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एक बिहारी सौ पर भारी, ये नारा हकीकत कैसे बनेगा? देखिए वीडियो एक बिहारी सौ पर भारी, ये नारा हकीकत कैसे बनेगा?देखिए वीडियो
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एक बिहारी सौ पर भारी, ये नारा हकीकत कैसे बनेगा? देखिए वीडियो एक बिहारी सौ पर भारी, ये नारा हकीकत कैसे बनेगा?देखिए वीडियो
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- मगरमच्छ को भी घड़ियाली आंसू के अपने फायदा मिलता है..!!1
- सीसीटीवी फुटेज ने खोला राज, जमीन विवाद में हुई हत्या में निर्दोषों को फंसाने की साजिश बेनकाब, कैमरे में दिखे सिर्फ परिवार के सदस्य बेतिया/बैरिया। पश्चिम चंपारण के बैरिया थाना क्षेत्र अंतर्गत भितहा मठिया गांव में एक सप्ताह पूर्व हुए खूनी संघर्ष और विजय पटेल की हत्या के मामले में आज एक नया और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। जिस घटना में पहले 14 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी, अब उस मामले में सीसीटीवी फुटेज ने सच्चाई की पूरी परतें खोल दी हैं। सामने आए वीडियो साक्ष्यों ने उन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं जिनमें बाहरी लोगों की संलिप्तता बताई गई थी। विदित हो कि बीते शुक्रवार को घरारी की जमीन के बंटवारे को लेकर पिता, पुत्र और भाइ भतीजो के बीच विवाद इतना बढ़ गया था कि धारदार हथियारों और भाले से हमला किया गया। इस हिंसक झड़प में विजय पटेल की जान चली गई थी और अखिलेश पटेल समेत अन्य भाई गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उस समय भाले के वार से अखिलेश की स्थिति अत्यंत नाजुक हो गई थी। घटना के तत्काल बाद पुलिसिया कार्रवाई और परिजनों के बयान के आधार पर घर के ही कुछ लोगों और अन्य ग्रामीणों को इस हत्याकांड में आरोपी बनाते हुए एफआईआर दर्ज कराई गई थी। हालांकि, घटनास्थल पर लगे कैमरों की फुटेज खंगालने के बाद अब यह स्पष्ट होता दिख रहा है कि वारदात के समय वहां केवल परिवार के ही सदस्य मौजूद थे। सीसीटीवी फुटेज में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे अपनों ने ही अपनों पर हमला किया और उस समय वहां अन्य लोगों की कोई मौजूदगी नहीं थी। इस खुलासे के बाद यह साफ हो गया है कि आपसी रंजिश के कारण निर्दोष ग्रामीणों को इस संगीन मामले में घसीटने की कोशिश की गई है। इस नए साक्ष्य के सामने आने के बाद अब बैरिया थाना पुलिस की जांच की दिशा भी बदल सकती है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर काफी आक्रोश है कि बिना ठोस सबूतों के इतने बड़े पैमाने पर लोगों को झूठा कैसे फंसाया गया। पुलिस द्वारा घटना के दिन ही परिवार के 3 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया था, परंतु अब भी कुछ अन्य लोग इस मामले में फंसे हुए हैं जिनकी संलिप्तता संदिग्ध है। ग्रामीणों और निष्पक्ष जांच की मांग करने वालों का कहना है कि पुलिस को इस मामले की गहराई से जांच करनी चाहिए ताकि किसी भी निर्दोष को सजा न मिले। फिलहाल, इस मामले से संबंधित एक वीडियो प्राप्त हुआ है जिसमें घटनाक्रम की कुछ झलकियां साफ दिख रही हैं, हालांकि आगे की वीडियो में क्या सच्चाई छिपी है और पूरी घटना का क्रम क्या रहा, यह गहन जांच का विषय है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज को आधिकारिक तौर पर जांच में शामिल किया जा रहा है और फुटेज में दिख रहे असली दोषियों की धरपकड़ तेज कर दी गई है। अब पुलिस के सामने बड़ी चुनौती उन लोगों को न्याय दिलाने की है जिन्हें साजिश के तहत इस विवाद का हिस्सा बनाया गया था। हालांकि अपडेट न्यूज़ बिहार इस वायरल वीडियो की पूर्णतः पुष्टि नहीं करता है और मामले की निष्पक्ष जांच की उम्मीद करता है। बेतिया/बैरिया। पश्चिम चंपारण के बैरिया थाना क्षेत्र अंतर्गत भितहा मठिया गांव में एक सप्ताह पूर्व हुए खूनी संघर्ष और विजय पटेल की हत्या के मामले में आज एक नया और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। जिस घटना में पहले 14 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी, अब उस मामले में सीसीटीवी फुटेज ने सच्चाई की पूरी परतें खोल दी हैं। सामने आए वीडियो साक्ष्यों ने उन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं जिनमें बाहरी लोगों की संलिप्तता बताई गई थी। विदित हो कि बीते शुक्रवार को घरारी की जमीन के बंटवारे को लेकर पिता, पुत्र और भाइ भतीजो के बीच विवाद इतना बढ़ गया था कि धारदार हथियारों और भाले से हमला किया गया। इस हिंसक झड़प में विजय पटेल की जान चली गई थी और अखिलेश पटेल समेत अन्य भाई गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उस समय भाले के वार से अखिलेश की स्थिति अत्यंत नाजुक हो गई थी। घटना के तत्काल बाद पुलिसिया कार्रवाई और परिजनों के बयान के आधार पर घर के ही कुछ लोगों और अन्य ग्रामीणों को इस हत्याकांड में आरोपी बनाते हुए एफआईआर दर्ज कराई गई थी। हालांकि, घटनास्थल पर लगे कैमरों की फुटेज खंगालने के बाद अब यह स्पष्ट होता दिख रहा है कि वारदात के समय वहां केवल परिवार के ही सदस्य मौजूद थे। सीसीटीवी फुटेज में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे अपनों ने ही अपनों पर हमला किया और उस समय वहां अन्य लोगों की कोई मौजूदगी नहीं थी। इस खुलासे के बाद यह साफ हो गया है कि आपसी रंजिश के कारण निर्दोष ग्रामीणों को इस संगीन मामले में घसीटने की कोशिश की गई है। इस नए साक्ष्य के सामने आने के बाद अब बैरिया थाना पुलिस की जांच की दिशा भी बदल सकती है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर काफी आक्रोश है कि बिना ठोस सबूतों के इतने बड़े पैमाने पर लोगों को झूठा कैसे फंसाया गया। पुलिस द्वारा घटना के दिन ही परिवार के 3 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया था, परंतु अब भी कुछ अन्य लोग इस मामले में फंसे हुए हैं जिनकी संलिप्तता संदिग्ध है। ग्रामीणों और निष्पक्ष जांच की मांग करने वालों का कहना है कि पुलिस को इस मामले की गहराई से जांच करनी चाहिए ताकि किसी भी निर्दोष को सजा न मिले। फिलहाल, इस मामले से संबंधित एक वीडियो प्राप्त हुआ है जिसमें घटनाक्रम की कुछ झलकियां साफ दिख रही हैं, हालांकि आगे की वीडियो में क्या सच्चाई छिपी है और पूरी घटना का क्रम क्या रहा, यह गहन जांच का विषय है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज को आधिकारिक तौर पर जांच में शामिल किया जा रहा है और फुटेज में दिख रहे असली दोषियों की धरपकड़ तेज कर दी गई है। अब पुलिस के सामने बड़ी चुनौती उन लोगों को न्याय दिलाने की है जिन्हें साजिश के तहत इस विवाद का हिस्सा बनाया गया था। हालांकि अपडेट न्यूज़ बिहार इस वायरल वीडियो की पूर्णतः पुष्टि नहीं करता है और मामले की निष्पक्ष जांच की उम्मीद करता है।1
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- Post by धर्मेंद्र गुप्ता1
- कुशीनगर। जनपद के जटहां थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत कटाई भरपुरवा बांध पर अवैध बालू खनन का बड़ा खेल उजागर हुआ है। मंगलवार सुबह खैरा टोला के पास केबी बांध के ठोकर नंबर-4 पर स्थानीय दबंग बालू माफियाओं द्वारा खुलेआम खनन कर बालू की तस्करी की जा रही है। जीरो ग्राउंड रिपोर्ट में साफ देखा गया कि करीब तीन ट्रैक्टरों में बालू की लोडिंग की जा रही थी, जिसे मुंहमांगी कीमत पर बेचा जा रहा है। गौरतलब है कि गांवों को बाढ़ से सुरक्षित रखने के लिए बनाए गए केबी बांध पर हर साल सरकार लाखों रुपये खर्च करती है, लेकिन उसी बांध को बालू माफिया खोखला करने में जुटे हैं। वर्षों से चल रहे इस अवैध कारोबार के बावजूद स्थानीय प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। इलाके में शांति और सुरक्षा के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत में संगठित तरीके से हो रहा यह अवैध खनन न सिर्फ सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि भविष्य में बांध की मजबूती पर भी खतरा पैदा कर रहा है। अनुमान है कि इस अवैध कारोबार से हर साल राजस्व विभाग को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। मामले में तहसील खड्डा प्रशासन की निष्क्रियता भी सामने आई है। जब इस संबंध में जिला खनन अधिकारी अभिषेक सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक बालू माफियाओं का यह खेल यूं ही चलता रहेगा और प्रशासन कब सख्त कदम उठाएगा।1
- तथागत गौतम बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी आध्यात्मिक पहचान को मजबूत करने जा रहा है। आज मंगलवार से यहां अंतरराष्ट्रीय बौद्ध कॉन्क्लेव का भव्य शुभारंभ होने जा रहा है, जिसमें दुनिया भर से श्रद्धालु और बौद्ध भिक्षु शामिल होंगे। धम्म की इस पावन धरती पर वियतनाम, थाईलैंड, जापान, श्रीलंका और नेपाल समेत कई देशों के प्रतिनिधि जुटेंगे। यह आयोजन सिर्फ आस्था का नहीं, बल्कि वैश्विक एकता, शांति और करुणा का प्रतीक बनने जा रहा है। महापरिनिर्वाण मंदिर परिसर में “धम्म डायलॉग” के जरिए विश्व शांति का संदेश दिया जाएगा, वहीं शांति वन में साधना और कला के माध्यम से आध्यात्मिक अनुभव को और गहरा किया जाएगा। इस भव्य आयोजन में सांस्कृतिक रंग भी देखने को मिलेगा। मशहूर गायक कैलाश खेर और लोकगायक रितेश पांडेय अपनी प्रस्तुतियों से माहौल को भक्ति और उत्साह से भर देंगे। प्रशासन ने भी तैयारियां पूरी कर ली हैं—सुरक्षा से लेकर ट्रैफिक तक हर व्यवस्था को दुरुस्त किया गया है ताकि देश-विदेश से आने वाले मेहमानों को कोई असुविधा न हो। ✨ कुल मिलाकर, कुशीनगर एक बार फिर दुनिया को यह संदेश देने जा रहा है कि शांति, करुणा और भाईचारा ही मानवता का असली मार्ग है। 🙏 “बुद्ध की धरती से उठेगा संदेश… शांति ही है सबसे बड़ी शक्ति”1
- माधोपुर: डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर द्वारा 'मखाना उत्पादन की तकनीक और प्रसंस्करण' पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ जल-जमाव वाले क्षेत्रों के बेहतर उपयोग के लिए जागरूक करना था। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने मखाना खेती के आधुनिक और तकनीकी पहलुओं को साझा किया: डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान, उन्होंने जोर दिया कि वर्तमान जलवायु परिवर्तन की अनिश्चितताओं के बीच मखाना एक 'बीमा फसल' की तरह है। उन्होंने कहा, "जल-जमाव वाले क्षेत्रों में पारंपरिक धान के बजाय यदि किसान वैज्ञानिक पद्धति से मखाना की खेती करें, तो वे कम लागत में अधिक लाभ सुनिश्चित कर सकते हैं।" डॉ. हर्षा मखाना क्षेत्र में बिहार की वैश्विक और राष्ट्रीय स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बिहार देश के कुल उत्पादन का लगभग 90% हिस्सा प्रदान करता है। उन्होंने किसानों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण मखाना उत्पादन से न केवल स्थानीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी बेहतर मूल्य प्राप्त किया जा सकता है। डॉ. जगपाल ने ने एकीकृत मखाना-सह-मछली पालन' तकनीक को आय बढ़ाने का सबसे सटीक जरिया बताया। उनके अनुसार, "मखाना के साथ मछली पालन करने से खाद का खर्च 30% तक कम हो जाता है क्योंकि मछलियों का अपशिष्ट पौधों को पोषक तत्व प्रदान करता है, जिससे जल स्रोत का दोहरा उपयोग और दोहरी आय संभव है।" डॉ. चेलपुरी रामुलु ने प्रसंस्करण में तकनीक के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने सुझाव दिया कि, "मखाना की कटाई और सफाई के लिए उन्नत कृषि यंत्रों का उपयोग अनिवार्य है। इससे न केवल किसानों की शारीरिक मेहनत कम होती है, बल्कि बीजों की चमक और गुणवत्ता बनी रहती है, जिससे बाजार में ऊंचे दाम मिलते हैं।" डॉ. सौरभ दुबे ने मखाना की खेती के नए आयामों की जानकारी देते हुए कहा कि, "अब मखाना केवल पुराने तालाबों का मोहताज नहीं है। 'खेत-प्रणाली' तकनीक से इसे धान के खेत की तरह सामान्य खेतों में भी उगाया जा सकता है, जो पारंपरिक खेती की तुलना में किसानों की आय को दोगुना करने का सामर्थ्य रखती है। इस कार्यक्रम में 50 से अधिक किसानों ने भाग लिया !4
- योगापट्टी लौकरिया गांव में 9 फीट लंबा अजगर मिलाः ग्रामीणों में दहश्त, वन विभाग ने रेस्क्यू किया1