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लापरवाही पर कड़ा एक्शन: PMAY-G के लाभुकों पर सख्ती, BDO पूजा कुमारी की सक्रियता से तेज हुई कार्रवाई कटकमसांडी (हजारीबाग): प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत आवंटित घरों का निर्माण नहीं करने वाले लाभुकों के खिलाफ अब प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) पूजा कुमारी की सक्रिय पहल पर वर्षों से लंबित मामलों में तेज कार्रवाई शुरू कर दी गई है। प्रखंड कार्यालय से जारी पत्र के अनुसार, वर्ष 2016-17 से 2020-21 के बीच चयनित कई लाभुकों को बार-बार सूचना एवं नोटिस देने के बावजूद उन्होंने आवास निर्माण में रुचि नहीं दिखाई। इससे न केवल सरकारी योजना का उद्देश्य प्रभावित हुआ, बल्कि जरूरतमंद लोगों तक इसका लाभ भी नहीं पहुंच पा रहा है। प्रकाश प्रसाद केशरी, विमला देवी, रनिया देवी एवं तुलसी साव जैसे लाभुकों के नाम सूची में शामिल हैं, जिन्होंने स्वीकृति मिलने के बावजूद अब तक आवास निर्माण कार्य पूरा नहीं किया। प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि ऐसे सभी लाभुकों पर नियमानुसार सर्टिफिकेट केस (वसूली कार्रवाई) की प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि योजना की राशि की वसूली सुनिश्चित हो सके। प्रखंड विकास पदाधिकारी पूजा कुमारी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी योजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही या उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनकी तत्परता और निगरानी के चलते अब वर्षों से लंबित मामलों में तेजी आई है और प्रशासनिक कार्यशैली में नई धार दिखाई दे रही है। जो लाभुक योजना का लाभ लेकर भी निर्माण नहीं करेंगे, उन्हें अब जवाबदेह बनाया जाएगा। BDO पूजा कुमारी की कड़ी निगरानी और सक्रिय नेतृत्व में कटकमसांडी प्रखंड में विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। यह कार्रवाई न केवल पारदर्शिता को बढ़ावा देगी, बल्कि जरूरतमंदों तक योजनाओं का सही लाभ पहुंचाने में भी मददगार साबित होगी।

3 hrs ago
user_Arif Khan (Journalist)khabar36
Arif Khan (Journalist)khabar36
Classified ads newspaper publisher हजारीबाग, हजारीबाग, झारखंड•
3 hrs ago
4931b23d-119b-4937-abf6-220ee43faed8

लापरवाही पर कड़ा एक्शन: PMAY-G के लाभुकों पर सख्ती, BDO पूजा कुमारी की सक्रियता से तेज हुई कार्रवाई कटकमसांडी (हजारीबाग): प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत आवंटित घरों का निर्माण नहीं करने वाले लाभुकों के खिलाफ अब प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) पूजा कुमारी की सक्रिय पहल पर वर्षों से लंबित मामलों में तेज कार्रवाई शुरू कर दी गई है। प्रखंड कार्यालय से जारी पत्र के अनुसार, वर्ष 2016-17 से 2020-21 के बीच चयनित कई लाभुकों को बार-बार सूचना एवं नोटिस देने के बावजूद उन्होंने आवास निर्माण में रुचि नहीं दिखाई। इससे न केवल सरकारी योजना का उद्देश्य प्रभावित हुआ, बल्कि जरूरतमंद लोगों तक इसका लाभ भी नहीं पहुंच पा रहा है। प्रकाश प्रसाद केशरी, विमला देवी, रनिया देवी एवं तुलसी साव जैसे लाभुकों के नाम सूची में शामिल हैं, जिन्होंने स्वीकृति मिलने के बावजूद अब तक आवास निर्माण कार्य पूरा नहीं किया। प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि ऐसे सभी लाभुकों पर नियमानुसार सर्टिफिकेट केस (वसूली कार्रवाई) की प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि योजना की राशि की वसूली सुनिश्चित हो सके। प्रखंड विकास पदाधिकारी पूजा कुमारी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी योजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही या उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनकी तत्परता और निगरानी के चलते अब वर्षों से लंबित मामलों में तेजी आई है और प्रशासनिक कार्यशैली में नई धार दिखाई दे रही है। जो लाभुक योजना का लाभ लेकर भी निर्माण नहीं करेंगे, उन्हें अब जवाबदेह बनाया जाएगा। BDO पूजा कुमारी की कड़ी निगरानी और सक्रिय नेतृत्व में कटकमसांडी प्रखंड में विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। यह कार्रवाई न केवल पारदर्शिता को बढ़ावा देगी, बल्कि जरूरतमंदों तक योजनाओं का सही लाभ पहुंचाने में भी मददगार साबित होगी।

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  • जल पखवाड़ा 2026 के तहत जी.एम. महाविद्यालय इचाक में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन
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    जल पखवाड़ा 2026 के तहत जी.एम. महाविद्यालय इचाक में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन
    user_झारखण्ड न्यूज हजारीबाग
    झारखण्ड न्यूज हजारीबाग
    हजारीबाग, हजारीबाग, झारखंड•
    3 hrs ago
  • हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज में एसी मिस्त्री मो. सलीम उर्फ गुड्डू की गिरने से मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि काम के दौरान कोई सेफ्टी सुविधा नहीं दी गई थी। घटना के विरोध में परिजनों ने सदर अस्पताल गेट के सामने जाम कर दिया और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की।
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    हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज में एसी मिस्त्री मो. सलीम उर्फ गुड्डू की गिरने से मौत हो गई। 
परिजनों ने आरोप लगाया कि काम के दौरान कोई सेफ्टी सुविधा नहीं दी गई थी। 
घटना के विरोध में परिजनों ने सदर अस्पताल गेट के सामने जाम कर दिया और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की।
    user_Abhay Kumar Singh
    Abhay Kumar Singh
    पत्रकार हजारीबाग, हजारीबाग, झारखंड•
    4 hrs ago
  • विक्की मंडल और डॉली सिंह की शानदार अभिनय से सजी यह फिल्म समाज में हो रहे अन्याय के खिलाफ एक मजबूत आवाज उठाती है और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है।
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    विक्की मंडल और डॉली सिंह की शानदार अभिनय से सजी यह फिल्म समाज में हो रहे अन्याय के खिलाफ एक मजबूत आवाज उठाती है और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है।
    user_खबर आप तक
    खबर आप तक
    Local News Reporter Hazaribag, Hazaribagh•
    4 hrs ago
  • ✍रंजन चौधरी सांसद मीडिया प्रतिनिधि, हजारीबाग संसदीय क्षेत्र। हजारीबाग। वैसे तो सभी पर्व-त्योहार आस्था व विश्वास का प्रतीक होता हैं, परंतु झारखंड के मूल वासी जाती और जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में मनाया जाने वाला मंडा पर्व उत्सव में आस्था की ऐसी अविरल धारा बहती है कि भोक्ता (व्रती) फुलखुंदी (दहकते अंगारों) में ऐसे चलते हैं मानो वह अंगारा नहीं, बल्कि फूल बिछा हो। अपने शरीर में लोहे के बड़े-बड़े कील चुभोकर ऐसे हवा में झूलते हैं मानो वे सावन के महीने में झूले का आनंद ले रहे हों। इस पूजा में मुख्यतः भगवान शिव को खुश करने के लिए कठिन तपस्या की जाती है। फुलखुंदी (दहकते अंगारों) के नियम से कुछ दिन पहले से ही भोक्ता भगवान शिव की पूजा में जुट जाते हैं। यह पर्व झारखंड राज्य के बोकारो, धनबाद, गिरीडीह, रामगढ़, हजारीबाग, रांची, जमशेदपुर, सरायकेला-खरसांवा, खूंटी सहित दर्जनों जिले के विभिन्न क्षेत्रों में आस्था व विश्वास के साथ उल्लासपूर्वक वैशाख माह में मनाया जाता है। मंडा पर्व को लोग अलग-अलग क्षेत्रों में अलग- अलग नाम से यथा भोक्ता पर्व, चड़क पूजा, चैत पर्व, बनस पर्व आदि कई नामों से जानते हैं। इस त्यौहार में भक्ति, आस्था और लोगों के हैरतअंगेज कारनामे का संयुक्त प्रदर्शन होता है। झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा राज्य के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में यहां की पौराणिक संस्कृति और सभ्यता की अमित झलक इस त्यौहार के माध्यम से देखने को मिलती है। यह पर्व वैशाख माह के अक्षय तृतीया से आरंभ होता है। आमधारणा के अनुसार यह पर्व कलयुग में भी सत्य का प्रतीक माना जाता है, जिसमें भगवान की आराधना एक अनोखी शैली द्वारा महादेव मंडा के समक्ष किया जाता है। यह त्योहार राज्य के सदान और आदिवासी दोनों में सामान्य रूप से प्रचलित है। त्यौहार में घर का एक सदस्य जो व्रती होता है, भगता (भोक्ता) कहलाता है। उसकी मां या बहन उपवास रखती है जिसे सोखताईन कहा जाता है। त्योहार के दौरान तीन दिन तक उपवास रखकर चौथा दिन फुलखुंदी होता है। इस दिन भोक्ता द्वारा शषटांड दंड, मशाल जुलूस, तपती दोपहर की गर्मी में आग में चलना तथा अपने पीठ, पैर व जि‌ह्वा में लोहे का कील भोंकंदा कर डांग या ख़ुट्टा (लट्ठे) की सहायता से लगभग 35-40 फीट ऊपर नाचते हुए चारों ओर झूलते रहना रोंगटे खड़ा कर देने वाला अ‌द्भुत नजारा को हजारों-लाखों लोग उपस्थित होकर देखते हैं। जहां आधुनिक युग में एक सूई या पिन चुभने पर टेटनस की सुई लेने की आवश्यकता होती है। वहीं आज भी हजारों-लाखों लोग ऐसे हैं जो वर्षों से शक्ति के इस महापर्व के माध्यम से इस रिवाज से हर वर्ष गुजर रहे हैं। लेकिन कभी बीमार नहीं पड़े और ना ही उन्हें अपने दर्द तक का एहसास होता है। सदियों से चली आ रही इस परंपरा के निर्वहन को अच्छी बारिश, फसलों के उपज और सुख समृद्धि के लिए किया जाता है। इस त्यौहार में बड़ा ही कठिन व्रत होता है और व्रत के दौरान पूरी तरह सादगी और सात्विक होकर कई कठोर नियमों का पालन भी करना होता है। चार दिनों के कठिन तपस्या में निरंतर उपवास में रहना और इस दौरान भगवत भक्ति के कई कठोरतम नियमों से गुजरना पड़ता है। पहले दिन भगवान की पूजा-अर्चना होती है, दूसरे दिन रात्रि गाजन, मशाल प्रदर्शन, दंडी यात्रा और पारंपरिक ढोल- नगाड़े और मांदर की थाप पर नृत्य- संगीत, झूमर गान और नाच होता है तीसरे दिन ईश्वर भक्ति का अद्भुत और हैरतअंगेज प्रदर्शन भोक्ता घूरा या मंडा खुट्टा प्रदर्शन के माध्यम से होता है और अंतिम दिन भागवत पूजन के साथ शरीर में तेल -हल्दी लगाकर नहाने के पश्चात शरीर को गंगा जल छिड़कर शुद्ध करते हैं और फिर रात्रि में छऊ नृत्य का आनंद उठाते हैं। झारखंड के बोकारो के चंदनकियारी प्रखण्ड निवासी अरुण राय कहते हैं कि मैं 60 वर्षों से लगातार बनस पर कील भोंकवा कर चढ़ता हूं, आज तक कुछ नहीं हुआ। एक अन्य व्यक्ति अनिल महतो कहते हैं कि मैं लगभग 30 वर्षों से लोगों के पीठ, जीभ व पैरों में पर्व के दौरान कील भोंकने का कार्य कर रहा हूं। जहां भी यह पर्व मनाया जाता है वहां तीन दिनों तक वातावरण "ॐ नमः शिवायः" "शिव शिवाय मनी पार्वती हीं" आदि नारों से गुंजायमान हो उठता है। पर्व के माध्यम से लोगों ने प्रकृक्ति का आनन्द आम, तरबूज पलास के पत्ते, गुलैची के फूल व नये गुड़ और चना का प्रयोग साथ में प्रथम बार करके लेते हैं। लोगों का मानना है कि भगवान शिव व पार्वती को प्रसन्न करने के लिए वे लोहे के कील से सुराख कर शरीर में कसवाते हैं। जलती अंगारों में नंगे पांव चलते हैं, जिससे प्रसन्न होकर प्रभु उन्हें आशीर्वाद देते हैं और भक्तगण पूरे साल बीमारियों, से कोसों दूर रहते हैं। पर्व के दौरान कहीं छऊ नृत्य, झूमर नृत्य, बुलबुली नृत्य तो कहीं बाऊल संगीत, नाटक (यात्रा) तथा आर्केस्ट्रा का भी आयोजन होता है। इस दौरान ग्रामीण इलाके में मेले का भी भव्य आयोजन होता है जहां लोग एक-दूजे से मिलकर खुशियां भी लुटाते हैं।
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    ✍रंजन चौधरी
सांसद मीडिया प्रतिनिधि, हजारीबाग संसदीय क्षेत्र। 
हजारीबाग। वैसे तो सभी पर्व-त्योहार आस्था व विश्वास का प्रतीक होता हैं, परंतु झारखंड के मूल वासी जाती और जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में मनाया जाने वाला मंडा पर्व उत्सव में आस्था की ऐसी अविरल धारा बहती है कि भोक्ता (व्रती) फुलखुंदी (दहकते अंगारों) में ऐसे चलते हैं मानो वह अंगारा नहीं, बल्कि फूल बिछा हो। अपने शरीर में लोहे के बड़े-बड़े कील चुभोकर ऐसे हवा में झूलते हैं मानो वे सावन के महीने में झूले का आनंद ले रहे हों। इस पूजा में मुख्यतः भगवान शिव को खुश करने के लिए कठिन तपस्या की जाती है। फुलखुंदी (दहकते अंगारों) के नियम से कुछ दिन पहले से ही भोक्ता भगवान शिव की पूजा में जुट जाते हैं। यह पर्व झारखंड राज्य के बोकारो, धनबाद, गिरीडीह, रामगढ़, हजारीबाग, रांची, जमशेदपुर, सरायकेला-खरसांवा, खूंटी सहित दर्जनों जिले के विभिन्न क्षेत्रों में आस्था व विश्वास के साथ उल्लासपूर्वक वैशाख माह में मनाया जाता है। मंडा पर्व को लोग अलग-अलग क्षेत्रों में अलग- अलग नाम से यथा भोक्ता पर्व, चड़क पूजा, चैत पर्व, बनस पर्व आदि कई नामों से जानते हैं। इस त्यौहार में भक्ति, आस्था और लोगों के हैरतअंगेज कारनामे का संयुक्त प्रदर्शन होता है। झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा राज्य के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में यहां की पौराणिक संस्कृति और सभ्यता की अमित झलक इस त्यौहार के माध्यम से देखने को मिलती है।
यह पर्व वैशाख माह के अक्षय तृतीया से आरंभ होता है। आमधारणा के अनुसार यह पर्व कलयुग में भी सत्य का प्रतीक माना जाता है, जिसमें भगवान की आराधना एक अनोखी शैली द्वारा महादेव मंडा के समक्ष किया जाता है। यह त्योहार राज्य के सदान और आदिवासी दोनों में सामान्य रूप से प्रचलित है। त्यौहार में घर का एक सदस्य जो व्रती होता है, भगता (भोक्ता) कहलाता है। उसकी मां या बहन उपवास रखती है जिसे सोखताईन कहा जाता है। त्योहार के दौरान तीन दिन तक उपवास रखकर चौथा दिन फुलखुंदी होता है। इस दिन भोक्ता द्वारा शषटांड दंड, मशाल जुलूस, तपती दोपहर की गर्मी में आग में चलना तथा अपने पीठ, पैर व जि‌ह्वा में लोहे का कील भोंकंदा कर डांग या ख़ुट्टा (लट्ठे) की सहायता से लगभग 35-40 फीट ऊपर नाचते हुए चारों ओर झूलते रहना रोंगटे खड़ा कर देने वाला अ‌द्भुत नजारा को हजारों-लाखों लोग उपस्थित होकर देखते हैं। जहां आधुनिक युग में एक सूई या पिन चुभने पर टेटनस की सुई लेने की आवश्यकता होती है। वहीं आज भी हजारों-लाखों लोग ऐसे हैं जो वर्षों से शक्ति के इस महापर्व के माध्यम से इस रिवाज से हर वर्ष गुजर रहे हैं। लेकिन कभी बीमार नहीं पड़े और ना ही उन्हें अपने दर्द तक का एहसास होता है। सदियों से चली आ रही इस परंपरा के निर्वहन को अच्छी बारिश, फसलों के उपज और सुख समृद्धि के लिए किया जाता है। इस त्यौहार में बड़ा ही कठिन व्रत होता है और व्रत के दौरान पूरी तरह सादगी और सात्विक होकर कई कठोर नियमों का पालन भी करना होता है। चार दिनों के कठिन तपस्या में निरंतर उपवास में रहना और इस दौरान भगवत भक्ति के कई कठोरतम नियमों से गुजरना पड़ता है। पहले दिन भगवान की पूजा-अर्चना होती है, दूसरे दिन रात्रि गाजन, मशाल प्रदर्शन, दंडी यात्रा और पारंपरिक ढोल- नगाड़े और मांदर की थाप पर नृत्य- संगीत, झूमर गान और नाच होता है तीसरे दिन ईश्वर भक्ति का अद्भुत और हैरतअंगेज प्रदर्शन भोक्ता घूरा या मंडा खुट्टा प्रदर्शन के माध्यम से होता है और अंतिम दिन भागवत पूजन के साथ शरीर में तेल -हल्दी लगाकर नहाने के पश्चात शरीर को गंगा जल छिड़कर शुद्ध करते हैं और फिर रात्रि में छऊ नृत्य का आनंद उठाते हैं।
झारखंड के बोकारो के चंदनकियारी प्रखण्ड निवासी अरुण राय कहते हैं कि मैं 60 वर्षों से लगातार बनस पर कील भोंकवा कर चढ़ता हूं, आज तक कुछ नहीं हुआ। एक अन्य व्यक्ति अनिल महतो कहते हैं कि मैं लगभग 30 वर्षों से लोगों के पीठ, जीभ व पैरों में पर्व के दौरान कील भोंकने का कार्य कर रहा हूं। जहां भी यह पर्व मनाया जाता है वहां तीन दिनों तक वातावरण "ॐ नमः शिवायः" "शिव शिवाय मनी पार्वती हीं" आदि नारों से गुंजायमान हो उठता है। पर्व के माध्यम से लोगों ने प्रकृक्ति का आनन्द आम, तरबूज पलास के पत्ते, गुलैची के फूल व नये गुड़ और चना का प्रयोग साथ में प्रथम बार करके लेते हैं। लोगों का मानना है कि भगवान शिव व पार्वती को प्रसन्न करने के लिए वे लोहे के कील से सुराख कर शरीर में कसवाते हैं। जलती अंगारों में नंगे पांव चलते हैं, जिससे प्रसन्न होकर प्रभु उन्हें आशीर्वाद देते हैं और भक्तगण पूरे साल बीमारियों, से कोसों दूर रहते हैं। पर्व के दौरान कहीं छऊ नृत्य, झूमर नृत्य, बुलबुली नृत्य तो कहीं बाऊल संगीत, नाटक (यात्रा) तथा आर्केस्ट्रा का भी आयोजन होता है। इस दौरान ग्रामीण इलाके में मेले का भी भव्य आयोजन होता है जहां लोग एक-दूजे से मिलकर खुशियां भी लुटाते हैं।
    user_Kashif Adib
    Kashif Adib
    Local News Reporter हजारीबाग, हजारीबाग, झारखंड•
    4 hrs ago
  • डुमरी टोल प्लाजा के पास आज का दुखद घटना तीन गाड़ियां टकरा गई जिससे दो गाड़िया पुरी तरह जल कर राख हो गई एक टेलर को स्थानीय लोगों के प्रयास से इंजन वाले हिस्से को बचा लिया गया, चालक का अभी कोई पता नहीं
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    डुमरी टोल प्लाजा के पास आज का दुखद घटना तीन गाड़ियां टकरा गई जिससे दो गाड़िया पुरी तरह जल कर राख हो गई एक टेलर को स्थानीय लोगों के प्रयास से इंजन वाले हिस्से को बचा लिया गया, चालक का अभी कोई पता नहीं
    user_News Xpose ( Jishan Raj)
    News Xpose ( Jishan Raj)
    Press Azad Mahalla, Hazaribagh•
    9 hrs ago
  • Post by Om Singh
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    Post by Om Singh
    user_Om Singh
    Om Singh
    मयूर हैंड, चतरा, झारखंड•
    1 hr ago
  • Post by BaरKaट्ठा Ki आwaज
    1
    Post by BaरKaट्ठा Ki आwaज
    user_BaरKaट्ठा Ki आwaज
    BaरKaट्ठा Ki आwaज
    Court reporter बरकठा, हजारीबाग, झारखंड•
    2 hrs ago
  • उसकी मासूम आवाज़ में छुपी समझदारी ने सबका ध्यान खींच लिया — आप भी सुनिए आखिर उसने क्या कहा!
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    उसकी मासूम आवाज़ में छुपी समझदारी ने सबका ध्यान खींच लिया — आप भी सुनिए आखिर उसने क्या कहा!
    user_खबर आप तक
    खबर आप तक
    Local News Reporter Hazaribag, Hazaribagh•
    8 hrs ago
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