संयुक्त या पैतृक संपत्ति को सह-मालिकों या कानूनी वारिसों के बीच कानूनी रूप से बांटने के लिए विभाजन विलेख (Partition Deed) या बंटवारा नामा तैयार किया जाता है। यह दस्तावेज तब बनाया जाता है जब संयुक्त परिवार के सदस्य या सह-मालिक संपत्ति को संयुक्त रखने के बजाय अपना-अपना हिस्सा अलग करना चाहते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य भविष्य के पारिवारिक या कानूनी विवादों से बचना, संपत्ति पर स्पष्ट व स्वतंत्र मालिकाना हक प्राप्त करना और अपने हिस्से को बेचने, गिरवी रखने या उस पर निर्माण करने का पूर्ण अधिकार पाना है। इसे सभी वैध हिस्सेदार आपसी सहमति से तय सीमाओं (चौहद्दी) और संपत्ति के नक्शे के साथ लिखित रूप में तैयार करते हैं। यह हमेशा नॉन-जुडिशियल स्टाम्प पेपर पर प्रिंट किया जाता है, जिसकी स्टाम्प ड्यूटी हर राज्य में अलग-अलग होती है; जैसे मध्य प्रदेश के संदर्भ में यह विभाजित होने वाली संपत्ति के बाजार मूल्य या कलेक्टर गाइडलाइन के प्रतिशत के आधार पर तय होती है। भारतीय पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 17 के तहत, यदि विभाजित हो रही अचल संपत्ति का मूल्य 100 रुपये से अधिक है, तो संबंधित क्षेत्र के सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में दो गवाहों की मौजूदगी में इसका पंजीकरण कराना अनिवार्य है। बिना पंजीकरण के यह विलेख अदालत में स्वामित्व साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य नहीं माना जाता है। पंजीकृत बंटवारा नामा का उपयोग राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण (म्यूटेशन) कराने, बैंक लोन लेने, संपत्ति को बेचने, वसीयत या दान करने और बिजली-पानी का अलग कनेक्शन लेने के लिए किया जाता है। हालांकि, बहनों या अन्य वैध हिस्सेदारों को दरकिनार करना, स्टाम्प ड्यूटी बचाने के लिए संपत्ति का मूल्य कम दिखाना और किसी कमजोर वारिस से दबाव में हस्ताक्षर करवाना इसके बड़े दुरुपयोग हैं। यदि उचित स्टाम्प ड्यूटी चुकाकर बिना किसी दबाव के इस विलेख का पंजीकरण कराया गया है, तो इसकी वैधता स्थायी होती है और इसे केवल धोखाधड़ी साबित होने पर ही अदालत में चुनौती दी जा सकती है। कानूनी पेचीदगियों से बचने के लिए किसी भी लेनदेन से पहले योग्य वकील से सलाह लेना जरूरी है।
संयुक्त या पैतृक संपत्ति को सह-मालिकों या कानूनी वारिसों के बीच कानूनी रूप से बांटने के लिए विभाजन विलेख (Partition Deed) या बंटवारा नामा तैयार किया जाता है। यह दस्तावेज तब बनाया जाता है जब संयुक्त परिवार के सदस्य या सह-मालिक संपत्ति को संयुक्त रखने के बजाय अपना-अपना हिस्सा अलग करना चाहते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य भविष्य के पारिवारिक या कानूनी विवादों से बचना, संपत्ति पर स्पष्ट व स्वतंत्र मालिकाना हक प्राप्त करना और अपने हिस्से को बेचने, गिरवी रखने या उस पर निर्माण करने का पूर्ण अधिकार पाना है। इसे सभी वैध हिस्सेदार आपसी सहमति से तय सीमाओं (चौहद्दी) और संपत्ति के नक्शे के साथ लिखित रूप में तैयार करते हैं। यह हमेशा नॉन-जुडिशियल स्टाम्प पेपर पर प्रिंट किया जाता है, जिसकी स्टाम्प ड्यूटी हर राज्य में अलग-अलग होती है; जैसे मध्य प्रदेश के संदर्भ में यह विभाजित होने वाली संपत्ति के बाजार मूल्य या कलेक्टर गाइडलाइन के प्रतिशत के आधार पर तय होती है। भारतीय पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 17 के तहत, यदि विभाजित हो रही अचल संपत्ति का मूल्य 100 रुपये से अधिक है, तो संबंधित क्षेत्र के सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में दो गवाहों की मौजूदगी में इसका पंजीकरण कराना अनिवार्य है। बिना पंजीकरण के यह विलेख अदालत में स्वामित्व साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य नहीं माना जाता है। पंजीकृत बंटवारा नामा का उपयोग राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण (म्यूटेशन) कराने, बैंक लोन लेने, संपत्ति को बेचने, वसीयत या दान करने और बिजली-पानी का अलग कनेक्शन लेने के लिए किया जाता है। हालांकि, बहनों या अन्य वैध हिस्सेदारों को दरकिनार करना, स्टाम्प ड्यूटी बचाने के लिए संपत्ति का मूल्य कम दिखाना और किसी कमजोर वारिस से दबाव में हस्ताक्षर करवाना इसके बड़े दुरुपयोग हैं। यदि उचित स्टाम्प ड्यूटी चुकाकर बिना किसी दबाव के इस विलेख का पंजीकरण कराया गया है, तो इसकी वैधता स्थायी होती है और इसे केवल धोखाधड़ी साबित होने पर ही अदालत में चुनौती दी जा सकती है। कानूनी पेचीदगियों से बचने के लिए किसी भी लेनदेन से पहले योग्य वकील से सलाह लेना जरूरी है।
- पाली जिले में राजीव गांधी पंचायती राज संगठन द्वारा संचालित 'मनरेगा हर हाथ को रोजगार' अभियान का समापन हो गया है। यह अभियान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सीबी यादव के निर्देश पर 1 जून 2026 से 30 जून 2026 तक चलाया गया, जिसके दौरान संगठन के पदाधिकारी लगातार कार्य स्थलों पर पहुंचकर मनरेगा श्रमिकों की आवाज बने। अभियान के दौरान श्रमिकों को केंद्र सरकार की मनरेगा रोजगार गारंटी योजना में होने वाले बदलावों के बारे में सूचित किया गया। श्रमिकों को जानकारी दी गई कि 1 जुलाई से योजना का नाम बदलकर वी बी जी रामजी के बिना गारंटी की योजना लागू की जा रही है। संवाद के माध्यम से उन्हें उनके अधिकारों, समय पर मजदूरी भुगतान और अन्य स्थानीय समस्याओं के प्रति जागरूक किया गया। संगठन ने कार्य स्थलों पर पीने के पानी, छाया, विश्राम की सुविधा और प्राथमिक उपचार के साथ दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इसके अलावा, आंखों की फोटो खिंचवाने की प्रक्रिया में तकनीकी खामियों के कारण अनुपस्थिति लगने जैसी समस्याओं पर भी चर्चा की गई। अभियान के समापन पर संगठन ने श्रमिकों को अपने हक के लिए उग्र आंदोलन हेतु तैयार रहने का आह्वान किया।1
- Post by District.reporter.babulaljogaw1
- Post by User7241नाथुरामनायक1
- जोधपुर के सर्किट हाउस में पर्यावरण प्रेमी कुलदीप राव और अन्य शहरवासियों ने राजस्थान सरकार के कानून मंत्री जोगाराम पटेल से मुलाकात कर विवेक विहार क्षेत्र की 100 फीट सड़क के सौंदर्यीकरण और हरियाली विकसित करने की मांग की है। इस दौरान मंत्री को अवगत कराया गया कि विवेक विहार में डी सेंटर और ई सेंटर के बीच स्थित सड़क के मध्य भाग में पौधारोपण किया जाए। साथ ही, पौधों के संरक्षण के लिए सुरक्षा जालियां लगाने और उनकी नियमित देखभाल हेतु कार्मिकों की नियुक्ति की मांग भी रखी गई। इस मांग पर कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार 'हरियालो राजस्थान' अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रस्ताव पर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन देते हुए कहा कि हरियाली बढ़ाने के प्रयासों में जनभागीदारी को प्राथमिकता दी जाएगी। इस अवसर पर कुलदीप राव ने जोर दिया कि पर्यावरण संरक्षण में जनसहभागिता से ही प्रदेश को अधिक हरा-भरा बनाया जा सकता है और जनसेवा ही उनका संकल्प है।2
- राजस्थान के पाली जिले के बाली से सामने आया यह वीडियो बारिश के इस दौर में पर्यावरण को लेकर एक बड़ा संदेश दे रहा है।1
- पाली में पुलिस बेड़े में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। एसपी मोनिका सैन ने एक आदेश जारी कर जिले में 6 थानाप्रभारियों, 10 एएसआई (ASI), 4 हेड कांस्टेबल और 306 कांस्टेबलों के तबादले कर दिए हैं। इन तबादलों के जरिए कई पुलिस अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। विभाग के अनुसार, कुछ पुलिसकर्मियों का ट्रांसफर प्रशासनिक आधार पर किया गया है, जबकि कुछ को उनके खुद के प्रार्थना पत्र के आधार पर स्थानांतरित किया गया है। एसपी मोनिका सैन की ओर से जारी सूची के तहत बलभद्रसिंह को पुलिस लाइन से खिंवाड़ा थानाधिकारी बनाया गया है। वहीं, सहदेव चौधरी को पुलिस लाइन से मारवाड़ जंक्शन थानाधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा, दाउद खां को पुलिस लाइन से हटाकर शिवपुरा थानाधिकारी और पाना चौधरी को पुलिस लाइन से रोहट थानाप्रभारी के पद पर तैनात किया गया है। एक अलग आदेश के माध्यम से एसपी ने जिले में कार्यरत 306 कांस्टेबलों के भी तबादले किए हैं। इसमें भी प्रशासनिक और स्वयं के प्रार्थना पत्र के आधार पर नई पोस्टिंग दी गई है। इसके साथ ही 10 एएसआई और 4 हेड कांस्टेबलों को भी बदला गया है। पुलिस विभाग द्वारा इन आदेशों के जारी होने के बाद सभी संबंधित पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से अपने नए स्थानों पर पहुंचकर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।1
- राजस्थान एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने नशा तस्करों के खिलाफ अभियान के तहत पाली जिले के सदर पाली थाना क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 45.700 किलोग्राम अवैध डोडा पोस्त बरामद किया है और मौके से एक कार जब्त कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पुलिस महानिदेशक तथा अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस के निर्देशन में प्रदेशभर में नशा तस्करों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है। यह कार्रवाई तब हुई जब एएनटीएफ की टीम खैरवा क्षेत्र में संदिग्ध वाहनों की निगरानी कर रही थी। इसी दौरान धामली गांव की ओर से आ रही एक कार को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन चालक कार को तेज गति से भगाते हुए आईचिया गांव की तरफ ले गया। टीम ने पीछा कर कार को आईचिया गांव में रुकवाया और संदिग्ध गतिविधियों के कारण स्थानीय पुलिस को मौके पर बुलाया। सदर थाना पुलिस ने कार की तलाशी लेकर उसमें कट्टों में भरा हुआ अवैध डोडा पोस्त बरामद किया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान जोधपुर जिले के लूणी थाना अंतर्गत ढाणी रोहिच्चा कला निवासी सुभाष सियाक (24) पुत्र ओमाराम सियाक के रूप में हुई है। इसी अभियान के तहत एएनटीएफ ने प्रदेश के अन्य जिलों जैसे श्रीगंगानगर, उदयपुर, डीग, बाड़मेर, हनुमानगढ़ और बीकानेर में भी कार्रवाई की है। इन जिलों में हेरोइन (चिट्टा), एमडी, गांजा और डोडा पोस्त की बड़ी खेप बरामद की गई है, जिसमें कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और 4 वाहनों को जब्त किया गया। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच करने में जुटी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि बरामद मादक पदार्थ कहां से लाया गया था और इसे किन क्षेत्रों में सप्लाई किया जाना था।1