एक “अस्सलामु अलैकुम” से इतनी परेशानी क्यों? IPS डॉ. बुशरा बानो ने अपनी UPSC यात्रा पर एक प्रेरणादायक वीडियो साझा किया। वीडियो की शुरुआत “अस्सलामु अलैकुम” से हुई और बातचीत में “इंशाअल्लाह” व “जज़ाकल्लाह” जैसे आम धार्मिक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद उनके खिलाफ एक संगठन की ओर से शिकायत की गई। इसी बीच उनका तबादला भी हो गया। सरकार इसे रूटीन ट्रांसफर बता रही है, लेकिन शिकायत और तबादले की टाइमिंग ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल सिर्फ यह नहीं कि तबादला क्यों हुआ। बड़ा सवाल यह है कि क्या कोई सरकारी अधिकारी अपनी निजी पहचान और सहज धार्मिक अभिव्यक्ति के साथ सार्वजनिक रूप से अपनी बात भी नहीं रख सकता? अगर “नमस्ते”, “जय हिंद” या अन्य अभिवादन हमारी विविधता का हिस्सा हैं, तो “अस्सलामु अलैकुम” को लेकर असहजता क्यों? भारत की खूबसूरती ही इसकी विविधता में है। यहां अलग-अलग धर्म, भाषाएं, संस्कृतियां और परंपराएं साथ-साथ चलती हैं। धर्म और पहचान के आधार पर शब्दों को तौला जाएगा, तो सवाल सिर्फ डॉ. बुशरा बानो का नहीं रहेगा—सवाल बराबरी, सहिष्णुता और भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब का होगा। आप इस पूरे मामले को कैसे देखते हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। एक “अस्सलामु अलैकुम” से इतनी परेशानी क्यों? IPS डॉ. बुशरा बानो ने अपनी UPSC यात्रा पर एक प्रेरणादायक वीडियो साझा किया। वीडियो की शुरुआत “अस्सलामु अलैकुम” से हुई और बातचीत में “इंशाअल्लाह” व “जज़ाकल्लाह” जैसे आम धार्मिक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद उनके खिलाफ एक संगठन की ओर से शिकायत की गई। इसी बीच उनका तबादला भी हो गया। सरकार इसे रूटीन ट्रांसफर बता रही है, लेकिन शिकायत और तबादले की टाइमिंग ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल सिर्फ यह नहीं कि तबादला क्यों हुआ। बड़ा सवाल यह है कि क्या कोई सरकारी अधिकारी अपनी निजी पहचान और सहज धार्मिक अभिव्यक्ति के साथ सार्वजनिक रूप से अपनी बात भी नहीं रख सकता? अगर “नमस्ते”, “जय हिंद” या अन्य अभिवादन हमारी विविधता का हिस्सा हैं, तो “अस्सलामु अलैकुम” को लेकर असहजता क्यों? भारत की खूबसूरती ही इसकी विविधता में है। यहां अलग-अलग धर्म, भाषाएं, संस्कृतियां और परंपराएं साथ-साथ चलती हैं। धर्म और पहचान के आधार पर शब्दों को तौला जाएगा, तो सवाल सिर्फ डॉ. बुशरा बानो का नहीं रहेगा—सवाल बराबरी, सहिष्णुता और भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब का होगा। आप इस पूरे मामले को कैसे देखते हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।
एक “अस्सलामु अलैकुम” से इतनी परेशानी क्यों? IPS डॉ. बुशरा बानो ने अपनी UPSC यात्रा पर एक प्रेरणादायक वीडियो साझा किया। वीडियो की शुरुआत “अस्सलामु अलैकुम” से हुई और बातचीत में “इंशाअल्लाह” व “जज़ाकल्लाह” जैसे आम धार्मिक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद उनके खिलाफ एक संगठन की ओर से शिकायत की गई। इसी बीच उनका तबादला भी हो गया। सरकार इसे रूटीन ट्रांसफर बता रही है, लेकिन शिकायत और तबादले की टाइमिंग ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल सिर्फ यह नहीं कि तबादला क्यों हुआ। बड़ा सवाल यह है कि क्या कोई सरकारी अधिकारी अपनी निजी पहचान और सहज धार्मिक अभिव्यक्ति के साथ सार्वजनिक रूप से अपनी बात भी नहीं रख सकता? अगर “नमस्ते”, “जय हिंद” या अन्य अभिवादन हमारी विविधता का हिस्सा हैं, तो “अस्सलामु अलैकुम” को लेकर असहजता क्यों? भारत की खूबसूरती ही इसकी विविधता में है। यहां अलग-अलग धर्म, भाषाएं, संस्कृतियां और परंपराएं साथ-साथ चलती हैं। धर्म और पहचान के आधार पर शब्दों को तौला जाएगा, तो सवाल सिर्फ डॉ. बुशरा बानो का नहीं रहेगा—सवाल बराबरी, सहिष्णुता और भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब का होगा। आप इस पूरे मामले को कैसे देखते हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। एक “अस्सलामु अलैकुम” से इतनी परेशानी क्यों? IPS डॉ. बुशरा बानो ने अपनी UPSC यात्रा पर एक प्रेरणादायक वीडियो साझा किया। वीडियो की शुरुआत “अस्सलामु अलैकुम” से हुई और बातचीत में “इंशाअल्लाह” व “जज़ाकल्लाह” जैसे आम धार्मिक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद उनके खिलाफ एक संगठन की ओर से शिकायत की गई। इसी बीच उनका तबादला भी हो गया। सरकार इसे रूटीन ट्रांसफर बता रही है, लेकिन शिकायत और तबादले की टाइमिंग ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल सिर्फ यह नहीं कि तबादला क्यों हुआ। बड़ा सवाल यह है कि क्या कोई सरकारी अधिकारी अपनी निजी पहचान और सहज धार्मिक अभिव्यक्ति के साथ सार्वजनिक रूप से अपनी बात भी नहीं रख सकता? अगर “नमस्ते”, “जय हिंद” या अन्य अभिवादन हमारी विविधता का हिस्सा हैं, तो “अस्सलामु अलैकुम” को लेकर असहजता क्यों? भारत की खूबसूरती ही इसकी विविधता में है। यहां अलग-अलग धर्म, भाषाएं, संस्कृतियां और परंपराएं साथ-साथ चलती हैं। धर्म और पहचान के आधार पर शब्दों को तौला जाएगा, तो सवाल सिर्फ डॉ. बुशरा बानो का नहीं रहेगा—सवाल बराबरी, सहिष्णुता और भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब का होगा। आप इस पूरे मामले को कैसे देखते हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।
- किशनगंज:-जिलाधिकारी नवीन कुमार द्वारा दिघलबैंक प्रखंड अंतर्गत विभिन्न योजनाओं का औचक निरीक्षण।1
- टेढ़ागाछ में रोजगार का संकट! रोजगार नहीं मिलने से पलायन को मजबूर लोग, बीवी-बच्चों को छोड़कर रोजी-रोटी की तलाश में जा रहे हैं बाहर। आपके इलाके में भी है ऐसी समस्या? अपनी राय जरूर बताएं। टेढ़ागाछ में रोजगार का संकट! रोजगार नहीं मिलने से पलायन को मजबूर लोग, बीवी-बच्चों को छोड़कर रोजी-रोटी की तलाश में जा रहे हैं बाहर। आपके इलाके में भी है ऐसी समस्या? अपनी राय जरूर बताएं।1
- इंज्यूरी रिपोर्ट पर सवाल, मेडिकल बोर्ड से दोबारा जांच की मांग जोकीहाट/अररिया जोकीहाट रेफरल अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. आदित्य कुमार पर घायल व्यक्ति की कथित रूप से गलत इंज्यूरी रिपोर्ट तैयार करने का आरोप लगाया गया है। दभड़ा पंचायत निवासी मंदन मंडल ने इस संबंध में अररिया एसपी और सिविल सर्जन को आवेदन देकर मामले की जांच कराने तथा मेडिकल बोर्ड गठित कर दोबारा जख्मों की जांच कराने की मांग की है।आवेदन में मंदन मंडल ने आरोप लगाया है कि उस पर धारदार दबिया से हमला किया गया था। हमले में शरीर के करीब छह स्थानों पर कटने के जख्म आए थे और वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। उनका आरोप है कि इलाज के दौरान चोटों की गंभीरता के अनुरूप इंज्यूरी रिपोर्ट तैयार नहीं की गई और चोटों को साधारण (सिंपल) इंज्यूरी के रूप में दर्ज कर दिया गया।मंदन मंडल का कहना है कि आपराधिक मामलों में इंज्यूरी रिपोर्ट महत्वपूर्ण साक्ष्य होती है। इसलिए चोटों की वास्तविक स्थिति का सही तरीके से मेडिकल रिकॉर्ड में दर्ज होना जरूरी है। उन्होंने सिविल सर्जन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और मेडिकल बोर्ड गठित कर जख्मों की दोबारा जांच कराने की मांग की है।इधर, जोकीहाट रेफरल अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. आदित्य कुमार ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि घायल की मेडिकल जांच नियमानुसार की गई थी और जांच के आधार पर ही इंज्यूरी रिपोर्ट तैयार की गई है। उन्होंने रिपोर्ट तैयार करने में किसी तरह की लापरवाही या अनियमितता के आरोप से इनकार किया।अब पीड़ित के आवेदन पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच कराई जाती है या मेडिकल बोर्ड गठित कर दोबारा मेडिकल जांच की जाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। दोबारा मेडिकल जांच होने पर चोटों की प्रकृति और पूर्व में तैयार इंज्यूरी रिपोर्ट को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।1
- अररिया मुफस्सिल पत्रकार मंच की बैठक में संगठन का किया गया विस्तार! | जानिए क्या है इस मंच का उद्देश्य1
- जरूरतमंद महिलाओं को मिली सिलाई मशीन, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा कदम जरूरतमंद महिलाओं को मिली सिलाई मशीन, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा कदम1
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- टेढ़ागाछ प्रखंड मुख्यालय में आधार केंद्र बंद, ग्रामीण परेशान! आखिर कब खुलेगा आधार केंद्र? आपकी क्या राय है? कमेंट में जरूर बताएं। टेढ़ागाछ प्रखंड मुख्यालय में आधार केंद्र बंद, ग्रामीण परेशान! आखिर कब खुलेगा आधार केंद्र? आपकी क्या राय है? कमेंट में जरूर बताएं।1