क्या भारतीय जनता पार्टी चुनाव आयोग के साथ मिलकर ईवीएम मशीन में गड़बड़ी कर के लोकसभा चुनाव जीत रही है? . बीजेपी के पास ईवीएम को कंट्रोल करने का मेकेनिज्म नहीं है। ईवीएम को वही कंट्रोल कर सकता है, जिसके पास मीडिया पर कंट्रोल हो। बीजेपी का भारत के मीडिया पर नियन्त्रण नहीं है, अत: ईवीएम पर भी नियंत्रण नहीं है। . कोंग्रेस एवं आम आदमी पार्टी का भी मीडिया पर कोई नियंत्रण नहीं है। अत: ये पार्टियाँ भी ईवीएम में गड़बड़ी नहीं कर सकती। . भारत का मीडिया पूरी तरह से बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिको एवं मिशनरीज के नियंत्रण में है। अत: सिर्फ अमेरिकी धनिक ही ईवीएम को मेनिपुलेट कर सकते है। . 2009 में बीजेपी ने ईवीएम विरोधी अभियान चलाया था। किन्तु अमेरिकी धनिक भारत में ईवीएम चाहते थे अत: बीजेपी के नेता धीरे धीरे सरेंडर करते गए और ईवीएम जारी रही। यदि बीजेपी पीछे नहीं हटती तो अमेरिकी धनिक बीजेपी को अब तक तीसरे नंबर की पार्टी बना चुके होते। . 2014 के बाद से कोंग्रेस ईवीएम के विरोध में है। किन्तु ईवीएम भारत में जारी है। . सपा , बसपा समेत आम आदमी पार्टी भी मौके मौके पर ईवीएम विरोधी अभियान चला चुकी है। . दुसरे शब्दों में, जो भी पार्टी सत्ता से बाहर रहेगी वह ईवीएम का विरोध करेगी। क्योंकि तब उन पर ईवीएम केंसिल करने का क़ानून छापने की जिम्मेदारी नहीं होती है। किन्तु सत्ता में आने के साथ ही पार्टी ईवीएम के समर्थन में आ जाती है। क्योंकि सरकार चलाने के लिए अमेरिकी धनिकों के सहयोग की जरूरत होती है। और अमेरिकी धनिक चाहते है कि भारत में ईवीएम जारी रहे। . मेरे मानने में , भारत का चुनाव आयोग एवं भारत की सुप्रीम कोर्ट सीधे अमेरिकी धनिकों के संपर्क में रहता है। व्यवहारिक रूप से हमारे नेताओं का इन दो संस्थाओ पर लगभग शून्य नियंत्रण है। अत: सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग एवं मीडिया के माध्यम से अमेरिकी धनिक भारत के नेताओं को कंट्रोल करते है। यह कंट्रोल प्रत्यक्ष न होकर अप्रत्यक्ष होता है। . ————— . (1) क्या ईवीएम में वोटो की हेराफेरी की जा सकती है ? . 2009 तक भारत में ईवीएम के जिस मॉडल का इस्तेमाल किया जा रहा था, उसमे हेराफेरी की जा सकती थी। इस बात के काफी संकेत है कि 2009 का चुनाव बीजेपी ईवीएम की वजह से ही हारी थी। 2009 से 2011 तक ईवीएम भारत का सबसे हॉट मुद्दा बना रहा। जब यह बात कॉमन नोलेज में आने लगी कि केंचुआ हेराफेरी कर रहा है, तो केंचुआ लीपा पोती के लिए 2012 में वीवीपेट लेकर आया। . वीवीपेट आने के बाद ईवीएम की धोखाधड़ी का मुद्दा ठंडा हो गया। क्योंकि अब मतदाता पर्ची छपते हुए और कटते हुए देख सकता था। निचे पुरानी वीवीपेट का चित्र दिया गया है . बाद में केंचुआ ने धीरे धीरे वीवीपेट में ऐसे बदलाव लाने शुरू किये जिससे वह वोटो की धोखाधड़ी कर सके। इसी क्रम में उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनावों के एन पहले उत्तर भारत की लाखो वीवीपेट के पारदर्शी कांच को one way mirror ग्लास से बदल दिया। दिया गया चित्र लेटेस्ट वीवीपेट का है . अँधा कांच लगाने के बाद अब मतदाता सिर्फ पर्ची देखता है, पर्ची को छपते हुए एवं कटते हुए नहीं देखता है। मतलब जब आप फूल दबाते हो तो वीविपेट में फूल की पर्ची को छपते हुए और कटते हुए नहीं देखते। वीवीपेट पहले से छपी हुयी पर्ची को ही बार बार लाईट जला कर दिखाता रहता है। और बाद में एक साथ इच्छित उम्मीदार की कई पर्चियां काटकर डिब्बे में गिरा देता है। किन्तु मतदाता को यह लगता है कि उसने फूल को वोट दिया और फूल की पर्ची देख ली। . केंचुआ के दफ्तर में बैठे हुए 5-7 प्रोग्रामर किस तरह देश भर में करोड़ो वोटो की यह हेराफेरी कर सकते है, इसका विस्तृत विवरण मैंने इस जवाब में दिया है – Pawan Jury का जवाब - ईवीएम मशीन के साथ वीवीपैट क्यों लगाई जाती है? . ——————- . (2) EVM पर मेरा स्टेंड : पारदर्शी कांच को अंधे कांच से बदले जाने के बाद वीवीपेट सुरक्षित नहीं है, और इसमें बड़े पैमाने पर हेराफेरी की जा सकती है। evm में हेराफेरी सिर्फ वही कर सकता है, जो इसका प्रोग्राम X लिखता है। प्रोग्राम X वोटिंग के 15 दिन पहले जिला कलेक्टर्स को भेजा जाता है, और इसमें अमुक लोकसभा के उम्मीदवारों के नाम, पार्टी के नाम एवं चुनाव चिन्ह होते है । यह प्रोग्राम केंचुआ के दिल्ली के दफ्तर में बैठे हुए 4-5 इंजीनियर लिखते है। अत: evm में हेराफेरी सिर्फ केंचुआ ही कर सकता है। और मेरा मानना है कि केंचुआ भारत की दुसरे नंबर की सबसे भ्रष्ट संस्था है। ( पहला नम्बर सुप्रीम कोर्ट का है। ) . (3) समाधान ? . मेरी प्राथमिक मांग है कि वीवीपेट का ग्लास फिर से पारदर्शी कर दिया जाना चाहिए ताकि मतदाता ने जिस उम्मीदवार को वोट दिया है, उसके चिन्ह की पर्ची को वह "छपते हुए और कटते हुए" देख सके। वीवीपेट के ग्लास को फिर से पारदर्शी करके इस हेराफेरी को रोका जा सकता है। . यदि आप भी चाहते है कि evm के अंधे कांच को फिर से पारदर्शी किया जाए तो पीएम को पोस्टकार्ड लिख कर ऐसा करने के लिए बोल सकते है। आप चाहे तो पीएम को ट्विट भी कर सकते है। पोस्टकार्ड / ट्विट में यह लिखे - माननीय प्रधानमंत्री जी, कृपया वीवीपेट के अंधे कांच को पारदर्शी करें - #ChangeEvmGlass . evm का मुद्दा काफी डायनामिक है, और केंचुआ इसमें लगातार छोटे छोटे परिवर्तन करते रहता है। वीवीपेट के कांच को फिर से पारदर्शी करवाना मेरा प्राथमिक लक्ष्य है। यह जूरी कोर्ट एवं वोट वापसी कानूनों से भी ज्यादा महत्त्वपूर्ण है। मतलब यदि पीएम मुझसे कोई एक क़ानून लागू करने के लिए पूछे तो मैं उनसे अनुरोध करूँगा कि वे evm को रद्द करने का क़ानून तुरंत गेजेट में छापें। ) . —————— . अंधे कांच द्वारा कैसे वोटो में हेराफेरी की जा सकती है इसका एक प्रोसेस डेमो आप यहाँ देख सकते है - लिंक कमेंट में
क्या भारतीय जनता पार्टी चुनाव आयोग के साथ मिलकर ईवीएम मशीन में गड़बड़ी कर के लोकसभा चुनाव जीत रही है? . बीजेपी के पास ईवीएम को कंट्रोल करने का मेकेनिज्म नहीं है। ईवीएम को वही कंट्रोल कर सकता है, जिसके पास मीडिया पर कंट्रोल हो। बीजेपी का भारत के मीडिया पर नियन्त्रण नहीं है, अत: ईवीएम पर भी नियंत्रण नहीं है। . कोंग्रेस एवं आम आदमी पार्टी का भी मीडिया पर कोई नियंत्रण नहीं है। अत: ये पार्टियाँ भी ईवीएम में गड़बड़ी नहीं कर सकती। . भारत का मीडिया पूरी तरह से बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिको एवं मिशनरीज के नियंत्रण में है। अत: सिर्फ अमेरिकी धनिक ही ईवीएम को मेनिपुलेट कर सकते है। . 2009 में बीजेपी ने ईवीएम विरोधी अभियान चलाया था। किन्तु अमेरिकी धनिक भारत में ईवीएम चाहते थे अत: बीजेपी के नेता धीरे धीरे सरेंडर करते गए और ईवीएम जारी रही। यदि बीजेपी पीछे नहीं हटती तो अमेरिकी धनिक बीजेपी को अब तक तीसरे नंबर की पार्टी बना चुके होते। . 2014 के बाद से कोंग्रेस ईवीएम के विरोध में है। किन्तु ईवीएम भारत में जारी है। . सपा , बसपा समेत आम आदमी पार्टी भी मौके मौके पर ईवीएम विरोधी अभियान चला चुकी है। . दुसरे शब्दों में, जो भी पार्टी सत्ता से बाहर रहेगी वह ईवीएम का विरोध करेगी। क्योंकि तब उन पर ईवीएम केंसिल करने का क़ानून छापने की जिम्मेदारी नहीं होती है। किन्तु सत्ता में आने के साथ ही पार्टी ईवीएम के समर्थन में आ जाती है। क्योंकि सरकार चलाने के लिए अमेरिकी धनिकों के सहयोग की जरूरत होती है। और अमेरिकी धनिक चाहते है कि भारत में ईवीएम जारी रहे। . मेरे मानने में , भारत का चुनाव आयोग एवं भारत की सुप्रीम कोर्ट सीधे अमेरिकी धनिकों के संपर्क में रहता है। व्यवहारिक रूप से हमारे नेताओं का इन दो संस्थाओ पर लगभग शून्य नियंत्रण है। अत: सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग एवं मीडिया के माध्यम से अमेरिकी धनिक भारत के नेताओं को कंट्रोल करते है। यह कंट्रोल प्रत्यक्ष न होकर अप्रत्यक्ष होता है। . ————— . (1) क्या ईवीएम में वोटो की हेराफेरी की जा सकती है ? . 2009 तक भारत में ईवीएम के जिस मॉडल का इस्तेमाल किया जा रहा था, उसमे हेराफेरी की जा सकती थी। इस बात के काफी संकेत है कि 2009 का चुनाव बीजेपी ईवीएम की वजह से ही हारी थी। 2009 से 2011 तक ईवीएम भारत का सबसे हॉट मुद्दा बना रहा। जब यह बात कॉमन नोलेज में आने लगी कि केंचुआ हेराफेरी कर रहा है, तो केंचुआ लीपा पोती के लिए 2012 में वीवीपेट लेकर आया। . वीवीपेट आने के बाद ईवीएम की धोखाधड़ी का मुद्दा ठंडा हो गया। क्योंकि अब मतदाता पर्ची छपते हुए और कटते हुए देख सकता था। निचे पुरानी वीवीपेट का चित्र दिया गया है . बाद में केंचुआ ने धीरे धीरे वीवीपेट में ऐसे बदलाव लाने शुरू किये जिससे वह वोटो की धोखाधड़ी कर सके। इसी क्रम में उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनावों के एन पहले उत्तर भारत की लाखो वीवीपेट के पारदर्शी
कांच को one way mirror ग्लास से बदल दिया। दिया गया चित्र लेटेस्ट वीवीपेट का है . अँधा कांच लगाने के बाद अब मतदाता सिर्फ पर्ची देखता है, पर्ची को छपते हुए एवं कटते हुए नहीं देखता है। मतलब जब आप फूल दबाते हो तो वीविपेट में फूल की पर्ची को छपते हुए और कटते हुए नहीं देखते। वीवीपेट पहले से छपी हुयी पर्ची को ही बार बार लाईट जला कर दिखाता रहता है। और बाद में एक साथ इच्छित उम्मीदार की कई पर्चियां काटकर डिब्बे में गिरा देता है। किन्तु मतदाता को यह लगता है कि उसने फूल को वोट दिया और फूल की पर्ची देख ली। . केंचुआ के दफ्तर में बैठे हुए 5-7 प्रोग्रामर किस तरह देश भर में करोड़ो वोटो की यह हेराफेरी कर सकते है, इसका विस्तृत विवरण मैंने इस जवाब में दिया है – Pawan Jury का जवाब - ईवीएम मशीन के साथ वीवीपैट क्यों लगाई जाती है? . ——————- . (2) EVM पर मेरा स्टेंड : पारदर्शी कांच को अंधे कांच से बदले जाने के बाद वीवीपेट सुरक्षित नहीं है, और इसमें बड़े पैमाने पर हेराफेरी की जा सकती है। evm में हेराफेरी सिर्फ वही कर सकता है, जो इसका प्रोग्राम X लिखता है। प्रोग्राम X वोटिंग के 15 दिन पहले जिला कलेक्टर्स को भेजा जाता है, और इसमें अमुक लोकसभा के उम्मीदवारों के नाम, पार्टी के नाम एवं चुनाव चिन्ह होते है । यह प्रोग्राम केंचुआ के दिल्ली के दफ्तर में बैठे हुए 4-5 इंजीनियर लिखते है। अत: evm में हेराफेरी सिर्फ केंचुआ ही कर सकता है। और मेरा मानना है कि केंचुआ भारत की दुसरे नंबर की सबसे भ्रष्ट संस्था है। ( पहला नम्बर सुप्रीम कोर्ट का है। ) . (3) समाधान ? . मेरी प्राथमिक मांग है कि वीवीपेट का ग्लास फिर से पारदर्शी कर दिया जाना चाहिए ताकि मतदाता ने जिस उम्मीदवार को वोट दिया है, उसके चिन्ह की पर्ची को वह "छपते हुए और कटते हुए" देख सके। वीवीपेट के ग्लास को फिर से पारदर्शी करके इस हेराफेरी को रोका जा सकता है। . यदि आप भी चाहते है कि evm के अंधे कांच को फिर से पारदर्शी किया जाए तो पीएम को पोस्टकार्ड लिख कर ऐसा करने के लिए बोल सकते है। आप चाहे तो पीएम को ट्विट भी कर सकते है। पोस्टकार्ड / ट्विट में यह लिखे - माननीय प्रधानमंत्री जी, कृपया वीवीपेट के अंधे कांच को पारदर्शी करें - #ChangeEvmGlass . evm का मुद्दा काफी डायनामिक है, और केंचुआ इसमें लगातार छोटे छोटे परिवर्तन करते रहता है। वीवीपेट के कांच को फिर से पारदर्शी करवाना मेरा प्राथमिक लक्ष्य है। यह जूरी कोर्ट एवं वोट वापसी कानूनों से भी ज्यादा महत्त्वपूर्ण है। मतलब यदि पीएम मुझसे कोई एक क़ानून लागू करने के लिए पूछे तो मैं उनसे अनुरोध करूँगा कि वे evm को रद्द करने का क़ानून तुरंत गेजेट में छापें। ) . —————— . अंधे कांच द्वारा कैसे वोटो में हेराफेरी की जा सकती है इसका एक प्रोसेस डेमो आप यहाँ देख सकते है - लिंक कमेंट में
- Sonu Kumarगायघाट, मुजफ्फरपुर, बिहारक्या भारतीय जनता पार्टी चुनाव आयोग के साथ मिलकर ईवीएम मशीन में गड़बड़ी कर के लोकसभा चुनाव जीत रही है? . बीजेपी के पास ईवीएम को कंट्रोल करने का मेकेनिज्म नहीं है। ईवीएम को वही कंट्रोल कर सकता है, जिसके पास मीडिया पर कंट्रोल हो। बीजेपी का भारत के मीडिया पर नियन्त्रण नहीं है, अत: ईवीएम पर भी नियंत्रण नहीं है। . कोंग्रेस एवं आम आदमी पार्टी का भी मीडिया पर कोई नियंत्रण नहीं है। अत: ये पार्टियाँ भी ईवीएम में गड़बड़ी नहीं कर सकती। . भारत का मीडिया पूरी तरह से बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिको एवं मिशनरीज के नियंत्रण में है। अत: सिर्फ अमेरिकी धनिक ही ईवीएम को मेनिपुलेट कर सकते है। . 2009 में बीजेपी ने ईवीएम विरोधी अभियान चलाया था। किन्तु अमेरिकी धनिक भारत में ईवीएम चाहते थे अत: बीजेपी के नेता धीरे धीरे सरेंडर करते गए और ईवीएम जारी रही। यदि बीजेपी पीछे नहीं हटती तो अमेरिकी धनिक बीजेपी को अब तक तीसरे नंबर की पार्टी बना चुके होते। . 2014 के बाद से कोंग्रेस ईवीएम के विरोध में है। किन्तु ईवीएम भारत में जारी है। . सपा , बसपा समेत आम आदमी पार्टी भी मौके मौके पर ईवीएम विरोधी अभियान चला चुकी है। . दुसरे शब्दों में, जो भी पार्टी सत्ता से बाहर रहेगी वह ईवीएम का विरोध करेगी। क्योंकि तब उन पर ईवीएम केंसिल करने का क़ानून छापने की जिम्मेदारी नहीं होती है। किन्तु सत्ता में आने के साथ ही पार्टी ईवीएम के समर्थन में आ जाती है। क्योंकि सरकार चलाने के लिए अमेरिकी धनिकों के सहयोग की जरूरत होती है। और अमेरिकी धनिक चाहते है कि भारत में ईवीएम जारी रहे। . मेरे मानने में , भारत का चुनाव आयोग एवं भारत की सुप्रीम कोर्ट सीधे अमेरिकी धनिकों के संपर्क में रहता है। व्यवहारिक रूप से हमारे नेताओं का इन दो संस्थाओ पर लगभग शून्य नियंत्रण है। अत: सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग एवं मीडिया के माध्यम से अमेरिकी धनिक भारत के नेताओं को कंट्रोल करते है। यह कंट्रोल प्रत्यक्ष न होकर अप्रत्यक्ष होता है। . ————— . (1) क्या ईवीएम में वोटो की हेराफेरी की जा सकती है ? . 2009 तक भारत में ईवीएम के जिस मॉडल का इस्तेमाल किया जा रहा था, उसमे हेराफेरी की जा सकती थी। इस बात के काफी संकेत है कि 2009 का चुनाव बीजेपी ईवीएम की वजह से ही हारी थी। 2009 से 2011 तक ईवीएम भारत का सबसे हॉट मुद्दा बना रहा। जब यह बात कॉमन नोलेज में आने लगी कि केंचुआ हेराफेरी कर रहा है, तो केंचुआ लीपा पोती के लिए 2012 में वीवीपेट लेकर आया। . वीवीपेट आने के बाद ईवीएम की धोखाधड़ी का मुद्दा ठंडा हो गया। क्योंकि अब मतदाता पर्ची छपते हुए और कटते हुए देख सकता था। निचे पुरानी वीवीपेट का चित्र दिया गया है . बाद में केंचुआ ने धीरे धीरे वीवीपेट में ऐसे बदलाव लाने शुरू किये जिससे वह वोटो की धोखाधड़ी कर सके। इसी क्रम में उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनावों के एन पहले उत्तर भारत की लाखो वीवीपेट के पारदर्शी कांच को one way mirror ग्लास से बदल दिया। दिया गया चित्र लेटेस्ट वीवीपेट का है . अँधा कांच लगाने के बाद अब मतदाता सिर्फ पर्ची देखता है, पर्ची को छपते हुए एवं कटते हुए नहीं देखता है। मतलब जब आप फूल दबाते हो तो वीविपेट में फूल की पर्ची को छपते हुए और कटते हुए नहीं देखते। वीवीपेट पहले से छपी हुयी पर्ची को ही बार बार लाईट जला कर दिखाता रहता है। और बाद में एक साथ इच्छित उम्मीदार की कई पर्चियां काटकर डिब्बे में गिरा देता है। किन्तु मतदाता को यह लगता है कि उसने फूल को वोट दिया और फूल की पर्ची देख ली। . केंचुआ के दफ्तर में बैठे हुए 5-7 प्रोग्रामर किस तरह देश भर में करोड़ो वोटो की यह हेराफेरी कर सकते है, इसका विस्तृत विवरण मैंने इस जवाब में दिया है – Pawan Jury का जवाब - ईवीएम मशीन के साथ वीवीपैट क्यों लगाई जाती है? . ——————- . (2) EVM पर मेरा स्टेंड : पारदर्शी कांच को अंधे कांच से बदले जाने के बाद वीवीपेट सुरक्षित नहीं है, और इसमें बड़े पैमाने पर हेराफेरी की जा सकती है। evm में हेराफेरी सिर्फ वही कर सकता है, जो इसका प्रोग्राम X लिखता है। प्रोग्राम X वोटिंग के 15 दिन पहले जिला कलेक्टर्स को भेजा जाता है, और इसमें अमुक लोकसभा के उम्मीदवारों के नाम, पार्टी के नाम एवं चुनाव चिन्ह होते है । यह प्रोग्राम केंचुआ के दिल्ली के दफ्तर में बैठे हुए 4-5 इंजीनियर लिखते है। अत: evm में हेराफेरी सिर्फ केंचुआ ही कर सकता है। और मेरा मानना है कि केंचुआ भारत की दुसरे नंबर की सबसे भ्रष्ट संस्था है। ( पहला नम्बर सुप्रीम कोर्ट का है। ) . (3) समाधान ? . मेरी प्राथमिक मांग है कि वीवीपेट का ग्लास फिर से पारदर्शी कर दिया जाना चाहिए ताकि मतदाता ने जिस उम्मीदवार को वोट दिया है, उसके चिन्ह की पर्ची को वह "छपते हुए और कटते हुए" देख सके। वीवीपेट के ग्लास को फिर से पारदर्शी करके इस हेराफेरी को रोका जा सकता है। . यदि आप भी चाहते है कि evm के अंधे कांच को फिर से पारदर्शी किया जाए तो पीएम को पोस्टकार्ड लिख कर ऐसा करने के लिए बोल सकते है। आप चाहे तो पीएम को ट्विट भी कर सकते है। पोस्टकार्ड / ट्विट में यह लिखे - माननीय प्रधानमंत्री जी, कृपया वीवीपेट के अंधे कांच को पारदर्शी करें - #ChangeEvmGlass . evm का मुद्दा काफी डायनामिक है, और केंचुआ इसमें लगातार छोटे छोटे परिवर्तन करते रहता है। वीवीपेट के कांच को फिर से पारदर्शी करवाना मेरा प्राथमिक लक्ष्य है। यह जूरी कोर्ट एवं वोट वापसी कानूनों से भी ज्यादा महत्त्वपूर्ण है। मतलब यदि पीएम मुझसे कोई एक क़ानून लागू करने के लिए पूछे तो मैं उनसे अनुरोध करूँगा कि वे evm को रद्द करने का क़ानून तुरंत गेजेट में छापें। ) . —————— . अंधे कांच द्वारा कैसे वोटो में हेराफेरी की जा सकती है इसका एक प्रोसेस डेमो आप यहाँ देख सकते है - https://www.youtube.com/watch?time_continue=5&v=pAVsE7RKStY&feature=emb_title .7 hrs ago
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