्छता का महत्वपूर्ण संदेश दिया।1
- वेदांता हादसे को 45 दिन बीत जाने के बाद भी पीड़ितों को अभी तक पूरी राहत नहीं मिल पाई है। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा पीड़ितों के लिए की गई घोषणाएं केवल कागजों तक ही सीमित हैं। इस स्थिति में, हादसे का दर्द और इसका प्रभाव अभी भी बरकरार है।1
- कोरबा जिले के गोढ़ी में 'सुशासन तिहार' कार्यक्रम के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस आमने-सामने आ गए।1