बस्ती: सिस्टम की 'ऑक्सीजन' कम या संवेदनशीलता? नवजात की मौत पर सवालों के घेरे में विक्रमजोत CHC अजीत मिश्रा (खोजी) ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती, उत्तर प्रदेश बस्ती। स्वास्थ्य विभाग के बड़े-बड़े दावों और कागजी आंकड़ों के बीच जब एक मां की गोद उजाड़ दी जाती है, तो सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजमी है। जनपद के विक्रमजोत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में एक नवजात की मौत का मामला अब तूल पकड़ चुका है। मामला केवल एक मृत्यु का नहीं, बल्कि उस 'रेफरल खेल' का है जिसमें अक्सर गरीब मरीज अपनी जान गंवा देते हैं। जांच के घेरे में 'रेफर' का समय और नीयत बीते 14 मार्च को साधना नामक महिला को प्रसव पीड़ा के बाद CHC में भर्ती कराया गया। सामान्य प्रसव हुआ, लेकिन खुशियां मातम में बदलते देर नहीं लगी। चिकित्सक ने नवजात की हालत गंभीर बताकर उसे 'हायर सेंटर' रेफर कर दिया। सवाल यह है कि क्या रेफर करने में देरी की गई? या फिर अस्पताल के पास वे बुनियादी जीवन रक्षक उपकरण ही नहीं थे जो एक नवजात की सांसें बचा सकें? सफेद कोट पर लापरवाही के दाग? परिजनों का सीधा आरोप है कि CHC स्तर पर घोर लापरवाही बरती गई। इसी शिकायत पर जिलाधिकारी (DM) के निर्देश के बाद विभाग हरकत में आया है। सोमवार को डिप्टी सीएमओ डॉ. एसबी सिंह ने मौके पर पहुंचकर चिकित्सक, स्टाफ नर्स, एम्बुलेंस चालक और ईएमटी के बयान दर्ज किए। जांच के मुख्य बिंदु जो जवाब मांगते हैं: जन्म और रेफर के बीच का समय: क्या बच्चे को समय रहते रेफर किया गया? एम्बुलेंस की स्थिति: 102 एम्बुलेंस में क्या उस वक्त जरूरी जीवन रक्षक सुविधाएं मौजूद थीं? मृत्यु का वास्तविक समय: सबसे बड़ा सवाल यह है कि बच्चा रेफर के समय जीवित था या उसे मृत अवस्था में ही अस्पताल से बाहर भेज दिया गया? कागजों में दौड़ती जांच, इंसाफ का इंतजार डिप्टी सीएमओ का कहना है कि अल्ट्रासाउंड और अन्य जांच रिपोर्टों की बारीकी से जांच की जा रही है। जल्द ही रिपोर्ट सीएमओ डॉ. राजीव निगम को सौंपी जाएगी। लेकिन सवाल वही है— क्या यह जांच केवल फाइलों का पेट भरने के लिए है या फिर दोषी स्वास्थ्य कर्मियों पर गाज गिरेगी? बस्ती की जनता यह देख रही है कि सरकारी अस्पतालों में गरीब का बच्चा पैदा होना क्या अब भी एक 'जोखिम' बना रहेगा? जब तक सिस्टम की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक 'जांच' शब्द केवल पीड़ित परिवार को बहलाने का एक जरिया मात्र बना रहेगा।
बस्ती: सिस्टम की 'ऑक्सीजन' कम या संवेदनशीलता? नवजात की मौत पर सवालों के घेरे में विक्रमजोत CHC अजीत मिश्रा (खोजी) ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती, उत्तर प्रदेश बस्ती। स्वास्थ्य विभाग के बड़े-बड़े दावों और कागजी आंकड़ों के बीच जब एक मां की गोद उजाड़ दी जाती है, तो सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजमी है। जनपद के विक्रमजोत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में एक नवजात की मौत का मामला अब तूल पकड़ चुका है। मामला केवल एक मृत्यु का नहीं, बल्कि उस 'रेफरल खेल' का है जिसमें अक्सर गरीब मरीज अपनी जान गंवा देते हैं। जांच के घेरे में 'रेफर' का समय और नीयत बीते 14 मार्च को साधना नामक महिला को प्रसव पीड़ा के बाद CHC में भर्ती कराया गया। सामान्य प्रसव हुआ, लेकिन खुशियां मातम में बदलते देर नहीं लगी। चिकित्सक ने नवजात की हालत गंभीर बताकर उसे 'हायर सेंटर' रेफर कर दिया। सवाल यह है कि क्या रेफर करने में देरी की गई? या फिर अस्पताल के पास वे बुनियादी जीवन रक्षक उपकरण ही नहीं थे जो एक नवजात की सांसें बचा सकें? सफेद कोट पर लापरवाही के दाग? परिजनों का सीधा आरोप है कि CHC स्तर पर घोर लापरवाही बरती गई। इसी शिकायत पर जिलाधिकारी (DM) के निर्देश के बाद विभाग हरकत में आया है। सोमवार को डिप्टी सीएमओ डॉ. एसबी सिंह ने मौके पर पहुंचकर चिकित्सक, स्टाफ नर्स, एम्बुलेंस चालक और ईएमटी के बयान दर्ज किए। जांच के मुख्य बिंदु जो जवाब मांगते हैं: जन्म और रेफर के बीच का समय: क्या बच्चे को समय रहते रेफर किया गया? एम्बुलेंस की स्थिति: 102 एम्बुलेंस में क्या उस वक्त जरूरी जीवन रक्षक सुविधाएं मौजूद थीं? मृत्यु का वास्तविक समय: सबसे बड़ा सवाल यह है कि बच्चा रेफर के समय जीवित था या उसे मृत अवस्था में ही अस्पताल से बाहर भेज दिया गया? कागजों में दौड़ती जांच, इंसाफ का इंतजार डिप्टी सीएमओ का कहना है कि अल्ट्रासाउंड और अन्य जांच रिपोर्टों की बारीकी से जांच की जा रही है। जल्द ही रिपोर्ट सीएमओ डॉ. राजीव निगम को सौंपी जाएगी। लेकिन सवाल वही है— क्या यह जांच केवल फाइलों का पेट भरने के लिए है या फिर दोषी स्वास्थ्य कर्मियों पर गाज गिरेगी? बस्ती की जनता यह देख रही है कि सरकारी अस्पतालों में गरीब का बच्चा पैदा होना क्या अब भी एक 'जोखिम' बना रहेगा? जब तक सिस्टम की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक 'जांच' शब्द केवल पीड़ित परिवार को बहलाने का एक जरिया मात्र बना रहेगा।
- बस्ती से हैरान करने वाली खबर: पत्नी से छुटकारा मिला तो पति ने 9 किमी तक दंडवत यात्रा की, बोला– अब शांति महसूस कर रहा हूं बस्ती जिले के सोनहा थाना क्षेत्र से एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है। यहां एक युवक ने वैवाहिक कलह से परेशान होकर भगवान के दरबार में ऐसी मन्नत मान ली थी, जिसे पूरा करने में उसे अपनी पूरी ताकत झोंकनी पड़ी। क्या है पूरा मामला? भानपुर गांव के एक युवक की शादी करीब दो वर्ष पहले हुई थी। शुरुआत में सब ठीक रहा, लेकिन समय बीतने के साथ पति-पत्नी के बीच तकरार बढ़ती गई। युवक का कहना है कि वह लगातार मानसिक तनाव में था और रोज़मर्रा के झगड़ों से तंग आ चुका था। आख़िरकार उसने भानपुर से 9 किलोमीटर दूर स्थित मां बैड़वा समय माता के पौराणिक मंदिर में जाकर अरदास की— “हे माता, अगर मुझे इस रिश्ते के तनाव से छुटकारा मिल गया, तो मैं गांव से आपके दरबार तक दंडवत यात्रा करूंगा।” अदालत का फैसला और दंडवत यात्रा शुरू मन्नत के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच तलाक का फैसला हो गया। फैसला आते ही युवक ने अपनी प्रतिज्ञा पूरी करने का संकल्प ले लिया। रविवार सुबह, बिना अन्न-जल ग्रहण किए, वह घर से निकला और दंडवत लेट-लेटकर 9 किलोमीटर लंबी यात्रा शुरू कर दी। यात्रा के दौरान उसके माता-पिता और गांव के कुछ लोग साथ चलते रहे। माहौल में धार्मिक रंग घुल गया— “जय श्री राम!”, “जय बजरंगबली!” के जयकारों से रास्ता गूंजता रहा। क्या बोले युवक? युवक का कहना है “दो सालों से मानसिक रूप से बहुत परेशान था। अब फैसला मेरे पक्ष में आया है। मन को शांति मिली है। माता ने मेरी सुन ली।” गांव में चर्चा का विषय पूरा मामला गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोग इसे आस्था से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे समाज में बढ़ती वैवाहिक कड़वाहट का उदाहरण बता रहे हैं।1
- सिद्धार्थ गैस एजेंसी की मनमानी: महिला उपभोक्ताओं से बदसलूकी और नियम ताक पर सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश सरकार एक ओर जीरो टॉलरेंस और सुशासन का दावा करती है, वहीं जनपद के डुमरियागंज क्षेत्र स्थित चौधरी HP गैस ग्रामीण वितरक, चेतिया में उपभोक्ताओं का उत्पीड़न चरम पर है। ताज़ा मामला एक महिला उपभोक्ता के साथ हुई अभद्रता का है, जिसने गैस एजेंसी के संचालन और वहां मौजूद रसूखदार लोगों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विद्यालय छोड़ एजेंसी पर 'ड्यूटी' दे रहे शिक्षक एजेंसी की कार्यप्रणाली में सबसे चौंकाने वाला पहलू मालिक के पुत्र हरिश्चंद्र की भूमिका है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, हरिश्चंद्र शिक्षा विभाग में सरकारी अध्यापक के पद पर होरिलापुरा, खुनियांव में तैनात हैं। लेकिन विडंबना देखिए, जिस वक्त उन्हें विद्यालय में बच्चों का भविष्य संवारना चाहिए, उस वक्त वे गैस एजेंसी पर मौजूद रहकर उपभोक्ताओं को धमकाते नजर आते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि 'गुरुजी' आए दिन विद्यालय से नदारद रहकर एजेंसी का कामकाज संभालते हैं और विरोध करने वाले सीधे-सादे उपभोक्ताओं, खासकर महिलाओं के साथ अमर्यादित व्यवहार और दबंगई करने से बाज नहीं आते। क्या रसूख के आगे बौना है प्रशासन? गैस एजेंसी पर होने वाली इस मनमानी और सरकारी कर्मचारी की अवैध मौजूदगी ने विभाग की मिलीभगत की ओर भी इशारा किया है। एक सरकारी सेवक का अपने कार्यस्थल से गायब रहकर व्यावसायिक प्रतिष्ठान पर बैठकर जनता को प्रताड़ित करना न केवल सेवा नियमावली का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक शिथिलता का प्रमाण भी है। मुख्य बिंदु जो जांच का विषय हैं: ड्यूटी से गायब: क्या शिक्षा विभाग को अपने शिक्षक के विद्यालय से गायब रहने की जानकारी है? उपभोक्ता उत्पीड़न: महिला उपभोक्ता के साथ हुई बदसलूकी पर पुलिस और रसद विभाग मौन क्यों है? अवैध हस्तक्षेप: एक सरकारी शिक्षक किस हैसियत से गैस एजेंसी के विवादों में हस्तक्षेप कर उपभोक्ताओं को धमका रहा है? क्षेत्रीय जनता ने जिलाधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी से मांग की है कि ऐसे 'लापरवाह' शिक्षक और 'बेलगाम' गैस एजेंसी पर तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि आम जनता को इस मानसिक और आर्थिक शोषण से निजात मिल सके। रिपोर्ट: अजीत मिश्रा (खोजी) ब्यूरो चीफ, बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)2
- संतकबीरनगर। जनपद के खलीलाबाद स्थित सूर्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल में नए शैक्षणिक सत्र को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। विद्यालय परिसर में इन दिनों प्रवेश प्रक्रिया को लेकर अभिभावकों और छात्रों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। रजिस्ट्रेशन काउंटर पर सुबह से ही अभिभावकों की लंबी कतारें लग रही हैं, जहां वे अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। विद्यालय प्रशासन के अनुसार आगामी 2 अप्रैल से नए सत्र की औपचारिक शुरुआत की जाएगी। प्रधानाचार्य रविनेश श्रीवास्तव ने बताया कि सभी शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं, जिससे सत्र का संचालन व्यवस्थित रूप से किया जा सके। उन्होंने पुराने छात्रों से समय रहते नवीनीकरण कराने तथा नए अभ्यर्थियों से शीघ्र पंजीकरण कराने की अपील की है। विद्यालय में आधुनिक शिक्षा पद्धति को बढ़ावा देते हुए डिजिटल लाइब्रेरी, प्रोजेक्टर आधारित कक्षाएं और तकनीकी संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है। इसका उद्देश्य छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ तकनीकी रूप से दक्ष बनाना है। विद्यालय प्रबंधन ने इस वर्ष भी छात्रों के लिए प्रोत्साहन योजना जारी रखते हुए घोषणा की है कि 10वीं उत्तीर्ण कर 11वीं में प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं को निशुल्क टैबलेट प्रदान किया जाएगा। इस पहल से छात्रों में डिजिटल शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रबंधक डॉ. उदय प्रताप चतुर्वेदी ने कहा कि संस्थान का लक्ष्य केवल शैक्षणिक ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और उन्हें संस्कारयुक्त वातावरण उपलब्ध कराना भी प्राथमिकता में शामिल है। विद्यालय परिवार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से छात्रों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।1
- खलीलाबाद, संतकबीरनगर: शहर के मशहूर रेस्टोरेंट कस्तूरी बेकर्स (Kasturi Bakers) की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। गुणवत्ता के लिए जाने जाने वाले इस प्रतिष्ठान पर एक ग्राहक को बासी और खराब छोला भटूरा परोसने का गंभीर आरोप लगा है। इस घटना के बाद से स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। क्या है पूरा मामला? मिली जानकारी के अनुसार, एक ग्राहक ने रेस्टोरेंट से छोला भटूरा पार्सल करवाया था। घर जाकर जैसे ही ग्राहक ने खाने को चखा, उसे स्वाद में कड़वाहट और दुर्गंध महसूस हुई। खाना पूरी तरह से बासी और सेहत से खिलवाड़ करने लायक था। प्रबंधन का अड़ियल रवैया हैरानी की बात यह रही कि जब पीड़ित ग्राहक ने इसकी शिकायत रेस्टोरेंट स्टाफ और प्रबंधन से की, तो उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। आरोप है कि रेस्टोरेंट प्रबंधन ने अपनी गलती सुधारने के बजाय मामले को टालने की कोशिश की, जिससे ग्राहक का गुस्सा और बढ़ गया। "हम पैसे देकर ताजा भोजन की उम्मीद करते हैं, लेकिन शहर के इतने बड़े रेस्टोरेंट में अगर बासी खाना मिलेगा, तो आम आदमी की सेहत का क्या होगा?" — नाराज ग्राहक सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल घटना के बाद मौके पर काफी बहस हुई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। नेटिजन्स रेस्टोरेंट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं और खाद्य सुरक्षा विभाग से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं सावधान! संतकबीरनगर के 'कस्तूरी बेकर्स' में मिल रहा है बासी खाना। ग्राहक ने जब छोला-भटूरा पार्सल कराया तो निकला खराब। शिकायत पर भी नहीं पसीजा रेस्टोरेंट प्रबंधन। क्या ऐसे सुरक्षित रहेगी आपकी सेहत? 😡 #SantKabirNagar #KasturiBakers #FoodSafety #Khalilabad #ViralVideo UPNews1
- यह क्षेत्र खदरा के नाम से जाना जाता है। खदरा ,ग्राम पंचायत भगवानपुर गांव लटपुरवा के अंतर्गत आता है । (ग्राम पंचायत भगवानपुर ब्लॉक बघौली तहसील खलीलाबाद जनपद संत कबीर नगर उत्तर प्रदेश)! जैसा कि स्पषज़्झंजजदिखाई दे रहा है यह रास्ता गांव से निकलकर पूरा और पश्चिम की तरफ जाता है इस रास्ते के ऊपर मिट्टी डालकर इंटरलॉकिंग करवाना बहुत जरूरी है रास्ते मुखर चुके हैं इसके वजह से यातायात प्रभावित होता है आता शासन प्रशासन को क्षेत्र अति शीघ्र सम्मान में लेना चाहिए और रास्ते का नवीनीकरण करना चाहिए।1
- महुली पुलिस द्वारा कार्यवाही करते हुए लूट से सम्बन्धित 01 अभियुक्त को घटना के 24 घंटे के अन्दर किया गया गिरफ्तार* *लूट के मामले का सफल अनावरण करते हुए 01 अदद अवैध तमंचा .12 बोर, 01 अदद जिंदा कारतूस .12 बोर, लूट का 01 अदद काला बैग (मय 01 अदद बाट माप मशीन, मोबाईल चार्जर व 02 अदद फर्म की रसीद) किया गया बरामद* पुलिस अधीक्षक जनपद संतकबीरनगर *श्री संदीप कुमार मीना* के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक *श्री सुशील कुमार सिंह* के मार्गदर्शन व क्षेत्राधिकारी धनघटा *श्री अभयनाथ मिश्र* के निकट पर्यवेक्षण में जनपद संतकबीरनगर में अपराध एवं अपराधियो के विरुद्ध चलाये जा रहे अभियान के क्रम में थानाध्यक्ष महुली *श्री दुर्गेश कुमार पाण्डेय* के नेतृत्व में गठित टीम द्वारा कार्यवाही करते हुए आज दिनाँक 30.03.2026 को लूट की घटना का सफल अनावरण करते हुए लूट में संलिप्त 01 अभियुक्त गुलशन गौतम पुत्र कन्हैया लाल निवासी भगौतीपुर थाना महुली जनपद संतकबीरनगर को अगया उर्फ सिदाही मोड़ से गिरफ्तार किया गया । *घटना का संक्षिप्त विवरणः-* वादी श्री दानिश पुत्र अजीजुल्लाह ग्राम रजनौली थाना महुली जनपद संतकबीरनगर द्वारा आज दिनाँक 30.03.2026 को थाना महुली पर प्रार्थना पत्र दिया गया कि मैं धनघटा क्षेत्र में एक मुर्गीफार्म में काम करता हूँ, आज दिनाँक 30.03.2026 को सुबह के समय मै ग्राम भगौतीपुर स्थित मुर्गीफार्म से मुर्गी लोड कराने के बाद बाईक से घर जा रहा था कि भगौतीपुर पुलिया पर पहुँचते ही अज्ञात व्यक्ति द्वारा मेरी बाईक रोककर मेरी कनपटी पर कट्टा सटा दिया और मेरा बैग जिसमें बाट माप व चार्ज कापी रखा हुआ था लेकर भाग गया । प्राप्त प्रार्थना पत्र के आधार पर थाना महुली पर मु0अ0सं0 110/26 धारा 309(4) बीएनएस का अभियोग पंजीकृत किया गया था । *गिरफ्तारी व बरामदगी के आधार पर अभियोग उपरोक्त में धारा 317(2) बीएनएस व धारा 3/25 आर्म्स एक्ट की बढोत्तरी की गयी ।* *गिरफ्तार अभियुक्त का नाम व पताः-* गुलशन गौतम पुत्र कन्हैया लाल निवासी भगौतीपुर थाना महुली जनपद संतकबीरनगर । *बरामदगी का विवरणः-* 01 अदद अवैध तमंचा .12 बोर । अदद जिंदा कारतूस .12 बोर । लूट का 01 अदद काला बैग (मय 01 अदद बाट माप मशीन, मोबाईल चार्जर व 02 अदद फर्म की रसीद) । *पूछताछ विवरणः-* गिरफ्तार किये गये अभियुक्त से पूछताछ किया गया तो बताया कि मैं पिछले कई दिनो से इनके आने जाने की रेकी कर रहा था, आज सुबह मे भगौतीपुर पुलिया के पास मैं पैसे की लालच में अवैध असलहा सटाकर मुर्गी फार्म के सुपरवाईजर का बैग छीनकर भाग गया था । *गिरफ्तार करने वाले अधिकारी/कर्मचारीगणः-* उ0नि0 श्री नागेन्द्र कुमार सिंह, उ0नि0 श्री अजीत कुमार सिंह, हे0का0 नुरुद्दीन खान, का0 सुनील कुमार सिंह, का0 राजमंगल यादव, का0 अरविन्द यादव ।1
- (ब्यूरो संतकबीरनगर) ग्राम स्वराज्य धनघटा। पुलिस अधीक्षक जनपद संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन व क्षेत्राधिकारी धनघटा अभयनाथ मिश्र के निकट पर्यवेक्षण में जनपद संतकबीरनगर में अपराध एवं अपराधियो के विरुद्ध चलाये जा रहे अभियान के क्रम में थानाध्यक्ष महुली दुर्गेश कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में गठित टीम द्वारा कार्यवाही करते हुए आज दिनाँक 30.03.2026 को लूट की घटना का सफल अनावरण करते हुए लूट में संलिप्त 01 अभियुक्त गुलशन गौतम पुत्र कन्हैया लाल निवासी भगौतीपुर थाना महुली जनपद संतकबीरनगर को अगया उर्फ सिदाही मोड़ से गिरफ्तार किया गया । घटना का संक्षिप्त विवरणवादी दानिश पुत्र अजीजुल्लाह ग्राम रजनौली थाना महुली जनपद संतकबीरनगर द्वारा आज दिनाँक 30.03.2026 को थाना महुली पर प्रार्थना पत्र दिया गया कि मैं धनघटा क्षेत्र में एक मुर्गीफार्म में काम करता हूँ, आज दिनाँक 30.03.2026 को सुबह के समय मै ग्राम भगौतीपुर स्थित मुर्गीफार्म से मुर्गी लोड कराने के बाद बाईक से घर जा रहा था कि भगौतीपुर पुलिया पर पहुँचते ही अज्ञात व्यक्ति द्वारा मेरी बाईक रोककर मेरी कनपटी पर कट्टा सटा दिया और मेरा बैग जिसमें बाट माप व चार्ज कापी रखा हुआ था लेकर भाग गया । प्राप्त प्रार्थना पत्र के आधार पर थाना महुली पर मु0अ0सं0 110/26 धारा 309(4) बीएनएस का अभियोग पंजीकृत किया गया था । गिरफ्तारी व बरामदगी के आधार पर अभियोग उपरोक्त में धारा 317(2) बीएनएस व धारा 3/25 आर्म्स एक्ट की बढोत्तरी की गयी4
- अजीत मिश्रा (खोजी) बस्ती। लालगंज थाना क्षेत्र का बनकटी बाज़ार इन दिनों शराब माफियाओं और आबकारी विभाग के 'अपवित्र गठबंधन' का गवाह बना हुआ है। जहाँ प्रदेश सरकार कानून के राज का दावा कर रही है, वहीं बनकटी में नियमों को जूते की नोक पर रखकर सुबह 6 बजते ही दुकान के शटर के नीचे से मौत का सामान (देशी शराब) बिकना शुरू हो जाता है। शटर के नीचे से 'सेटिंग' का खेल हैरानी की बात यह है कि जिस वक्त आम नागरिक अपने दिन की शुरुआत ईश-प्रार्थना या सैर-सपाटे से करता है, बनकटी बाज़ार में पियक्कड़ों का हुजूम जमा हो जाता है। सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए, निर्धारित समय से घंटों पहले ही शराब की बिक्री शुरू कर दी जाती है। यह सब कुछ इतनी बेखौफ तरीके से हो रहा है कि मानो इन्हें किसी बड़े 'सफेदपोश' या विभागीय अधिकारी का सीधा अभयदान प्राप्त हो। महिलाओं और बच्चों का निकलना दूभर अवैध बिक्री के कारण सुबह-सुबह शराबियों के जमावड़े और उनकी अभद्र भाषा ने क्षेत्र के माहौल को पूरी तरह दूषित कर दिया है। स्कूल जाने वाले बच्चों और मंदिर जाने वाली महिलाओं का उस रास्ते से गुजरना दूभर हो गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग को कई बार सूचित किया गया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है। ऐसा प्रतीत होता है कि आबकारी विभाग ने शराब माफियाओं के आगे घुटने टेक दिए हैं या फिर उनकी जेबें माफिया के 'चंदे' से गरम हैं। प्रशासन की साख को खुली चुनौती बनकटी बाज़ार का यह संगठित भ्रष्टाचार सीधे तौर पर जिला प्रशासन और शासन की साख को चुनौती दे रहा है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और शिकायतों पर आंखें मूंद लें, तो जनता किसके पास जाए? क्या आबकारी विभाग के पास इतनी शक्ति भी नहीं कि वह सुबह 6 बजे अवैध रूप से खुल रहे इन ठिकानों पर ताला जड़ सके? या फिर विभाग खुद इस अवैध कमाई का हिस्सेदार है? जनता की मांग: अब आर-पार की कार्रवाई हो क्षेत्र की जनता में इस लचर कार्यप्रणाली को लेकर भारी आक्रोश है। लोग अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर कड़ी कार्रवाई चाहते हैं। सवाल यह है कि क्या बस्ती का जिला प्रशासन इन भ्रष्ट अधिकारियों और शराब माफियाओं के गठजोड़ पर नकेल कसेगा? या फिर इसी तरह 'सुशासन' के नाम पर भ्रष्टाचार का यह काला कारोबार फलता-फूलता रहेगा? ब्यूरो चीफ, बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।1