सपनों को मिली उड़ान: बायखेड़ा की बहू रश्मि बनीं MD, गृहस्थी के साथ रचा सफलता का इतिहास **आपका लिखा हुआ लेख बहुत ही प्रभावशाली है—भावना, संघर्ष और प्रेरणा तीनों का संतुलन शानदार है। बस इसे थोड़ा और धारदार और अख़बारी (दैनिक भास्कर स्टाइल) टच दे देते हैं ताकि पढ़ते ही असर करे 👇 --- सपनों को मिली उड़ान: बायखेड़ा की बहू रश्मि बनीं MD, गृहस्थी के साथ रचा सफलता का इतिहास कालीबावड़ी कहावत है—जहां इरादे मजबूत हों और अपनों का साथ मिले, वहां मुश्किलें भी रास्ता छोड़ देती हैं। धार जिले के छोटे से गांव बायखेड़ा की बहू डॉ. रश्मि रावत (डोडवा) ने इसे सच कर दिखाया है। उन्होंने मालवांचल यूनिवर्सिटी से एमडी (डर्मेटोलॉजी) की डिग्री हासिल कर न केवल चिकित्सा क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई, बल्कि नारी सशक्तिकरण की मिसाल भी पेश की। --- जिम्मेदारियों के बीच पढ़ाई: हर दिन था चुनौती भरा डॉ. रश्मि की सफलता केवल एक डिग्री नहीं, बल्कि संघर्ष और समर्पण की कहानी है। शादी के बाद जहां अधिकतर महिलाओं के सपने सीमित हो जाते हैं, वहीं रश्मि ने नई शुरुआत की। एक ओर घर-गृहस्थी की जिम्मेदारियां, दूसरी ओर छोटे बच्चे की परवरिश—इन सबके बीच मेडिकल जैसी कठिन पढ़ाई करना आसान नहीं था। दिनभर काम के बाद रातों में पढ़ाई कर उन्होंने अपने लक्ष्य को हासिल किया। यह सफर किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं रहा। --- परिवार बना सबसे बड़ी ताकत इस सफलता के पीछे रश्मि को परिवार का पूरा सहयोग मिला। उनके पिता देवीसिंह डोडवा, माता राधा डोडवा और पति डॉ. के.एस. रावत ने इसे वर्षों की मेहनत का परिणाम बताया। सास सुरली देवी सहित परिवार के अन्य सदस्य पी.एस. रावत और झिंगालाल रावत ने भी रश्मि के जज्बे की सराहना की। परिवार का कहना है कि उन्होंने साबित कर दिया कि बहू केवल घर तक सीमित नहीं, बल्कि परिवार का गौरव भी बन सकती है। --- प्रेरणा बनीं रश्मि: ‘महिलाओं के सपनों की कोई सीमा नहीं’ डॉ. रश्मि की कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो जिम्मेदारियों के कारण अपने सपनों को पीछे छोड़ देती हैं। उनकी उपलब्धि बताती है कि यदि हौसला हो, तो ससुराल भी सपनों की राह में बाधा नहीं, बल्कि सबसे बड़ा सहारा बन सकता है। ---
सपनों को मिली उड़ान: बायखेड़ा की बहू रश्मि बनीं MD, गृहस्थी के साथ रचा सफलता का इतिहास **आपका लिखा हुआ लेख बहुत ही प्रभावशाली है—भावना, संघर्ष और प्रेरणा तीनों का संतुलन शानदार है। बस इसे थोड़ा और धारदार और अख़बारी (दैनिक भास्कर स्टाइल) टच दे देते हैं ताकि पढ़ते ही असर करे 👇 --- सपनों को मिली उड़ान: बायखेड़ा की बहू रश्मि बनीं MD, गृहस्थी के साथ रचा सफलता का इतिहास कालीबावड़ी कहावत है—जहां इरादे मजबूत हों और अपनों का साथ मिले, वहां मुश्किलें भी रास्ता छोड़ देती हैं। धार जिले के छोटे से गांव बायखेड़ा की बहू डॉ. रश्मि रावत (डोडवा) ने इसे सच कर दिखाया है। उन्होंने मालवांचल यूनिवर्सिटी से एमडी (डर्मेटोलॉजी) की डिग्री हासिल कर न केवल चिकित्सा क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई, बल्कि नारी सशक्तिकरण की मिसाल भी पेश की। --- जिम्मेदारियों के बीच पढ़ाई: हर दिन था चुनौती भरा डॉ. रश्मि की सफलता केवल एक डिग्री नहीं, बल्कि संघर्ष और समर्पण की कहानी है। शादी के बाद जहां अधिकतर महिलाओं के सपने सीमित हो जाते हैं, वहीं रश्मि ने नई शुरुआत की। एक ओर घर-गृहस्थी की जिम्मेदारियां, दूसरी ओर छोटे बच्चे की परवरिश—इन सबके बीच मेडिकल जैसी कठिन पढ़ाई करना आसान नहीं था। दिनभर काम के बाद रातों में पढ़ाई कर उन्होंने अपने लक्ष्य को हासिल किया। यह सफर किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं रहा। --- परिवार बना सबसे बड़ी ताकत इस सफलता के पीछे रश्मि को परिवार का पूरा सहयोग मिला। उनके पिता देवीसिंह डोडवा, माता राधा डोडवा और पति डॉ. के.एस. रावत ने इसे वर्षों की मेहनत का परिणाम बताया। सास सुरली देवी सहित परिवार के अन्य सदस्य पी.एस. रावत और झिंगालाल रावत ने भी रश्मि के जज्बे की सराहना की। परिवार का कहना है कि उन्होंने साबित कर दिया कि बहू केवल घर तक सीमित नहीं, बल्कि परिवार का गौरव भी बन सकती है। --- प्रेरणा बनीं रश्मि: ‘महिलाओं के सपनों की कोई सीमा नहीं’ डॉ. रश्मि की कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो जिम्मेदारियों के कारण अपने सपनों को पीछे छोड़ देती हैं। उनकी उपलब्धि बताती है कि यदि हौसला हो, तो ससुराल भी सपनों की राह में बाधा नहीं, बल्कि सबसे बड़ा सहारा बन सकता है। ---
- बड़वानी। सर्व ब्राह्मण समाज द्वारा भगवान परशुराम जन्मोत्सव के अवसर पर रविवार भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया, जो पूरे उत्साह और पारंपरिक गरिमा के साथ सम्पन्न हुई। शहर में निकली इस शोभायात्रा में समाज के महिला-पुरुष, युवा एवं बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। शोभायात्रा कालिका माता मंदिर परिसर से प्रारंभ होकर मोटी माता मंदिर, रणजीत चौक होते हुए रानीपुरा स्थित श्री गौड़ मालवी ब्राह्मण समाज धर्मशाला पहुंची। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। पारंपरिक वेशभूषा में शामिल समाजजनों ने आयोजन को भव्य रूप दिया। शोभायात्रा के समापन पर पाटी नाका, जिसे आज से “भगवान परशुराम जी चौक” के रूप में नामांकित किया गया, वहां विधिवत आरती की गई। इसके पश्चात सभी श्रद्धालुओं को महाप्रसादी का वितरण किया गया। इस अवसर पर समाज के अध्यक्ष अनूप कुमार जोशी, सचिव अरविंद शर्मा, उपाध्यक्ष दिलीप जोशी, भरत रावल, सह-सचिव धर्मेंद्र शर्मा, प्रचार मंत्री दीपक जैमन, योगेश सराफ, दिनेश पुरोहित, कोषाध्यक्ष सुधीर शुक्ला, सह-कोषाध्यक्ष क्षितिज शर्मा सहित वरिष्ठजन उपस्थित रहे। संरक्षक मंडल में अशोक तिवारी, बिहारी जी शर्मा, हेमेन्द्र शुक्ला, मनीष पुरोहित, शरद रावत, सुभाष जोशी, रामसागर मिश्रा, अश्विन पुरोहित, डॉ. सुभाष रावत, अमित उपाध्याय, राजेश शर्मा, सुदाम कुलकर्णी, मनीष तिवारी, रामनरेश शुक्ला का मार्गदर्शन रहा। महिला मंडल में अध्यक्ष सुनीता अरविंद उपाध्याय, उपाध्यक्ष जया शर्मा, सचिव सुधा सराफ, सह सचिव आरती पुरोहित, कोषाध्यक्ष रेखा पुरोहित, मीडिया प्रभारी प्रीति शर्मा के साथ सदस्य निशा उपाध्याय, माधुरी जोशी, मीना जोशी, दुर्गा अत्रे, रचना सोहनी, आरती शुक्ला, श्रद्धा रावत, अनुपमा वोरे, महिमा सराफ, प्रीति पुरोहित, नुपूर पुरोहित, जया तिवारी, सीमा पुरोहित उपस्थित रहीं। नवयुवक मंडल में युवा अध्यक्ष आदित्य अनिल शर्मा, सचिव विश्वास सराफ, सह-सचिव सुमित परसाई, कोषाध्यक्ष दीपक पांडे, उपाध्यक्ष नवीन शर्मा, अंकुर शुक्ला, पार्थ पुरोहित, माधव पुरोहित, अभिषेक जोशी, सह-कोषाध्यक्ष प्रतीक शर्मा, सांस्कृतिक सचिव अमित पुरोहित, सह सांस्कृतिक सचिव आदर्श शर्मा, प्रचार मंत्री चित्रांश पांडे, संगठन सचिव मयूर उपासनी, मीडिया प्रभारी शुभ जोशी, सह मीडिया प्रभारी नील व्यास सहित कार्यकारिणी सदस्य अर्पित उपाध्याय, यश सराफ, अपूर्व जोशी, निलेश पांडे, पुष्कर पुरोहित, मानस पांडे, प्रज्ज्वल मिश्रा, चिरंजीव शर्मा, अथर्व कानूनगो, प्रवीण शर्मा, प्रवेश जोशी, अक्षय पुरोहित, यश मंडलोई, ऋषि शर्मा, यश त्रिवेदी, शिवम पुरोहित, गौरव जोशी, विशाल जोशी, विप्लव शर्मा की सक्रिय भागीदारी रही। अध्यक्ष अनूप कुमार जोशी ने कहा कि भगवान परशुराम जन्मोत्सव समाज की आस्था और एकता का प्रतीक है। इस तरह के आयोजनों से समाज में भाईचारा और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने सभी समाजजनों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। नव नियुक्त युवा अध्यक्ष पत्रकार आदित्य शर्मा ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज की एकता और संस्कृति को मजबूत करते हैं। वहीं महिला अध्यक्ष सुनीता उपाध्याय ने सभी महिलाओं और समाजजनों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम वरिष्ठ समाजजनों के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।1
- नालछा में सर्व ब्राह्मण समाज ने परशुराम जयंती मनाईः शोभायात्रा निकाली, भक्ति और सांस्कृतिक चेतना का संदेश राहुल सेन मांडव मो 9669141814 नालछा न्यूज/नालछा ब्लॉक मुख्यालय पर सर्व ब्राह्मण समाज ने भगवान परशुराम जयंती धूमधाम और धार्मिक आस्था के साथ मनाई। इस अवसर पर शोभायात्राएं, हवन और कई धार्मिक आयोजन किए गए। रविवार को भगवान परशुराम जयंती के अवसर पर एक कई शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। धार्मिक जोश और उत्साह के बीच निकली इस यात्रा में भगवान परशुराम की आकर्षक झांकियां, बैंड-बाजे और धार्मिक ध्वज आकर्षण का केंद्र रहे। शोभायात्रा शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से गुजरी, जहां जगह-जगह श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर स्वागत किया। यात्रा के दौरान "जय परशुराम" के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। कई स्थानों पर विभिन्न संगठनों द्वारा लंगर और ठंडे पानी की सेवा भी प्रदान की गई। आयोजकों ने बताया कि भगवान परशुराम जयंती समाज को धर्म, सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। नालछा पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे, जिससे पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। ब्राह्मण संस्कार यात्रा और अन्य धार्मिक शोभायात्राओं में भी श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए धार्मिक आयोजन समाज के वरिष्ठ सदस्य मोहन शर्मा और विनोद इंदुलकर ने कहा कि सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए इस प्रकार के धार्मिक आयोजन आवश्यक हैं। उन्होंने जोर दिया कि सनातन धर्म की मजबूत स्थापना के लिए परशुराम जैसे महापुरुषों की जयंती मनाना महत्वपूर्ण है। परशुराम के चरित्र से हमें माता-पिता के वचनों का पालन करने और अधर्म के खिलाफ हमेशा आवाज उठाने की सीख मिलती है। वक्ताओं ने कहा कि कलयुग में भगवान परशुराम अपने शस्त्रों के माध्यम से कई संदेश देते हैं। उनके विचारों और आदर्शों पर चलकर ही एक कुशल नागरिक बना जा सकता है। ऐसे धार्मिक आयोजनों से महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा मिलती रहती है। भगवान के अन्य अवतार धर्म स्थापना के बाद विष्णु लोक चले गए, लेकिन परशुराम जीव अवतार के रूप में पृथ्वी लोक में ही रहे और चिरंजीवी कहलाए।3
- Post by निमाड़ का दबंग न्यूज1
- बड़वानी जिले में पिता पुत्र के रिश्ते को कलयुगी पूत्र ने शर्मसार किया है,अपने पिता की गोली मारकर हत्या कर दी है,सूचना के बाद मौके पर पुलिस पहुंची,घटना की जांच जारी।1
- बड़वानी जिला एवं पार्टी थाना के अंतर्गत एक घटना घटी है जो की झांझर देने वाली हे1
- मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना अंतर्गत सामूहिक विवाह सम्मेलन का कृषि उपज मंडी आलीराजपुर प्रांगण में किया गया आयोजन3
- 🚩🔱🌹जय हो मेरी मय्या मां बगलामुखी माता जी 🌹🔱🚩1
- मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के अंजड़ में एक अनोखी शादी चर्चा का विषय बनी हुई है। अंजड़ नगर परिषद में 17 वर्षों से कार्यरत कर्मचारी मुकेश कुशवाह ने उत्तर प्रदेश के बलरामपुर की नेहा कुशवाह से विवाह किया है। दोनों की मुलाकात सोशल मीडिया के माध्यम से हुई थी और उनके बीच लगभग 1300 किलोमीटर की दूरी थी। 35 वर्षीय मुकेश का कद सामान्य से कम, लगभग तीन से चार फीट है, जिसके कारण उन्हें विवाह के लिए लंबे समय से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। उनके पिता रामू कुशवाह का भी कद छोटा था और उनका निधन हो चुका है। परिवार में उनके बड़े भाई राधू हैं। करीब दो साल पहले, सोशल मीडिया के जरिए मुकेश की पहचान उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले की नेहा कुशवाह से हुई। नेहा का कद भी सामान्य से कम है, जिससे दोनों के बीच एक समानता बनी। सोशल मीडिया पर शुरू हुई बातचीत धीरे-धीरे गहरी दोस्ती में बदल गई, जो बाद में प्रेम संबंध में परिवर्तित हो गई। दोनों ने विवाह करने का निर्णय लिया और अपने-अपने परिवारों को इस बारे में बताया। नेहा के परिजनों ने अंजड़ आकर मुकेश के बारे में जानकारी जुटाई, जहां उन्हें मुकेश के अच्छे स्वभाव और आर्थिक स्थिति के बारे में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। इसके बाद दोनों परिवार इस विवाह के लिए सहमत हो गए। दोनों परिवारों की सहमति के बाद, मुकेश और नेहा का विवाह श्री राम जन्मभूमि अयोध्या में संपन्न हुआ। शादी के बाद शनिवार शाम को मुकेश अपनी पत्नी नेहा के साथ अंजड़ स्थित श्री खाटू श्याम बाबा मंदिर पहुंचे। यहां स्थानीय लोगों और परिचितों ने नवदंपति का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें शुभकामनाएं दीं।1