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क्या भारतीय जनता पार्टी चुनाव आयोग के साथ मिलकर ईवीएम मशीन में गड़बड़ी कर के लोकसभा चुनाव जीत रही है? . बीजेपी के पास ईवीएम को कंट्रोल करने का मेकेनिज्म नहीं है। ईवीएम को वही कंट्रोल कर सकता है, जिसके पास मीडिया पर कंट्रोल हो। बीजेपी का भारत के मीडिया पर नियन्त्रण नहीं है, अत: ईवीएम पर भी नियंत्रण नहीं है। . कोंग्रेस एवं आम आदमी पार्टी का भी मीडिया पर कोई नियंत्रण नहीं है। अत: ये पार्टियाँ भी ईवीएम में गड़बड़ी नहीं कर सकती। . भारत का मीडिया पूरी तरह से बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिको एवं मिशनरीज के नियंत्रण में है। अत: सिर्फ अमेरिकी धनिक ही ईवीएम को मेनिपुलेट कर सकते है। . 2009 में बीजेपी ने ईवीएम विरोधी अभियान चलाया था। किन्तु अमेरिकी धनिक भारत में ईवीएम चाहते थे अत: बीजेपी के नेता धीरे धीरे सरेंडर करते गए और ईवीएम जारी रही। यदि बीजेपी पीछे नहीं हटती तो अमेरिकी धनिक बीजेपी को अब तक तीसरे नंबर की पार्टी बना चुके होते। . 2014 के बाद से कोंग्रेस ईवीएम के विरोध में है। किन्तु ईवीएम भारत में जारी है। . सपा , बसपा समेत आम आदमी पार्टी भी मौके मौके पर ईवीएम विरोधी अभियान चला चुकी है। . दुसरे शब्दों में, जो भी पार्टी सत्ता से बाहर रहेगी वह ईवीएम का विरोध करेगी। क्योंकि तब उन पर ईवीएम केंसिल करने का क़ानून छापने की जिम्मेदारी नहीं होती है। किन्तु सत्ता में आने के साथ ही पार्टी ईवीएम के समर्थन में आ जाती है। क्योंकि सरकार चलाने के लिए अमेरिकी धनिकों के सहयोग की जरूरत होती है। और अमेरिकी धनिक चाहते है कि भारत में ईवीएम जारी रहे। . मेरे मानने में , भारत का चुनाव आयोग एवं भारत की सुप्रीम कोर्ट सीधे अमेरिकी धनिकों के संपर्क में रहता है। व्यवहारिक रूप से हमारे नेताओं का इन दो संस्थाओ पर लगभग शून्य नियंत्रण है। अत: सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग एवं मीडिया के माध्यम से अमेरिकी धनिक भारत के नेताओं को कंट्रोल करते है। यह कंट्रोल प्रत्यक्ष न होकर अप्रत्यक्ष होता है। . ————— . (1) क्या ईवीएम में वोटो की हेराफेरी की जा सकती है ? . 2009 तक भारत में ईवीएम के जिस मॉडल का इस्तेमाल किया जा रहा था, उसमे हेराफेरी की जा सकती थी। इस बात के काफी संकेत है कि 2009 का चुनाव बीजेपी ईवीएम की वजह से ही हारी थी। 2009 से 2011 तक ईवीएम भारत का सबसे हॉट मुद्दा बना रहा। जब यह बात कॉमन नोलेज में आने लगी कि केंचुआ हेराफेरी कर रहा है, तो केंचुआ लीपा पोती के लिए 2012 में वीवीपेट लेकर आया। . वीवीपेट आने के बाद ईवीएम की धोखाधड़ी का मुद्दा ठंडा हो गया। क्योंकि अब मतदाता पर्ची छपते हुए और कटते हुए देख सकता था। निचे पुरानी वीवीपेट का चित्र दिया गया है . बाद में केंचुआ ने धीरे धीरे वीवीपेट में ऐसे बदलाव लाने शुरू किये जिससे वह वोटो की धोखाधड़ी कर सके। इसी क्रम में उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनावों के एन पहले उत्तर भारत की लाखो वीवीपेट के पारदर्शी कांच को one way mirror ग्लास से बदल दिया। दिया गया चित्र लेटेस्ट वीवीपेट का है . अँधा कांच लगाने के बाद अब मतदाता सिर्फ पर्ची देखता है, पर्ची को छपते हुए एवं कटते हुए नहीं देखता है। मतलब जब आप फूल दबाते हो तो वीविपेट में फूल की पर्ची को छपते हुए और कटते हुए नहीं देखते। वीवीपेट पहले से छपी हुयी पर्ची को ही बार बार लाईट जला कर दिखाता रहता है। और बाद में एक साथ इच्छित उम्मीदार की कई पर्चियां काटकर डिब्बे में गिरा देता है। किन्तु मतदाता को यह लगता है कि उसने फूल को वोट दिया और फूल की पर्ची देख ली। . केंचुआ के दफ्तर में बैठे हुए 5-7 प्रोग्रामर किस तरह देश भर में करोड़ो वोटो की यह हेराफेरी कर सकते है, इसका विस्तृत विवरण मैंने इस जवाब में दिया है – Pawan Jury का जवाब - ईवीएम मशीन के साथ वीवीपैट क्यों लगाई जाती है? . ——————- . (2) EVM पर मेरा स्टेंड : पारदर्शी कांच को अंधे कांच से बदले जाने के बाद वीवीपेट सुरक्षित नहीं है, और इसमें बड़े पैमाने पर हेराफेरी की जा सकती है। evm में हेराफेरी सिर्फ वही कर सकता है, जो इसका प्रोग्राम X लिखता है। प्रोग्राम X वोटिंग के 15 दिन पहले जिला कलेक्टर्स को भेजा जाता है, और इसमें अमुक लोकसभा के उम्मीदवारों के नाम, पार्टी के नाम एवं चुनाव चिन्ह होते है । यह प्रोग्राम केंचुआ के दिल्ली के दफ्तर में बैठे हुए 4-5 इंजीनियर लिखते है। अत: evm में हेराफेरी सिर्फ केंचुआ ही कर सकता है। और मेरा मानना है कि केंचुआ भारत की दुसरे नंबर की सबसे भ्रष्ट संस्था है। ( पहला नम्बर सुप्रीम कोर्ट का है। ) . (3) समाधान ? . मेरी प्राथमिक मांग है कि वीवीपेट का ग्लास फिर से पारदर्शी कर दिया जाना चाहिए ताकि मतदाता ने जिस उम्मीदवार को वोट दिया है, उसके चिन्ह की पर्ची को वह "छपते हुए और कटते हुए" देख सके। वीवीपेट के ग्लास को फिर से पारदर्शी करके इस हेराफेरी को रोका जा सकता है। . यदि आप भी चाहते है कि evm के अंधे कांच को फिर से पारदर्शी किया जाए तो पीएम को पोस्टकार्ड लिख कर ऐसा करने के लिए बोल सकते है। आप चाहे तो पीएम को ट्विट भी कर सकते है। पोस्टकार्ड / ट्विट में यह लिखे - माननीय प्रधानमंत्री जी, कृपया वीवीपेट के अंधे कांच को पारदर्शी करें - #ChangeEvmGlass . evm का मुद्दा काफी डायनामिक है, और केंचुआ इसमें लगातार छोटे छोटे परिवर्तन करते रहता है। वीवीपेट के कांच को फिर से पारदर्शी करवाना मेरा प्राथमिक लक्ष्य है। यह जूरी कोर्ट एवं वोट वापसी कानूनों से भी ज्यादा महत्त्वपूर्ण है। मतलब यदि पीएम मुझसे कोई एक क़ानून लागू करने के लिए पूछे तो मैं उनसे अनुरोध करूँगा कि वे evm को रद्द करने का क़ानून तुरंत गेजेट में छापें। ) . —————— . अंधे कांच द्वारा कैसे वोटो में हेराफेरी की जा सकती है इसका एक प्रोसेस डेमो आप यहाँ देख सकते है - लिंक कमेंट में

8 hrs ago
user_Sonu Kumar
Sonu Kumar
गायघाट, मुजफ्फरपुर, बिहार•
8 hrs ago
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क्या भारतीय जनता पार्टी चुनाव आयोग के साथ मिलकर ईवीएम मशीन में गड़बड़ी कर के लोकसभा चुनाव जीत रही है? . बीजेपी के पास ईवीएम को कंट्रोल करने का मेकेनिज्म नहीं है। ईवीएम को वही कंट्रोल कर सकता है, जिसके पास मीडिया पर कंट्रोल हो। बीजेपी का भारत के मीडिया पर नियन्त्रण नहीं है, अत: ईवीएम पर भी नियंत्रण नहीं है। . कोंग्रेस एवं आम आदमी पार्टी का भी मीडिया पर कोई नियंत्रण नहीं है। अत: ये पार्टियाँ भी ईवीएम में गड़बड़ी नहीं कर सकती। . भारत का मीडिया पूरी तरह से बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिको एवं मिशनरीज के नियंत्रण में है। अत: सिर्फ अमेरिकी धनिक ही ईवीएम को मेनिपुलेट कर सकते है। . 2009 में बीजेपी ने ईवीएम विरोधी अभियान चलाया था। किन्तु अमेरिकी धनिक भारत में ईवीएम चाहते थे अत: बीजेपी के नेता धीरे धीरे सरेंडर करते गए और ईवीएम जारी रही। यदि बीजेपी पीछे नहीं हटती तो अमेरिकी धनिक बीजेपी को अब तक तीसरे नंबर की पार्टी बना चुके होते। . 2014 के बाद से कोंग्रेस ईवीएम के विरोध में है। किन्तु ईवीएम भारत में जारी है। . सपा , बसपा समेत आम आदमी पार्टी भी मौके मौके पर ईवीएम विरोधी अभियान चला चुकी है। . दुसरे शब्दों में, जो भी पार्टी सत्ता से बाहर रहेगी वह ईवीएम का विरोध करेगी। क्योंकि तब उन पर ईवीएम केंसिल करने का क़ानून छापने की जिम्मेदारी नहीं होती है। किन्तु सत्ता में आने के साथ ही पार्टी ईवीएम के समर्थन में आ जाती है। क्योंकि सरकार चलाने के लिए अमेरिकी धनिकों के सहयोग की जरूरत होती है। और अमेरिकी धनिक चाहते है कि भारत में ईवीएम जारी रहे। . मेरे मानने में , भारत का चुनाव आयोग एवं भारत की सुप्रीम कोर्ट सीधे अमेरिकी धनिकों के संपर्क में रहता है। व्यवहारिक रूप से हमारे नेताओं का इन दो संस्थाओ पर लगभग शून्य नियंत्रण है। अत: सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग एवं मीडिया के माध्यम से अमेरिकी धनिक भारत के नेताओं को कंट्रोल करते है। यह कंट्रोल प्रत्यक्ष न होकर अप्रत्यक्ष होता है। . ————— . (1) क्या ईवीएम में वोटो की हेराफेरी की जा सकती है ? . 2009 तक भारत में ईवीएम के जिस मॉडल का इस्तेमाल किया जा रहा था, उसमे हेराफेरी की जा सकती थी। इस बात के काफी संकेत है कि 2009 का चुनाव बीजेपी ईवीएम की वजह से ही हारी थी। 2009 से 2011 तक ईवीएम भारत का सबसे हॉट मुद्दा बना रहा। जब यह बात कॉमन नोलेज में आने लगी कि केंचुआ हेराफेरी कर रहा है, तो केंचुआ लीपा पोती के लिए 2012 में वीवीपेट लेकर आया। . वीवीपेट आने के बाद ईवीएम की धोखाधड़ी का मुद्दा ठंडा हो गया। क्योंकि अब मतदाता पर्ची छपते हुए और कटते हुए देख सकता था। निचे पुरानी वीवीपेट का चित्र दिया गया है . बाद में केंचुआ ने धीरे धीरे वीवीपेट में ऐसे बदलाव लाने शुरू किये जिससे वह वोटो की धोखाधड़ी कर सके। इसी क्रम में उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनावों के एन पहले उत्तर भारत की लाखो वीवीपेट के पारदर्शी

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कांच को one way mirror ग्लास से बदल दिया। दिया गया चित्र लेटेस्ट वीवीपेट का है . अँधा कांच लगाने के बाद अब मतदाता सिर्फ पर्ची देखता है, पर्ची को छपते हुए एवं कटते हुए नहीं देखता है। मतलब जब आप फूल दबाते हो तो वीविपेट में फूल की पर्ची को छपते हुए और कटते हुए नहीं देखते। वीवीपेट पहले से छपी हुयी पर्ची को ही बार बार लाईट जला कर दिखाता रहता है। और बाद में एक साथ इच्छित उम्मीदार की कई पर्चियां काटकर डिब्बे में गिरा देता है। किन्तु मतदाता को यह लगता है कि उसने फूल को वोट दिया और फूल की पर्ची देख ली। . केंचुआ के दफ्तर में बैठे हुए 5-7 प्रोग्रामर किस तरह देश भर में करोड़ो वोटो की यह हेराफेरी कर सकते है, इसका विस्तृत विवरण मैंने इस जवाब में दिया है – Pawan Jury का जवाब - ईवीएम मशीन के साथ वीवीपैट क्यों लगाई जाती है? . ——————- . (2) EVM पर मेरा स्टेंड : पारदर्शी कांच को अंधे कांच से बदले जाने के बाद वीवीपेट सुरक्षित नहीं है, और इसमें बड़े पैमाने पर हेराफेरी की जा सकती है। evm में हेराफेरी सिर्फ वही कर सकता है, जो इसका प्रोग्राम X लिखता है। प्रोग्राम X वोटिंग के 15 दिन पहले जिला कलेक्टर्स को भेजा जाता है, और इसमें अमुक लोकसभा के उम्मीदवारों के नाम, पार्टी के नाम एवं चुनाव चिन्ह होते है । यह प्रोग्राम केंचुआ के दिल्ली के दफ्तर में बैठे हुए 4-5 इंजीनियर लिखते है। अत: evm में हेराफेरी सिर्फ केंचुआ ही कर सकता है। और मेरा मानना है कि केंचुआ भारत की दुसरे नंबर की सबसे भ्रष्ट संस्था है। ( पहला नम्बर सुप्रीम कोर्ट का है। ) . (3) समाधान ? . मेरी प्राथमिक मांग है कि वीवीपेट का ग्लास फिर से पारदर्शी कर दिया जाना चाहिए ताकि मतदाता ने जिस उम्मीदवार को वोट दिया है, उसके चिन्ह की पर्ची को वह "छपते हुए और कटते हुए" देख सके। वीवीपेट के ग्लास को फिर से पारदर्शी करके इस हेराफेरी को रोका जा सकता है। . यदि आप भी चाहते है कि evm के अंधे कांच को फिर से पारदर्शी किया जाए तो पीएम को पोस्टकार्ड लिख कर ऐसा करने के लिए बोल सकते है। आप चाहे तो पीएम को ट्विट भी कर सकते है। पोस्टकार्ड / ट्विट में यह लिखे - माननीय प्रधानमंत्री जी, कृपया वीवीपेट के अंधे कांच को पारदर्शी करें - #ChangeEvmGlass . evm का मुद्दा काफी डायनामिक है, और केंचुआ इसमें लगातार छोटे छोटे परिवर्तन करते रहता है। वीवीपेट के कांच को फिर से पारदर्शी करवाना मेरा प्राथमिक लक्ष्य है। यह जूरी कोर्ट एवं वोट वापसी कानूनों से भी ज्यादा महत्त्वपूर्ण है। मतलब यदि पीएम मुझसे कोई एक क़ानून लागू करने के लिए पूछे तो मैं उनसे अनुरोध करूँगा कि वे evm को रद्द करने का क़ानून तुरंत गेजेट में छापें। ) . —————— . अंधे कांच द्वारा कैसे वोटो में हेराफेरी की जा सकती है इसका एक प्रोसेस डेमो आप यहाँ देख सकते है - लिंक कमेंट में

  • user_Sonu Kumar
    Sonu Kumar
    गायघाट, मुजफ्फरपुर, बिहार
    क्या भारतीय जनता पार्टी चुनाव आयोग के साथ मिलकर ईवीएम मशीन में गड़बड़ी कर के लोकसभा चुनाव जीत रही है? . बीजेपी के पास ईवीएम को कंट्रोल करने का मेकेनिज्म नहीं है। ईवीएम को वही कंट्रोल कर सकता है, जिसके पास मीडिया पर कंट्रोल हो। बीजेपी का भारत के मीडिया पर नियन्त्रण नहीं है, अत: ईवीएम पर भी नियंत्रण नहीं है। . कोंग्रेस एवं आम आदमी पार्टी का भी मीडिया पर कोई नियंत्रण नहीं है। अत: ये पार्टियाँ भी ईवीएम में गड़बड़ी नहीं कर सकती। . भारत का मीडिया पूरी तरह से बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिको एवं मिशनरीज के नियंत्रण में है। अत: सिर्फ अमेरिकी धनिक ही ईवीएम को मेनिपुलेट कर सकते है। . 2009 में बीजेपी ने ईवीएम विरोधी अभियान चलाया था। किन्तु अमेरिकी धनिक भारत में ईवीएम चाहते थे अत: बीजेपी के नेता धीरे धीरे सरेंडर करते गए और ईवीएम जारी रही। यदि बीजेपी पीछे नहीं हटती तो अमेरिकी धनिक बीजेपी को अब तक तीसरे नंबर की पार्टी बना चुके होते। . 2014 के बाद से कोंग्रेस ईवीएम के विरोध में है। किन्तु ईवीएम भारत में जारी है। . सपा , बसपा समेत आम आदमी पार्टी भी मौके मौके पर ईवीएम विरोधी अभियान चला चुकी है। . दुसरे शब्दों में, जो भी पार्टी सत्ता से बाहर रहेगी वह ईवीएम का विरोध करेगी। क्योंकि तब उन पर ईवीएम केंसिल करने का क़ानून छापने की जिम्मेदारी नहीं होती है। किन्तु सत्ता में आने के साथ ही पार्टी ईवीएम के समर्थन में आ जाती है। क्योंकि सरकार चलाने के लिए अमेरिकी धनिकों के सहयोग की जरूरत होती है। और अमेरिकी धनिक चाहते है कि भारत में ईवीएम जारी रहे। . मेरे मानने में , भारत का चुनाव आयोग एवं भारत की सुप्रीम कोर्ट सीधे अमेरिकी धनिकों के संपर्क में रहता है। व्यवहारिक रूप से हमारे नेताओं का इन दो संस्थाओ पर लगभग शून्य नियंत्रण है। अत: सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग एवं मीडिया के माध्यम से अमेरिकी धनिक भारत के नेताओं को कंट्रोल करते है। यह कंट्रोल प्रत्यक्ष न होकर अप्रत्यक्ष होता है। . ————— . (1) क्या ईवीएम में वोटो की हेराफेरी की जा सकती है ? . 2009 तक भारत में ईवीएम के जिस मॉडल का इस्तेमाल किया जा रहा था, उसमे हेराफेरी की जा सकती थी। इस बात के काफी संकेत है कि 2009 का चुनाव बीजेपी ईवीएम की वजह से ही हारी थी। 2009 से 2011 तक ईवीएम भारत का सबसे हॉट मुद्दा बना रहा। जब यह बात कॉमन नोलेज में आने लगी कि केंचुआ हेराफेरी कर रहा है, तो केंचुआ लीपा पोती के लिए 2012 में वीवीपेट लेकर आया। . वीवीपेट आने के बाद ईवीएम की धोखाधड़ी का मुद्दा ठंडा हो गया। क्योंकि अब मतदाता पर्ची छपते हुए और कटते हुए देख सकता था। निचे पुरानी वीवीपेट का चित्र दिया गया है . बाद में केंचुआ ने धीरे धीरे वीवीपेट में ऐसे बदलाव लाने शुरू किये जिससे वह वोटो की धोखाधड़ी कर सके। इसी क्रम में उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनावों के एन पहले उत्तर भारत की लाखो वीवीपेट के पारदर्शी कांच को one way mirror ग्लास से बदल दिया। दिया गया चित्र लेटेस्ट वीवीपेट का है . अँधा कांच लगाने के बाद अब मतदाता सिर्फ पर्ची देखता है, पर्ची को छपते हुए एवं कटते हुए नहीं देखता है। मतलब जब आप फूल दबाते हो तो वीविपेट में फूल की पर्ची को छपते हुए और कटते हुए नहीं देखते। वीवीपेट पहले से छपी हुयी पर्ची को ही बार बार लाईट जला कर दिखाता रहता है। और बाद में एक साथ इच्छित उम्मीदार की कई पर्चियां काटकर डिब्बे में गिरा देता है। किन्तु मतदाता को यह लगता है कि उसने फूल को वोट दिया और फूल की पर्ची देख ली। . केंचुआ के दफ्तर में बैठे हुए 5-7 प्रोग्रामर किस तरह देश भर में करोड़ो वोटो की यह हेराफेरी कर सकते है, इसका विस्तृत विवरण मैंने इस जवाब में दिया है – Pawan Jury का जवाब - ईवीएम मशीन के साथ वीवीपैट क्यों लगाई जाती है? . ——————- . (2) EVM पर मेरा स्टेंड : पारदर्शी कांच को अंधे कांच से बदले जाने के बाद वीवीपेट सुरक्षित नहीं है, और इसमें बड़े पैमाने पर हेराफेरी की जा सकती है। evm में हेराफेरी सिर्फ वही कर सकता है, जो इसका प्रोग्राम X लिखता है। प्रोग्राम X वोटिंग के 15 दिन पहले जिला कलेक्टर्स को भेजा जाता है, और इसमें अमुक लोकसभा के उम्मीदवारों के नाम, पार्टी के नाम एवं चुनाव चिन्ह होते है । यह प्रोग्राम केंचुआ के दिल्ली के दफ्तर में बैठे हुए 4-5 इंजीनियर लिखते है। अत: evm में हेराफेरी सिर्फ केंचुआ ही कर सकता है। और मेरा मानना है कि केंचुआ भारत की दुसरे नंबर की सबसे भ्रष्ट संस्था है। ( पहला नम्बर सुप्रीम कोर्ट का है। ) . (3) समाधान ? . मेरी प्राथमिक मांग है कि वीवीपेट का ग्लास फिर से पारदर्शी कर दिया जाना चाहिए ताकि मतदाता ने जिस उम्मीदवार को वोट दिया है, उसके चिन्ह की पर्ची को वह "छपते हुए और कटते हुए" देख सके। वीवीपेट के ग्लास को फिर से पारदर्शी करके इस हेराफेरी को रोका जा सकता है। . यदि आप भी चाहते है कि evm के अंधे कांच को फिर से पारदर्शी किया जाए तो पीएम को पोस्टकार्ड लिख कर ऐसा करने के लिए बोल सकते है। आप चाहे तो पीएम को ट्विट भी कर सकते है। पोस्टकार्ड / ट्विट में यह लिखे - माननीय प्रधानमंत्री जी, कृपया वीवीपेट के अंधे कांच को पारदर्शी करें - #ChangeEvmGlass . evm का मुद्दा काफी डायनामिक है, और केंचुआ इसमें लगातार छोटे छोटे परिवर्तन करते रहता है। वीवीपेट के कांच को फिर से पारदर्शी करवाना मेरा प्राथमिक लक्ष्य है। यह जूरी कोर्ट एवं वोट वापसी कानूनों से भी ज्यादा महत्त्वपूर्ण है। मतलब यदि पीएम मुझसे कोई एक क़ानून लागू करने के लिए पूछे तो मैं उनसे अनुरोध करूँगा कि वे evm को रद्द करने का क़ानून तुरंत गेजेट में छापें। ) . —————— . अंधे कांच द्वारा कैसे वोटो में हेराफेरी की जा सकती है इसका एक प्रोसेस डेमो आप यहाँ देख सकते है - https://www.youtube.com/watch?time_continue=5&v=pAVsE7RKStY&feature=emb_title .
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    DARBHANGA ओमेगा स्टडी सेंटर ने कर दिया कमाल अपने ही रिकॉर्ड को तोड़कर JEE Main 2026 (Phase-2) 7 बच्चों ने 99% से ज्यादा पर्सेंटाइल  
ओमेगा स्टडी सेंटर ने रचा नया इतिहास, 
दरभंगा: JEE Main 2026 (Phase-2) के परिणाम सोमवार देर शाम घोषित किए गए, जिसमें मिथिलांचल के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान ओमेगा स्टडी सेंटर के विद्यार्थियों ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए सफलता का नया कीर्तिमान स्थापित किया। इस वर्ष संस्थान के 7 विद्यार्थियों ने 99 से अधिक पर्सेंटाइल प्राप्त कर न केवल संस्थान बल्कि पूरे मिथिलांचल को गौरवान्वित किया है।
उत्तर बिहार में यह सबसे बड़ा और ऐतिहासिक रिजल्ट माना जा रहा है। संस्थान के चेयरमैन सुमन कुमार ठाकुर ने बताया कि इस वर्ष 2026 के जी Main के रिजल्ट में अनिक राज (99.59), आदित्य सिन्हा (99.57), प्रियांशु राज (99.49), अभिनव अजय (99.44),  आकर्ष राज (99.25), श्रुति कुमारी (99.09), नंदनी गुप्ता (99.05) के साथ 99 से अधिक पर्सेंटाइल हासिल कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इसके अतिरिक्त अर्पित, तेजस, विवेक, अभिनव भारतद्वाज, चेतन, अभिनव चौधरी, ऋषिकेश, प्रियांशु सहित 70 से अधिक विद्यार्थियों ने 96+ पर्सेंटाइल प्राप्त किए, जो संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता को दर्शाता है।
उन्होंने आगे बताया कि 160 से अधिक विद्यार्थी JEE Advanced के लिए क्वालिफाई हुए हैं। यह उपलब्धि सिद्ध करती है कि अनुशासन, निरंतर अभ्यास और सही मार्गदर्शन से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
संस्थान के मैनेजिंग डायरेक्टर सुमित कुमार चौबे ने कहा कि परिणामों के अनुपात के आधार पर ओमेगा स्टडी सेंटर पिछले 12 वर्षों से राज्य स्तर पर उत्कृष्ट परिणाम देता आ रहा है, जो पूरे मिथिलांचल के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने यह भी बताया कि सफल विद्यार्थी अब अनुभवी शिक्षकों के मार्गदर्शन में JEE Advanced की तैयारी में पूरी लगन से जुटे हुए हैं।
इस शानदार उपलब्धि का श्रेय विद्यार्थियों की मेहनत, शिक्षकों के सटीक मार्गदर्शन और प्रबंधन टीम के समर्पण को देते हुए संस्थान ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। वरिष्ठ शिक्षकगण आशीष ओझा, अनुज मिश्रा, रुपेश कुमार, रौशन कुमार, निशिकांत सिन्हा, पंकज कुमार, रोहित कुमार, धनंजय सिंह तथा प्रबंधन टीम के प्रवीण कुमार, चंद्रमणि प्रकाश, रोशन कुमार, अनुराग आदि की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
उल्लेखनीय है कि ओमेगा स्टडी सेंटर पिछले कुछ वर्षों में इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के क्षेत्र में बिहार का एक विश्वसनीय और अग्रणी संस्थान बनकर उभरा है। संस्थान के सैकड़ों विद्यार्थी देश के विभिन्न IITs, सरकारी मेडिकल कॉलेजों एवं प्रतिष्ठित संस्थानों में चयनित होकर अपनी प्रतिभा का परचम लहरा चुके हैं। मिथिलांचल के किसी संस्थान का उत्तर बिहार का सबसे बड़ा रिजल्ट हासिल करना पुरे मिथिलांचल के लिए गर्व की बात है। संस्थान आगे भी और बेहतर रिजल्ट के लिए कृतसंकल्पित है आगे बताया गया की संस्थान 11 का नया बैच 27 अप्रैल को प्रारम्भ कर रही है।
    user_AWAAZ hindustan LIVE AZAAD PATRKAAR
    AWAAZ hindustan LIVE AZAAD PATRKAAR
    Darbhanga, Bihar•
    19 hrs ago
  • बिहार :- यहाँ रोजगार के नाम पर चुनाव मे 10हजार दिया जाता है बाद मे लोग रोने को मजबूर सरकार मस्त जनता त्रस्त
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    बिहार :- यहाँ रोजगार के नाम पर चुनाव मे 10हजार दिया जाता है बाद मे लोग रोने को मजबूर सरकार मस्त जनता त्रस्त
    user_PTB gramin
    PTB gramin
    News Anchor Darbhanga, Bihar•
    23 hrs ago
  • Post by Arvind Kumar News 7 Samastipur
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    Post by Arvind Kumar News 7 Samastipur
    user_Arvind Kumar News 7 Samastipur
    Arvind Kumar News 7 Samastipur
    Samastipur, Bihar•
    22 min ago
  • sad mood 😢hdjhehnb
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    sad mood 😢hdjhehnb
    user_Ahiran bittu boss
    Ahiran bittu boss
    Chehra Kalan, Vaishali•
    6 hrs ago
  • दरभंगा स्थित कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय मे इन दiनों काफी रहना रहने का माहौल है बताया जा रहा है की कई शिक्षक शिक्षिकाओं एवं कर्मचारी का वेतन भी रोका गया है जिससे उनको परिवार चलाना मुश्किल हो गया है वीते दिनों बैठक में डॉ संतोष पासवान को साहित्य के विभागाध्यक्ष बनाने को लेकर मुहर लगाया गया इसके बाबजूद टालमटोल में कुलपति लक्मीनिवास पांडे लगे है कुलपति द्वारा मिथिलांचल के लोगों से भेदभाव कहीं ना कहीं एक बड़ा सवाल खड़ा करता है
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    दरभंगा स्थित कामेश्वर सिंह  संस्कृत विश्वविद्यालय मे इन दiनों काफी रहना रहने का माहौल है बताया जा रहा है की कई शिक्षक शिक्षिकाओं एवं कर्मचारी का वेतन भी रोका गया है जिससे उनको परिवार चलाना मुश्किल हो गया है वीते दिनों बैठक में डॉ संतोष पासवान को साहित्य के विभागाध्यक्ष बनाने को लेकर मुहर लगाया गया इसके बाबजूद टालमटोल में कुलपति लक्मीनिवास पांडे लगे है कुलपति द्वारा मिथिलांचल के लोगों से भेदभाव कहीं ना कहीं एक बड़ा सवाल खड़ा करता है
    user_Raman kumar Darbhanga Tak
    Raman kumar Darbhanga Tak
    हयाघाट, दरभंगा, बिहार•
    6 hrs ago
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