भारत में FCRA व्यवस्था को समाप्त कर आत्मनिर्भर सामाजिक संरचना की ओर बढ़ना समय की मांग : सीए. संजय कुमार झा . पटना/एनजीओ के संस्थापक निदेशक एवं प्रख्यात समाज चिंतक सीए संजय कुमार झा ने आज एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दे पर अपनी स्पष्ट एवं विचारोत्तेजक राय व्यक्त करते हुए कहा कि भारत में Foreign Contribution Regulation Act (FCRA) के अंतर्गत विदेशी फंडिंग की व्यवस्था को अब समाप्त (Abolish) कर देना चाहिए, क्योंकि यह देश की दीर्घकालिक सामाजिक, सांस्कृतिक एवं नीतिगत स्वायत्तता के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। श्री झा ने आज अपनी आधिकारिक पहल के अंतर्गत देशभर के NGO संचालकों, नीति-निर्माताओं एवं भारत सरकार को संबोधित करते हुए एक व्यापक संवाद प्रारंभ किया। उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से बेवनार के माध्यम से से जन-जागरूकता अभियान चलाते हुए इस विषय को जमीनी स्तर तक पहुँचाने का प्रयास किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि “FCRA के माध्यम से आने वाली विदेशी निधि, भले ही प्रारंभिक रूप में विकासात्मक प्रतीत होती हो, किन्तु इसके माध्यम से बाहरी शक्तियों द्वारा भारत की नीतियों, सामाजिक संरचना एवं सांस्कृतिक मूल्यों को प्रभावित करने की संभावनाएँ निरंतर बढ़ती रही हैं। यह देश की संप्रभुता एवं नीति-निर्माण की स्वतंत्रता के लिए दीर्घकालिक खतरा है।”» श्री झा ने आगे कहा कि विदेशी फंडिंग पर बढ़ती निर्भरता ने देश के NGO सेक्टर में आत्मनिर्भरता के भाव को कमजोर किया है। इसके कारण स्थानीय संसाधनों के विकास, जनभागीदारी एवं CSR आधारित सहयोग को पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं मिल पाया है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कई मामलों में FCRA फंडिंग के दुरुपयोग, पारदर्शिता की कमी एवं सामाजिक-राजनीतिक असंतुलन उत्पन्न होने जैसी स्थितियाँ सामने आई हैं, जिससे पूरे स्वैच्छिक क्षेत्र की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। मुख्य बिंदु जो श्री झा ने अपने वक्तव्य में प्रस्तुत किए जैसे विदेशी फंडिंग के माध्यम से राष्ट्रीय संप्रभुता पर अप्रत्यक्ष प्रभाव , सांस्कृतिक एवं सामाजिक संरचना में बाहरी हस्तक्षेप का खतरा , NGO सेक्टर में निर्भरता (Dependency Syndrome) का विस्तार , फंड के दुरुपयोग एवं पारदर्शिता की चुनौतियाँ , राजनीतिक अस्थिरता एवं सामाजिक ध्रुवीकरण की आशंका , स्थानीय अर्थव्यवस्था एवं दान संस्कृति पर प्रतिकूल प्रभाव आदि! उन्होंने “आत्मनिर्भर भारत” के दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि देश अपने सामाजिक विकास के लिए घरेलू संसाधनों, CSR फंडिंग एवं जनसहभागिता पर आधारित एक सशक्त एवं पारदर्शी मॉडल विकसित करे। सरकार एवं नीति-निर्माताओं के लिए सुझाव देते हुए , सीए. झा ने कहा कि FCRA व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाए , घरेलू CSR एवं लोकल डोनेशन को संस्थागत रूप से बढ़ावा दिया जाए , NGO सेक्टर के लिए एक राष्ट्रीय पारदर्शी फंडिंग प्लेटफॉर्म विकसित किया जाए , सशक्त ऑडिट एवं जवाबदेही तंत्र लागू किया जाए और सामाजिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता एवं स्वदेशी वित्त पोषण मॉडल को प्राथमिकता दी जाए अंत में, श्री झा ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इस विषय पर व्यापक राष्ट्रीय बहस प्रारंभ की जाए, ताकि भारत एक स्वतंत्र, आत्मनिर्भर एवं सांस्कृतिक रूप से सुदृढ़ सामाजिक व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ सके।
भारत में FCRA व्यवस्था को समाप्त कर आत्मनिर्भर सामाजिक संरचना की ओर बढ़ना समय की मांग : सीए. संजय कुमार झा . पटना/एनजीओ के संस्थापक निदेशक एवं प्रख्यात समाज चिंतक सीए संजय कुमार झा ने आज एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दे पर अपनी स्पष्ट एवं विचारोत्तेजक राय व्यक्त करते हुए कहा कि भारत में Foreign Contribution Regulation Act (FCRA) के अंतर्गत विदेशी फंडिंग की व्यवस्था को अब समाप्त (Abolish) कर देना चाहिए, क्योंकि यह देश की दीर्घकालिक सामाजिक, सांस्कृतिक एवं नीतिगत स्वायत्तता के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। श्री झा ने आज अपनी आधिकारिक पहल के अंतर्गत देशभर के NGO संचालकों, नीति-निर्माताओं एवं भारत सरकार को संबोधित करते हुए एक व्यापक संवाद प्रारंभ किया। उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से बेवनार के माध्यम से से जन-जागरूकता अभियान चलाते हुए इस विषय को जमीनी स्तर तक पहुँचाने का प्रयास किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि “FCRA के माध्यम से आने वाली विदेशी निधि, भले ही प्रारंभिक रूप में विकासात्मक प्रतीत होती हो, किन्तु इसके माध्यम से बाहरी शक्तियों द्वारा भारत की नीतियों, सामाजिक संरचना एवं सांस्कृतिक मूल्यों को प्रभावित करने की संभावनाएँ निरंतर बढ़ती रही हैं। यह देश की संप्रभुता एवं नीति-निर्माण की स्वतंत्रता के लिए दीर्घकालिक खतरा है।”» श्री झा ने आगे कहा कि विदेशी फंडिंग पर बढ़ती निर्भरता ने देश के NGO सेक्टर में आत्मनिर्भरता के भाव को कमजोर किया है। इसके कारण स्थानीय संसाधनों के विकास, जनभागीदारी एवं CSR आधारित सहयोग को पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं मिल पाया है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कई मामलों में FCRA फंडिंग के दुरुपयोग, पारदर्शिता की कमी एवं सामाजिक-राजनीतिक असंतुलन उत्पन्न होने जैसी स्थितियाँ सामने आई हैं, जिससे पूरे स्वैच्छिक क्षेत्र की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। मुख्य बिंदु जो श्री झा ने अपने वक्तव्य में प्रस्तुत किए जैसे विदेशी फंडिंग के माध्यम से राष्ट्रीय संप्रभुता पर अप्रत्यक्ष प्रभाव , सांस्कृतिक एवं सामाजिक संरचना में बाहरी हस्तक्षेप का खतरा , NGO सेक्टर में निर्भरता (Dependency Syndrome) का विस्तार , फंड के दुरुपयोग एवं पारदर्शिता की चुनौतियाँ , राजनीतिक अस्थिरता एवं सामाजिक ध्रुवीकरण की आशंका , स्थानीय अर्थव्यवस्था एवं दान संस्कृति पर प्रतिकूल प्रभाव आदि! उन्होंने “आत्मनिर्भर भारत” के दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि देश अपने सामाजिक विकास के लिए घरेलू संसाधनों, CSR फंडिंग एवं जनसहभागिता पर आधारित एक सशक्त एवं पारदर्शी मॉडल विकसित करे। सरकार एवं नीति-निर्माताओं के लिए सुझाव देते हुए , सीए. झा ने कहा कि FCRA व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाए , घरेलू CSR एवं लोकल डोनेशन को संस्थागत रूप से बढ़ावा दिया जाए , NGO सेक्टर के लिए एक राष्ट्रीय पारदर्शी फंडिंग प्लेटफॉर्म विकसित किया जाए , सशक्त ऑडिट एवं जवाबदेही तंत्र लागू किया जाए और सामाजिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता एवं स्वदेशी वित्त पोषण मॉडल को प्राथमिकता दी जाए अंत में, श्री झा ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इस विषय पर व्यापक राष्ट्रीय बहस प्रारंभ की जाए, ताकि भारत एक स्वतंत्र, आत्मनिर्भर एवं सांस्कृतिक रूप से सुदृढ़ सामाजिक व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ सके।
- राजधानी पटना से इस वक्त की बड़ी खबर… ऐतिहासिक गांधी मैदान और कारगिल चौक आज महिला शक्ति के नारों से गूंज उठा… 33% महिला आरक्षण के समर्थन में हजारों महिलाएं सड़कों पर उतर आईं… एनडीए के ‘जन आक्रोश महिला सम्मेलन’ में भारी भीड़ देखने को मिली… तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि हाथों में तख्तियां और झंडे लिए महिलाएं अपने अधिकार की आवाज बुलंद कर रही हैं… हर तरफ एक ही मांग—महिला आरक्षण लागू करो… मैं इस वक्त गांधी मैदान में मौजूद हूं… जहां हजारों महिलाएं इकट्ठा हुई हैं… यहां NDA की महिला कार्यकर्ताओं द्वारा सम्मेलन का आयोजन किया गया है… रैली में शामिल महिलाओं का कहना है कि अब वक्त आ गया है जब उन्हें राजनीति में बराबरी का हक मिले… “33% आरक्षण हमारा अधिकार है… इसे अब और टाला नहीं जाना चाहिए…” इस दौरान बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी कार्यक्रम में शामिल हुए… उन्होंने मंच से महिलाओं को संबोधित करते हुए विपक्ष पर जमकर निशाना साधा… उन्होंने कहा— “महिला आरक्षण सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को उनका अधिकार दिलाने का संकल्प है… विपक्ष इस ऐतिहासिक कदम में बाधा डाल रहा है…” मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि जो महिलाएं सशक्तिकरण के रास्ते में बाधा डालेंगे, जनता उन्हें आने वाले समय में जवाब देगी… पटना से महिला शक्ति का यह बड़ा संदेश है कि अब महिलाओं की आवाज को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा…1
- बच्चा का दवा है पर केजी डोज है1
- #पटना_सिटी में बुलडोजर एक्शन जारी ,सरकारी संपत्ति पर अवैध अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ बुलडोजर से एक्शन शुरू कर दिया गया है ,सोमवार को टेढ़ी घाट गंगा नदी के पास कच्चे पक्के मकानों को तोड़ा गया ,भद्रघाट से दीदारगंज तक फोर लाइन सड़क का निर्माण कराया जाना है,जिसके लिए पटना जिला प्रशासन ने अवैध अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है ,#ApnaCityTakNews #PatnaCity #Buldojar #SmratChodhri1
- फतुहा पुलिस अनुमंडल के खुसरूपुर थाना क्षेत्र में हथियार के बल पर हुए बाइक लुट कि घटना का पुलिस ने सफलता पूर्वक उद्भेदन करते हुए घटना में शामिल दो आरोपियों को लूटी गई बाइक और लूट में प्रयुक्त हथियार को भी बरामद किया।1
- शादीशुदा मर्द सावधान! सोनम-राजा और सौरभ-मुस्कान के बाद अब 'प्रियंका-कृष्ण देव'..देश में क्या हो रहा?2
- Post by Spiderman1
- पटना। बिहार में नई सरकार के गठन के बाद राजनीतिक हलचलें तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री आवास (CM हाउस) में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के विधायक दल के नेता के चुनाव को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पार्टी के भविष्य और आगामी चुनावों की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। 2030 तक 200 सीटों का संकल्प बैठक का मुख्य आकर्षण नीतीश कुमार द्वारा दिया गया 'लक्ष्य 200' रहा। उन्होंने विधायकों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि पार्टी का लक्ष्य 2030 तक बिहार विधानसभा में 200 सीटें जीतने का है। लगभग 90 मिनट तक चली इस बैठक में नीतीश कुमार काफी आत्मविश्वास में दिखे। उन्होंने विधायकों से कहा, "मैं पूरे बिहार का दौरा करूंगा। आप लोग चिंता मत कीजिए, सब अच्छा होगा। मैं जैसे पहले काम करता था, वैसे ही सक्रिय रहकर काम करता रहूंगा।" क्षेत्र में सक्रिय रहने के निर्देश बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए अनंत सिंह ने बताया कि नीतीश कुमार ने सभी विधायकों को अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में सक्रिय रहने और जनता के बीच जाकर काम करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगली बार 200 सीटें जीतने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अभी से मेहनत करनी होगी। गौरतलब है कि बैठक के दौरान नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को लेकर किसी भी तरह की कोई चर्चा नहीं हुई।1
- प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन और बैंकों की ओर से बड़ा कदम उठाया गया है। अब उपभोक्ताओं को सोलर रूफटॉप लगाने के लिए आसान लोन सुविधा दी जा रही है। वीओ (VO): इस पहल का उद्देश्य लोगों को सोलर ऊर्जा अपनाने के लिए आर्थिक सहायता देना है, ताकि वे कम खर्च में अपने घरों में सोलर सिस्टम लगा सकें। लोन कैंप के जरिए इच्छुक उपभोक्ताओं से आवेदन लिए गए हैं और उनकी प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है। योजना के तहत सरकार 1 किलोवाट पर 30 हजार, 2 किलोवाट पर 60 हजार और 3 किलोवाट पर 78 हजार रुपये तक की सब्सिडी दे रही है। इससे लोगों का बिजली बिल कम हो रहा है और वे आत्मनिर्भर बन रहे हैं। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा दें।1