सिर्फ भाषण या धरातल पर उतरेगा महिला सशक्तिकरण? बस्ती की पांच सीटों पर टिकी राजनीतिक गलियारों की निगाहें बस्ती में महिला सशक्तिकरण की सुगबुगाहट तेज: क्या आगामी विधानसभा चुनाव में पांच में से किसी एक सीट पर दिखेगा महिला नेतृत्व? क्या बस्ती की राजनीति में खुलेगा महिलाओं का द्वार? पांच सीटों पर टकटकी लगाए बैठे हैं राजनीतिक दल महिला आरक्षण और PDA का समीकरण: क्या बस्ती में किसी एक सीट पर दांव पर लगेगा महिला चेहरा? बस्ती विधानसभा चुनाव: क्या बदलेगी रणनीति, चुनावी मैदान में उतरेंगी कोई मजबूत महिला नेत्री? सिर्फ भाषण या धरातल पर उतरेगा महिला सशक्तिकरण? बस्ती की पांच सीटों पर टिकी राजनीतिक गलियारों की निगाहें बस्ती | विशेष रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक दल अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं, वहीं चुनावी राज्यों में महिला सशक्तिकरण और राजनीति में महिलाओं की प्रभावी भागीदारी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। खासकर बस्ती जनपद की पांचों विधानसभा सीटों पर संभावित प्रत्याशियों और समीकरणों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं, जिसमें एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस बार किसी प्रमुख दल द्वारा बस्ती में महिला चेहरे को मैदान में उतारा जाएगा? बस्ती जनपद का राजनीतिक परिदृश्य और सीटों का गणित बस्ती जनपद के अंतर्गत कुल पांच विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जो राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और सक्रिय माने जाते हैं: हर्रैया विधानसभा क्षेत्र कप्तानगंज विधानसभा क्षेत्र रुधौली विधानसभा क्षेत्र बस्ती सदर विधानसभा क्षेत्र महादेवा (सुरक्षित) विधानसभा क्षेत्र वर्ष 2022 के पिछले विधानसभा चुनाव परिणामों पर नजर डालें तो इन पांच सीटों में से चार पर समाजवादी पार्टी गठबंधन ने जीत दर्ज की थी, जबकि हर्रैया सीट भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई थी। वर्तमान राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए यह कयास लगाए जा रहे हैं कि आगामी चुनाव में जीत-हार के अंतर को पाटने और नए सामाजिक समीकरण साधने के लिए राजनीतिक दल कुछ नए प्रयोग कर सकते हैं। PDA समीकरण और महिला आरक्षण की सुगबुगाहट राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का मुद्दा लगातार बहसों में बना हुआ है। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के संदर्भ में भी इसके क्रियान्वयन और राजनीतिक प्रभावों पर चर्चा जारी है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी महिला आरक्षण में PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) वर्ग की महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दे चुके हैं। ऐसे में यदि विपक्षी दल समाजवादी पार्टी या अन्य दल बस्ती की पांच सीटों में से कम से कम एक सीट पर किसी मजबूत महिला चेहरे को मौका देते हैं, तो इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जाएगा। प्रत्याशी चयन के संभावित मानक राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केवल महिला होने के आधार पर ही नहीं, बल्कि चुनावी मैदान में उतरने वाले चेहरे के लिए कई अन्य जमीनी पहलुओं को भी परखा जाना आवश्यक है: क्षेत्रीय स्वीकार्यता और जनसंपर्क: महिला नेतृत्व की उस विशेष क्षेत्र में जनता के बीच कितनी पकड़ है। संगठन में सक्रियता: लंबे समय से पार्टी के बूथ स्तर और संगठनात्मक कार्यक्रमों में भागीदारी। सामाजिक सरोकार: क्षेत्र की जनता के मुद्दों और समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता। चुनावी प्रबंधन क्षमता: चुनाव जीतने की मजबूत राजनीतिक क्षमता। दलों की स्थिति और भविष्य की संभावनाएं वर्तमान में समाजवादी पार्टी समेत तमाम राजनीतिक दलों की महिला कार्यकर्ताओं और नेत्रियों ने संगठनात्मक गतिविधियों, जनसंपर्क अभियानों और बूथ स्तर के कार्यक्रमों में अपनी सक्रिय भूमिका बढ़ाई है। पार्टी के पास यह एक सुनहरा अवसर है कि वह लंबे समय से संगठन के लिए समर्पित महिला नेताओं को प्रतिनिधित्व देकर राजनीतिक भागीदारी के दायरे को और व्यापक बनाएं। विशेष नोट: फिलहाल किसी भी प्रमुख राजनीतिक दल (विशेषकर समाजवादी पार्टी) की ओर से बस्ती की किसी विधानसभा सीट पर आधिकारिक तौर पर महिला प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं की गई है। यह विषय अभी राजनीतिक चर्चा और संभावना के स्तर पर ही है। अंततः, चुनाव नजदीक आने के साथ ही यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राजनीतिक दल सिर्फ भाषणों और मंचों तक महिला सशक्तिकरण सीमित रखते हैं, या फिर बस्ती की इन पांच सीटों में से किसी एक पर महिला नेतृत्व को धरातल पर उतारकर एक ठोस राजनीतिक पहल करते हैं।
सिर्फ भाषण या धरातल पर उतरेगा महिला सशक्तिकरण? बस्ती की पांच सीटों पर टिकी राजनीतिक गलियारों की निगाहें बस्ती में महिला सशक्तिकरण की सुगबुगाहट तेज: क्या आगामी विधानसभा चुनाव में पांच में से किसी एक सीट पर दिखेगा महिला नेतृत्व? क्या बस्ती की राजनीति में खुलेगा महिलाओं का द्वार? पांच सीटों पर टकटकी लगाए बैठे हैं राजनीतिक दल महिला आरक्षण और PDA का समीकरण: क्या बस्ती में किसी एक सीट पर दांव पर लगेगा महिला चेहरा? बस्ती विधानसभा चुनाव: क्या बदलेगी रणनीति, चुनावी मैदान में उतरेंगी कोई मजबूत महिला नेत्री? सिर्फ भाषण या धरातल पर उतरेगा महिला सशक्तिकरण? बस्ती की पांच सीटों पर टिकी राजनीतिक गलियारों की निगाहें बस्ती | विशेष रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक दल अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं, वहीं चुनावी राज्यों में महिला सशक्तिकरण और राजनीति में महिलाओं की प्रभावी भागीदारी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। खासकर बस्ती जनपद की पांचों विधानसभा सीटों पर संभावित प्रत्याशियों और समीकरणों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं, जिसमें एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस बार किसी प्रमुख दल द्वारा बस्ती में महिला चेहरे को मैदान में उतारा जाएगा? बस्ती जनपद का राजनीतिक परिदृश्य और सीटों का गणित बस्ती जनपद के अंतर्गत कुल पांच विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जो राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और सक्रिय माने जाते हैं: हर्रैया विधानसभा क्षेत्र कप्तानगंज विधानसभा क्षेत्र रुधौली विधानसभा क्षेत्र बस्ती सदर विधानसभा क्षेत्र महादेवा (सुरक्षित) विधानसभा क्षेत्र वर्ष 2022 के पिछले विधानसभा चुनाव परिणामों पर नजर डालें तो इन पांच सीटों में से चार पर समाजवादी पार्टी गठबंधन ने जीत दर्ज की थी, जबकि हर्रैया सीट भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई थी। वर्तमान राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए यह कयास लगाए जा रहे हैं कि आगामी चुनाव में जीत-हार के अंतर को पाटने और नए सामाजिक समीकरण साधने के लिए राजनीतिक दल कुछ नए प्रयोग कर सकते हैं। PDA समीकरण और महिला आरक्षण की सुगबुगाहट राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का मुद्दा लगातार बहसों में बना हुआ है। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के संदर्भ में भी इसके क्रियान्वयन और राजनीतिक प्रभावों पर चर्चा जारी है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी महिला आरक्षण में PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) वर्ग की महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दे चुके हैं। ऐसे में यदि विपक्षी दल समाजवादी पार्टी या अन्य दल बस्ती की पांच सीटों में से कम से कम एक सीट पर किसी मजबूत महिला चेहरे को मौका देते हैं, तो इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जाएगा। प्रत्याशी चयन के संभावित मानक राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केवल महिला होने के आधार पर ही नहीं, बल्कि चुनावी मैदान में उतरने वाले चेहरे के लिए कई अन्य जमीनी पहलुओं को भी परखा जाना आवश्यक है: क्षेत्रीय स्वीकार्यता और जनसंपर्क: महिला नेतृत्व की उस विशेष क्षेत्र में जनता के बीच कितनी पकड़ है। संगठन में सक्रियता: लंबे समय से पार्टी के बूथ स्तर और संगठनात्मक कार्यक्रमों में भागीदारी। सामाजिक सरोकार: क्षेत्र की जनता के मुद्दों और समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता। चुनावी प्रबंधन क्षमता: चुनाव जीतने की मजबूत राजनीतिक क्षमता। दलों की स्थिति और भविष्य की संभावनाएं वर्तमान में समाजवादी पार्टी समेत तमाम राजनीतिक दलों की महिला कार्यकर्ताओं और नेत्रियों ने संगठनात्मक गतिविधियों, जनसंपर्क अभियानों और बूथ स्तर के कार्यक्रमों में अपनी सक्रिय भूमिका बढ़ाई है। पार्टी के पास यह एक सुनहरा अवसर है कि वह लंबे समय से संगठन के लिए समर्पित महिला नेताओं को प्रतिनिधित्व देकर राजनीतिक भागीदारी के दायरे को और व्यापक बनाएं। विशेष नोट: फिलहाल किसी भी प्रमुख राजनीतिक दल (विशेषकर समाजवादी पार्टी) की ओर से बस्ती की किसी विधानसभा सीट पर आधिकारिक तौर पर महिला प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं की गई है। यह विषय अभी राजनीतिक चर्चा और संभावना के स्तर पर ही है। अंततः, चुनाव नजदीक आने के साथ ही यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राजनीतिक दल सिर्फ भाषणों और मंचों तक महिला सशक्तिकरण सीमित रखते हैं, या फिर बस्ती की इन पांच सीटों में से किसी एक पर महिला नेतृत्व को धरातल पर उतारकर एक ठोस राजनीतिक पहल करते हैं।
- #ग्रामीण_18_घण्टे_और_शहरी_क्षेत्र_मे_22_घण्टे_बिद्युत_अपूर्ति_के_दावे_मे_सरकार_पूरी_तरह_से_फेल। #ग्रामीण_18_घण्टे_और_शहरी_क्षेत्र_मे_22_घण्टे_बिद्युत_अपूर्ति_के_दावे_मे_सरकार_पूरी_तरह_से_फेल। इस समय विधानसभा क्षेत्र के भानपुर,बघौड़ी,दसिया,रूधौली,असनहरा आदि सभी सब स्टेशनो का संचालन लोढ़वा से हो रहा है इसलिए विधानसभा क्षेत्र के लोगो द्वारा लगातार मिल रही अघोषित विद्युत कटौती की सूचना पर माननीय विधायक रूधौली Rajendra Prasad Chaudhary जी जानकारी के लिए पहुचे #ट्रांसमिशन_विद्युत_उपकेन्द्र_लोढ़वा। #अघोषित #विद्युत #कटौती को लेकर विद्युत विभाग के अवर अभियंन्ता विद्युत मण्डल बस्ती से होगी बात।1
- अयोध्या आजाद समाज पार्टी का जोरदार प्रदर्शन,अयोध्या और गोंडा हत्याकांड व बाराबंकी में सांसद चंद्रशेखर आजाद के काफिले पर हमले के विरोध प्रदर्शन अयोध्या आजाद समाज पार्टी का जोरदार प्रदर्शन,अयोध्या और गोंडा हत्याकांड व बाराबंकी में सांसद चंद्रशेखर आजाद के काफिले पर हमले के विरोध में कार्यकर्ताओं ने तिकोनिया पार्क से कचहरी गेट तक निकाला मार्च। राष्ट्रपति को संबोधित चार सूत्रीय ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा। हत्याओं की उच्चस्तरीय जांच, शिक्षक भर्ती घोटाले में न्याय, पंचायत सहायकों की मांगों और धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई रोकने की मांग। प्रदर्शन में जिलाध्यक्ष देवेश कुमार पिंटू, महानगर अध्यक्ष मुख्तार खान और प्रदेश महामंत्री जसवंत मौर्य रहे मौजूद।4
- आओ मिलकर चले जीवन में कुछ अच्छा कार्य कर ले,दुनिया के लोगो जागो नही तो प्रदुषित शहर होने मे देरी नही होती जागो पर्यावरण सेव करो, आओ चले धरती माँ को हरियाली युक्त मौसम बनाओ जीवन अनमोल धरोहर है देख भाल करो, प्राकृतिक पर्यावरण संरक्षण करे जीवन में पेड़ पौधे अधिक लगाये जीवन खुशहाल बनाएं आओ हम सब मिलकर अपने देश को स्वच्छ सुंदर बनाए पर्यावरण संरक्षण करें जीवन अनमोल बने सभी का ख्याल करेंजि और शुद्ध हवाओं के साथ योग करें और पर्यावरण स्वच्छ सुंदर बनाएं भारत सरकार राज्यों की सरकार से कंधा से कंधा मिलाकर चले पेड़ पौधे लगाने के लिए एनवायरनमेंट सेव करने के लिए हम सभी को आगे आना चाहिए। ।। Aaj subah times।। ।। रिपोर्टिंग Lal Chand Soni,, आओ मिलकर चले जीवन में कुछ अच्छा कार्य कर ले,दुनिया के लोगो जागो नही तो प्रदुषित शहर होने मे देरी नही होती जागो पर्यावरण सेव करो, आओ चले धरती माँ को हरियाली युक्त मौसम बनाओ जीवन अनमोल धरोहर है देख भाल करो, प्राकृतिक पर्यावरण संरक्षण करे जीवन में पेड़ पौधे अधिक लगाये जीवन खुशहाल बनाएं आओ हम सब मिलकर अपने देश को स्वच्छ सुंदर बनाए पर्यावरण संरक्षण करें जीवन अनमोल बने सभी का ख्याल करेंजि और शुद्ध हवाओं के साथ योग करें और पर्यावरण स्वच्छ सुंदर बनाएं भारत सरकार राज्यों की सरकार से कंधा से कंधा मिलाकर चले पेड़ पौधे लगाने के लिए एनवायरनमेंट सेव करने के लिए हम सभी को आगे आना चाहिए। ।। Aaj subah times।। ।। रिपोर्टिंग Lal Chand Soni,,1
- कंडेला हत्याकांड पर समाजवादी पार्टी कीपूर्व एमएलसी लीलावती कुशवाहा को रोके जाने पर भड़की, और सरकार पर लगाया आरोप बिपिन पांडेय संवाददाता अयोध्या लोकेशन अयोध्या लखनऊ/अयोध्या कदैंला हत्याकांड पर पूर्व एमएलसी लीलावती कुशवाहा को रोके जाने का आरोप, सरकार पर साधा निशाना अयोध्या। जनपद के थाना पूराकलंदर क्षेत्र अंतर्गत कदैंला गांव में हुए चर्चित रामलगन मौर्य हत्याकांड को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी की पूर्व एमएलसी एवं वरिष्ठ नेता लीलावती कुशवाहा ने आरोप लगाया है कि उन्हें पीड़ित परिवार से मिलने और कदैंला गांव जाने से रोकने के लिए उनके आवास पर पुलिस तैनात कर उन्हें नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया गया। गौरतलब है कि 25 अगस्त को कदैंला गांव में रामलगन मौर्य पर कथित रूप से बम और गोली से हमला किया गया था, जिसमें उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई थी। घटना में उनकी मां पार्वती देवी भी गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। उन्हें पहले जिला अस्पताल, फिर दर्शननगर मेडिकल कॉलेज और बाद में बेहतर उपचार के लिए लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया था, जहां उपचार के दौरान सोमवार को उनकी भी मृत्यु हो गई। मामले को लेकर पीड़ित परिवार एवं विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठनों द्वारा लगातार आरोपियों की गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। इसी क्रम में पूर्व एमएलसी लीलावती कुशवाहा कदैंला गांव जाकर परिजनों से मुलाकात करना चाहती थीं, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन ने उन्हें घर से बाहर निकलने नहीं दिया। लीलावती कुशवाहा ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे प्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की आवाज उठाने वालों को भी रोका जा रहा है, जो लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। पूर्व एमएलसी ने कहा कि कदैंला हत्याकांड की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए तथा सभी नामजद आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखने का भी दावा किया। उधर, कदैंला हत्याकांड को लेकर क्षेत्र में मौर्य समाज के साथ साथ बहुजन समाज व विभिन्न संगठनों में आक्रोश बना हुआ है और विभिन्न सामाजिक संगठनों तथा राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि लगातार पीड़ित परिवार के समर्थन में सामने आ रहे हैं। मामले को लेकर जनपद की राजनीति भी गर्म होती जा रही है। प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।3
- अवैध खनन पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, चार ट्रैक्टर-ट्रालियां सीज,* *रात में छापेमारी से खनन माफियाओं में मचा हड़कंप, कई दिनों से चल रहा था अवैध खनन।* *अवैध खनन पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, चार ट्रैक्टर-ट्रालियां सीज,* *रात में छापेमारी से खनन माफियाओं में मचा हड़कंप, कई दिनों से चल रहा था अवैध खनन।* *रूदौली (अयोध्या)।* रूदौली क्षेत्र के अमरावती गांव के समीप कई दिनों से चल रहे अवैध खनन के खिलाफ पुलिस ने 13 तरीक देर रात बड़ी कार्रवाई की। अवैध खनन की सूचना मिलते ही क्षेत्राधिकारी अरविंद सोनकर ने पुलिस टीम के साथ रात करीब 12 बजे मौके पर छापेमारी की। पुलिस की अचानक कार्रवाई से अवैध खनन में लगे लोगों में हड़कंप मच गया।छापेमारी के दौरान मौके से अवैध खनन में प्रयुक्त चार ट्रैक्टर-ट्रालियां पकड़ी गईं, जिन्हें पुलिस ने तत्काल सीज कर दिया। पुलिस की कार्रवाई से अवैध खनन करने वालों में खलबली मच गई।क्षेत्राधिकारी अरविंद सोनकर के नेतृत्व में हुई कार्रवाई के दौरान शुजागंज चौकी प्रभारी अभिषेक सिंह, कांस्टेबल राजेंद्र सिंह और रवीश मौजूद रहे।क्षेत्राधिकारी अरविंद सोनकर ने बताया कि अवैध खनन की सूचना पर कार्रवाई की गई है। मौके से चार ट्रैक्टर-ट्रालियां सीज की गई हैं। अवैध खनन के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।1
- समस्याओं का समाधान धरातल पर नहीं हुआ तो होगा बीकापुर में बड़ा आंदोलन अयोध्या जिले के बीकापुर तहसील परिसर में भारतीय किसान यूनियन तहसील इकाई बीकापुर की मासिक पंचायत संपन्न हुई पंचायत में तहसीलदार बीकापुर पहुंचकर बिन्दुवार समस्याओं पर वार्ता किया और समाधान के लिए संबंधित कर्मचारियों को निर्देशित किया।समस्याओं का समझान न होने पर होगा बड़ा आंदोलन,-घनश्याम वर्मा,प्रदेश सचिव घनश्याम वर्मा द्वारा जानकारी देते हुए बताया गया कि संगठन को मजबूत बनाए जाने हेतु चंदू भाई पटेल को बीकापुर का ब्लॉक अध्यक्ष और रामनरेश कनौजिया को तारुन विकासखंड का ब्लॉक अध्यक्ष सर्वसम्मति से बनाया गया। मांह की 15 तारीख को भारतीय किसान यूनियन की तहसील इकाईयों की मासिक पंचायत होती है जिसके क्रम में तहसील अध्यक्ष संतोष वर्मा की अध्यक्षता में मासिक पंचायत लगाई गई पंचायत में 16 बिंदुओं का ज्ञापन तहसीलदार बीकापुर को सौपा गया ज्ञापन की समस्याओं पर बिन्दुवार वार्ता किया गया समस्याओं के समाधान हेतु तहसीलदार बीकापुर संबंधित अधिकारियों कर्मचारियों को निर्देशित किया,घनश्याम वर्मा बोले अधिकारियों द्वारा केवल कोरा आश्वासन दिया जाता है धरातल पर समाधान नहीं किया जाता है यदि अविलंब समस्याओं का समाधान ना हुआ तो नवंबर माह में बड़ा आंदोलन किया जाएगा पंचायत में सर्वसम्मति से बीकापुर ब्लॉक अध्यक्ष चंदू भाई पटेल ,तारुन ब्लॉक अध्यक्ष राम नरेश कनौजिया तहसील उपाध्यक्ष मस्तराम वर्मा, तहसील महासचिव शिवराम शर्मा, ब्लॉक उपाध्यक्ष बीकापुर जय लाल चौधरी, रामानंद यादव ,ब्लॉक सचिव देवी प्रसाद को चयनित किया गया पंचायत में अभय राज ब्रह्मचारी मंसाराम वर्मा, बैजनाथ निषाद,रामसहाय वर्मा, काली प्रसाद मौर्य,लीलावती रामवती,जसमता देवी, देवी प्रसाद, मनीराम यादव, राहुल वर्मा, आदि लोगों ने मौजूद रहे।1
- अयोध्या सदर तहसील में भ्रष्टाचार का नंगा नाच, एसडीएम की नाक के नीचे चल रहा अवैध वसूली का काला कारोबार। वायरल वीडियो ने खोली पोल: खुलेआम हो रही है वसूली के पैसों की बंदरबांट, एंटी करप्शन टीम जब पकड़ती है भ्रष्ट कर्मचारियों को, तो समर्थन में उतर आते हैं सैकड़ों लेखपाल। अयोध्या। मर्यादित नगरी अयोध्या से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अयोध्या की सदर तहसील भ्रष्टाचार का गढ़ बन चुकी है, जहां बिना रिश्वत दिए गरीब जनता का कोई भी काम नहीं होता। एसडीएम की गैर-मौजूदगी और भ्रष्टाचार का खेल आरोप है कि सदर तहसील के एसडीएम ज्यादातर समय फील्ड में रहते हैं और तहसील में उनकी मौजूदगी न के बराबर होती है। इसी का फायदा उठाकर कार्यालय में खुलेआम अवैध वसूली का खेल चल रहा है। सामने आए एक वायरल वीडियो में साफ सुना जा सकता है कि कैसे वसूली के पैसों का वितरण आपस में किया जा रहा है। भ्रष्टों को बचाने के लिए शुरू हो जाता है धरना! हद तो तब हो जाती है जब एंटी करप्शन विभाग किसी भ्रष्ट कर्मचारी को रंगे हाथों गिरफ्तार करता है, तो उसके बचाव में तुरंत सैकड़ों लेखपाल धरने पर बैठ जाते हैं। बड़ा सवाल यह है कि आखिर यह धरना प्रक्रिया किसलिए? क्या इन भ्रष्ट और चोर कर्मचारियों को बचाने के लिए पूरा प्रशासनिक अमला खड़ा हो जाता है? एसडीएम सदर का रवैया और प्रतिक्रिया जब इस पूरे मामले को लेकर एसडीएम सदर, अयोध्या को अवगत कराया गया और उनका पक्ष जानना चाहा, तो उन्होंने इस पर कार्रवाई की बात तो कही, लेकिन कैमरे या खुलकर कुछ भी बोलने से साफ इनकार करते नजर आए। ज़िम्मेदार अधिकारियों का इस तरह से चुप्पी साधना और कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से कतराना इस पूरे मामले को और ज्यादा संदेहास्पद बनाता है। योगी सरकार के 'जीरो टॉलरेंस' दावों को ठेंगा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति का दावा करते हों, लेकिन अयोध्या सदर तहसील के इन हालात ने स्थानीय प्रशासन और न्याय व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।1
- अयोध्या रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंचे दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू। अयोध्या रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंचे दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू। महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया गया। एयरपोर्ट से उपराज्यपाल राम जन्मभूमि परिसर के लिए रवाना हुए। राम जन्मभूमि परिसर में रामलला के दरबार में मत्था टेका। विधि-विधान से रामलला का दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद लिया। मीडिया से बातचीत में कहा—रामलला के दरबार में मत्था टेकने आया हूं। बोले—रामलला के दर्शन करना मेरा सौभाग्य है। अयोध्या के विकास की सराहना करते हुए कहा—अयोध्या बहुत सुंदर नगरी बन रही है।1