सिंहपुर में कानून का 'चीरहरण': महिला जन-प्रतिनिधि को अधमरा कर क्या साबित करना चाहते हैं दबंग? जिले के सिंहपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत लालपुर गाँव में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। जहाँ एक पूर्व जनपद सदस्य और पूर्व जिला मंत्री, मीना कुशवाहा पर जानलेवा हमला कर उनकी कमर की पसली तोड़ दी गई। अस्पताल के बिस्तर पर लाचार पड़ी मीना कुशवाहा की हालत दबंगों के बेखौफ हौसलों की गवाही दे रही है। विवाद की असली जड़: आम का पेड़ या करोड़ों की जमीन? दिखने में यह विवाद खेत में लगे एक आम के पेड़ से फल तोड़ने जैसा मामूली नजर आ रहा है, लेकिन गहराई में जाने पर कहानी कुछ और ही बयां करती है। पुरानी रंजिश: सूत्रों की मानें तो जिस जमीन को मीना कुशवाहा ने खरीदा है, उस पर भू-माफियाओं की गिद्ध दृष्टि काफी समय से है। अवैध उत्खनन का साया: क्या यह हमला मीना जी की जमीन से लगी नदी में चल रहे अवैध रेत उत्खनन के विरोध की सजा है? क्या दबंगों को डर था कि एक सक्रिय महिला जन प्रतिनिधि उनके काले कारोबार में बाधा बन सकती है? बेखौफ आरोपी: कानून का भय या सत्ता का संरक्षण? घटना के वक्त जब मीना कुशवाहा ने आम तोड़ने का विरोध किया, तो आरोपियों ने उन पर लाठियों और पत्थरों से हमला कर दिया। इस हमले में उनकी कमर की हड्डी (पसली) टूट गई है। पुलिस ने आरोपी कुलदीप पाण्डेय , धर्मेन्द्र पाण्डेय , पुष्पेन्द्र पाण्डेय और मंदीप पाण्डेय के खिलाफ BNS की विभिन्न धाराओं (296, 115(2), 351(3), 3(5)) के तहत मामला तो दर्ज कर लिया है, लेकिन सवाल अभी भी बरकरार हैं। "सिंहपुर में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं? क्या प्रशासन का इकबाल खत्म हो चुका है, या फिर इन गुंडों को किसी सफेदपोश का वरदहस्त प्राप्त है?" प्रशासनिक बयान शिवाली चतुर्वेदी (DSP): "पीड़िता की शिकायत पर 4 व्यक्तियों के विरुद्ध FIR दर्ज कर जांच की जा रही है।" आशीष झारिया (थाना प्रभारी): "आवेदन के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है, जल्द ही अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।" खंपरिया का चश्मा 👓 (नजरिया) महज आम तोड़ने के लिए किसी की पसली तोड़ देना गले नहीं उतरता। यह सीधा-सीधा जमीन कब्जाने और अवैध उत्खनन के रास्ते से 'कांटा' हटाने की साजिश प्रतीत होती है। अगर एक पूर्व जनपद सदस्य सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता का क्या होगा? सिंहपुर पुलिस को अब 'कागजी कार्रवाई' से आगे बढ़कर 'कड़ी कार्रवाई' करनी होगी, ताकि अपराधियों के मन में कानून का खौफ दोबारा पैदा हो सके। - शिवनारायण द्विवेदी शहडोल | खमपरिया का चश्मा 👓 रिपोर्ट: शिवनारायण द्विवेदी शहडोल जिले के सिंहपुर थाना क्षेत्र से मानवता को शर्मसार करने वाली एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि समाज की उस लाचारी को भी उजागर किया है जहाँ एक महिला जन-प्रतिनिधि सुरक्षित नहीं है। क्रूरता की सारी हदें पार: लात-घूंसे और पत्थरों से हमला पूर्व जनपद सदस्य और पूर्व जिला मंत्री मीना कुशवाहा को जिस बेरहमी से पीटा गया, वह रूह कंपा देने वाला है। आरोपियों ने महिला को केवल मारा ही नहीं, बल्कि उनके निजी अंगों पर वार किए, जिससे उनकी हालत अत्यंत नाजुक हो गई है। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, मारपीट इतनी भीषण थी कि महिला को खून की उल्टियां होने लगीं और उनकी कमर की पसलियां तक टूट गई हैं। एक महिला को इस तरह लहूलुहान कर देना यह दर्शाता है कि हमलावरों के मन में कानून का रत्ती भर भी खौफ नहीं है। आम तोड़ने का बहाना या जमीन हड़पने की गहरी साजिश? दिखने में यह विवाद केवल 'आम तोड़ने' जैसी छोटी बात से शुरू हुआ लगता है, लेकिन इसकी जड़ें कहीं गहरी हैं। चर्चा है कि यह हमला मीना जी द्वारा खरीदी गई कीमती जमीन पर नजर गड़ाए बैठे दबंगों की एक सोची-समझी साजिश है। क्या यह हमला उस जमीन को हड़पने के लिए डराने का एक तरीका है? या फिर मामला नदी में चल रहे अवैध उत्खनन से जुड़ा है, जिसका विरोध करना भारी पड़ा? पुराना इतिहास: पहले भी घर में घुसकर कर चुके हैं मारपीट ये आरोपी कोई नए नहीं हैं। बताया जा रहा है कि लगभग एक वर्ष पूर्व भी पुष्पेंद्र, धर्मेंद्र और यादवेन्द्र पांडेय ने अशोक तिवारी के घर में घुसकर इसी तरह तांडव मचाया था। जब अपराधी बार-बार अपराध करके भी खुलेआम घूमते हैं, तो उनके हौसले बुलंद होना लाजिमी है। सिंहपुर पुलिस द्वारा कुलदीप, धर्मेंद्र, पुष्पेंद्र और मंदीप पांडेय के विरुद्ध धाराएं तो दर्ज कर ली गई हैं, लेकिन क्या ये धाराएं उस लाचार महिला के साथ हुए अन्याय का हिसाब कर पाएंगी? सवाल गहरा है: आखिर सिंहपुर क्षेत्र में इन दबंगों को किसका संरक्षण प्राप्त है? क्या एक महिला को अधमरा कर देना ही 'शक्ति प्रदर्शन' है? पुलिस प्रशासन की ढिलाई ही है जो आज एक जन-प्रतिनिधि अस्पताल के बिस्तर पर अपनी जिंदगी की जंग लड़ रही है। अब समय है कि प्रशासन केवल FIR दर्ज न करे, बल्कि ऐसी कठोर कार्रवाई करे कि भविष्य में किसी भी महिला की तरफ हाथ उठाने से पहले अपराधियों की रूह कांप जाए। #JusticeForMeenaKushwaha #ShahdolNews #CrimeAgainstWomen #PoliceAction #MPNews
सिंहपुर में कानून का 'चीरहरण': महिला जन-प्रतिनिधि को अधमरा कर क्या साबित करना चाहते हैं दबंग? जिले के सिंहपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत लालपुर गाँव में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। जहाँ एक पूर्व जनपद सदस्य और पूर्व जिला मंत्री, मीना कुशवाहा पर जानलेवा हमला कर उनकी कमर की पसली तोड़ दी गई। अस्पताल के बिस्तर पर लाचार पड़ी मीना कुशवाहा की हालत दबंगों के बेखौफ हौसलों की गवाही दे रही है। विवाद की असली जड़: आम का पेड़ या करोड़ों की जमीन? दिखने में यह विवाद खेत में लगे एक आम के पेड़ से फल तोड़ने जैसा मामूली नजर आ रहा है, लेकिन गहराई में जाने पर कहानी कुछ और ही बयां करती है। पुरानी रंजिश: सूत्रों की मानें तो जिस जमीन को मीना कुशवाहा ने खरीदा है, उस पर भू-माफियाओं की गिद्ध दृष्टि काफी समय से है। अवैध उत्खनन का साया: क्या यह हमला मीना जी की जमीन से लगी नदी में चल रहे अवैध रेत उत्खनन के विरोध की सजा है? क्या दबंगों को डर था कि एक सक्रिय महिला जन प्रतिनिधि उनके काले कारोबार में बाधा बन सकती है? बेखौफ आरोपी: कानून का भय या सत्ता का संरक्षण? घटना के वक्त जब मीना कुशवाहा ने आम तोड़ने का विरोध किया, तो आरोपियों ने उन पर लाठियों और पत्थरों से हमला कर दिया। इस हमले में उनकी कमर की हड्डी (पसली) टूट गई है। पुलिस ने आरोपी कुलदीप पाण्डेय , धर्मेन्द्र पाण्डेय , पुष्पेन्द्र पाण्डेय और मंदीप पाण्डेय के खिलाफ BNS की विभिन्न धाराओं (296, 115(2), 351(3), 3(5)) के तहत मामला तो दर्ज कर लिया है, लेकिन सवाल अभी भी बरकरार हैं। "सिंहपुर में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं? क्या प्रशासन का इकबाल खत्म हो चुका है, या फिर इन गुंडों को किसी सफेदपोश का वरदहस्त प्राप्त है?" प्रशासनिक बयान शिवाली चतुर्वेदी (DSP): "पीड़िता की शिकायत पर 4 व्यक्तियों के विरुद्ध FIR दर्ज कर जांच की जा रही है।" आशीष झारिया (थाना प्रभारी): "आवेदन के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है, जल्द ही अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।" खंपरिया का चश्मा 👓 (नजरिया) महज आम तोड़ने के लिए किसी की पसली तोड़ देना गले नहीं उतरता। यह सीधा-सीधा जमीन कब्जाने और अवैध उत्खनन के रास्ते से 'कांटा' हटाने की साजिश प्रतीत होती है। अगर एक पूर्व जनपद सदस्य सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता का क्या होगा? सिंहपुर पुलिस को अब 'कागजी कार्रवाई' से आगे बढ़कर 'कड़ी कार्रवाई' करनी होगी, ताकि अपराधियों के मन में कानून का खौफ दोबारा पैदा हो सके। - शिवनारायण द्विवेदी शहडोल | खमपरिया का चश्मा 👓 रिपोर्ट: शिवनारायण द्विवेदी शहडोल जिले के सिंहपुर थाना क्षेत्र से मानवता को शर्मसार करने वाली एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि समाज की उस लाचारी को भी उजागर किया है जहाँ एक महिला जन-प्रतिनिधि सुरक्षित नहीं है। क्रूरता की सारी हदें पार: लात-घूंसे और पत्थरों से हमला पूर्व जनपद सदस्य और पूर्व जिला मंत्री मीना कुशवाहा को जिस बेरहमी से पीटा गया, वह रूह कंपा देने वाला है। आरोपियों ने महिला को केवल मारा ही नहीं, बल्कि उनके निजी अंगों पर वार किए, जिससे उनकी हालत अत्यंत नाजुक हो गई है। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, मारपीट इतनी भीषण थी कि महिला को खून की उल्टियां होने लगीं और उनकी कमर की पसलियां तक टूट गई हैं। एक महिला को इस तरह लहूलुहान कर देना यह दर्शाता है कि हमलावरों के मन में कानून का रत्ती भर भी खौफ नहीं है। आम तोड़ने का बहाना या जमीन हड़पने की गहरी साजिश? दिखने में यह विवाद केवल 'आम तोड़ने' जैसी छोटी बात से शुरू हुआ लगता है, लेकिन इसकी जड़ें कहीं गहरी हैं। चर्चा है कि यह हमला मीना जी द्वारा खरीदी गई कीमती जमीन पर नजर गड़ाए बैठे दबंगों की एक सोची-समझी साजिश है। क्या यह हमला उस जमीन को हड़पने के लिए डराने का एक तरीका है? या फिर मामला नदी में चल रहे अवैध उत्खनन से जुड़ा है, जिसका विरोध करना भारी पड़ा? पुराना इतिहास: पहले भी घर में घुसकर कर चुके हैं मारपीट ये आरोपी कोई नए नहीं हैं। बताया जा रहा है कि लगभग एक वर्ष पूर्व भी पुष्पेंद्र, धर्मेंद्र और यादवेन्द्र पांडेय ने अशोक तिवारी के घर में घुसकर इसी तरह तांडव मचाया था। जब अपराधी बार-बार अपराध करके भी खुलेआम घूमते हैं, तो उनके हौसले बुलंद होना लाजिमी है। सिंहपुर पुलिस द्वारा कुलदीप, धर्मेंद्र, पुष्पेंद्र और मंदीप पांडेय के विरुद्ध धाराएं तो दर्ज कर ली गई हैं, लेकिन क्या ये धाराएं उस लाचार महिला के साथ हुए अन्याय का हिसाब कर पाएंगी? सवाल गहरा है: आखिर सिंहपुर क्षेत्र में इन दबंगों को किसका संरक्षण प्राप्त है? क्या एक महिला को अधमरा कर देना ही 'शक्ति प्रदर्शन' है? पुलिस प्रशासन की ढिलाई ही है जो आज एक जन-प्रतिनिधि अस्पताल के बिस्तर पर अपनी जिंदगी की जंग लड़ रही है। अब समय है कि प्रशासन केवल FIR दर्ज न करे, बल्कि ऐसी कठोर कार्रवाई करे कि भविष्य में किसी भी महिला की तरफ हाथ उठाने से पहले अपराधियों की रूह कांप जाए। #JusticeForMeenaKushwaha #ShahdolNews #CrimeAgainstWomen #PoliceAction #MPNews
- Shivnarayan Dwivediसोहागपुर, शहडोल, मध्य प्रदेशLinear fracture involving 5–9 rib on left side मतलब: बाईं तरफ की 5वीं से 9वीं पसलियों में फ्रैक्चर (दरार/टूटना) है।1 hr ago
- शहडोल की पुरानी बस्ती में एक पालतू कुत्ते को गाड़ी से कुचलने के बाद कुछ युवकों ने घर में घुसकर महिलाओं से मारपीट व बदसलूकी की। घटना के बाद डरी हुई महिलाओं ने वीडियो में अपना दर्द बयां किया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चारों आरोपी युवकों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।1
- मध्य प्रदेश के ग्वालियर में दिनदहाड़े लड़की को उठाने की घटना एक सुनियोजित साजिश निकली। लड़के ने वीडियो जारी कर इस पूरी प्लानिंग का हैरान करने वाला खुलासा किया है।1
- मानपुर में नल-जल योजना बनी सरकारी खजाने पर बोझ? सड़कों पर बह रहा पानी, लाखों का भुगतान फिर भी व्यवस्था बदहाल जिम्मेदारों की कार्यशैली कटघरे में* *मानपुर में नल-जल योजना बनी सरकारी खजाने पर बोझ? सड़कों पर बह रहा पानी, लाखों का भुगतान फिर भी व्यवस्था बदहाल जिम्मेदारों की कार्यशैली कटघरे में* मानपुर। नगर परिषद मानपुर में करोड़ों रुपये की नल-जल योजना अब आमजन को राहत देने के बजाय सरकारी धन की बर्बादी और अव्यवस्था का बड़ा उदाहरण बनती जा रही है। लगभग एक वर्ष पूर्व जल निगम द्वारा योजना नगर परिषद मानपुर को हैंडओवर कर दी गई थी, लेकिन एक साल बाद भी नगर परिषद व्यवस्था संभालने की बुनियादी तैयारी तक नहीं कर सकी। नतीजा यह है कि नगर के कई हिस्सों में पाइपलाइन लीकेज, खराब वाल्व और बिना टोटी वाले नलों से हजारों लीटर पानी लगातार सड़कों और नालियों में बह रहा है। एक ओर गर्मी में लोग पर्याप्त पानी के लिए परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर जनता के टैक्स का पैसा पानी के साथ बहता नजर आ रहा है। जल निगम के डिप्टी मैनेजर शुभम गुप्ता ने स्पष्ट किया कि नल-जल योजना पूरी तरह नगर परिषद मानपुर को हैंडओवर की जा चुकी है और अब जल निगम का कार्य केवल टंकियों में पानी भरना है। सप्लाई, मेंटेनेंस, लीकेज सुधार, वसूली, नए कनेक्शन और पाइपलाइन विस्तार सहित सभी जिम्मेदारियां नगर परिषद के अधीन हैं। उन्होंने बताया कि टंकियों से सप्लाई होने वाले पानी की रीडिंग के आधार पर जल निगम नगर परिषद को बिल भेजता है और नगर परिषद उसका भुगतान करती है। यानी पानी घरों तक पहुंचे या रास्ते में लीकेज होकर बह जाए, भुगतान पूरा किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक नगर परिषद हर माह करीब 7 से 8 लाख रुपये जल निगम को भुगतान कर रही है, जबकि आमजन से पानी शुल्क के रूप में केवल 2 से ढाई लाख रुपये की ही वसूली हो पाती है। बाकी राशि नगर परिषद को अन्य राजस्व स्रोतों से वहन करनी पड़ रही है। ऐसे में स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब पानी की हर बूंद का भुगतान करना पड़ रहा है, तो फिर लीकेज रोकने और व्यवस्था सुधारने पर गंभीरता क्यों नहीं दिखाई जा रही। मामला सिर्फ आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है। लगातार हो रहे पाइपलाइन लीकेज के कारण कई स्थानों पर गंदा और दूषित पानी सप्लाई होने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि लीकेज वाली पाइपलाइन से बाहरी गंदगी और नालियों का दूषित पानी लाइन में मिलने का खतरा बना रहता है, जिससे जलजनित बीमारियों का जोखिम बढ़ गया है। ऐसे में यह लापरवाही अब केवल पानी की बर्बादी नहीं, बल्कि नगरवासियों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही है। हैरानी की बात यह है कि पानी शुल्क वसूली के लिए नगर परिषद द्वारा लगभग 10 कर्मचारियों की भर्ती की गई है, लेकिन मेंटेनेंस और लीकेज रोकने के लिए पर्याप्त तकनीकी स्टाफ उपलब्ध नहीं कराया गया। जानकारी के अनुसार नगर परिषद क्षेत्र के खुटार, बरबसपुर, मानपुर, बैगांव, गोवरदे और सिगुड़ी में सप्लाई संचालन के लिए पूर्व से 6 वाल्व ऑपरेटर कार्यरत हैं, जिनका काम टंकियां भरना और पानी सप्लाई देना है। योजना हैंडओवर होने के बावजूद नगर परिषद ने इन अनुभवी कर्मचारियों को अपने अधीन नहीं लिया, जिससे व्यवस्था और अधिक प्रभावित हुई है। बताया जाता है कि ये कर्मचारी आज भी बेहद कम मानदेय पर कार्य कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते खराब वाल्व, पाइपलाइन लीकेज और बिना टोटी वाले नलों की मरम्मत कराई जाती, तो हर माह लगभग 2 से 3 लाख रुपये तक की बचत संभव थी। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण सरकारी धन लगातार व्यर्थ बह रहा है। इस पूरे मामले पर नगर परिषद मानपुर के सीएमओ राजेंद्र कुशवाहा ने कहा कि टोटियों के लिए ऑर्डर दिया जा चुका है तथा जल्द ही मिस्त्री और कर्मचारियों की भर्ती की जाएगी। हालांकि जनता का सवाल है कि जब योजना को हैंडओवर हुए लगभग एक वर्ष बीत चुका है, तो अब तक केवल आश्वासन ही क्यों दिए जा रहे हैं। मानपुर में अब नल-जल योजना विकास से ज्यादा प्रशासनिक लापरवाही, वित्तीय अव्यवस्था और जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय बन चुकी है। जनता पूछ रही है कि आखिर कब तक सरकारी खजाने का पैसा नालियों में बहते पानी के रूप में भुगतान किया जाता रहेगा और नगर परिषद व्यर्थ बहते पानी की रोकथाम व स्वच्छ पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कब ठोस कदम उठाएगी। स्थानीय नागरिकों ने जिले की नवागत संवेदनशील कलेक्टर महोदया से मांग की है कि नगर परिषद मानपुर में नल-जल योजना की जमीनी स्थिति का गंभीरता से परीक्षण कराया जाए। लगातार हो रही पानी की बर्बादी, लीकेज, दूषित पेयजल आपूर्ति और हर माह हो रहे आर्थिक नुकसान की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या आगे चलकर जल संकट के साथ जनस्वास्थ्य संकट का भी रूप ले सकती है। आमजन को उम्मीद है कि जिला प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर त्वरित हस्तक्षेप कर नगरवासियों को राहत दिलाएगा।4
- नगरीय विकास एवं आवास विभाग राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी ने डिंडौरी में जिले के विकास कार्यों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों की योजनाओं की प्रगति का जायजा लिया और आगामी विकास योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की।1
- डिंडोरी में नगरीय विकास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने जिले के विकास कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने विभागों की योजनाओं की प्रगति परखी और आगामी विकास परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की।2
- डिंडोरी जिला मुख्यालय के मुख्य मार्ग पर कचरा संग्रहण वाहन में जलते कचरे से आग लग गई। वाहन चालक और स्वच्छता कर्मियों ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत आग बुझा दी, जिससे बड़ा हादसा टल गया। हालांकि, जलता कचरा वाहन में भरने को लेकर जिम्मेदारों की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है।1
- उमरिया के मानपुर क्षेत्र में एक ओवरलोड पिकअप में बाराती अपनी जान जोखिम में डालकर 80-90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से सफर करते दिखे। वाहन से लटकते बच्चों और युवाओं का यह नजारा सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है, जिस पर स्थानीय लोगों ने प्रशासन की अनदेखी पर चिंता जताई। ग्रामीणों ने ऐसे वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में कोई बड़ा हादसा न हो।1
- मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले में बिलगढ़ा बांध के पास नियमों की अनदेखी कर विस्फोटक का इस्तेमाल कर निर्माण कार्य जारी है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना सुरक्षा इंतजाम के लगातार धमाकों से इलाके में हादसे का खतरा और दहशत का माहौल है। जल संसाधन विभाग के काम रोकने के निर्देश और पूर्व में दर्ज FIR के बावजूद यह कार्य जारी है।1
- मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए लाए गए एक शव को डीप फ्रीजर में जगह नहीं मिल सकी। ट्रांसफार्मर खराब होने से बिजली गुल थी और अस्पताल में कोई बैकअप व्यवस्था नहीं थी, जिससे अस्पताल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। फिलहाल शव को मरचुरी में रखा गया है और पोस्टमार्टम अगले दिन किया जाएगा।1